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Friday, December 31, 2010

जितेन्द्र ‘जौहर’ को मिला वर्ष-२०१० का ‘सृजन-सम्मान’



रॉबर्ट्‍सगंज । सोनभद्र
२३ दिसम्बर,२०१० को स्थानीय विवेकानन्द प्रेक्षागृह में हिन्दी दैनिक ‘बहुजन परिवार’ के स्थापना-दिवस एवं अंग्रेज़ी दैनिक ‘सोनभद्र कॉलिंग’ के विमोचन समारोह के संयुक्त अवसर पर ‘प्रेरणा’ (त्रैमा) के संपादकीय सलाहकार एवं सुपरिचित कवि श्री जितेन्द्र ‘जौहर’ को साहित्यिक योगदान के लिए वर्ष-२०१० के द्वितीय ‘सृजन-सम्मान’ से अलंकृत किया गया। श्री ‘जौहर’ को यह सम्मान मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित सोनभद्र के उप ज़िलाधिकारी श्री त्रिलोकी सिंह एवं विशिष्ट अतिथि बेसिक शिक्षाधिकारी श्री राजेश कुमार सिंह के साथ वरिष्ठ साहित्यकार पं. अजय शेखर तथा देश के ख्यातिलब्ध बुज़ुर्ग शाइर व ‘यथार्थ गीता’ के उर्दू मुतर्जिम मुनीर बख़्श आलम साहब के कर-कमलों द्वारा प्रदान किया गया।

ग़ौरतलब है कि कन्नौज (उप्र) में जन्मे श्री जितेन्द्र ‘जौहर’ ने देश-विदेश की अनेकानेक पत्रिकाओं, वीडियो-एलबम, वेब-मैगज़ीन्स, ब्लॉग्ज़, न्यूज़-पोर्टल्ज़ पर अपने उत्कृष्ट चिंतनप्रधान मौलिक लेखन तथा समीक्षाओं के साथ ही टेलीविज़न, आकाशवाणी एवं काव्य-मंचों पर ओजस्वी व मर्यादित हास्य-व्यंग्यपरक रचनाओं की प्रस्तुतियों व मंच-संचालन के माध्यम से जनपद सोनभद्र की महत्त्वपूर्ण उपस्थिति दर्ज करायी है।

अभी हाल ही में देश की लोकप्रिय साहित्यिक-सांस्कृतिक त्रैमासिक पत्रिका ‘सरस्वती सुमन’ (देहरादून) ने उन्हें अपने आगामी ‘मुक्तक/रुबाई विशेषांक’ का अतिथि संपादक मनोनीत किया है। वे देश की प्रतिष्ठित त्रैमासिक पत्रिका ‘अभिनव प्रयास’ (अलीगढ़) के सहयोगी भी हैं। पेशे से अंग्रेज़ी विषय के प्रतिभा-सम्पन्न अध्यापक श्री जितेन्द्र जौहर के हिन्दी-प्रेम की सर्वत्र सराहना होती रही है।

समारोह के इस अवसर पर ‘भ्रष्टाचार और पत्रकारिता’ विषय पर आयोजित एक विचार-गोष्ठी में जनपद के वरिष्ठ साहित्यकारों सर्व श्री मुनीर बख़्श आलम, पं. अजय शेखर, पत्रकार विजय विनीत, विमल जालान, डॉ. अर्जुन दास केसरी, कथाकार रामनाथ शिवेन्द्र एवं महाकाल समाचार के संपादक श्रीवास्तव जी, सहित अनेक वरिष्ठ पत्रकारों तथा साहित्यकारों ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कविवर श्री जितेन्द्र ‘जौहर’ को बधाई दी। संपादक श्री आशुतोष चौबे ने अपने जोशीले उद्‌बोधन में भ्रष्टाचार के कतिपय पहलुओं पर प्रमाण-सम्मत प्रकाश डाला। उन्होंने समस्त पाठकों व नागरिकों के अपनत्व के प्रति हार्दिक आभार व्यक्त करते हुए निष्पक्ष तथा निर्भीक पत्रकारिता के साथ ही उच्च गुणवत्तायुक्त वैचारिक सामग्री के प्रकाशन का वादा किया।

इस अवसर पर भोजपुरी के वरिष्ठ गीतकार श्री जगदीश पंथी को सम्मानित करने के अतिरिक्त समाचार-पत्र द्वारा आयोजित विभिन्न प्रतियोगिताओं के विजेताओं को मुख्य अतिथि ने ट्रॉफी व प्रमाण-पत्र देकर पुरस्कृत किया ।

हिन्दी दैनिक ‘बहुजन परिवार’ तथा अंग्रेज़ी दैनिक ‘सोनभद्र कॉलिंग’ के संपादक श्री अभिषेक चौबे के निर्देशन में आयोजित इस कार्यक्रम का सफल संयोजन बूरो चीफ़ श्री ब्रजेश कुमार पाठक एवं टीम ने तथा संचालन आशुतोष पाण्डेय ‘मुन्ना’ ने किया।

उक्त मौक़े पर एबीआई कॉलेज की हिन्दी प्रवक्ता श्रीमती सुशीला चौबे और जेसीज बालभवन की हेड मिस्ट्रेस डॉ. विभा दुबे सहित भारी संख्या में जनपद के पत्रकार, वरिष्ठ साहित्यकार एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।
प्रस्तुति: विजय ‘तन्हा'

Wednesday, February 17, 2010

अभिषेक कश्यप को पहला युवा कथा सम्मान

संगीत-साहित्य उत्सव 2010

डाला । सोनभद्र


उदय प्रकाश के हाथों सम्मान ग्रहण करते अभिषेक कश्यप

‘अभिषेक अपनी कहानियों में एक लगभग अंधेरे भविष्य की ओर बढते देश के युवाओं के अंतर्मन की जटिलताओं को रचनात्मक अभिव्यक्ति देते हुए एक भयावह यथार्थ से हमारा परिचय कराते हैं।’ ये बातें विख्यात कवि-कथाकार उदय प्रकाश ने युवा कथाकार अभिषेक कश्यप को श्री अचलेश्वर महादेव मंदिर फाउंडेशन, डाला, सोनभद्र (उत्तर प्रदेश) द्वारा आयोजित संगीत-साहित्य उत्सव में पहला युवा कथा सम्मान प्रदान करते हुए कही। यह पुरस्कार अभिषेक कश्यप को उनके पहले कथा संग्रह खेल पर दिया गया। पुरस्कारस्वरूप श्री कश्यप को स्मृति-चिन्ह और 21 हजार की राशि प्रदान की गई। उदय प्रकाश ने आगे कहा -‘साल 2000 में ‘स्वाधीनता’ के ‘साहित्य विशेषांक’ के संपादक के तौर पर मैं अभिषेक की कहानी ‘जाम-बेजाम’ का पहला पाठक था और इनकी ‘खेल’ कहानी मुझे बहुत प्रिय है। इस पुरस्कार के बाद एक कथाकार के रूप में इनका दायित्व बढ जाता है।’

भारतीय ज्ञानपीठ के नवलेखन पुरस्कार विजेता युवा कवि-चित्रकार अमित कल्ला ने अभिषेक कश्यप की कहानियों पर बात करते हुए कहा -‘खेल संग्रह में 11 कहानियाँ हैं जिनमें अभिषेक ने बहुत मौलिकता के साथ चीजों को सामने रखा है। इन कहानियों में जीवन के विविध रंग-रेखाएं हैं। इन कहानियों को पढते हुए लगता है मानो हम खुद इनका हिस्सा हों। यहां अभिषेक एक यात्री के रूप में हैं और यात्रा की स्मृतियों को यादगार कहानियों में बदल देते हैं।’

इस दोदिवसीय ‘संगीत-साहित्य उत्सव’ के पहले दिन (13 फरवरी) गुंदेचा बंधुओं के गुरुकुल की पहली प्रशिक्षित गायिका अमिता सिन्हा ने ध्रुपद गायन पेश किया और युवा पखावजवादक सुखद मानिक मुंडे ने पखावजवादन पेश किया।

दूसरे दिन (14 फरवरी) आयोजित साहित्य उत्सव में युवा कथा सम्मान समारोह के साथ सेमिनार, युवा कविता गोष्ठी और कथा-पाठ का भी कार्यक्रम रखा गया था। सेमिनार का विषय था -‘आज हमें कैसे साहित्य की जरूरत है।’ उदय प्रकाश ने इस विषय पर कुछ इस तरह अपनी बात रखी -‘साहित्य को समाज का दर्पण कहा जाता है। मगर साहित्य सिर्फ दर्पण नहीं, क्योंकि दर्पण स्वप्न नहीं देखता जबकि साहित्य समाज का स्वप्न है। महात्मा गांधी ने जिस अंतिम आदमी की बात की थी, साहित्य उस अंतिम आदमी की आँख का आँसू भी हो सकता है, चीख भी हो सकती है।’ सांस्कृतिक पत्रकार अजित राय ने कहा कि आज साहित्य महानगरों से ज्यादा दूरदराज के क्षेत्रों के लिए होना चाहिए क्योंकि महानगरों में साहित्य के पाठक अब नहीं बचे हैं।’ युवा रचनाकार आशुतोष मिश्र ने कहा -‘आज ऐसे साहित्य की जरूरत है जो उनकी आवाज बने जिनकी आवाज पहले कभी नहीं सुनी गई। ऐसा साहित्य, जो समाज के उस आखिरी आदमी को अपनी बात कहने का मौका दे जिसे आज तक बोलने नहीं दिया गया।’ साहित्यकार राजेंद्र प्रसाद पांडेय ने कहा कि वैश्वीकरण ने हमारी रुचियों को जबरन बदल डाला है जिसका प्रभाव हमारे समकालीन साहित्य पर पड़ा है। कला समीक्षक मंजरी सिन्हा ने कहा-‘अच्छे साहित्य, अच्छी कला से हमारी उदारता को, अच्छाई को सम्पोषण मिलता है।’

कवि-गोष्ठी में अमित कल्ला, वाजदा खान, ध्यानेंद्र मणि त्रिपाठी, दीपक दुबे और धनंजय सिंह राकिम ने अपनी कविताओं का पाठ किया जबकि कथा पाठ में पुरस्कृत कथाकार अभिषेक कश्यप ने अपनी कहानी ‘स्टेपिंग स्टोन’ का पाठ किया। इस अवसर पर एक अंतरविद्यालयीन कविता प्रतियोगिता का भी आयोजन किया गया था जिसमें अन्नु कुमारी, आकांक्षा यादव और दीक्षा को क्रमश पहला, दूसरा और तीसरा पुरस्कार दिया गया।
भवदीय

प्रेषक-चन्द्रप्रकाश तिवारी
सचिव
श्री अचलेश्वर महादेव मंदिर फाउंडेशन
डाला, सोनभद्र