Sunday, August 30, 2009

साहित्य अकादमी की 'सिन्धी साहित्य गोष्ठी'

रिपोर्ट - प्रेमचंद सहजवाला
'साहित्य अकादमी' भारत की सभी भाषाओँ के साहित्य की प्रगति के लिए समय समय पर गोष्ठियां आयोजित करती रही है. दि. 22 अगस्त 2009 को सायं 5 से 7 बजे तक दिल्ली में 35, फेरोज़ शाह रोड स्थित 'साहित्य अकादमी' के सभागार में सिन्धी साहित्य की एक सशक्त गोष्ठी आयोजित की गई. इस गोष्ठी में सिन्धी कहानी, व्यंग्य व कविता के चर्चित हस्ताक्षरों द्वारा रचनाएं पढ़ी गई. सभागार में आए सिन्धी साहित्य प्रेमियों व रचनाकारों का स्वागत साहित्य अकादमी उप-सचिव गीतांजलि चैटर्जी ने किया. गोष्ठी की अध्यक्षता दिल्ली सरकार की 'सिन्धी अकादमी' के उपाध्यक्ष डॉ. एम.के. जेटली ने की. संचालन सुपरिचित सिन्धी साहित्यकार मोहन हिमथानी ने किया. रचना पाठ शुरू करने से पहले पाकिस्तान से आए कुछ साहित्यकारों का स्वागत भी किया गया. गोष्ठी का प्रारंभ मोहिनी हिंगोरानी की कविताओं से हुआ तथा इस के बाद शालिनी सागर व मेघराज गुरनानी ने भी कविताएँ पढ़ी. सिन्धी कथाकार व्यंग्यकार जगदीश रावतानी ने दूरदर्शन धारावाहिकों पर एक रोचक व्यंग्य पढ़ा, जिस के बाद अमुल आहूजा का रोचक व्यंग्य पाठ हुआ. सिन्धी कहानी का पाठ सुप्रसिद्ध कथाकारों वीना शृंगी व डॉ. रवि टेकचन्दाणी ने किया. सिन्धी साहित्य के वरिष्ठ समालोचक हीरो ठाकुर ने अंत में सभी की रचनाओं पर अपनी आलोचनात्मक टिप्पणियाँ कह कर आज पढ़े गए साहित्य का मूल्यांकन किया. अंत में अध्यक्ष एम.के. जेटली ने भी आज प्रस्तुत हुए साहित्य पर अपने विचार कहे और सभी साहित्यकारों को बधाई दी. गीतांजलि चैटर्जी द्वारा सभी को धन्यवाद दिए जाने के साथ कार्यक्रम संपन्न हुआ.


सिन्धी अकादमी उपाध्यक्ष एम.के. जेटली व समालोचक हीरो ठाकुर

जगदीश रावतानी व शालिनी सागर


पाकिस्तान से आए साहित्यकारों का सम्मान