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Saturday, February 27, 2010

हिंदी दिवस की महत्ता में एक नया मोर पंख - "नवतरंग" का लोकार्पण एवं काव्यगोष्ठी

दिनांक रविवार, २१ फरवरी २०१० अंतराष्ट्रीय हिंदीं समिति, न्यू जर्सी शाखा के अध्यक्ष श्री रामबाबू गौतम जी द्वारा संपादित प्रवासी साहित्यकारों का संग्रह "नवतरंग" साहित्य के कैनवास पर एक नया अयाम प्रदान करता रहा. अंतर्राष्ट्रीय. हिन्दी दिवस के उपलक्ष में एक इन्द्र-धनुषी कवि सम्मलेन का सफ़ल आयोजन हुआ जिसमें मुख्य अतिथि सम्माननीय डॉ. विजय कुमार मेहता, न्यूयार्क (अखिल विश्व समिति) ने अध्यक्षता की. अन्य मुख्य महमान रहे, श्री देवेन्द्र सिंह, रचयिता सिंह, एस.मलिक, श्री अनूप भार्गव, श्री शेरबहादुर सिंह एवं डा. रेखा रस्तोगी.



डॉ. मेहता तथा श्री रामबाबू गौतम ने माँ सरस्वती के चरणों में दीप प्रज्ज्वलित करके इस आयोजन की शुरूवात स्वागत स्वरूप यह कहते हुए किया -

"निज भाषा उन्नति अहे, करता हूँ प्रणाम
न्यू जर्सी में सरस्वती बढी, ले कविता की शाम
कोटि- कोटि हिंदी अहे, दे प्रवासी सम्मान,
रूख- रूख उभरी यहाँ, कर कवियों का सम्मान

इसके बाद अमेरिका में जन्में दो भारतीय बच्चे प्राची व् उसके भाई सूर्य ने अपने साज़ और आवाज़ के संगम से सुर लय ताल में मधुर राष्ट्रीय गान "वन्दे मातरम" गाकर श्रोताओं का मन मोह लिया.

शुरुवाती वक्तव्य में श्री शेरबहादुर सिंह जी.. अंतराष्ट्रीय हिंदीं समिति.के पूर्व अध्यक्ष... ने कहा कि 'यह एक स्वर्ण युग है हिंदी भाषा के लिए. इतने हिंदी सेवी निष्टा से इस प्रचार प्रसार के आन्दोलन में जुटे हुए हैं, अब हिंदी के प्रवाह को कोई नहीं रोक सकता. अब अपने संगठित प्रयासों से भाषा जी जड़ों को और मज़बूत करना है.



हिंदी USA के संस्थापक श्री देवेन्द्र सिंह एवं रचिता सिंह भी इस अवसर पर मौजूद रहे. अपने विचारों को व्यक्त करते हुए रचयिता जी ने कहा "जब तक हम मिलकर हिंदी भाषा के लिए काम नहीं करेंगे, तब तक आने वाली पीढ़ियों को उनकी विरासत देने का प्रयास सफल नहीं होगा" श्री देवेन्द्र सिंह ने हिंदी के कार्यों का विवरण देते हुए उनमें और सक्रियता की आशा की. इससे साफ़ ज़ाहिर होता है की वे हिंदी को प्रवास में स्थापित करने के स्वप्न को लेकर कितने सक्रिय रूप से जुटे हुए हैं. जोश भरी इस रचना से उन्होंने श्रोताओं, कविओं में जोश का संचार किया...

हिन्दू जागो हिंदी सीखो हिन्दोस्तान बचाना है/

भारत मान की आन बाण का डंका हमें बजाना है.

भावों के आदान प्रदान के पश्चात् काव्य गोष्टी प्रारंभ हुई. कवि- सम्मेलन के प्रथम सत्र के शामिल कवि इस प्रकार थे -



श्री अशोक सिंह, डॉ. सरिता मेहता, श्रीमती पूर्णिमा देसाई, श्री हिमांशु ओम पाठक, श्रीमती शशी पाधा, श्रीमती सुषमा मल्होत्रा. राम बाबू गौतम जी के संचालन में पाठ का आगाज़ किया श्री अशोक व्यास जी ने अपने वतन के प्रति एक निष्टावान पंक्तियों से " मेरा भारत महान" और पाठ करने वाले वरिष्ठ रचनाकार, शायर, अपनी अपनी अनुभूतियों से महफ़िल को सजीव व् रुचिकर करने में सफल रहे. डा. सरिता मेहता ने इस दौर में बचपन की हंसी की कमी की ओर विशेष ध्यानर देते हुए सुंदर रचना से माहौल को रौनक प्रदान की. कवियित्री शशि पाधा एक सैनिक की पत्नि है, जिन्होंने एक मार्मिक, हृदयस्पर्शी रचना उन सैनिकों की ओर से पढ़ी जो जी-जान से भारत माँ की शान पर अपनी निष्टा के सुमन चढ़ा कर वहीँ सरहदों पर शहादत का परचम फहरा गए. अंत की ओर आते आते सुश्री सुषमा मल्होत्रा ने इन्द्रधनुषी रचना से रंगों के बिम्ब खींचते हुए होली के त्यौहार को सजीव व् सकारात्मक स्वरुप प्रदान किया.



दूसरे सत्र के पहले "नवतरंग" का लोकार्पण डा. विजय मेहता, अथवा अन्य मुख़्य महमान के हाथों

संपूर्ण हुआ. उस संकलन में शामिल रचनाकार रहे श्रीमती अनंत कौर, डॉ. बबीता श्रीवास्तव , श्रीमती देवी नागरानी, श्रीमती बिंदु भट्ट , श्री रामबाबू गौतम, डॉ. रेखा रस्तोगी 'कल्प' , स्व. श्रीमती सीमा अरोरा , लेखक डॉ. हेमंत शर्मा. नवतंरंग के साहित्यकारों का सन्मान सुमन शाल और हिंदी दिवस प्रमाण पत्र से किया गया..



दुसरे सत्र में काव्य गोष्टी का संचालन किया डॉ.सरिता मेहता ने किया . इस सूत्र के कवि रहे डॉ. रानी नगिंदर, श्रीमती अनंत कौर, डॉ. बबीता श्रीवास्तव , श्रीमती देवी नागरानी, अनुराधा चंदर, वीरेन्द्र कुमार चौधरी, डॉ. रेखा रस्तोगी, रामबाबू गौतम, ललित अहुलवालिया, डॉ. हेमंत कुमार शर्मा, वी.के चौधरी, जिन्होंने अपने अपने गीत ग़ज़ल की सरिता से महफिल में रंग भरा.

अंत में अपने अध्यक्षता के दौर में डॉ. विजय मेहता ने अनेकों शेर' का पाठ करते हुए अच्छा समां बांधा . अन्य कई श्रोता मौजूद रहे जिनमें खास रहे अर्चना जी, अशोक ओझा जी, श्री देव मक्कड़, रश्मी मक्कड, राकेश जी अपने परिवार, साहित और सरिता मेहता ने इस आयोजन में सक्रिय भागीदारी के साथ इसे सफ़ल बनाया. रामबाबू गौतम ने सभी उपस्थित गण का अभार प्रकट किया. कार्यक्रम की समाप्ति भोजन के साथ हुई.

देवी नागरानी