Showing posts with label Baal Sahitya Samman. Show all posts
Showing posts with label Baal Sahitya Samman. Show all posts

Saturday, May 7, 2011

तृतीय स्व. मिथलेश-रामेश्वर प्रतिभा सम्मान, 2011

उपर्युक्त सम्मान योजना के अंतर्गत इस वर्ष ये सम्मान बाल साहित्य एवं कार्टून विधा में देने का प्रस्ताव है। इसके लिए बाल साहित्य एवं कार्टून के क्षेत्र में विगत कम से कम 20 वर्षों से संलग्न व उल्लेखनीय उपलब्धिधारक मौलिक प्रतिभाएं अपनी श्रेष्ठ कृतियों (मूल)/प्रकाशित रचनाओं (अलग-अलग वर्षों की कम से कम 20 श्रेष्ठ रचनाओं/कार्टूनों की फोटो प्रति) के साथ अपनी प्रविष्टि स्वयं के पूर्ण विवरण, फोटो, एक स्वयं का पता लिखा जवाबी लिफाफा व पोस्टकार्ड के साथ 16 अगस्त, 2011 तक नीचे दिए गए पते पर
प्रेषित करें। यह सम्मान एक कार्यक्रम के दौरान झॉंसी या दिल्ली में सितंबर/अक्तूबर,11 माह में प्रदान किया जाएगा। इसके लिए केवल वही प्रतिभाएं अपनी प्रविष्टि प्रेषित करें जो स्वयं कार्यक्रम में पहुंचकर अपना सम्मान ले सकें। जिन प्रतिभाओं को हम सब साथ साथ का पहले ही कोई सम्मान प्राप्त हो चुका हो वे कृपया इसके लिए अपनी प्रविष्टि प्रेषित न करें। यह योजना निःशुल्क है। इसमें निर्णायकों का निर्णय अंतिम व सर्वमान्य होगा। प्रविष्टि भेजते समय प्रविष्टि के लिफाफे पर ऊपर कोने में ‘स्व. मिथलेश-रामेश्वर सम्मान’ अवश्य लिखें।

प्रविष्टि भेजने का पताः एस. श्रीवास्तव,
संपादक- हम सब साथ साथ पत्रिका,
916, बाबा फरीदपुरी, पश्चिमी पटेल नगर,
नई दिल्ली-110008 मो. 9868709348, 9716654047

Thursday, April 8, 2010

बाल साहित्यकार गोविंद शर्मा भोपाल में सम्मानित



बाल कल्याण एवं बाल साहित्य शोध केन्द्र, भोपाल (म.प्र.) द्वारा आयोजित समारोह में बाल साहित्यकार गोविन्द शर्मा को उनके समग्र योगदान के लिए ‘भीष्मसिंह चौहान स्मृति बाल साहित्य सम्मान’ प्रदान कर सम्मानित किया गया। भोपाल में
आयोजित इस सम्मान समारोह की अध्यक्षता मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री एवं वर्तमान सांसद कैलाश जोशी ने की तथा मुख्य अतिथि के रूप में मध्यप्रदेश की स्कूल शिक्षा मंत्री श्रीमती अर्चना चिटनिस पधारीं। समारोह में केन्द्र के संचालक महेश सक्सेना ने केन्द्र की गतिविधियों का परिचय दिया। विशिष्ट अतिथि देवेन्द्र दीपक (पूर्व निदेशक, मध्यप्रदेश साहित्य अकादमी) ने उपस्थित साहित्यकारों का स्वागत किया। सांसद कैलाश जोशी शॉल ओढ़ा कर एवं श्रीमती अर्चना चिटनिस ने प्रतीक चिन्ह देकर गोविन्द शर्मा को सम्मानित कया। श्रीमती अर्चना चिटनिस ने अपने उद् बोधन में कहा कि अब सभी को शिक्शा का मौलिक अधिकार प्राप्त हो गया है। कोई भी सरकार अकेली सभी को शिक्षित नहीं कर सकती। इसके लिए जन सहयोग, विशेषत: बालसाहित्य के रचनाकारों की भूमिका महत्वपूर्ण सिद्ध होगी।