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Monday, October 25, 2010

स्वर्णिम मातृभाषा महोत्सव 2010 के अंतर्गत गुजरात साहित्य अकादमी का कवि सम्मलेन



स्वर्णिम मातृभाषा महोत्सव : 2010 के अंतर्गत गुजरात साहित्य अकादमी के द्वारा सुरेंद्रनगर में कवि सम्मलेन का आयोजन 23 अक्टूबर 2010 किया गया था| स्वर्णिम मातृभाषा महोत्सव में गुजरात के सभी जिलो में स्थानीय कवि सम्मेलनों का आयोजन करके गुजराती भाषा की व्यापकता और सज्जता बढाने हेतु किया जाता है| इस कवि सम्मलेन में सुरेंद्रनगर जिले के 11- कविओं में सर्वश्री रमेश आचार्य, रमणीकलाल मारू, सोलिड मेहता, राज लखतरवी, गिरीश भट्ट, जशवंत मेहता, बी.के.राठोड, जातूष जोशी, दर्शक आचार्य, हसमुख गोवाणी और कवि सम्मलेन का संचालन कर रहे कविश्री एस. एस. राही उपस्थित थे|

कार्यक्रम के आरम्भ में गुजरात साहित्य अकादमी के महामात्र (डायरेक्टर) श्री हर्षद त्रिवेदी ने स्वागत प्रवचन किया और गुजराती भाषा का महिमा बढ़ाने का अनुरोध किया|

Friday, April 30, 2010

विश्व पुस्तक दिवस पर आयोजित 'कविता में जुगलबंदी'



23 अप्रैल 2010
गांधीनगर, अहमदाबाद में फिल्म-प्रशिक्षण-संस्थान सिटी प्लस द्वारा एक प्रयोगात्मक रोचक कार्यक्रम 'कविता में जुगलबंदी' का आयोजन किया गया| साहित्यिक क्षेत्र में यह इस प्रकार का एक नवीन प्रयोग था जो काफी रोचक रहा और श्रोताओं को अंतत: बांधे रहा| यह जुगलबंदी थी नगर की दो सुप्रसिद्ध कवयित्रियों- डॉक्टर प्रणव भारती और मंजु महिमा के बीच में| कार्यक्रम के संचालक सेवानिवृत वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी श्री विजय रंचन जी ने दोनों कवयित्रियों का पूर्ण परिचय देते हुए अपने साहित्यिक ज्ञान का भी परिचय दिया| पाश्चात्य और भारतीय साहित्य की तुलना करते हुए काफी जानकारी श्रोताओं को दी| उन्होंने कहा, 'मैं आतुर हूँ यह जानने को कि यह कैसे जुगलबंदी होगी क्योंकि दोनों ही कवयित्रियाँ कविता अलग-अलग विधा में काव्य-रचना करती हैं- एक गीतकारा है और छंदबद्ध गीत लिखती हैं तो दूसरी छंदमुक्त विधा को स्वीकारती हैं?’ इसी जिज्ञासा के साथ उन्होंने इस कार्यक्रम का आगाज़ कर डॉक्टर प्रणव भारती और मंजु महिमा को मंच पर आमंत्रित किया| सेवानिवृत वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी श्रीमती सुधा ने पुष्प-गुच्छों से स्वागत किया| कार्यक्रम के आयोजक तथा संस्था के निदेशक श्री आई.एस.माथुर ने कार्यक्रम आरम्भ करने की सहमति दी|

अपने मधुर स्वर में डॉ.प्रणव भारती ने सरस्वती-वंदना कर वातावरण को पुनीत कर दिया और अपनी सुन्दर रचना ''तुम मुझे एक कविता दे दो..दुल्हन के पैरो में महावर सी सजी नाजुक सी कविता' ज़वाब में मंजु महिमा ने सुनाया कि आजकल के माहौल में जहां हर घड़ी बमों के फटने की खबरे आती रहती हैं, मै कैसे अपने कविता कामिनी को सजाऊँ अलंकारों से, कैसे उसे बादल के घिर आने का सन्देश सुनाऊँ कैसे पहना दूं मै कविता कामिनी को सतरंगी चूनर, जबकि नज़र आ रहे है मुझे हर ओर कफ़न ही कफ़न| इसी प्रकार भारती ने सुन्दर-मधुर गीत 'पहले तो कूका करती थी कोयल मन के गाँव में' सुनाकर श्रोताओं को मन्त्र-मुग्ध कर दिया तभी मंजु ने कोयल से ही पूछ लिया, 'कोयल तुम कैसे कूक पाती हो? ज़हरीली गैस छोड़ती चिमनियाँ, धुंआ ही धुंआ उठा अम्बर में, कैसे तुम श्वासों को सहला, हरियाले गीत सुना पाती हो? बैठ नीम की डाल, कैसे मधुर गीत छेड़ पाती हो?

'रिश्तों के आकार नहीं होते' भारती की रचना के उत्तर में मंजु ने चाहत और प्रारब्ध का बिम्ब भाई-बहन के संबंधों के माध्यम से चित्रित किया तो श्रोता दाद दिए बिना नहीं रह सके| नारी-विमर्श की रचना, ’तृप्त सागर के किनारे एक नदिया अनमनी सी है, झूमते बादल समेटे,सूर्य की एक हथकड़ी है|’ प्रणव ने सुनाई और 'क्यों गरल के घूँट पीती रहीं तुम आज तक?’ के ज़वाब में महिमा ने कहा अब ऐसा नहीं होगा 'बहुत होगई मनमानी महानता की आड़ में, मै सीता नहीं, अहिल्या नहीं और न ही हूँ गांधारी| मै तो हूँ बस आज की नारी, जिसे रचना है वर्त्तमान न कि इतिहास और पुराण' रचना सुना कर श्रोताओं को सोचने पर मजबूर कर दिया| इसी प्रकार दोनों कवयित्रियों की यह जुगलबंदी करीब डेढ़ घंटे तक निर्विघ्न रूप से चलती रही और श्रोताओं का भरपूर मनोरंजन करती रही|

उपस्थित समुदाय में संस्थान के स्वप्नदृष्टा श्री अशोक पुरोहित, श्रीमती वीणा पुरोहित तथा नगर के करीब ५० कलाप्रेमियो ने भाग लेकर देश की पहले स्नातक फिल्म-शिक्षण संस्था की शुक्रवारीय संध्या को एक यादगार संध्या बना दिया|

Saturday, October 17, 2009

चाँद है शबाब पर...... शरद पूर्णिमा पर एक काव्य संध्या

4 सितम्बर 2009 । अहमदाबाद



साहित्यिक एवं सामाजिक सस्था ‘संजीवनी’ द्वारा शरद पूर्णिमा के अवसर पर शुकन रेज़ीडेंसी, न्यू सी.जी.रोड, अहमदाबाद के परिसर में एक काव्य-संध्या का आयोजन किया गया, जिसमें अहमदाबाद की 7 सुपरिचित कवयित्रियों और 2 कवियों ने अपनी रचनाओं से सबको रस विभोर कर दिया। इनसे प्रोत्साहित होकर इस सोसाइटी के करीब 13 बालकों और 4 कवि हृदयों ने भी अपनी रचनाएं सुनाई। कार्यक्रम का शुभारम्भ पारम्परिक तरीके से दीप-प्रज्ज्वलन और माँ सरस्वती की स्तुति से हुआ। बेबी श्रुतकीर्ति के मधुर कंठ से निस्रत स्वर सबको आल्हादित कर गया। काव्य संध्या की अध्यक्षता का दायित्व वरिष्ठ कवयित्री डॉ. सुधा श्रीवास्तव को सौंपा गया तथा संचालन का कार्य श्री चन्द्रमोहन तिवारी जी ने बखूबी निभाया। डॉ.हरिवंश राय बच्चन के अंदाज में तिवारी जी ने कविगोष्टी का आगाज़ किया-‘श्रोतागण है पीनेवाले, कवि सम्मेलन है मधुशाला।‘
सोसाइटी के 2 वर्ष की नन्ही उम्र से 16 वर्ष तक के करीब 13 बालकों ने अपनी छोटी पर प्रभावी रचनाओं से सबको चकित कर दिया, जिनमें प्रियांशी, प्रांजल, साक्षी, श्रेयस के नाम उल्लेखनीय हैं। श्रीमती प्रतिमा पुरोहित ने पूनम के चाँद से कामना की ‘ चाँद हमें रोशनी दो’ श्रीमती मधु प्रसाद जी ने गीतों में मधु घोलते हुए गाया‘ तेरा-मेरा करते-करते संध्या आई जीवन की’ साथ ही सुनाया ‘ बेटियाँ होतीं हैं ऋतुएं – कभी सावन बन मन भिगो जाती हैं।‘ तो दिनेश कुमार वशिष्ठ ने गीत ‘बाँसुरी नहीं तो क्या डांडिया का सहारा है’ गाया फिर अपनी हास्य रचनाओं से सबको हँसाया भी। मंजु महिमा भटनागर ने आने वाली पीढ़ी को संदेश देते हुए कहा-‘मिट सकते हैं ज़रूर ये नफरतों के दायरे / प्यार में हमारे ताकत होनी चाहिए / बदल सकते हैं हवा के रूख हम भी, दीवार इरादों की मज़बूत होनी चाहिए‘ सन्ध्या बडी रोमांचक और सुरमई रंग में रंग गई जब मंजु महिमा जी ने आह्वान किया शुकन रेज़ीडेंसी के लोगों का इन शब्दों में—‘चाँद है शबाब पर, उजालों में उतर आइए,/ भूल कर सभी शिकवे गिले, ज़रा तो मुस्कुराइए।‘ सुश्री रंजना सक्सेना जी भी अपने को रोक नहीं पाईं और गुनगुना उठीं-‘शरद सलौनी, चाँद नशीला, झलमल-झलमल तारा है।/मौसम प्यारा-प्यारा है।‘ और एक दीप अंतस की देहरी पर रख दो तुम...’ डॉ. प्रणव भारती ने भी ऐसे माहोल में अपने भावुक और दिल में उतर जाने वाली आवाज़ और शायराना अंदाज़ में सुनाया ‘चाँद आसपास है, चाँदनी उजास है, तू क्यों गुम है, मुस्कुरा, ज़िन्दगी तो खास है।‘ तथा ‘जब यह दिल किसी का हौंसला पाने लगा, शाम की तन्हाइयों में मज़ा आने लगा।‘ प्रसिद्ध शायरा डॉ. अंजना संधीर ने अपनी बुलन्द पर प्रभावी आवाज़ में गाकर संदेशा अपने विदेश में बैठे पति तक पहुँचाया----

‘बारिश के नज़ारों का अंदाज़ ज़रा लिखना, वो प्यार भरी आँखें रहती हैं मेरे दिल में, उन आँखों के रिश्तों का पता ज़रा लिखना।‘ श्री चंद्रमोहन जी तिवारी ने जो इस कार्यक्रम के कुशल संचालक भी थे, जहाँ निराले अंदाज़ में बच्चन जी की तर्ज पर अपनी रचना सुनाई, ‘दीपक जलाना कब मना है?’ वहाँ इस कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहीं, वरिष्ठ एवं डॉ. सुधा श्रीवास्तव ने अपने गीतों को लोकधुनों के रंग में रंग कर आने का आश्वासन प्यारी सी शर्त पर दिया—‘मैं आऊँगी ज़रूर, तुम पुकारते चलो/ पुकारते चलो, मनुहारते चलो।‘ और अपने अन्य गीतों के टुहकों से सबको गुजरात से भोजपुरी पृष्टभूमि में पहुँचा दिया।
इन सुप्रसिद्ध कवियों की रचनाओं से प्रेरणा पाकर सोसाइटी के अन्य छुपे रुस्तम भी सामने आए जिनमें श्री वी.के. सिन्हा, श्री सलिल सिन्हा, श्री लोहखंडे और श्रीमती चैताली के नाम प्रमुख हैं।
कुल मिलाकर इस वर्ष की यह शरद पूर्णिमा एक रोमांचक यादगार काव्य-संध्या बन गई जिसे सफल बनाने का श्रेय संजीवनी संस्था को विशेष रूप से जाता है, जो समाज और साहित्य की बिखरी हुई कड‌़ियों को जोड़ने में प्रयासरत है। संस्था की अध्यक्षा सुश्री रंजना सक्सेना ने अपनी संजीवनी संस्था के उद्देश्य को स्पष्ट करते हुए बताया कि जैसे बहुत सी वनस्पतियाँ और प्रजातियाँ धीरे-धीरे विलुप्त होती जा रहीं हैं, वैसे ही अच्छा साहित्य एवं अच्छे साहित्यकारों का भी विलोप हो रहा है, अत: उनको प्रकाश में लाना और संजीवनी संस्था के द्वारा उन्हें संजीवनी प्रदान करना ही उनका लक्ष्य है। अपनी इन पंक्तियों से उन्होंने इस आयोजन को विराम दिया- ’ दर्द अंतस का उमड़ता हुआ नीर है / अश्रु मन के भाव की तस्वीर है। / ज़िन्दगी की तह पर जाने पर लगा / प्रीत की बिखरी हुई ज़ंज़ीर है।‘

प्रस्तुति–
मंजु महिमा, अहमदाबाद

Thursday, January 22, 2009

कु. ईशिता मधुसुदन शर्मा पुरस्कृत


रविवार १८ जनवरी, २००९ को महाराष्ट्र राष्ट्र भाषा सभा, पुणे एवं गुजरात हिन्दी प्रचार समिति, अहमदाबाद के संयुक्त तत्वावधान में ४७वीं अन्तर राज्यीय "महाराष्ट्र-गुजरात संयुक्त हिन्दी वक्तृत्व स्पर्धा" का आयोजन गुजरात के डाकोर स्थित उत्तर बुनियादी विद्यालय में किया गया। इस अवसर पर एस. बी. ओ. ए. पब्लिक स्कूल, औरंगाबाद के आठवीं की छात्रा कु. ईशिता मधुसुदन शर्मा को दूसरे विभाग (कक्षा ८वीं व ९वीं) में प्रथम पुरस्कार प्राप्त हुआ। प्रमुख अतिथि श्री राजेन्द्र भाई सिमानी (कुल सचिव गुजरात विद्यापीठ ), विनोद भाई सुखाडिया (सामाजिक कार्यकर्ता ), डॉ. चम्पक लाल मोदी (निवृत्त प्राध्यापक, बी.एड. कालेज), लल्लू भाई पटेल (संयोजक ,गुजरात हिन्दी प्रचार समिति ) की उपस्थिति में पुरस्कार के रूप में प्रमाण पत्र, स्मृति चिह्न,चांदी का सिक्का व नगद प्रदान किए गए। विद्यालय की मुख्याध्यापिकाएं श्रीमती सुरेखा माने, श्रीमती अर्चना फडके, मार्ग दर्शक शिक्षिका श्रीमती सुनीता प्रेम यादव तथा अन्य शिक्षिका गण सुयश की कामना करते हुए ईशिता मधुसूदन शर्मा की सफलता पर बधाई दी।