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Saturday, December 12, 2009

इस क्रिसमस आप अनाथ-गरीब बच्चों को चाँद पर लेकर जाएँ



अनाथ, गरीब बच्चे !!!
कैसे होते होंगे उनके ख्वाब !
ख्वाहिशें
क्या कहती होंगी सपनों में !
क्या माँ आती होगी ?
एक चौकलेट
उनकी आँखों में
किस तरह अंगडाई लेता होगा !
अकेले नींद कैसे आती होगी !
.............................
प्रश्न ही प्रश्न .............जवाब किससे ?
आइये
हम अपना एक दिन
उनके नाम कर दें.......
क्या एक दिन
बहुत महंगा होगा?
.......................................................

अपराजिता कल्याणी एक दिन उन बच्चों के नाम कर रही हैं, जो अनाथ, गरीबी और लाचारी में अपना बचपन कहीं खो देते हैं। .......25 दिसम्बर से पहले सांता क्लॉज़ उनके लिए आ रहे हैं........जी हाँ, अपराजिता ने निमंत्रण दिया है। 24 दिसम्बर को सांता उनसे कहने आ रहे हैं 'आओ तुम्हें चाँद पे ले जाएँ'............

अपराजिता को इस कार्यक्रम को आयोजित करने का दायित्व इनके ही कॉलेज सिम्बॉयसिस इंस्ट्टीट्यूट ऑफ मीडिया एंड कम्यूनिकेशन ने सौंपा है। इस कार्यक्रम में अनाथ-गरीब बच्चों के उत्थान के लिए काम कर रही तीन गैरसरकारी संगठनों आश्रय इनीशिएटिव (150 बच्चों और 15 बड‌़ों सहित), SOS चिल्ड्रैन्स विलेज ऑफ इंडिया (168 बच्चों और 15 बड़ों सहित) और सरस्वती अनाथ शिक्षण आश्रम (50 बच्चों और 5 बड़ों सहित) ने भाग लेना स्वीकार किया है।

चूँकि यह पूरा कार्यक्रम अपराजिता अकेले कर रही हैं, इसलिए इन्हें आपके किसी भी प्रकार के सहयोग ( आर्थिक, या कोई उपहार) की बहुत ज़रूरत है। इस दिन को सफल बनाने के लिए दिल से अपना योगदान दें और उनके मासूम सपनों को हकीकत की बानगी दे जाएँ ।

यदि आप आर्थिक सहयोग देना चाहें तो निम्नलिखित में से किसी खाते में ऑनलाइन मनी ट्रांसफर करें-

खुश्बू प्रियदर्शिनी (Khushboo Priyadarshini)
खाता क्रमांक.544302010003104
बैंक का नाम- यूनियन बैंक ऑफ इंडिया
शाखा - विमान विहार, पुणे

या

खुश्बू प्रियदर्शिनी (Khushboo Priyadarshini)
खाता क्रमांक. 30124854596
बैंक - भारतीय स्टेट बैंक
शाखा- बोरिंग रोड, पटना

आप चाहें तो कार्यक्रम में उपस्थित होकर सहयोग राशि नगद भी जमा कर सकते हैं।


"आओ तुम्हे चाँद पे ले जाएँ... "
दिनांक: 24 दिसम्बर 2009
समय: अपराह्न 3 बजे से रात्रि 9 बजे तक।
स्थान: विट्ठ्लांजन मंगल कार्यालय, पुणे

Thursday, July 30, 2009

पुणे का दो दिवसीय सर्व भारतीय भाषा सम्मेलन संपन्न



पुणे
दिनांक 25-26 जुलाई 2009 को पुणे में स्थित एस.एम.जोशी हिंदी माध्यमिक विद्यालय में महाराष्ट्र राष्ट्रभाषा सभा, पुणे एवं महाराष्ट्र राज्य हिन्दी साहित्य अकादमी, मुम्बई (सांस्कृतिक कार्य विभाग, महाराष्ट्र शासन) के संयुक्त तत्वावधान में सर्व भारतीय भाषा सम्मलेन सुचारू रूप से संपन्न हुआ। कार्यक्रम का आरम्भ सरस्वती वन्दना से हुआ। दो दिवसीय इस कार्यक्रम के उद्‍घाटनकर्ता थे पद्मविभूषण, डॉ.मोहन धारिया (अध्यक्ष, वनराई व महाराष्ट्र राष्ट्रभाषा सभा, पुणे) एवं नंदकिशोर नौटियाल (कार्याध्यक्ष, महाराष्ट्र राज्य हिदी साहित्य अकादमी, मुम्बई)। मुख्य अतिथि के रूप में आमंत्रित थे मा. ललितकुमार जैन (मैन आफ द इयर 2009, अध्यक्ष, पुणे बिल्डर्स असोसिएशन, पुणे), डॉ.सत्यपाल सिंह (कमीशनर आफ पुलिस, पुणे)। दिनांक 25-26 जुलाई 2009 को सर्व भारतीय भाषा सम्मलेन के प्रथम सत्र से लेकर चतुर्थ सत्र तक क्रमश: डॉ.सरोजा भाटे, डॉ.चंद्रकांत बांदिवडेकर, डॉ.मु.ब. शहा एवं डॉ. दामोदर खडसे की अध्यक्षता में सर्व संबंधित भाषा विषयतज्ञ मार्गदर्शक भिन्न-भिन्न भाषाओँ की विशेषता, विकास व योगदान के बारे में मार्गदर्शन करते रहे। सर्व भारतीय भाषाओं के इस अनूठे संगम में उत्तर-दक्षिण-पूरब और पश्चिम से आये भिन्न-भिन्न भाषाभाषी लेखकों-साहित्यकारों ने देश की सभी भाषाओं के बीच संवाद स्थापित करने की जरूरत पर बल दिया और कहा भारतीय संस्कृति के महीन तारों को जोड़ने का ठोस प्रयास अनुवाद के माध्यम से हो। लोग अंतरजाल (इंटरनेट) को अपनाए तथा हिन्दी को एक सूत्र में पिरोने हेतु संकल्पित रहें। राष्ट्रीय अस्मिता, संस्कृति एवं हिन्दी भाषा तथा साहित्य के सर्वोन्मुखी उन्नयन हेतु नित नए प्रयास किए जाए. लुप्त होती भाषाओं के कारण और निवारण पर भी चिंता व्यक्त की गयी। इस बात को स्वीकारा गया कि अंग्रेजी को अन्य भाषाओं के साथ सम्मिलित करने में हर्ज नहीं है पर उसे राष्ट्रभाषा के वैकल्पिक सेतु न माना जाए।



सत्र के दौरान भारतीय संत परम्परा का परिचय देते हुए डॉ.अशोक कामत ने भारतीय अस्मिता, संस्कृति का सम्मान व रक्षा करने में संतों की भूमिका कैसी रही व किस प्रकार वे जन-मन तक पहुँचने के लिए लोक भाषा को अपनाते थे, बताया और कहा कि हमें भी अन्य प्रान्तों की भाषा सीखनी चाहिए। इसके उपरांत कविता खर्वंदीकर ने अपने मधुर आवाज में संतवाणी प्रस्तुत किया। कार्यक्रम का संचालन गो.म.दाभोलकर और लक्ष्मी गिडवानी ने किया।



समापन सत्र में पारित हुए प्रस्ताव में एक स्वर से यह मांग की गयी है कि राजभाषा अधिनियम 1986 में जो संशोधन किये गये हैं, उन्हें तत्काल निरस्त किये जाएँ। अध्यक्षीय भाषण में नामदार किशन शर्मा जी ने कहा कि सभी भारतीय भाषाएँ हिन्दी के नेतृत्व में चलकर ही अपनी स्वतंत्रता और अस्मिता की रक्षा कर पाने में समर्थ होंगी। भाषा भारती गीतमंच का आभार प्रकट किया तथा उन सारे विद्यार्थियों के गान को सराहा जो हर भाषा के गीतों को बड़े ही उत्साहपूर्वक सुरीली अंदाज़ में पेश किये जा रहे थे। इस अवसर पर पंडित हरिनारायण व्यास को 'कवि शिरोमणी' एवं डॉ. आनंद प्रकाश दीक्षित को 'साहित्य समीक्षक पुरस्कार' से सम्मानित किया गया। डॉ. आनंद प्रकाश दीक्षित जी की अस्वस्थता के कारण अनुपस्थित रहे।

अकादमी की ओर से कार्याध्यक्ष नंदकिशोर नौटियाल ने इस सर्वभाषा सम्मेलन के आयोजन के लिए वित्तीय सहयोग करने के लिए जहां राज्य सरकार का आभार व्यक्त किया, वहीं राज्य के उप मुख्य मंत्री आर.आर पाटिल की इस घोषणा का स्वागत किया कि महाराष्ट्र में ऐसा सम्मेलन हर वर्ष होना चाहिये।



अंत में विशेष सहयोगी व्यक्तियों का सम्मान महाराष्ट्र राष्ट्रभाषा सभा,पुणे के सचिव शेषराव जगताप ने किया व सभा के कार्याध्यक्ष सु.मो.शाह ने सम्मेलन को सफल बनाने में योगदान करने के लिए देश-भर से पधारे सभी भाषाओं के विद्वानों और अकादमी के सभी सदस्यों तथा सहयोगियों के प्रति आभार माना।

उल्लेखनीय बात यह है कि एस.एम.जोशी विद्यालय के महामहोपाध्याय दत्तोवामन पोतदार सभा गृह में, जहाँ यह समारोह संपन्न हुआ, एक पवित्र ज्ञान का मंदिर है जहाँ विद्यार्थियों में अनुशासन कूट-कूट कर भरी हुई है। धैर्य, कर्तव्य के प्रति निष्ठा व गुरुजनों के प्रति सम्मान को देख कर यह अंदाजा लगाया जा सकता है कि आज की यह युवा पीढी कल के सरताज होंगे.मात्र विद्यार्थी ही नहीं सभी शिक्षक- शिक्षिका गण भी उत्साही थे. दिल खुशी से भर गया। मैं आभार मानती हूँ कि इस सम्मलेन में मुझे एक व्याख्याता के रूप में भाग लेने के लिए अवसर प्रदान किया गया और ईश्वर से प्रार्थना है कि आगे भी ऐसे अवसर मिलते रहे।




---पुणे से सुनीता यादव

Saturday, January 3, 2009

एस . आर. जोशी जी का देहांत



पुणे।
महाराष्ट्र राष्ट्र भाषा सभा, पुणे के सचिव श्रीमान् एस . आर. जोशी जी का देहांत कल ०२/०१/०९ को पुणे में अपने निवास स्थान पर दिल का दौरा पड़ने से हो गया। ये ७३ वर्ष के थे। हिन्दी सेवक , कर्मठ हिन्दी कार्यकर्ता क रूप में जोशी भली भांति परिचित थे। गंगाशरण सिंह पुरस्कार, दक्षिण भारतीय ज्येष्ठ हिन्दी प्रेमी पुरस्कार (कर्नाटक की संस्था की ओर से) पुरस्कृत उस महान आत्मा की शान्ति के लिए आइये हम सब प्रार्थना करें।