Wednesday, April 8, 2009

पहली पुस्तक लेखक के लिए एक अद्‍भुत घटना होती है- समीर लाल

दो दिन बीते. न कोई कमेंट, न अधिक ब्लॉग विचरण. कोई ब्लॉग वैराग्य जैसी बात भी नहीं बस शनिवार को लंदन रुकते हुए कनाडा वापसी की तैयारी है तो बस!! समयाभाव सा हो लिया है. इस बीच मेरी पहली पुस्तक 'बिखरे मोती' भी पंकज सुबीर जी और रमेश हटीला के अथक परिश्रम के बाद छप कर आ ही गई. छबि मिडिया याने बैगाणी बंधुओं ने कवर सज्जा भी खूब की.

अपनी पहली पुस्तक यूँ भी किसी लेखक के लिए एक अद्भुत घटना होती है और तिस पर से यह रोक कि परम्परानुसार बिना विमोचन आप इसे मित्रों को दे भी नहीं सकते. मन को मना भी लूँ तो हाथ को कैसे रोकूँ जो कुद कुद कर परिवार और मित्रों को पुस्तक पढ़वाने और वाह वाही लूटने को लालायित था.

याद आया कि मैने अपने पुत्र पर रोक लगाई थी कि बिना सगाई वधु के साथ घूमने नहीं जाओगे और सगाई हमारे आये बिना करोगे नहीं. बेटे ने तो़ड़ निकाली कि रोका का फन्कशन कर लेता हूँ फिर सगाई जब आप कनाडा से आ जायें तब. क्या अब घूम सकता हूँ? बेटा बाप से बढ़कर निकला और हम चुप. बस उसी को याद करते सुबीर जी को फोन लगाया. विमोचन कनाडा में हमारे गुरुदेव कम मार्गदर्शक कम मित्र कम अग्रज राकेश खण्डॆलवाल जी से ही करवाना है और इस बात पर मैं अडिग हूँ तो फिर पुस्तक कैसे बाटूँ?
अनुभवी पंकज सुबीर जी ने सोच विचार कर सलाह दी कि रोका टाइप एक अंतरिम विमोचन कर लिजिये और बांट दिजिये. मुख्य विमोचन कनाडा में कर लिजियेगा. बेटे को रोका जमा था और हमें ये.

आनन फानन, प्रमेन्द्र महाशक्ति इलाहाबाद से आ ही रहे थे, एक ब्लॉगर मीट रखी गई और वरिष्ट साहित्यकार आचार्य संजीव सलिल जी के कर कमलों से अन्तरिम विमोचन हुआ.
कार्यक्रम में आचार्य संजीव सलिल, प्रमेन्द्र, तारा चन्द्र, डूबे जी कार्टूनिस्ट, गिरिश बिल्लोर जी, संजय तिवारी संजू, बवाल, विवेक रंजन श्रीवास्तव, आनन्द कृष्ण, महेन्द्र मिश्रा और मैं उपस्थित था. संजीव जी ने विमोचन किया और सभी ने किताब से एक एक रचना पढ़ी. भाई पंकज सुबीर, रमेश हटीला जी, बैगाणी बंधुओं का विशेष आभार व्यक्त किया गया.

इस अवसर पर लिए गये कुछ चित्र और विस्तृत रिपोर्ट महेन्द्र मिश्रा जी प्रस्तुत कर ही चुके हैं.
वैसे बवाल की कव्वाली, विवेक जी और गिरिश बिल्लोरे जी कविता ने कार्यक्रम का समा बांध दिया.

प्रस्तुति- समीर लाल


अंतरिम विमोचन:बिखरे मोती



अंतरिम विमोचन:बिखरे मोती


अंतरिम विमोचन:बिखरे मोती

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7 पाठकों का कहना है :

Dr.Bhawna का कहना है कि -

आपको बहुत-बहुत बधाई आपकी पुस्तक के प्रकाशन और विमोचन के लिए रिपोर्ट और फोटो बहुत पंसद आये...

निरन्तर- महेन्द्र मिश्र का कहना है कि -

बहुत-बहुत बधाई ..

Anonymous का कहना है कि -

आप को बहुत बहुत बधाई /

हिन्दी टाइपिंग करानेकेलिए आप कौनसी टाइपिंग टूल यूज़ करते हे...? रीसेंट्ली मे यूज़र फ्रेंड्ली टाइपिंग टूल केलिए सर्च कर रहा ता, तो मूज़े मिला " क्विलपॅड " www.quillpad.in
आप भी " क्विलपॅड " यूज़ करते हे क्या...?

mahashakti का कहना है कि -

धन्‍यभाग हमारे जो हम वहॉं पधारे :)

पहली कृति का साक्षी होना निश्चित रूप से मेरे लिये सौभाग्‍य की बात है। हिन्‍द युग्‍म परिवार को धन्‍यवाद

आचार्य संजीव वर्मा 'सलिल' का कहना है कि -

'बिखरे मोती' साथ ले, आये लाल-बवाल.
काव्य-सलिल में स्नान कर, हम सब हुए निहाल.
हम सब हुए निहाल, सुहानी साँझ रसमयी.
मिले ह्रदय से ह्रदय, नेह नर्मदा बह गयी.
थे विवेक आनंद गिरीश प्रमेन्द्र तिवारी.
बिन डूबे डूबे महेंद्र सुन रचना प्यारी.

संगीता पुरी का कहना है कि -

बहुत बहुत बधाई।

Smart Indian - स्मार्ट इंडियन का कहना है कि -

बहुत-बहुत बधाई!

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