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Thursday, February 25, 2010

पुस्तक ’गुंजन’ का विमोचन समारोह



कवि कुलवंत सिंह, मुंबई एवं श्रीमती सी. आर. राजश्री कोयंबतूर द्वारा संपादित पुस्तक ’गुंजन’ का विमोचन समारोह मुंबई में श्री कीर्तन केंद्र, जुहू में प्रसिद्ध उद्योगपति एवं समाजसेवी श्री महावीर सराफ जी के कर कमलों द्वारा 2 फरवरी की संध्या को संपन्न हुआ. कार्यक्रम का प्रारंभ मां सरस्वती का आवाहन करते हुए नमन कर, दीप प्रज्ज्वलन एवं माल्यार्पण के साथ हुआ. कार्यक्रम का संचालन देश की सुप्रसिद्ध बुद्धिजीवी, लेखिका, अध्यापक, चिंतक, संपादक (कुतुबनुमा - त्रैमासिक पत्रिका) डा. राजम नटराजम पिल्लई ने किया. कार्यक्रम की अध्यक्षता की - प्रसिद्ध स्क्रिप्ट लेखक, कहानीकार श्री जगमोहन कपूर ने, जिनकी कई फिल्में सिल्वर जुबली रही हैं (नागिन, नगीना, निगाहें इत्यादि). मंच पर उपस्थित अन्य विशिष्ट सम्माननीय व्यक्तित्व थे डा. गिरिजाशंकर त्रिवेदी (पूर्व मुख्य संपादक नवनीत), शायर एवं कवि श्री खन्ना मुजफ्फरपुरी, श्री कपिल कुमार (अभिनेता, कुंडलियों के सम्राट, उनका एक गीत हंसने की चाह ने इतना मुझे रुलाया है, जिसे मन्ना डे ने गाया था, बहुत प्रसिद्ध हुआ था).

गुंजन पुस्तक की खास विशेषता यह है कि यह दक्षिण भारत के एक शहर कोयंबतूर के एक विद्यालय में पढ़ रहे विद्यार्थियों द्वारा लिखी रचनाओं का संकलन है. हिंदी को एक विषय के रूप में पढ़ रहे इन छात्रों की रचनात्मक प्रतिभा को बढ़ावा देने वाली और कोई नही एक दक्षिण भारतीय हिंदी अध्यापिका ही हैं. जिनका नाम है श्रीमती सी आर राजश्री; जिनकी जितनी प्रशंसा की जाये, कम है. छात्रों की रचनात्मक प्रतिभा को बढ़ावा देने के लिये एवं उनमें संवेदनशीलता को उभारने के लिये उन्होंने कालेज में एक रचनात्मक कार्यशाला आयोजित की और उनके सभी छात्रों ने इसमें बढ़ चढ़ कर हिस्सा लिया. साथ ही कालेज के प्रिंसिपल, सलाहकार (संस्थापक) एवं विभागाध्यक्ष भी अनुशंसा के पात्र हैं जिन्होंने इस कार्यशाला के आयोजन के लिये न ही केवल राजश्री को प्रोत्साहन ही दिया अपितु सभी सुविधायें भी प्रदान कीं.

इन छात्रों की रचनात्मकता देखते ही बनती है. उनमें कई त्रुटियां होंगी पर उन्हें नज़रअंदाज करके ही हमें देखना होगा. छात्रों की संवेदनशीलता देखते ही बनती है. 66 छात्रों की रचनओं में से लगभग 13 कविताएं माँ पर हैं. माँ एक विषय नही अपितु संसार है जिसमें सभी कुछ समाहित होता है. इससे सिद्ध होता है कि हम भारतीय अपनी संस्कृति के ह्रास को लेकर दिनरात जो रोना रोते हैं वह कितना खोखला है. जब तक भारतीय माँ जिंदा है, हमारी संस्कृति बहुत ही अच्छे तरीके से सहेजी हुई है, सुरक्षित है.



विमोचन कार्यक्रम के उपरांत काव्य गोष्ठी का आयोजन हुआ, जिसका सुंदर संचालन विख्यात श्री कुमार जैन ने अपने निराले अंदाज में किया. कवियों ने अपनी मधुर वाणी एवं विचारों से उपस्थित श्रोताओं का मन मोह लिया. उपस्थित प्रमुख कवि एवं विचारक थे - सर्वश्री त्रिलोचन अरोडा, नंदलाल थापर, रवि यादव, कुलदीप दीप, हरि राम चौधरी, सुरेश जैन, जयंतीलाल जैन, जवाहरलाल निर्झर, गिरीश जोशी, भजन गायक हरिश्चंद्र जी, राजेश्वर उनियाल, डा. जमील, लोचन सक्सेना, मुरलीधर पाण्डेय, डा. तारा सिंह, श्रीमती शुभकीर्ति माहेश्वरी, श्रीमती मंजू गुप्ता, श्रीमती नीलिमा पाण्डे, श्रीमती शकुंतला शर्मा, डा. सुषमा सेनगुप्ता.

कार्यक्रम के उपरांत कुलवंत सिंह ने माँ शारदा के साथ साथ सभी अतिथियों, श्रोताओं, संचालक एवं महानुभावों का तहे दिल से शुक्रिया अदा किया.

प्रस्तुति-
कवि कुलवंत सिंह
2 डी, बद्रीनाथ बिल्डिंग, अणुशक्तिनगर, मुंबई - 94
फोन : 022-25595378 / 09819173477

Wednesday, March 18, 2009

सी आर राजश्री के 'कलम और ख्याल' का विमोचन


कोयमब्टूर के डॉ जी आर दामोदरन महाविद्यालय में ०२-०३-०९ को आयोजित हिंदी विभागीय समारोह में मुस्कान की दसवीं सालगिरह को बड़े ही धूम-धाम से मनाया गया। माननीय मुख्य अतिथि के रूप में बाबा अनुसन्धान केंद्र से कुलवंत जी पधारे और इस समारोह की शोभा बढ़ाई। इस विभाग का उद्‌घाटन एक गौरवमयी और पारंपरिक रीति से किया गया। फिर पहले वर्ष की छात्रा पवित्रा द्वारा माँ सरस्वती की वंदना की गई। फिर दीप प्रज्वलन और पुष्पगुच्छ देने की वेला थी। प्रथम वर्ष के छात्र आशीष द्वारा स्वागत भाषण दिया गया। दस छात्रों ने अपनी कविताओं को प्रस्तुत किया।

महाविद्यालय के सलाहाकार लक्ष्मणन ने अपने वक्तव्य में हिंदी विभाग की प्रशंसा करते हुए इस विभाग के प्राध्यापकों को बधाइयाँ दी और आगे भी इस तरह के साहित्यिक समारोह का आयोजन करवाने के बारे में अपनी राय दी। सी. आर. राजश्री ने इस शुभ अवसर पर अपनी कविता संग्रह 'कलम और ख़याल' का विमोचन मुख्य अतिथि के करकमलों द्वारा किया।

फिर मुख्य अतिथि महोदय के संक्षिप्त परिचय के बाद अपने प्रभावपूर्ण भाषण से उन्होंने छात्राओं का दिल जीत लिया। पुस्तक की समीक्षा उन्होंने बड़े ही अद्भुत ढंग से किया और पुस्तक के हर आयाम पर प्रकाश डाला, साथ ही छात्रों को काव्य लेखन करने के लिए प्रोत्साहित किया। विभिन्न प्रतिभागियों के लिए पुरस्कार वितरित किया गया। सर्वश्रेष्ठ छात्रों को आधिक अंक मिलने के लिए भी पुरस्कार दिया गया। जिसमें रामचंद्रन, दीपिका, अनुपमा, मधुमिता और ऐथिह्या को पुरस्कार प्रदान किया गया। छात्राओं ने कर-घोष के साथ सबको बधाइयाँ दी। धन्यवाद एवं आभार प्रदर्शन के बाद इस समरोह समाप्त किया गया। इस प्रकार यह समारोह अपने आप में एक ख़ास थी और छात्र-संघठन और प्रयत्न का एक अनूठा उदाहरण साबित हुआ।