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Wednesday, February 17, 2010

अभिषेक कश्यप को पहला युवा कथा सम्मान

संगीत-साहित्य उत्सव 2010

डाला । सोनभद्र


उदय प्रकाश के हाथों सम्मान ग्रहण करते अभिषेक कश्यप

‘अभिषेक अपनी कहानियों में एक लगभग अंधेरे भविष्य की ओर बढते देश के युवाओं के अंतर्मन की जटिलताओं को रचनात्मक अभिव्यक्ति देते हुए एक भयावह यथार्थ से हमारा परिचय कराते हैं।’ ये बातें विख्यात कवि-कथाकार उदय प्रकाश ने युवा कथाकार अभिषेक कश्यप को श्री अचलेश्वर महादेव मंदिर फाउंडेशन, डाला, सोनभद्र (उत्तर प्रदेश) द्वारा आयोजित संगीत-साहित्य उत्सव में पहला युवा कथा सम्मान प्रदान करते हुए कही। यह पुरस्कार अभिषेक कश्यप को उनके पहले कथा संग्रह खेल पर दिया गया। पुरस्कारस्वरूप श्री कश्यप को स्मृति-चिन्ह और 21 हजार की राशि प्रदान की गई। उदय प्रकाश ने आगे कहा -‘साल 2000 में ‘स्वाधीनता’ के ‘साहित्य विशेषांक’ के संपादक के तौर पर मैं अभिषेक की कहानी ‘जाम-बेजाम’ का पहला पाठक था और इनकी ‘खेल’ कहानी मुझे बहुत प्रिय है। इस पुरस्कार के बाद एक कथाकार के रूप में इनका दायित्व बढ जाता है।’

भारतीय ज्ञानपीठ के नवलेखन पुरस्कार विजेता युवा कवि-चित्रकार अमित कल्ला ने अभिषेक कश्यप की कहानियों पर बात करते हुए कहा -‘खेल संग्रह में 11 कहानियाँ हैं जिनमें अभिषेक ने बहुत मौलिकता के साथ चीजों को सामने रखा है। इन कहानियों में जीवन के विविध रंग-रेखाएं हैं। इन कहानियों को पढते हुए लगता है मानो हम खुद इनका हिस्सा हों। यहां अभिषेक एक यात्री के रूप में हैं और यात्रा की स्मृतियों को यादगार कहानियों में बदल देते हैं।’

इस दोदिवसीय ‘संगीत-साहित्य उत्सव’ के पहले दिन (13 फरवरी) गुंदेचा बंधुओं के गुरुकुल की पहली प्रशिक्षित गायिका अमिता सिन्हा ने ध्रुपद गायन पेश किया और युवा पखावजवादक सुखद मानिक मुंडे ने पखावजवादन पेश किया।

दूसरे दिन (14 फरवरी) आयोजित साहित्य उत्सव में युवा कथा सम्मान समारोह के साथ सेमिनार, युवा कविता गोष्ठी और कथा-पाठ का भी कार्यक्रम रखा गया था। सेमिनार का विषय था -‘आज हमें कैसे साहित्य की जरूरत है।’ उदय प्रकाश ने इस विषय पर कुछ इस तरह अपनी बात रखी -‘साहित्य को समाज का दर्पण कहा जाता है। मगर साहित्य सिर्फ दर्पण नहीं, क्योंकि दर्पण स्वप्न नहीं देखता जबकि साहित्य समाज का स्वप्न है। महात्मा गांधी ने जिस अंतिम आदमी की बात की थी, साहित्य उस अंतिम आदमी की आँख का आँसू भी हो सकता है, चीख भी हो सकती है।’ सांस्कृतिक पत्रकार अजित राय ने कहा कि आज साहित्य महानगरों से ज्यादा दूरदराज के क्षेत्रों के लिए होना चाहिए क्योंकि महानगरों में साहित्य के पाठक अब नहीं बचे हैं।’ युवा रचनाकार आशुतोष मिश्र ने कहा -‘आज ऐसे साहित्य की जरूरत है जो उनकी आवाज बने जिनकी आवाज पहले कभी नहीं सुनी गई। ऐसा साहित्य, जो समाज के उस आखिरी आदमी को अपनी बात कहने का मौका दे जिसे आज तक बोलने नहीं दिया गया।’ साहित्यकार राजेंद्र प्रसाद पांडेय ने कहा कि वैश्वीकरण ने हमारी रुचियों को जबरन बदल डाला है जिसका प्रभाव हमारे समकालीन साहित्य पर पड़ा है। कला समीक्षक मंजरी सिन्हा ने कहा-‘अच्छे साहित्य, अच्छी कला से हमारी उदारता को, अच्छाई को सम्पोषण मिलता है।’

कवि-गोष्ठी में अमित कल्ला, वाजदा खान, ध्यानेंद्र मणि त्रिपाठी, दीपक दुबे और धनंजय सिंह राकिम ने अपनी कविताओं का पाठ किया जबकि कथा पाठ में पुरस्कृत कथाकार अभिषेक कश्यप ने अपनी कहानी ‘स्टेपिंग स्टोन’ का पाठ किया। इस अवसर पर एक अंतरविद्यालयीन कविता प्रतियोगिता का भी आयोजन किया गया था जिसमें अन्नु कुमारी, आकांक्षा यादव और दीक्षा को क्रमश पहला, दूसरा और तीसरा पुरस्कार दिया गया।
भवदीय

प्रेषक-चन्द्रप्रकाश तिवारी
सचिव
श्री अचलेश्वर महादेव मंदिर फाउंडेशन
डाला, सोनभद्र