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Monday, September 5, 2011

कवि उद्भ्रांत को भवानी प्रसाद मिश्र पुरस्कार

भोपाल: विगत 25 अगस्त, 2011 को भारत भवन सभागार में मध्यप्रदेश संस्कृति परिषद की साहित्य अकादमी द्वारा आयोजित
एक भव्य समारोह में वरिष्ठ हिंदी कवि श्री उद्भ्रांत को उनकी लम्बी कविता ‘अनाद्यसूक्त’ के लिए अकादमी का वर्ष 2008 का अखिल भारतीय भवानी प्रसाद मिश्र पुरस्कार प्रदान किया गया। ‘पूर्वग्रह’ के 123वें अंक में संपूर्ण प्रकाशित होकर पहले ही चर्चा में आई इस लम्बी कविता को कवि ने नौ स्पंदों में विभक्त किया है। अकादमी द्वारा प्रकाशित अलंकरण समारोह की पुस्तिका में कहा गया है कि कवि ने ‘‘नासदीय सूक्त की परंपरा में नए प्रयोग कर सृष्टि के उन्मेष और रहस्य को जानने के लिए वैदिक और तांत्रिक जानकारी का उपयोग किया है। ऐसी भावभूमि वैदिक और औपनिषद् काव्य के बाद कुछ निर्गुणीय कवियों में ही दिखाई देती है। अनाद्यसूक्त में एक शब्दीय पंक्ति का उपयोग कर उसके भीतर समाहित दार्शनिक अर्थों का संप्रेषण, कवि के सोच को अर्थवान बनाता है।’’

इसके अतिरिक्त निबंध संग्रह ‘विवेचना के सुर’ के लिए प्रो. शरद नारायण खरे (मंडला) को माखनलाल चतुर्वेदी पुरस्कार, ‘एक अचानक शाम’ पर कहानी के लिए मनमोहन सरल (मुम्बई) को मुक्तिबोध पुरस्कार, उपन्यास ‘काहे री नलिनी’ के लिए उषा यादव (आगरा) को वीरसिंह देव पुरस्कार और आलोचना पुस्तक ‘गांधी: पत्रकारिता के प्रतिमान’ के लिए डॉ. कमलकिशोर गोयनका (दिल्ली) को आचार्य रामचंद्र शुक्ल पुरस्कार से भी अलंकृत किया गया।

सभी पुरस्कृत रचनाकारों को नारियल, शॉल, सम्मान-पत्र के साथ इक्यावन हज़ार रुपये की धनराशि उत्तर प्रदेश की संस्कृति मंत्री माननीय श्री लक्ष्मीकांत शर्मा द्वारा प्रदान की गयी।

Tuesday, July 20, 2010

डॉ॰ रमा द्विवेदी कृत 'रेत का समंदर' का विमोचन सम्पन्न



अखिल भारतीय भाषा साहित्य सम्मेलन, भोपाल का 22वाँ राष्ट्रीय अधिवेशन 10/7/2010-11/7/2010 भोपाल के अरेरा कालोनी स्थित चित्रांश महाविद्यालय के परिसर में संपन्न हुआ। इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में पं. श्री लक्ष्मीकान्त शर्मा, मंत्री, संस्कृति, जनसंपर्क, उच्चशिक्षा एवं खनिज संसाधन, मध्य प्रदेश, मंचासीन हुए। राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री सतीश चतुर्वेदी ने अध्यक्षता की। राष्ट्रीय महासचिव पं. सुरेश नीरव, कर्नल विपिन चतुर्वेदी, प्रो. यासमीन सुलताना नक़वी (ओसाका वि.वि.,जापान), डा. मधु चतुर्वेदी ने उद्गाटन सत्र में भाग लिया और अपने विचार व्यक्त किए। राष्ट्रीय अध्यक्ष ने सभी का स्वागत किया। पं. लक्ष्मी कान्त शर्मा के कर कमलों से संस्था द्वारा प्रदत्त विविध सम्मानों से प्रान्त-प्रान्तान्तर से आए साहित्यकारों का सम्मान किया गया। तत्पश्चात मंत्री जी के द्वारा विविध विधाओं की पुस्तकों का लोकार्पण किया गया।
इसी क्रम में हैदराबाद की वरिष्ठ कवयित्री डॉ.रमा द्विवेदी के काव्य संग्रह ‘रेत का समन्दर’ का विमोचन माननीय मंत्री श्री पं. लक्ष्मी कान्त शर्मा के कर कमलों द्वारा किया गया। डॉ. अहिल्या मिश्र ने कवयित्री डॉ. रमा द्विवेदी के काव्य संग्रह की जानकारी दी और अपनी शुभकामनाएँ प्रेषित की। पं. लक्ष्मी कान्त शर्मा ने अपने उद्बोधन में कहा -‘साहित्यकार प्रणम्य होते हैं। साहित्य लेखन के माध्यम से जनजागृति एवं समाज निर्माण की महती भूमिका निभाते हैं। द्वितीय सत्र में बहु भाषा कवि सम्मेलन आयोजित किया गया जिसमें स्थानीय लोगों के साथ-साथ बाहर से आए अनेक कवियों ने काव्य पाठ किया, जिसमें प्रमुख नाम इस प्रकार हैं- डॉ. यासमीन सुलताना नक़वी, डॉ. राजश्री रावत, जगदीश श्रीवास्तव, जगदीश किंजल्क, डा. संध्या भराडे, रमा कान्त पूनम, पं. सुरेश नीरव, डॉ. मधु चतुर्वेदी, श्याम बिहारी सक्सेना, डॉ. प्रेमलता नीलम, उषा रानी, राजेश टैगोर, क्रान्ति चतुर्वेदी, डॉ. सरोज ललवानी, डा. शशि नायक, डॉ. अहिल्या मिश्र, डॉ. रमा द्विवेदी, कृति चतुर्वेदी, रजनी कान्त राजन, रिचा अनुरागी, देवकी नंदन शुक्ल, तपन बंद्यौपाध्याय, अंजना अनिल, यतींद्र राही, वीरेन्द्र सिंह, राम स्वरूप शाह, बनवारी लाल वर्मा, मधु सक्सेना, वैभव कोतवाल, डॉ. एन.एम मूर्ति, अश्विनी वर्मा इत्यादि ने भाग लिया ।



11/7/2010 के प्रात: प्रथम सत्र राष्ट्रीय महिला साहित्यकार सम्मेलन के नाम रहा और इस अवसर पर मंचासीन हुईं डॉ. सरोज ललवानी (अध्यक्ष), डॉ. यासमीन सुलताना नक़वी, डॉ. अहिल्या मिश्र एवं डॉ. मधु चतुर्वेदी विशेष अतिथि के रूप में भाग लिया। डॉ. अहिल्या मिश्र ने अपने उद्बोधन में सभ्यता, संस्कृति एवं भाषात्मक संकट से आगाह करते हुए इससे निपटने हेतु साहित्यकारों को एक जुट होकर आगे बढ़ने का आह्वान किया। इस सत्र में महिलाओं की समस्याओं पर चर्चा की गई एवं कवयित्री सम्मेलन में डॉ. रमा द्विवेदी, डॉ. प्रेमलता नीलम, डॉ. राजश्री रावत, डॉ. मधु चतुर्वेदी, डॉ. शशि नायक, डॉ. शीला तिवारी, डॉ. रिचा अनुरागी, डॉ. कमला सक्सेना, आदि ने गीत-ग़ज़ल कविताओं के माध्यम से अपना संदेश प्रेषित किया। अपरान्ह सत्र में राष्ट्रीय परिसंवाद में ‘भारतीय भाषाओं की उपेक्षा और समन्वय, आंग्ल भाषा का बढ़ता प्रभाव' लेखकों की समस्याओं पर चर्चा संपन्न हुई। इस सत्र के मुख्य अतिथि श्री बाबूलाल जैन, अध्यक्ष निर्धन वर्ग कल्याण आयोग, म. प्र. विशिष्ट अतिथि श्री आशीष उपाध्याय, आई ए. एस., आयुक्त उच्च शिक्षा, म.प्र. थे। सायं समापन समारोह के मुख्य अतिथि डॉ. संतोष चौबे, कुलपति, सी.वी. रमन विश्वविद्यालय, रायपुर रहे। अधिवेशन के अन्त में सांस्कृतिक कार्यक्रम हुआ और कृति चतुर्वेदी के आभार से कार्यक्रम समाप्त हुआ ।

प्रस्तुति: डा.रमा द्विवेदी

Thursday, April 8, 2010

बाल साहित्यकार गोविंद शर्मा भोपाल में सम्मानित



बाल कल्याण एवं बाल साहित्य शोध केन्द्र, भोपाल (म.प्र.) द्वारा आयोजित समारोह में बाल साहित्यकार गोविन्द शर्मा को उनके समग्र योगदान के लिए ‘भीष्मसिंह चौहान स्मृति बाल साहित्य सम्मान’ प्रदान कर सम्मानित किया गया। भोपाल में
आयोजित इस सम्मान समारोह की अध्यक्षता मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री एवं वर्तमान सांसद कैलाश जोशी ने की तथा मुख्य अतिथि के रूप में मध्यप्रदेश की स्कूल शिक्षा मंत्री श्रीमती अर्चना चिटनिस पधारीं। समारोह में केन्द्र के संचालक महेश सक्सेना ने केन्द्र की गतिविधियों का परिचय दिया। विशिष्ट अतिथि देवेन्द्र दीपक (पूर्व निदेशक, मध्यप्रदेश साहित्य अकादमी) ने उपस्थित साहित्यकारों का स्वागत किया। सांसद कैलाश जोशी शॉल ओढ़ा कर एवं श्रीमती अर्चना चिटनिस ने प्रतीक चिन्ह देकर गोविन्द शर्मा को सम्मानित कया। श्रीमती अर्चना चिटनिस ने अपने उद् बोधन में कहा कि अब सभी को शिक्शा का मौलिक अधिकार प्राप्त हो गया है। कोई भी सरकार अकेली सभी को शिक्षित नहीं कर सकती। इसके लिए जन सहयोग, विशेषत: बालसाहित्य के रचनाकारों की भूमिका महत्वपूर्ण सिद्ध होगी।

Wednesday, March 17, 2010

भास्कर समूह के तीन पत्रकारों सहित प्रदेश के आठ पत्रकारों को विकास संवाद फैलोशिप

भोपाल। सामाजिक सरोकार एवं विकास से जुड़े मुद्दों पर अध्ययन एवं रिपोर्टिंग के लिए मप्र के पत्रकारों को दी जाने वाली विकास संवाद फैलोशिप के लिए आठ पत्रकारों का चयन किया गया है।
मनीषा पांडेय (दैनिक भास्कर, भोपाल), आशीष महर्षि (भास्कर डॉट कॉम), रफी मोहम्मद शेख (डीबी स्टार, इंदौर), अनिल चौधरी (पत्रिका, भोपाल), शिवकरण सिंह (द स्टेट्समैन, मप्र), सीजी अखिला (पत्रिका इंदौर), नूपुर दीक्षित (पत्रिका, इंदौर), सुश्री श्रदृधा मंडलोई (पिपरिया \) को यह फैलोशिप दी गई है।
विकास संवाद मीडिया फैलोशिप के तहत मध्यप्रदेश में पत्रकारिता से जुड़े पत्रकारों को विकास के मुद्दे पर लेखन व शोध के लिए प्रति वर्ष चयन किया जाता है।
वर्ष 2010 के लिए मनीषा पांडेय को सुरक्षित प्रसव एंव मातृत्व, आशीष महर्षि को विस्थापन एवं बच्चों के अधिकारों का हनन, रफी मोहम्मद शेख को स्कूली शिक्षा से बाहर बच्चे, अनिल चैधरी को शहरी गरीबी का उपेक्षित चेहरा, शिवकरण सिंह को शिक्षा का अधिकारः चुनौती भरी राह, सीजी अखिला को देखरेख एवं संरक्षण की जरूरतमंद बच्चे, नुपूर दीक्षित को शिक्षा व्यवस्था में दंड और उसके व्यापक प्रभाव, और श्रदृधा मंडलोई को स्वास्थ्य का अधिकार और सामुदायिक निगरानी विषय पर फैलोशिप दी गई है। वरिष्ठ पत्रकारों की एक स्वतंत्र चयन समिति ने इन पत्रकारों का चयन किया है।

सौजन्य- सचिन जैन
समन्वयक, मीडिया फैलोशिप

Friday, January 8, 2010

ग़ज़ल लेखन प्रतियोगिता में जतिन्दर परवाज़ को प्रथम पुरस्कार


पूर्व मुख्यमंत्री एवं सांसद कैलाश जोशी जतिन्दर परवाज़ को पुरस्कृत और सम्मानित करते हुए

भोपाल।
दुष्यन्त कुमार स्मारक पाण्डुलिपि संग्रहालय भोपाल द्वारा युवा सृजनात्मकता को प्रोत्साहित करने के लिए राष्ट्रीय हिमाक्षरा साहित्य परिषद के सहयोग से अखिल भारतीय स्तर पर एक ग़ज़ल लेखन प्रतियोगिता का आयोजित किया गया। इस प्रतियोगिता में देश भर से युवा शायरों ने भाग लिया, जिसके संयोजक श्री इसरार कुरैशी ‘गुणेश थे’। प्रतियोगिता के पहले पुरस्कार के लिए पठानकोट के जतिन्दर परवाज़ को पुरस्कृत किया गया। दूसरा दमोह के ताबीश नैय्यर तथा जबलपुर की अमिता श्रीवास्तव ‘तमन्ना’ को तीसरे स्थान के लिए पुरस्कृत किया गया। साथ ही हरदा के मंसूर अली मंसूर को सांत्वना पुरस्कार दिया गया। 29 एवं 30 दिसम्बर को भारत भवन में दुष्यन्त कुमार स्मारक पाण्डुलिपि संग्रहालय के स्थापना उत्सव के अवसर पर अयोयित एक भव्य 'पुरस्कार वितरण समारोह' में मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित पूर्व मुख्यमंत्री एवं सांसद श्री कैलाश जोशी ने अपने कर कमलों से इन पुरस्कारों का वितरण किया । इस अवसर पर संग्रहालय के प्रयासों की प्रशंसा करते हुए उन्होंने आज के दौर में बढ़ती व्यावसायिक प्रवृत्ति पर गहरी चिन्ता व्यक्त की और संग्रहालय के दस्तावेज़ीकरण के काम को अनुकरणीय माना। विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित भारतीय स्टेट बैंक भोपाल वृत्त के मुख्य महाप्रबंधक श्री एम.भगवन्त राव ने अपने उद्‍बोधन में संग्रहालय के विविध प्रयत्नों को रेखांकित करते हुए समाज के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। विशिष्ट अतिथि बतौर स्व. दुष्यन्त कुमार की जीवन संगिनी श्रीमती राजेश्वरी दुष्यन्त कुमार भी उपस्थित थीं।


एक अन्य चित्र

रिपोर्ट: वसन्त सकरगाये


प्रेषक:
संगीता राजुरकर (सहायक निदेशक)
दुष्यन्त कुमार स्मारक पाण्डुलिपि संग्रहालय
एफ-50/17, दक्षिण तात्या टोपे नगर
शरद जोशी मार्ग, भोपाल-462003

Saturday, December 19, 2009

मीडिया छात्र समाज के भावी चिकित्सकः डा. शाहिद अली



भोपाल । 19 दिसंबर

मीडिया के छात्र समाज की बुराइयों को पहचान कर उनका निदान करने वाले भावी चिकित्सक हैं। ये विचार कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय, रायपुर में जनसंचार विभाग के अध्यक्ष डा. शाहिद अली ने व्यक्त किए। डा. अली में माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल के जनसंचार विभाग के छात्र-छात्राओं से एक संवाद में कहा कि जनसंचार के क्षेत्र में काम करने वालों की जिम्मेदारियां बहुत बड़ी हैं। जनसंचारकर्मी वास्तव में समाज की पहचान करता है और उसके आधार पर समस्याओं का निदान करते हैं। उन्होंने कहा कि आनेवाली पीढ़ी ही मीडिया जगत के अंदर आ गई विकृतियों का निदान भी खोजेगी और उसे जनोन्मुखी बनाने में मदद करेगी। उन्होंने कहा कि मीडिया पर पड़े रहे बाजार के प्रभावों से मिल रही चुनौतियों का सामना करने के लिए पत्रकारिता के मूल्यों की ओर लौटने की ओर लौटने की जरूरत है। समाज और राष्ट्र के निर्माण में संचार माध्यमों की जागरूकता जरूरी है। मीडिया का नया परिदृश्य गंभीर और चिंतनशील जनसंचार के शोधार्थियों का है जिसे आगे बढ़ाने की जरूरत है। वर्तमान को कोसने से नहीं उसका सामना करने और नए रास्ते बनाने से ही यह क्षेत्र पुनः एक नई उर्जा को प्राप्त कर सकेगा।

कार्यक्रम के प्रारंभ में जनसंचार विभाग के अध्यक्ष संजय द्विवेदी ने डा.अली का स्वागत किया। आभार प्रदर्शन डा. मोनिका वर्मा ने किया। आयोजन में विभाग के छात्र-छात्राएं मौजूद रहे।

रिपोर्ट- संजय द्विवेदी

Thursday, December 17, 2009

भोपाल में तेजेन्द्र शर्मा का कहानी पाठ एवं पुस्तक लोकार्पण


बाएं से प्रो. रमेश दवे, तेजेन्द्र शर्मा, ज्ञान चतुर्वेदी, मनोज श्रीवास्तव

भोपाल
संस्कृति, साहित्य तथा ललित कलाओं के लिए समर्पित संस्था स्पंदन भोपाल द्वारा दिनांक 26 नवंबर 09 को स्वराज भवन, भोपाल में लंदन के प्रतिष्ठित कथाकार तेजेन्द्र शर्मा की अब तक प्रकाशित संपूर्ण कहानियों के प्रथम खण्ड सीधी रेखा की परतें का लोकार्पण समारोह का आयोजन किया गया।

इस अवसर पर तेजेन्द्र शर्मा ने इस संग्रह से अपनी बहुचर्चित कहानी कैंसर का पाठ किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ साहित्यकार, चिंतक तथा शिक्षाविद् प्रो. रमेश दवे ने की। मुख्य अतिथि के रूप में प्रख्यात व्यंग्यकार डा. ज्ञान चतुर्वेदी उपस्थित थे। विशिष्ट अतिथि थे श्री मनोज कुमार श्रीवास्तव, आयुक्त जनसंपर्क म.प्र.शासन।

इससे पूर्व संस्था के अध्यक्ष डा. शिरीष शर्मा तथा सचिव गायत्री गौड़ ने अतिथियों का स्वागत किया।

श्री मनोज श्रीवास्तव ने अपने लिखित आलेख का पाठ करते हुए तेजन्द्र शर्मा की कहानियों को ख़ालिस हिन्दुस्तानी कहानियां बताया। उनका मानना था कि तेजेन्द्र की कहानियां करुण हैं। उनके पात्र स्मृतियों में रहते हैं। मृत्यु की अनेक अंतरछवियां इन कहानियों में देखने को मिलती हैं।

डा. आनंद सिंह ने कहा कि तेजेन्द्र शर्मा सामान्य कहानीकार नहीं हैं। वे इंटेलिजेण्ट और नॉलेजेबल कहानीकार हैं। वे घटनाओं का तार्किक चित्रण करते हैं। वे ऐसी पृष्ठभूमि तथा परिवेश के रचनाकार हैं जिसकी तुलना अन्य किसी रचनाकार से नहीं की जा सकती। वे अपनी कहानियों में महीन आध्यात्मिकता का सृजन करते हैं। उनकी कहानियों में मानवता का समग्र वेदना तरल रूप में काम करती है। तेजेन्द्र शर्मा के कहानी पाठ करने के नाटकीय ढंग की भी उन्होंने तारीफ़ की।

मुख्य अतिथि डा. ज्ञान चतुर्वेदी ने कहानी की परम्परा को विस्तार से रखा। प्रेमचन्द से लेकर नये कहानीकारों का ज़िक्र करते हुए उन्होंने प्रत्येक धारा की विशिष्टताओं को रेखांकित किया। डा. ज्ञान चतुर्वेदी के अनुसार कहानी में किस्सागोई तथा भाषा की कलात्मकता तथा सौन्दर्य बोध होना चाहिये। तेजेन्द्र शर्मा की कहानियों में ये तत्व हैं। उन्होंने आगे कहा कि कैंसर एक बड़ी कहानी बनते बनते रह गयी।

कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे प्रतिष्ठित साहित्यकार प्रो. रमेश दवे ने कहा कि तेजेन्द्र शर्मा की कहानियां लोग और रोग के बीच कंट्राडिक्शन को सामने लाती हैं। उनकी कहानियां मृत्यु का बोध करवाती हैं। कैंसर कहानी हो या अन्य इनमें वैकल्पिक जीवन उभर कर आता है। कहानियां जो व्यक्ति और परिवार की संवेदना को लोक संवेदना में बदल देती हैं। कैंसर जैसी कहानियों में आई करुणा को ट्रांसफ़ॉर्म कर देना रचनात्मक लेखक का फ़र्ज़ बनता है। तेजेन्द्र अपनी कहानियों में मानसिक द्वन्द्वों को बख़ूबी निभाते हैं। उनकी सबसे बड़ी ताकत है भाषा का प्रयोग।

कार्यक्रम का संचालन करते हुए उर्मिला शिरीष ने तेजेन्द्र शर्मा के व्यापक अनुभव जगत की बात कही। कार्यक्रम में अन्य गणमान्य अतिथियों के अतिरिक्त राजेश जोशी, हरि भटनागर, वीरेन्द्र जैन, राजेन्द्र जोशी, मुकेश वर्मा, स्वाति तिवारी, आशा सिंह तथा अल्पना नारायण भी उपस्थित थे।

रिपोर्ट- उर्मिला शिरीष

Monday, June 8, 2009

सड़क दुर्घटना में तीन कवियों की मौत और 1 गंभीर रूप से घायल

8 जुलाई 2009 । भोपाल
आज सुबह हिन्दी के 3 कवियों ओम प्रकाश आदित्य, नीरज पुरी और लाड़ सिंह गूजर की एक सड़क दुर्घटना में मृत्यु हो गई। कवि ओम व्यास की हालत गंभीर बनी हुई है। उन्हें भोपाल के हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया है। डॉक्टर अगले 30 घंटे तक उनकी हालत के विषय में कुछ बता पाने की स्थिति में नहीं हैं। साथ ही साथ एक और कवि जानी बैरागी को गंभीर चोटें आई हैं, लेकिन वे खतरे से बाहर हैं। वाहन के ड्राइवर की हालत भी गंभीर बनी हुई है।

ये पाँचों कवि इनोवा कार में ड्राइवर और फोटोग्राफर सहित विदिशा से भोपाल जा रहे थे। ये कवि बहुत से अन्य कवियों के साथ संस्कृति विभाग, म॰ प्र॰ शासन द्वारा आयोजित दो दिवसीय सांस्कृतिक महोत्सव 'बेतवा उत्सव' के पहले दिन के कार्यक्रम में शिरकत करने गये थे। रात का कार्यक्रम करके ये कार से वापिस लौट रहे थे, कि सुबह 4 से साढ़े बजे के क़रीब इनकी गाड़ी को किसी गाड़ी ने टक्कर मारी। किस गाड़ी ने टक्कर मारी, अभी यह विश्वास के साथ नहीं कहा जा सकता कि कौन सी गाड़ी है। उसके ट्रक होने की सम्भावना है। तीन कवियों की मृत्यु घटनास्थल पर ही हो गई।

होश में आ चुके कवि जानी वैरागी से जब पूछा गया कि पूरी घटना क्या थी तो उन्होंने बताया कि ड्राइवर के अलावा सभी सो रहे थे। क्या हुआ किसी को कुछ पता नहीं। मुझे भी नहीं।

कवि देवमणि पाण्डेय ने फोन करके हमें बताया कि इस गाड़ी के पीछे एक गाड़ी में कवि अशोक चक्रधर और प्रदीप चौबे भी भोपाल आ रहे थे, जो उसी कार्यक्रम में भाग लेने गये थे।

घटना को और समझने के लिए हिन्द-युग्म के संपादक शैलेश भारतवासी ने कवि प्रदीप चौबे को फोन लगाया और सारी जानकारी ली। कवि अशोक चक्रधर भी अभी वहीं हास्पिटल में मौज़ूद हैं।

राजेश चेतन ने बताया कि वरिष्ठ कवि ओम प्रकाश आदित्य का अंतिम संस्कार आज दोपहर 3 बजे मालवीय नगर, दिल्ली के श्मशान भूमि में होगा।

कवि राजेश चेतन, देवमणि पाण्डेय और प्रदीप चौबे ने इसे हिन्दी कविता के लिए बड़ी क्षति बताया और दिवंगत आत्मा की शांति की कामना की।

Thursday, April 23, 2009

डॉ॰ अजित गुप्ता के नवीनतम उपन्यास 'अरण्य में सूरज' का लोकार्पण


20 अप्रैल 2009 को भोपाल में उदयपुर की लेखिका डॉ॰ अजित गुप्ता के नवीनतम उपन्यास 'अरण्य का सूरज' का लोकार्पण हुआ। लोकार्पण समारोह में मध्‍यप्रदेश साहित्‍य अकादमी के निदेशक डॉ. देवेन्‍द्र दीपक, प्रसिद्ध व्‍यंग्‍यकार एवं कवि माणिक वर्मा, गीतकार दिनेश प्रभात सहित बड़ी संख्‍या में भोपाल के साहित्‍यकार उपस्थित थे।

यह उपन्‍यास राजस्‍थान में मेवाड़ क्षेत्र की जनजातियों पर आधारित है। ग्‍यारहवीं शताब्‍दी तक राजा रहे जनजाति समाज के अपने कानून थे और आज भी हैं। उसी के अन्‍तर्गत 'मौताणा' प्रथा का जन्‍म हुआ और आज विकृत रूप में उसी समाज का अहित कर रही है। इस समस्‍या पर आजतक किसी लेखक की कलम नहीं चली, डॉ॰ अजित गुप्ता ने मौताणे सहित बाल मजदूरी और बालविवाह की समस्‍याओं को भी प्रमुखता से उठाया है। यह पुस्तक दिल्ली के सामयिक प्रकाशन से प्रकाशित हुआ है।

डॉ॰ अजित बहुत लम्बे अर्से से लेखन में सक्रिय हैं। शब्‍द जो मकरंद बने, सांझ्‍ा की झंकार (कविता संग्रह), अहम् से वयम् तक (निबन्‍ध संग्रह), सैलाबी तटबन्‍ध (उपन्‍यास), अरण्‍य में सूरज (उपन्‍यास), हम गुलेलची (व्‍यंग्‍य संग्रह), बौर तो आए (निबन्‍ध संग्रह), सोने का पिंजर (अमेरिका-यात्रा का संस्मरण) इत्यादि इनकी प्रकाशित पुस्तकें हैं।

गौरतलब है कि हिन्द-युग्म डॉट कॉम के बैठक मंच पर इनके यात्रा-संस्मरण 'सोने का पिंजर' को धारावाहिक रूप में प्रकाशित किया जा रहा है।