Wednesday, March 18, 2009

सी आर राजश्री के 'कलम और ख्याल' का विमोचन


कोयमब्टूर के डॉ जी आर दामोदरन महाविद्यालय में ०२-०३-०९ को आयोजित हिंदी विभागीय समारोह में मुस्कान की दसवीं सालगिरह को बड़े ही धूम-धाम से मनाया गया। माननीय मुख्य अतिथि के रूप में बाबा अनुसन्धान केंद्र से कुलवंत जी पधारे और इस समारोह की शोभा बढ़ाई। इस विभाग का उद्‌घाटन एक गौरवमयी और पारंपरिक रीति से किया गया। फिर पहले वर्ष की छात्रा पवित्रा द्वारा माँ सरस्वती की वंदना की गई। फिर दीप प्रज्वलन और पुष्पगुच्छ देने की वेला थी। प्रथम वर्ष के छात्र आशीष द्वारा स्वागत भाषण दिया गया। दस छात्रों ने अपनी कविताओं को प्रस्तुत किया।

महाविद्यालय के सलाहाकार लक्ष्मणन ने अपने वक्तव्य में हिंदी विभाग की प्रशंसा करते हुए इस विभाग के प्राध्यापकों को बधाइयाँ दी और आगे भी इस तरह के साहित्यिक समारोह का आयोजन करवाने के बारे में अपनी राय दी। सी. आर. राजश्री ने इस शुभ अवसर पर अपनी कविता संग्रह 'कलम और ख़याल' का विमोचन मुख्य अतिथि के करकमलों द्वारा किया।

फिर मुख्य अतिथि महोदय के संक्षिप्त परिचय के बाद अपने प्रभावपूर्ण भाषण से उन्होंने छात्राओं का दिल जीत लिया। पुस्तक की समीक्षा उन्होंने बड़े ही अद्भुत ढंग से किया और पुस्तक के हर आयाम पर प्रकाश डाला, साथ ही छात्रों को काव्य लेखन करने के लिए प्रोत्साहित किया। विभिन्न प्रतिभागियों के लिए पुरस्कार वितरित किया गया। सर्वश्रेष्ठ छात्रों को आधिक अंक मिलने के लिए भी पुरस्कार दिया गया। जिसमें रामचंद्रन, दीपिका, अनुपमा, मधुमिता और ऐथिह्या को पुरस्कार प्रदान किया गया। छात्राओं ने कर-घोष के साथ सबको बधाइयाँ दी। धन्यवाद एवं आभार प्रदर्शन के बाद इस समरोह समाप्त किया गया। इस प्रकार यह समारोह अपने आप में एक ख़ास थी और छात्र-संघठन और प्रयत्न का एक अनूठा उदाहरण साबित हुआ।

आप क्या कहना चाहेंगे? (post your comment)

4 पाठकों का कहना है :

Mired Mirage का कहना है कि -

यह तो बहुत ही अच्छा समाचार है। हिन्दी को बढ़ावा एसे ही मिलेगा।
घुघूती बासूती

आचार्य संजीव वर्मा 'सलिल' का कहना है कि -

सी. आर. राज श्री को अनंत-अशेष बधाई. निवेदन यह कि ''सी. आर. राजश्री ने इस शुभ अवसर पर अपनी कविता संग्रह 'कलम और ख़याल' का विमोचन मुख्य अतिथि के करकमलों द्वारा किया।'' में किया के स्थान पर 'कराया' या 'करवाया' होना चाहिए.

शैलेश भारतवासी का कहना है कि -

आचार्य जी,

गैर हिन्दी भाषियों को इतनी छूट मिलनी चाहिए। मैंने जान-बूझकर इसे ठीक नहीं किया, ताकि कोई गलती बताये और रिपोर्टर को पता चल सके।

सी आर राजश्री जी को बधाइयाँ।

C.R.Rajashree का कहना है कि -

आदरणीय हिंदी प्रेमीजन
सप्रेम नमस्कार
आपका इतना प्रोत्साहन और सम्मान मिला यह क्या कम है. मैंने इसलिए "किया" लिखा क्योंकि मिएँ इस समारोह को बिलकुल ताज़ा मानती हूँ और यह पल मेरे लिए बिलकुल यादगार रहे. व्याकरणिक दृष्टि से इसमें त्रुटी हो तो में माफ़ी चाहती हूँ. विअसे में २२ साल मध्य प्रदेश में रह चुकीं हूँ पर वहां रहते मुझे कविता लेखन का शौक कम ही रहा दक्षिण भारत में आ कर मुझे हिंदी के प्रति मोह और बढ़ गया और काव्य सृजन के प्रति रूचि भी. फिर भी आप सब का स्नेह आसिष रहा तो मुझे और प्रेरणा मिलती रहेगी
धन्यवाद
सी. आर .राजश्री

आप क्या कहना चाहेंगे? (post your comment)