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Friday, August 20, 2010

"लौ दर्दे दिल की" ग़ज़ल संग्रह का लोकार्पण



15 अगस्त 2010 को कुतुबनुमा एवं श्रुति संवाद समिति द्वारा आयोजित समारोह के अंतर्गत श्रीमती देवी नागरानी के ग़ज़ल संग्रह "लौ दर्दे दिल की" का लोकार्पण मुंबई में 15 अगस्त 2010, शाम 5 बजे, आर. डी. नेशनल कालेज के कॉन्फ्रेन्स हाल श्री आर.पी.शर्मा महर्षि की अध्यक्षता में पूर्ण भव्यता के साथ संपन्न हुआ। कार्य दो सत्रों में हुआ- पहला विमोचन, दूसरा काव्य गोष्टी।

समारोह की शुरूआत में मुख़्य महमानों ने दीप प्रज्वलित किया और श्री हरिशचंद्र ने सरस्वती वंदना की सुरमई प्रस्तुती की। अध्यक्षता की जिम्मेदारी श्री आर. पी शर्मा (पिंगलाचार्य) ने संभाली। मुख़्य महमान श्री नंदकिशोर नौटियाल (कार्याध्यक्ष-महाराष्ट्र राज्य हिंदी साहित्य अकादमी एवं संपादक नूतन सवेरा), श्री इब्रहीम अशक (प्रसिद्ध गीतकार) जो किसी कारण न आ सके, श्री जलीस शेरवानी (लोकप्रिय साहित्यकार), "कुतुबनुमा" की संपादिका डा॰ राजम नटराजन पिलै रहे। देवी नागरानी जी ने सभी मुख़्य महमानों को पुष्प देकर सन्मान किया, जिसमें शामिल थे डा॰ गिरिजाशंकर त्रिवेदी, संतोष श्रीवास्तव श्री और श्रीमती गोपीचाद चुघ।

आर पी शर्मा "महरिष" ने संग्रह का लोकार्पण किया और अपने वक्तव्य में यह ज़ाहिर किया कि साहित्यकार अपनी क़लम के माध्यम से लेखिनी द्वारा समाज को नई रोशनी देतने में सक्षम हैं। उसके पश्चात शास्त्रीय संगीतकार सुधीर मज़मूदार ने देवी जी की एक ग़ज़ल गाकर श्रोताओं को मुग्ध कर दिया...

"रहे जो ज़िंदगी भर साथ ऐसा हमसफ़र देना
मिले चाहत को चाहत वो दुआओं में असर देना"

कुतुबनुमा की संपादक डा॰ राजाम नटराजन पिल्लै ने अपने वक्तव्य में लेखन कला पर अपने विचार प्रकट करते हुए देवी जी के व्यक्तित्व व उनकी अनुभूतियों की शालीनता पर अपने विचार प्रस्तुत किये और उनके इस प्रयास को भी सराहते हुए रचनात्मक योगदान के लिये शुभकामनाएं पेश की। जलीस शेरवानी जनाब ने "लौ दर्दे दिल की" गज़लों के चंद पसंदीदा शेर सुनाकर ग़ज़ल की बारीकियों का विस्तार से उल्लेख भी किया और सिंधी समुदाय के योगदान का विवरण किया। नौटियाल जी ने आज़ादी के दिवस की शुभकामनायें देते हुए, देवी जी को इस संकलन के लिये बधाई व शुभकामनाएं दी।

देवी नागरानी ने अपनी बात रखते हुए सभी महमानों का धन्यवाद अता किया। आगे अपने विचार रखते हुए उन्होंने कहा "प्रवासी शब्द हमारी सोच में है. भारत के संस्कार, यहाँ की संस्कृति लेकर हम हिंदुस्तानी जहाँ भी जाते हैं वहीं एक मिनी भारत का निर्माण होता है, जहाँ खड़े होकर हम अपने वतन की भाषा बोलते है, आज़ादी के दिवस पर वहां भी हिंदोस्तान का झंडा फहराते हैं, जन गन मन गाते हैं। हम भले ही वतन से दूर रहते हैं पर वतन हमसे दूर नहीं। हम हिंदोस्ताँ की संतान है, देश के वासी हैं, प्रवासी नहीं।" और अपनी एक ग़ज़ल ला पाठ किया..

"पहचानता है यारो हमको जहान सारा
हिंदोस्ताँ के हम हैं, हिंदोस्ताँ हमारा."

पहले सत्र में संचालान का भार श्री अनंत श्रीमाली ने अपने ढंग से खूब निभाया। देवी जी ने पुष्प गुच्छ से उनका स्वागत करते हुए उनका धन्यवाद अता किया।

द्वितीय सत्र में संचालान की बागडौर अंजुमन संस्था के अध्यक्ष एवं प्रमुख शायर खन्ना मुज़फ्फ़रपुरी जी ने बड़ी ही रोचकतपूर्ण अंदाज़ से संभाली। और इस कार्य के और समारोह में वरिष्ट साहित्यकार व महमान थे- श्री सागर त्रिपाठी, श्री अरविंद राही, (अध्यक्ष‍ श्रुति संवाद साहित्य कला अकादमी), श्री गिरिजा शंजकर त्रिवेदी (नवनीत के पूर्व संपादक), श्री उमाकांत बाजपेयी, हरिराम चौधरी, राजश्री प्रोडक्शन के मालिक श्री राजकुमार बड़जातिया, संजीव निगम, श्री मुस्तकीम मक्की (हुदा टाइम्स के संपादक)व जाने माने उर्दू के शायर श्री उबेद आज़म जिन्होंने इस शेर को बधाई स्वरूप पेश किया. ...

अँधेरे ज़माने में बेइंतिहा है
बहुत काम आएगी लौ दर्दे-दिल की "..उब्बेद आज़म

सभी कवियों, कवयित्रियों ने अपनी अपनी रचनात्मक अभिव्यक्तियों से समां बांधे रखा। कविता पाठ की सरिता में शामिल रहे श्री सागार त्रिपाठी जिन्होंने अपने छंदों की सरिता की रौ में श्रोताओं को ख़ूब आनंद प्रदान किया। कड़ी से कड़ी जोड़ते रहे श्री अरविंद राही, लक्ष्मण दुबे, श्री मुरलीधर पांडेय, शढ़ीक अब्बासी, देवी नागरानी, श्री शिवदत्त अक्स, गीतकार कुमार शैलेंद्र, नंदकुमार व्यास, राजम पिल्लै, मरियम गज़ाला, रेखा किंगर, नीलिमा डुबे, काविता गुप्ता, श्री राम प्यारे रघुवंशी, संजीव निगम, संगीता सहजवाणी, शिवदत "अक्स", कपिल कुमार, सुष्मा सेनगुप्ता, और शील निगम, ज्यिति गजभिये।

श्रोताओं ने काव्य सुधा का पूर्ण आनंद लेते रहे श्री गिरीश जोशी, प्रमिला शर्मा, प्रो॰ लखबीर वर्मा, मेघा श्रीमाली, पं॰ महादेव मिश्रा, संतोष श्रीवास्तव, प्रमिला वर्मा, पंडित महादेव मिश्रा, रवि रश्मि अनुभूति, शिप्र वर्मा, राजेश विक्रांत, मुमताज़ खान, वी. न. ढोली, लक्ष्मी यादव, प्रकाश माखिजा, शकुंतला शर्मा, इकबाल मोम राजस्तानी, श्याम कुमार श्याम, सतीश शुक्ल, सिकंदर हयात खान, अमर ककड़, विभा पांडेय, शिल्पा सोनटके, अमर मंजाल, कान्ता, लक्ष्मी सिंह, रत्ना झा, गोपीचंद चुघ, आशा चुघ, संगीता सहजवानी, प्रो॰ शोभा बंभवानी, देवीदास व लता सजनानी, गिरीश जोशी. करनानी जी, कवि कुलवंत. त्रिलोचन अरोड़ा, नंदलाल थापर, श्रीमती किरण जोशी, सोफिया सिद्दिकी, रजनिश दुबे और सुनील शुक्ला।

Friday, June 25, 2010

कवयित्री शैलजा दुबे के सम्मान में काव्य-गोष्ठी

मुम्बई।

दिनांक 22। मंगलावार, जून 2010 को दिल्ली की वरिष्ठ रचनाकार व कवियित्री श्रीमती शैलजा दुबे जी के सन्मान में एक काव्य गोष्ठी का आयोजन मुंबई में श्रीमती देवी नागरानी जी के निवास स्थान पर किया गया, जिसमें शामिल रहे अनेक गीत ग़ज़ल के सृजनहार जिन्होंने महफ़िल को महकाने में कोई कसर नहीं छोड़ी। काव्य गोष्ठी में वरिष्ठ गज़लकार श्री आर. पी. शर्मा की अध्यक्षता और जाने माने शायर मा.ना. नरहरी जी के संचालन ने एक खुशनुमा समाँ बांध दिया।


बाएँ से दाएँ- आर ज्योति गजभिये, ताज आरसी, श्रीमती अरुणा गोस्वाम, शैलजा दूबे, श्री उदय दुबे, खन्ना जी, पीके सक्सेना, नरहरि साहब, देवी नागरानी, डॉ॰ राजम नटराजन पिल्लई

काव्य गोष्टी आरंभ करने के पूर्व श्रीमती देवी नागरानी ने पुष्प गुच्छ से अध्यक्ष श्री आर. पी. शर्मा महर्षि जी का सन्मान किया. साथ ही मुख़्य महमान शैलजा दुबे और उनके पति श्री उदय दुबे जी का पुष्प व शाल से सम्मान किया.

काव्य सुधा का आगाज़ किया शास्त्रीय संगीतकार श्री नीरज गोस्वामी ने। उन्होने अपनी मधुर आवाज़ से शायर रज़ा साहब की एक ग़ज़ल पेश की और ख़ूब वाह-वाह लूटी। सुधा की सरिता शाम ७ बजे से रात १० बजे तक निर्झर बहती रही जिसके प्रवाह में सभी का अनूठा योगदान रहा।


बाएँ से दाएँ- ज़फ़र रज़ा, ताज आरसी, मुरलीधर पांडेय, महिर साहब, शैलजा दुबे, आर पी शर्मा, उदय दुबे, खन्ना जी, एम एन नरहरि, नीरज गोस्वामी

सिलसिला आगे बढ़ता रहा और क़ाफिला बनता रहा, जब भागीदारी करते रहे मुंबई के जाने माने मौजूद रचनाकारः अंजुमन संस्था के अध्यक्ष एवं प्रमुख शायर खन्ना मुज़फ्फ़रपुरी, श्री रमांकांत शर्मा, डा॰ राजम नटराजन पिलै, त्रैमासिक पत्रिका "कुतुबनुमा" की संपादक जिन्होंने पहली बार अपनी एक रचना का पाठ किया. संयोग साहित्य के संपादक श्री मुरलीधर पांडेय ने शास्त्रीय गायन के साथ फ़िज़ा में शबनम घोल दी. नीरज गोस्वामी, शिवदत "अक्स", हस्तीमल हस्ती, कविता गुप्ता, प्रमिला शर्मा, ज़ाफर रज़ा, के. पी.सक्सेना "दूसरे", नईमा इम्तियाज़, सुमीता केशवा, रचना भंडारी, मरियम गज़ाला, डा. रीटा गौतम, श्री मा.ना. नरहरी, देवी नागरानी, ज्योती गजभिये, कपिल कुमार, मुहमुद्दिल माहिर. श्रीमती शैलजा दुबे ने अपनी सशक्त रचनाओं का पाठ कर के सभी रचनाकारों की दाद हासिल की. रत्ना झा, अस्मिता दुबे, ताज वारसी श्रोता बने गोष्टी का आनंद लेते रहे.


काव्यपाठ करते श्री अमर कक्कड़

अंत में अध्यक्ष श्री आर. पी. शर्मा ने कई गज़लों का पाठ भरपूर ताज़गी के साथ किया. अमर काकड़ "हुप्पा हुय्या" के प्रोड्यूसर भी इस संध्या का गौरव बढ़ाने के लिये मौजूद रहे.

काव्या गोष्टी सफलता पूर्ण संपूर्ण हुई. देवी नागरानी ने सभी कवि गण का तहे दिल से आभार व्यक्त किया. मधुर वातावरण में शाम कब रात हुई पता नहीं चला. भोजन के साथ समाप्ती हुई. जयहिंद

देवी नागरानी

Tuesday, April 27, 2010

प्रवासी साहित्यकारों के प्रतिनिधि डा॰ दाऊजी गुप्त मुंबई में



17 अप्रैल 2010 की बात है जब देवी नागरानी जी के मोबाइल फोन की घंटी बजी- "मैं दाऊजी गुप्त बोल रहा हूँ लखनऊ से, कल मुंबई पहुँच रहा हूँ।" देवी जी ने क्षण भर को सोचा और ख़ुशी से बोलीं- "आपका स्वागत है हमारी महानगरी में।" और बातों के सिलसिले में यह तय हुआ कि सुनने-सुनाने के सिलसिले को एक काव्य गोष्टी का स्वरूप दिया जाय ताकि कुछ मिलने-मिलाने का भी लाभ मिले।" देवी जी जानतीं हैं कि दाऊजी जो खुद बेहतरीन कवि हैं को कवितायें-ग़ज़लें सुनने का कितना शौक है। लेकिन इतने कम समय में कौन आ पायेगा उनके यहाँ ये सोचनीय प्रश्न था। उन्होंने कहा, "दाऊजी आपका स्वागत है लेकिन मुझे ये सब प्रबंध करने में समय लगेगा आप अगर अनुमति दें तो 20 अप्रैल 2010, मंगलवार को रख लें।" इस तरह मंगलवार की शाम पांच बजे देवी नागरानी जी के घर पर एक काव्य गोष्ठी रखने का कार्यक्रम पक्का हो गया।

जो लोग देवी जी को जानते हैं उन्हें उनकी कर्मठता और कार्य क्षमताओं का पूरा अंदाज़ा है, बहुत मुश्किल लगने वाले काम को वो आसानी से कर दिखाती हैं। एक बार वो जिस काम को करने का बीड़ा उठा लेती हैं उसके बाद उसे पूरा कर के ही सांस लेती हैं। अकेली होने के बावजूद वो कभी अपने आपको अकेला या असहाय नहीं पातीं। उनका ये गुण अनुकरणीय हैं। दाऊजी से बात करने के पश्चात उन्होंने बिना समय गंवाये मुंबई के काव्य रसिकों-शायरों की एक लिस्ट तैयार की और फिर उसके अनुसार एक एक को फोन करने में जुट गयीं। तीन घंटे की लगातार हो रही फोन कालों के बाद कई जाने-माने शायर मंगलवार की शाम उनके घर पर पधारे।

मंगलवार बीस अप्रैल को देवी जी घर सब से पहले पहुँचने वाले दाउजी गुप्त ही थे। पाँच बजे की तपती शाम में देवी जी के घर पहुँच कर दाउजी ने अपने काव्य प्रेम को दर्शा दिया। एक-एक कर काव्य प्रेमी आने लगे। पिंगलाचार्य श्री महर्षि जी, जानी मानी कवयित्री माया गोविन्द और उनके अद्भुत शायर पति राम गोविन्द, हरदिल अज़ीज़ शायर जनाब खन्ना मुज्ज़फ़री, मधुर कविताओं के रचयिता कुमार शैलेन्द्र, 'कुतुबनुमा' पत्रिका के माध्यम से हिंदी की पताका फहराने वाली संपादक डा. राजम नटराजन पिल्ले, अपनी ग़ज़लों से सबके दिलों पर छाने वाले शायर जनाब सागर त्रिपाठी, सौम्य प्रकृति के अनूठे शायर जनाब हस्ती मल हस्ती, 'क़ुतुबनुमा' के संपादक मंडल और अनेकों संस्थाओं से जुड़े श्री अलोक भट्टाचार्य, नारी शक्ति की प्रतीक कवयित्री नीलिमा दुबे, प्रो॰रत्ना झा, खोपोली के शायर नीरज गोस्वामी, रास बिहारी पाण्डेय, आशु कवि श्यामकुमार श्याम, अपनी विशिष्ट शैली से चमत्कृत करने वाले कवि, शायर श्री लक्षमण डुबे, आर. डी. नैशनल कालेज की हिंदी विभाग की अध्यक्षा डा॰ संगीता सहजवानी और जाने माने कवि, शायर, ओर मंच संचालक देव मणि पांडेय मौजूद थे, जिन्होंने सहर्ष कार्यक्रम के संचालन की जिम्मेवारी भी संभाली। शायर जनाब खन्ना मुज्ज़फ़री अध्यक्ष के पद पर आसीन हुए, श्री महरिष जी एवं दाऊजी गुप्त, माया गोविंद मुख्य महमान रहे।

गोष्ठी के पूर्व देवमणि पांडेय ने दाऊजी गुप्त परिचय दिया और फिर गोष्टी में आए सभी कावियों का उनसे परिचय करवाया। दाऊजी गुप्त अंतरराष्ट्रीय अखिल विश्व समिति के अध्यक्ष हैं और न्यूयार्क से निकलती सौरभ पत्रिका का प्रधान संपादक भी।





शाम छः बजे से शुरू हुई ये यादगार काव्य रस धारा सुनने-सुनाने वालों को दो घंटों तक लगातार भिगोती रही। दो घंटे कब निकल गए पता ही नहीं चला। बोझिल पलों को देवमणि जी ने अपने कुशल संचालन से रोचक बना दिया। सभी कवियों, कवयित्रियों ने अपनी अपनी रच्नात्मक अभिव्यक्तियों से समा बांधे रखा। धन्यवाद ज्ञापन से पूर्व पिंगलाचार्य श्री महर्षि जी ने श्री दाउजी गुप्त का सम्मान पुष्प गुच्छ और शाल ओढ़ा कर किया, इसके बाद देवी नागरानी जी ने सुश्री माया गोविन्द जी का सम्मान पुष्प गुच्छ और शाल ओढा कर किया। ये भी एक सुखद संयोग था की काव्य रसिक प्रो॰ लखबीर जी, जो राजम जी की शिष्य रह चुकी हैं ने उसी दिन अपना शोध कार्य पूरा कर डाक्टरेट की डिग्री हासिल की थी। श्री दाऊजी गुप्त ने सबकी ओर से उन्हें शुभकामनाओं के साथ पुष्प गुच्छ भेंट किये।
सफल काव्यगोष्ठी के लिये कविगण के सफल प्रयासों को सराहते हुए देवी जी ने सबका आभार प्रकट किया। कार्यक्रम के अंत में मेहमानों ने स्वादिष्ट व्यंजनों से सजे रात्रि भोज का आनंद लिया। ये काव्य गोष्ठी बरसों तक इसमें शामिल मेहमानों के दिलों में याद बनके महका करेगी।

प्रस्तुतकर्ताः नीरज गोस्वामी

Saturday, April 3, 2010

प्रवासी कवयित्रियों अंजना संधीर और रेखा मैत्र के सम्मान में काव्य-गोष्ठी

दिनांक 27, मार्च 2010 मुंबई में प्रवासी कवयित्रियों अंजना संधीर और रेखा मैत्र के सम्मान में काव्य-गोष्ठी का आयोजन हिन्दी-उर्दू-सिंधी की लोकप्रिय ग़ज़लकारा देवी नागरानी के निवास स्थान पर आयोजन किया गया। काव्य गोष्ठी में वरिष्ठ गज़लकार श्री आर. पी. शर्मा की अध्यक्षता और संपादक-कवि-मंच संचालक अरविंद राही के संचालन ने एक खुशनुमा समाँ बांध दिया।
काव्य गोष्टी आरंभ करने के पूर्व देवी नागरानी ने पुष्प गुच्छ से महरिष जी का सम्मान किया। फिर देवमणि पांडेय ने दोनों कवयित्रियों का परिचय दिया। आगाज़ी शुरूआत देवमणी पांडेय जी ने अंजना संधीर और रेखा जी के परिचय के साथ की और उन्होंने अंजना जी के कार्य विस्तार पर रोशनी डाली। अंजना जी अब देश-विदेश के बीच की स्थाई पुल बना रही हैं। अंजना जी एक ऐसी विभूति हैं जिन्होंने साहित्य के प्रचार में, संस्कृति के प्रचार में अपना योगदान दिया है। रेखा जी भी निरंतर साहित्य सृजन का कार्य करती आ रही हैं।
हिंदुस्तानी प्रचार सभा की कार्यकर्ता डा. सुशीला गुप्ता जी ने अंजना के प्रति अपनी भावनाएँ व्यक्त करते हुए उनके हिंदी भाषा के प्रति साराहनीय क़दम के उल्लेख किया और उनके प्रयासों की साराहना की।



काव्य सुधा रस के पहले अंजना संधीर, महरिष, अरविंद राही, शिवानी जोशी, देवी नागरानी, एवं संतोष श्रीवास्तव के हाथों डा. राजाम पिल्लै नटराजन की संपादित त्रेमासिक पत्रिका "कुतुबनुमा" के 9वें अंक का विमोचन हुआ। इसके बाद महरिष जी ने रेखा जी का और अंजना जी का देवी नागरानी ने सुमन शाल से सम्मान किया ।



काव्य सुधा की सरिता शाम भर बहती रही जिसमें प्रवाह की पहली अंजुली प्रदान की सुप्रसिद्ध कथाकार-कवयित्री संतोष श्रीवास्तव ने। उन्होंने जब यह कविता पढ़ी तो सभी उपस्थित कवि वाह-वाह कह उठे। "जिन की गंध बटोर सकूँ मैं ऐसी कुछ कलियां दे देना" इस पंक्ति से जो ध्वनि तरंगित होती है, वह प्रवासी कवयित्रियों अंजना संधीर और रेखा मैत्र का प्रतिनिधित्व पूर्ण रूप से करती जान पड़ती हैं। सिलसिले को आगे बढ़ाया देवमणी पांडेय ने (एक समंदर पी चुकूँ और तिश्नगी बाकी रहे), रेखा मैत्र (उंगलियों की फितरत और चाबी वाली गुड़िया), ज़ाफर रज़ा( आज शाम के चेहरे पे उदासी क्यों है), डा. सुशीला गुप्ता( बूंद), अंजना संधीर(निकले गुलशन से तो गुलशन को बहुत याद किया),



खन्ना मुज़फ्फ़रपुरी( दोनों कवयित्रियों पर कुँडली और ग़ज़ल), कुमार शैलेन्द्र (दुनिया की बातें बहुत हुईं अब घर आंगन की बात करो ), देवी नागरानी ( छू गई मुझको ये हवा जैसे), अरविंद शर्मा "राही"(कुछ खट्टी मीट्ठी यादें है कुछ बीती बातों की), ज्योती गजभिये(सब कुछ बदल देने का हौसला लिये बैठी हूँ), सुषमा सेनगुप्ता ( माली), कुलवंत सिंह (शहीद भगतसिंह), गिरीश जोशी (प्यार मौजों की रवानी सा कभी लगता है), माणिक मुंडे (जाग जाने के लिये सपने दिखाता हूं मैं), कपिल कुमार (कुंडलियों के अनेक रंग), मुहमुद्दिल माहिर ( ऐसा नहीं है कि सारे के सारे चले गए), अंत में अध्यक्ष श्री आर. पी. शर्मा ने कई गज़लों का पाठ भरपूर ताज़गी के साथ किया। शिवानी जोशी, और चंद्रकांत जोशी भी इस संध्या का गौरव बढ़ाने के लिये मौजूद रहे।

काव्या गोष्टी सफलता पूर्वक संपूर्ण हुई। देवी नागरानी ने सभी कवि गण का तहे दिल से आभार व्यक्त किया। मधुर वातावरण में जलपान के साथ शाम ढली।

रिपोर्टः कपिल कुमार और देवी नागरानी

Monday, March 22, 2010

सिन्धी नव वर्ष "चेटी चाँद" के अवसर पर फिल्म "जय झूलेलाल" का उद्घाटन उत्सव एवं देवी नागरानी के सिन्धी काव्य संग्रह "मैं सिंध की पैदाइश हूँ " का लोकार्पण


अजीत मनयाल, रमेश करनानी, कुमार खिनानी, देवीदास सजनानी, देवी नागरानी और मोहन बेल्लानी

दिनांक 13 मार्च, 2010 रविवार शाम 5‍ः30 बजे आर.डी. नेशनल कॉलेज के ऑडिटोरियम में लायन क्लब ऑफ़ यूनिवर्सिटी कैम्पस एवं लायन क्लब ऑफ़ बांद्रा के लायंस श्री अमर मंजाल एवं देवीदास सजनानी के सौजन्य से सिन्धी फिल्म "जय झूलेलाल" दर्शायी गई, वहाँ फिल्म के मुख्य कलाकार श्री मोहनलाल बेल्लानी(झूलेलाल), कुमार खिलनानी(मिर्ख बादशाह), एवं रमेश करनानी (झूलेलाल के पिता) प्रमुख महमान रहे।
कार्यक्रम की शुरूआत फिल्म से हुई और इंटरवल के पश्चात सभी मेहमानों का शाल सुमन से सम्मान हुआ और श्रीमती देवी नागरानी के कराची से प्रकाशित काव्य-संग्रह "सिंध की मैं पैदाइश हूँ" का लोकार्पण मुख्य मेहमानों के हाथों सम्पन्न हुआ। टी.वी सिन्धुदर्शन चैनेल के अधिकारी श्री मुकेश आडवानी उस कार्यं को कवर करने के लिए मौजूद रहे। सिन्धी सेवी श्री निर्मल मीरचंदानी एवं उनकी पत्नी भी वहां सक्रिय रूप से मौजूद रहे।
आगाज़ी कार्यों की सफलता के लिए अंत में श्री अजित मंजाल ने सभी का धन्यवाद अता किया। देखरेख का कार्य निपुणता से संभाला श्री सुनील खोसला जी ने। मौजूद श्रोताओं में लता सजनानी, वर्षा सजनानी, कल्पना, सावित्री और अनेक सिन्धी अदब के लोगों का नाम प्रमुख है।

प्रस्तुति- देवी नागरानी

Saturday, February 27, 2010

हिंदी दिवस की महत्ता में एक नया मोर पंख - "नवतरंग" का लोकार्पण एवं काव्यगोष्ठी

दिनांक रविवार, २१ फरवरी २०१० अंतराष्ट्रीय हिंदीं समिति, न्यू जर्सी शाखा के अध्यक्ष श्री रामबाबू गौतम जी द्वारा संपादित प्रवासी साहित्यकारों का संग्रह "नवतरंग" साहित्य के कैनवास पर एक नया अयाम प्रदान करता रहा. अंतर्राष्ट्रीय. हिन्दी दिवस के उपलक्ष में एक इन्द्र-धनुषी कवि सम्मलेन का सफ़ल आयोजन हुआ जिसमें मुख्य अतिथि सम्माननीय डॉ. विजय कुमार मेहता, न्यूयार्क (अखिल विश्व समिति) ने अध्यक्षता की. अन्य मुख्य महमान रहे, श्री देवेन्द्र सिंह, रचयिता सिंह, एस.मलिक, श्री अनूप भार्गव, श्री शेरबहादुर सिंह एवं डा. रेखा रस्तोगी.



डॉ. मेहता तथा श्री रामबाबू गौतम ने माँ सरस्वती के चरणों में दीप प्रज्ज्वलित करके इस आयोजन की शुरूवात स्वागत स्वरूप यह कहते हुए किया -

"निज भाषा उन्नति अहे, करता हूँ प्रणाम
न्यू जर्सी में सरस्वती बढी, ले कविता की शाम
कोटि- कोटि हिंदी अहे, दे प्रवासी सम्मान,
रूख- रूख उभरी यहाँ, कर कवियों का सम्मान

इसके बाद अमेरिका में जन्में दो भारतीय बच्चे प्राची व् उसके भाई सूर्य ने अपने साज़ और आवाज़ के संगम से सुर लय ताल में मधुर राष्ट्रीय गान "वन्दे मातरम" गाकर श्रोताओं का मन मोह लिया.

शुरुवाती वक्तव्य में श्री शेरबहादुर सिंह जी.. अंतराष्ट्रीय हिंदीं समिति.के पूर्व अध्यक्ष... ने कहा कि 'यह एक स्वर्ण युग है हिंदी भाषा के लिए. इतने हिंदी सेवी निष्टा से इस प्रचार प्रसार के आन्दोलन में जुटे हुए हैं, अब हिंदी के प्रवाह को कोई नहीं रोक सकता. अब अपने संगठित प्रयासों से भाषा जी जड़ों को और मज़बूत करना है.



हिंदी USA के संस्थापक श्री देवेन्द्र सिंह एवं रचिता सिंह भी इस अवसर पर मौजूद रहे. अपने विचारों को व्यक्त करते हुए रचयिता जी ने कहा "जब तक हम मिलकर हिंदी भाषा के लिए काम नहीं करेंगे, तब तक आने वाली पीढ़ियों को उनकी विरासत देने का प्रयास सफल नहीं होगा" श्री देवेन्द्र सिंह ने हिंदी के कार्यों का विवरण देते हुए उनमें और सक्रियता की आशा की. इससे साफ़ ज़ाहिर होता है की वे हिंदी को प्रवास में स्थापित करने के स्वप्न को लेकर कितने सक्रिय रूप से जुटे हुए हैं. जोश भरी इस रचना से उन्होंने श्रोताओं, कविओं में जोश का संचार किया...

हिन्दू जागो हिंदी सीखो हिन्दोस्तान बचाना है/

भारत मान की आन बाण का डंका हमें बजाना है.

भावों के आदान प्रदान के पश्चात् काव्य गोष्टी प्रारंभ हुई. कवि- सम्मेलन के प्रथम सत्र के शामिल कवि इस प्रकार थे -



श्री अशोक सिंह, डॉ. सरिता मेहता, श्रीमती पूर्णिमा देसाई, श्री हिमांशु ओम पाठक, श्रीमती शशी पाधा, श्रीमती सुषमा मल्होत्रा. राम बाबू गौतम जी के संचालन में पाठ का आगाज़ किया श्री अशोक व्यास जी ने अपने वतन के प्रति एक निष्टावान पंक्तियों से " मेरा भारत महान" और पाठ करने वाले वरिष्ठ रचनाकार, शायर, अपनी अपनी अनुभूतियों से महफ़िल को सजीव व् रुचिकर करने में सफल रहे. डा. सरिता मेहता ने इस दौर में बचपन की हंसी की कमी की ओर विशेष ध्यानर देते हुए सुंदर रचना से माहौल को रौनक प्रदान की. कवियित्री शशि पाधा एक सैनिक की पत्नि है, जिन्होंने एक मार्मिक, हृदयस्पर्शी रचना उन सैनिकों की ओर से पढ़ी जो जी-जान से भारत माँ की शान पर अपनी निष्टा के सुमन चढ़ा कर वहीँ सरहदों पर शहादत का परचम फहरा गए. अंत की ओर आते आते सुश्री सुषमा मल्होत्रा ने इन्द्रधनुषी रचना से रंगों के बिम्ब खींचते हुए होली के त्यौहार को सजीव व् सकारात्मक स्वरुप प्रदान किया.



दूसरे सत्र के पहले "नवतरंग" का लोकार्पण डा. विजय मेहता, अथवा अन्य मुख़्य महमान के हाथों

संपूर्ण हुआ. उस संकलन में शामिल रचनाकार रहे श्रीमती अनंत कौर, डॉ. बबीता श्रीवास्तव , श्रीमती देवी नागरानी, श्रीमती बिंदु भट्ट , श्री रामबाबू गौतम, डॉ. रेखा रस्तोगी 'कल्प' , स्व. श्रीमती सीमा अरोरा , लेखक डॉ. हेमंत शर्मा. नवतंरंग के साहित्यकारों का सन्मान सुमन शाल और हिंदी दिवस प्रमाण पत्र से किया गया..



दुसरे सत्र में काव्य गोष्टी का संचालन किया डॉ.सरिता मेहता ने किया . इस सूत्र के कवि रहे डॉ. रानी नगिंदर, श्रीमती अनंत कौर, डॉ. बबीता श्रीवास्तव , श्रीमती देवी नागरानी, अनुराधा चंदर, वीरेन्द्र कुमार चौधरी, डॉ. रेखा रस्तोगी, रामबाबू गौतम, ललित अहुलवालिया, डॉ. हेमंत कुमार शर्मा, वी.के चौधरी, जिन्होंने अपने अपने गीत ग़ज़ल की सरिता से महफिल में रंग भरा.

अंत में अपने अध्यक्षता के दौर में डॉ. विजय मेहता ने अनेकों शेर' का पाठ करते हुए अच्छा समां बांधा . अन्य कई श्रोता मौजूद रहे जिनमें खास रहे अर्चना जी, अशोक ओझा जी, श्री देव मक्कड़, रश्मी मक्कड, राकेश जी अपने परिवार, साहित और सरिता मेहता ने इस आयोजन में सक्रिय भागीदारी के साथ इसे सफ़ल बनाया. रामबाबू गौतम ने सभी उपस्थित गण का अभार प्रकट किया. कार्यक्रम की समाप्ति भोजन के साथ हुई.

देवी नागरानी

Friday, January 22, 2010

हिंदी यू.एस.ए की ओर से कविता पाठ प्रतियोगिता



दिनांक शनिवार, १६ जनवरी २०१० Hindi USA जिसके संस्थापक हैं श्री देवेन्द्र सिंह एवं रचिता सिंह, उसकी अनेक शाखाओं से अपने आप में सर्वोतम काम करती शाखा जिसके संचालक श्री राज मित्तल हैं "एडिसन हिन्दी पाठशाला" के छात्रों की कविता पाठ प्रतियोगिता सफलतापूर्ण संपन हुई जिसमें एडिसन हिदी पाठशाला के १६० छात्र / छात्राओं ने जो अमेरिका में ही जन्मे तथा पले हैं उन्होंने भाग लिया। अधिकांश छात्र ६ वर्ष से १२ वर्ष की आयु के बीच के हैं। कविता पाठ प्रतियोगिता २ समूहों में विभाजित की गयी है. प्रत्येक समूह में तीन निर्णायकों की एक मंडली रही. इस विभाग के सेनानी संचालक है राज मित्तल, मानक काबरा, अजय कुमार, और गोपाल चतुर्वेदी।

कविता पाठ प्रतियोगिता २ समूहों में विभाजित की गयी। प्रत्येक समूह में तीन निर्णायकों की एक मंडली रही। १२:०० से २:०० बजे निर्णय करने वाले थे-



पहले समूह में रहे श्री रामबाबू गौतम, सुश्री देवी नागरानी जी, डा. श्री उमेश शुक्ला और दूसरे समूह में २.०० से ४.०० तक रहे डा. श्री हिमांशु ओम पाठक , डा. श्री नरेश शर्मा, डा. श्री सुशील श्रीवास्तव.बच्चों के मापदंड की श्रेणियां थीं उच्चारण , आत्मविश्वास, शैली, अभिव्यक्ति, स्मरण।

पहले समूह के तीन सत्र रहे जिन में अलग अलग उम्र के हिसाब से बच्चों को मौका दिया गया था। और उन तीनों सत्रों के संचालन का भार संभाला शशि शर्मा, प्रतिभा जी, और अंजलि मलिक ने। बच्चों ने अनेकों कविताएं पढ़ीं जिनमें कुछ महादेवी वर्मा की और श्याम सुंदर अग्रवाल जी की भी शामिल थी, जिनके उन्वान रहे कोयल, चंदामामा, कछुआ, हाथी राजा, घड़ी, सारी दुनिया गोल है, तोता, मेरा घर, दिवाली, सारे जहाँ से अच्छा। कई कविताएँ सुनी हुई फिर से बच्चों के मुख से सुनने में भली लगी।

कविता पाठ से झलक रही थी हिंदी सिखाने वाले निस्वार्थ भावी हिंदी सेवक-सेविकाएँ की निष्ठा जो शुक्रवार के दिन इन कक्षाओं की बागडोर संभल लेते हैं।

अंत की ओर आते मन को छूने वाली कविता का पाठ किया कुमारी सुमेघा दुबे ने अपने दादा जी श्री सूर्यदत्त दुबे जी ( उनका दुखद निधन १५, जनवरी २०१० को हुआ) की एक रचना उन्हें ही श्रधांजलि स्वरूप अर्पित करते हुए पढ़ी

दीनानाथ दया निधि
दीजे कोई ऐसी संधि

यह प्रतियोगता सिर्फ बच्चों की ही नहीं थी, इस सफ़लता के भागीदार रहे उनके माता-पिता, उनके शिक्षक जिन्होंने इन बच्चों को वतन की मिट्टी और उसके परिवेश के साथ जोड़ने में सहयोगी और सहभागी बने हैं. हिंदी भाषा के माध्यम से ये बच्चे अपने मनोबल को बढ़ाते हुए अपनी संस्कृति के साथ परिचित हो पाए हैं जिसका श्रेय इन हिंदी सेवकों को जाता है जिन्होंने अपने कन्धों पर मातृभाषा को यहाँ इस परिवेश में स्थापित करने की ठान ली है। इस समारोह के सफल कार्यकर्ता रहे : राज मित्तल, मानक काबरा, अजय कुमार, गोपाल चतुर्वेदी, अर्चना कुमार, अरुण कुमार , सीमा गुप्ता, शिव एवं सुधा अग्रवाल, सुशील एवं वन्दना अग्रवाल, दीपक एवं नूतन लाल, तथा अन्य तरुण कार्यकर्ता, अमर्पित अध्यापक एवं अभिभावक। ऐसे देश के सिपाहियों को मेरी शुभकामनयें और हार्दिक बधाई . जय हिंद




प्रस्तुतकर्ताः
देवी नागरानी, न्यू जर्सी, dnangrani@gmail.com

Monday, November 16, 2009

सिन्धी असोसिएशन ऑफ़ शिकागो द्वारा मनाया गया गुरु नानक देव जी का जन्मदिन



14 नवम्बर, शिकागो के मदीना (Madina) उपनगर के "ॐ शांति मंदिर" में सिन्धी असोसिएशन ऑफ़ शिकागो की तरफ से श्री गुरु नानक देव जी का जन्म दिन धूमधाम से मनाया गया, जिसमें लगभग 300 के करीब लोगों की भागीदारी रही। शाम के 6.00 बजे से रात के 10.00 बजे तक कार्य की समाप्ति हुई।

शुरूआत का पहला चरण गुरुबानी व अन्य भजन कीर्तन से हुआ जिसमें पूरी संगत तन्मय होकर साथ देती रही। 8.00 बजे गुरु दर्शन की रस्म की अदायगी हुई और शंख व फूलों की बरखा हुई। अंत में आनंद साहब का पाठ हुआ और फिर आरती की रस्म पूरी हुई। गुरु ग्रन्थ से वचन लेकर समारोह की समाप्ति की गयी।

अंत में लंगर का आरंभ हुआ और सभी लोग एल दूजे से मिलते मिलाते हुए प्रसाद ग्रहण करते रहे। व्यवस्था असोसिएशन के प्रेजिडेंट श्री हरेश हर्पलानी जी की देख-रेख में की गयी जिसकी बागडोर आज की नव पीढ़ी अपने साथ से बखूबी पूर्ण कर पाई।


पूरी रस्मों के तहद देश से दूर लोग अपने धर्म और संस्कृति के प्रति भारतीय प्रवासी आज भी उतने ही जागरूक हैं जितने की हिंदुस्तान में। इन भारतीय संस्कारों की बुलंदिओं का चराग़ जहाँ भी रौशन होगा वह स्थान, वह धरती हमारे देश की धरती से किसी भी प्रकार भी कम न होगी। जहाँ-जहाँ एक भी हिन्दोस्तानी का दिल धड़केगा, सच में वहीँ वहीँ देश की सौंधी मिट्टी की महक फिजाओं में पाई जायेगी।

प्रेषक-
देवी नागरानी
न्यू जर्सी

Tuesday, June 23, 2009

भारतीय विद्या भवन के सभागार में हिंदी भाषा की धाराओं का संगम



न्यूयॉर्क।

डॉ. कृष्ण कुमार एवं श्री अनूप भार्गव के सम्मिलित प्रयास से २९ मई, २००९ रविवार की सांध्यवेला में न्यूयॉर्क के भारतीय विद्या भवन में अमेरिका की हिंदी विकास मंच और इंग्लैंड की गीतांजलि नामक संस्थाओं के सौजन्य से एक अद्वितीय काव्य-संध्या का आयोजन सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। यह कार्यक्रम इस दृष्टिकोण से अद्वितीय था कि यह विश्व के एक भूभाग (इंग्लैंड) के हिन्दी प्रेमियों द्वारा दूसरे भूभाग (उत्तरी अमरीका) की सद्‍भावना यात्रा का एक महत्वपूर्ण अंग था।

भारतीय विद्या भवन के श्री दीपक दवे ने सभागार में उपस्थित व्यक्तियों का स्वागत करते हुए डॉ० जयरामन की ओर से कार्यक्रम के लिये शुभकामनाएं दीं और भविष्य में भी होने वाले ऐसे आयोजनों में भवन की ओर से पूर्ण सहयोग का आश्वासन दिया।

इंग्लैंड से आये इस सद्‌भावना-मण्डल में डॉ० कृष्ण कुमार के नेतृत्व में आये अन्य कवि-कवियित्रियों के नाम इस प्रकार हैं: श्री परवेज़ मुज़फ्फर, डॉ. कृष्ण कन्हैया, श्रीमती नीना पॉल, श्रीमती अरुण सब्बरवाल, श्री नरेन्द्र ग्रोवर, श्रीमती जय वर्मा, श्रीमती स्वर्ण तलवाड़। डॉ० कृष्ण कुमार ने अपने दल के सदस्यों का संक्षिप्त परिचय दिया और गीतांजलि संस्था के विषय में भी जानकारी दी। उन्होंने बताया कि गीतांजलि एक बहुभाषी साहित्यिक समुदाय है जो मुख्य रूप से बरमिंघम, यू.के., में स्थित है पर अब इसकी शाखायें अन्य शहरों में भी शुरू हो रही हैं। यह संस्था अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर साहित्य के विकास की दिशा में निष्ठा के साथ सेवा करती आई है। हिंदी की सेवा करने का महत्वपूर्ण कार्य साहित्य लेखन के माध्यम से हो रहा है। प्रवासी भारतीय अनेक हिंदी कार्यक्रमों की रूप-रेखा रचते चले आ रहे हैं। उनका अपने देश की मिट्‍टी से प्रेम और हिंदी भाषा व संस्कृति से लगाव प्रशंसनीय है।

डॉ० कृष्ण कुमार ने अपना विश्वास प्रकट करते हुए कहा कि "भारत से दूर रहकर अपनी भाषा को कैसे जीवित रखा जाये, इस प्रयास में आने वाली कठिनाइयों से कैसे जूझा जाय, और संभावनाओं को कैसे साकार किया जाय इस दिशा में प्रवासी भारतीय साहित्यकारों का योगदान सराहनीय है। यही वे भारतीय है जो भारतीयों में बची भारतीयता को बचाने की कोशिश कर रहे हैं"। उन्होंने यह चिंता व्यक्त की कि "हम भारतीय अपनी छोटी समझ के कारण खुद को छोटे-छोटे भागों में बाँट रहे हैं और केवल एकता का नारा पीट रहे हैं"। उनका कहना है कि विचार व्यक्ति से बढ़ता है। गाँधी एक विचार लेकर चले और आज़ादी हासिल की। एक व्यक्ति दीवाली में एक दीपक घर में जलाये, तो घर प्रज्वलित होता है।

हिंदी विकास मंच की ओर से श्री अनूप भार्गव ने समयाभाव के कारण संक्षेप में ही ई‌‌-कविता याहू ग्रुप के सफल प्रयोग के विषय में बताया। अन्तर्जाल पर जाना-माना यह मंच कई वर्षों से हिंदी साहित्य, विशेषकर कविता के क्षेत्र में, प्रगतिशील है और इसके सदस्यों की संख्या लगभग ६०० हो चुकी है। सदस्य विश्व के कोने-कोने से इस गुट से जुड़े हैं। हिन्दी विकास मंच की परिकल्पना हिन्दी के विकास में योगदान दे रही संस्थाओं को एक सूत्र में बाँधने के विचार से की गई है। इंग्लैंड से कवियों को उत्तरी अमेरिका की यात्रा करने का निमंत्रण इसी विचार की पहली कड़ी है। अनूप जी ने बताया कि न्यूयॉर्क के अतिरिक्त कनाडा के टोरंटो शहर में होने वाले कार्यक्रम में भी कवियों का यह दल भाग लेगा।

विचारों के आदान प्रदान के उपरान्त डॉ० कृष्ण कुमार की अध्यक्षता में काव्य पाठ का आरम्भ हुआ। श्रीमती स्वर्ण तलवाड़ ने अपने साथियों का परिचय करवाते हुए उन्हें मंच पर आमांत्रित करने का संचालन-भार बखूबी निभाया। उनके साथ आए हुए यू.के. के सभी साथियों ने अपनी रचनाएं प्रस्तुत कीं। बीच-बीच में श्री अनूप भार्गव ने न्यूयॉर्क, न्यू जर्सी, और फिलाडेल्फिया में रहने वाले स्थानीय कवियों को भी संक्षिप्त परिचय के साथ काव्य पाठ के लिये आमंत्रित किया। इन कवियों में थे डा॰ सरिता मेहता, श्री घनश्याम चंद्र गुप्त, श्रीमती बिन्देश्वरी अग्रवाल, श्री राम गौतम, डा॰ अंजना संधीर, देवी नागरानी, और स्वयं श्री अनूप भार्गव। अंत में अध्यक्ष डॉ० कृष्ण कुमार ने अपनी रचनाओं और उत्कीर्ण विचारों से इस साहित्य सरिता को समेटा। अंतर्राष्ट्रीय हिंदी समिति की न्यूयॉर्क शाखा के पूर्वाध्यक्ष मेजर शेर बहादुर सिंह भी श्रोताओं में उपस्थित रहे।

कार्यक्रम का समापन भारतीय विद्या भवन के श्री दीपक दवे ने आगन्तुक कवियों और श्रोताओं को धन्यवाद देते हुए किया। श्री दवे ने कहा कि पूरा कार्यक्रम उनके लिये एक सुखद अनुभव था। इस प्रकार एक सफल काव्य-संध्या सम्पन्न हुई। सभागार में श्रोताओं की उपस्थिति शोचनीय रूप से कम रहने के विषय में कई लोग असंतुष्ट दिखाई-सुनाई दिये। इस विषय में विचार और प्रयत्न करने की आवश्यकता है।

प्रस्तुति- देवी नागरानी

Saturday, June 13, 2009

न्यूयॉर्क की एक शाम अंजना संधीर के नाम

न्यूयॉर्क । संयुक्त राज्य अमेरिका

दिनांक 7, जून 2009 को पूर्णमासी के दिन श्रीमती पूर्णिमा देसाई के शिक्षायतन के देवालय में डॉ अंजना संधीर के सम्मान में एक काव्य गोष्ठी का आयोजन सफलता पूर्ण संपूर्ण हुआ। वातावरण की पवित्रता में माँ की स्तुति गायन वन्दनीय रहा।

आगाज़ी शब्दों में पूर्णिमा देसाई शिक्षायतन की संस्थापिका एवं निर्देशिका ने ये कहते हुए "मैं एक ऐसी विभूति को बुला रही हूँ जिन्होंने साहित्य के प्रचार में, संस्कृति के प्रचार में अपना योगदान दिया है और वह है डा. अंजना संधीर, जिन्होंने मंच की शान बढाते हुए दीप प्रज्वलित किया। शिक्षायतन संस्था के संगीत विभाग से जुड़े सुर-सागर के माहिर पंडित कमल मिश्रा जी ने माता के चरणों में गुलाब के फूलों को अर्पित करते हुए सरस्वती वंदना की।

अपने भावों को व्यक्त करते हुए अंजना जी ने कहा " मै यहीं हूँ, यहीं थी और यहाँ से कहीं नहीं गयी" और अपनी व्याख्यान में कुछ न कहते हुए उन्होने यू. के. से आए श्री कृष्ण कुमार जो को सादर आमंत्रित किया, जिन्होंने अपने विचार प्रस्तुत करने से पहले पूर्णिमा जी को बधाई की पात्र मानते हुए अंजना के लिये कहा कि " अंजना जी का काम बोलता है" यह हर नारी जाति के लिए गर्व की बात रही जो "प्रवासिनी के बोल" और "प्रवासी आवाज़" के मंच पर अपने आपको स्थापित कर पाई है। अंजना जी का कहना और मानना है कि अमेरिका के हर शहर में उसका एक घर है और सीमाओं से परे उनके रिश्ते हैं जिनकी कोई सरहद नहीं बाँध पाएगी।

भावों के आदान-प्रदान के पश्चात काव्य गोष्ठी का आरंभ हुआ, जिसका स्वरूप अंतर्राष्ट्रीय गोष्ठी से कम न था। रचना-पाठ का शुरूआत डा. दाऊजी गुप्त ने किया, जो लखनऊ से पधारे थे। यू. के. से आये डा. कृष्ण कुमार ने अपनी रचना पाठ के बाद अपने साथी साहित्यकारों और कविगणों को आवाज़ दी जिनमें वहां मौजूद थे श्री कृष्ण कन्हैया, श्री नरेन्द्र कोहली, जय वर्मा, श्रीमती स्वर्ण तलवाड़। उसके ही पश्चात अनूप और रजनी भार्गव ने अपनी नन्हीं नन्हीं कविताओं के कपोलों से ज़िन्दगी के अंकुरित नए रंग माहौल में भर दिए। टोरंटो से श्री गोपाल बगेल जी ने सुरमई धुन में अपनी रचना सुनाई। फिर मंच को थामा न्यू यार्क तथा न्यू जर्सी के कविओं में जिनमें शामिल रही श्री अशोक व्यास, श्री ललित अहलुवालिया, मंजू राई, बिन्देश्वरी अग्रवाल, अंजना संधीर, पूर्णिमा देसाई, गौतमजी, पुष्पा मल्होत्रा, नीना वाही, अनुराधा चंदर, डा. अनिल प्रभा, गिरीश वैद्य, देवी नागरानी, लखनऊ से आई श्रीमती शशि तिवारी और उनकी सुपुत्री शिवरंजनी। श्रोताओं में रहे श्री कथूरिया जी, परवीन शाहीन, रेनू नंदा और अनेक साहित्यप्रेमी। यहाँ डॉ. सरिता मेहता का ज़िक्र करना भी ज़रूरी होहगा, जो खुद विध्याधाम संस्था की निर्देशिका है और साथ में एक अच्छी कवयित्री भी और इस काव्य सुधा की शाम में उनका पूरी तरह से सहकार रहा।

अंत में पूर्णिमा जी ने अंजना जी का सम्मान "साहित्य मणि' की उपाधि से श्री दाऊजी गुप्त के हाथों से करवाया और सभी कविगणों का साधुवाद किया। अंत में रात्रि-भोजन का भी उत्तम प्रबंध था।

प्रस्तुति- देवी नागरानी

Thursday, April 9, 2009

देवी नांगरानी के अंग्रेजी कविता-संग्रह 'The Journey' का विमोचन


(पुस्तक के विमचोन अवसर पर नंदकिशोर नौटियाल, खन्ना मुजफ़्फ़पुरी, वासुदेव निर्मल, आलोक भट्टाचार्या)

देवी नागरानी के अंग्रेज़ी काव्य संग्रह The Journey का विमोचन किरणदेवी सराफ ट्रस्ट के सहयोग से समारोह कीर्तन केंद्र सभागृह, विले पार्ले, मुंबई में १७ मार्च, २००९ को संपन्न हुआ। पुस्तक का विमोचन प्रसिद्ध उद्योगपति एवं समाजसेवी श्री महावीर सराफ जी के कर कमलों द्वारा संपन्न हुआ । कार्यक्रम की अध्यक्षता की - 'महाराष्ट्र हिंदी साहित्य अकादमी' के अध्यक्ष श्री नंद किशोर नौटियाल जी ने। विशिष्ट अतिथि के रूप में महानगर के अनेक गणमान्य एवं साहित्य के शीर्षस्थ कवि, पत्रकार पधारे ।

जिनमें प्रमुख अतिथी थे - श्री वासुदेव निर्मल, प्रख़्यात सिंधी शायर। मुख्य अतिथि- कुतुबनुमा की संपादिका डा॰राजम नटराजम पिल्लै, प्रमुख वक्ता- श्री आलोक भट्टाचार्य, फिल्म कथाकार श्री जगमोहन कपूर, अंजुमन संस्था के अध्यक्ष एवं प्रमुख शायर खन्ना मुजफ्फरपुरी, डा॰ संगीता सहजवाणी, अध्यक्ष हिंदी डिपार्टमेंट, आर.डी. कालेज। कार्यक्रम का संचालन किया मंचो के प्रसिद्ध संचालक श्री अनंत श्रीमाली ने कार्यक्रम का प्रारंभ माँ सरस्वती पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्जवलन से किया गया। माँ सरस्वती का आव्हान श्री हरिशचंद्र ने वंदना को अपने कण्ठ से अभिनव स्वर प्रदान कर किया।

पुस्तक के विमोचन के उपरांत श्री आलोक भट्टाचार्य ने Sounds of Silence नामक रचना का पाठ करते हुए अपने विचार प्रकट किये। डा॰राजम ने अपने भाव प्रकट करते हुए देवी जी को बधाई दी। श्री जगमोहन कपूर ने अपने विचार लेखन पर प्रस्तुत किये, खन्ना मुजफ्फरपुरी ने इस अवसर के अनुकूल कई दोहों का पाठ किया।

डा॰ संगीता सहजवाणी ने The Journey की कुछ रचनाओं के संदर्भ में विशेष टिप्पणी करते हुए कहा " कि रचनाओं को पढ़ने के पश्चात जाने अनजाने में मन उस सत्य के साथ जुड़। जाने को करता है, पढते पढते सुकून का आलम घेर लेता है" रामप्यारे रघुवंशी, ने अपनी संस्था की ओर से अपनी साथियों सहित देवी नागरानी जी का फूलों से सन्मान किया। मौजूद कवि गण समारोह में मौजूद थे‍ रत्ना झा, रामप्यारे रघुवंशी, शोभा भवानी, गिरिश जोशी, रश्मी गितेश, शिप्रा वर्मा, रमेश श्रीवास्तव ललू, मधु अरोड़ा, उषा गुप्ता, अविनाश दीक्षित, मंजू गुप्ता, विश्वामित्र भेरवानी

उसके पश्चात काव्य गोष्टी शुरू हुई जिसमें अनेकों कावि भागीदार रहे। जिनमें थे कुमार शैलेन्द्र जी, श्रीमती ज्योति गजभिये, खन्ना मुज़फ्फ़रपुरी, डा. वफा सैलेश, शायर उबेद आज़म, संगीता सहजवाणी, कुलवंत सिंह, प्रमिला शर्मा, श्री कपिल कुमार, डा. वफा सैलेश, शायर उबेद आज़म, जनाब माहिर, नंदलाल थापर, और त्रिलोचन सक्सेना,

इस अवसर पर देवी नागरानी की रचनाओं पर टिप्पणी करते हुए अध्यक्ष श्री नौटियाल जी ने बहुभाषी रचनात्मक प्रस्तुतियों के लिये उन्हें विशेष बधाई दी। कार्यक्रम के अंत में देवी नागरानी ने माँ सरस्वती सहित सभी आगंतुकों का हार्दिक दिल से धन्यवाद किया ।

Saturday, April 4, 2009

फिर हुया संगम कला-विज्ञान का


मुम्बई बी.ए.आर.सी. के साहित्य प्रेमियों ने कला, साहित्य और सामाजिक कार्यों के प्रोत्साहन हेतु "सबरस" नामक समूह की शुरुवात की है| साहित्य सृजन में अपने किये गए प्रयासों को आगे बढ़ाते हुए, २९ मार्च २००९ के दिन मुम्बई में चेम्बूर इलाके के कलेक्टर कालोनी में एक काव्य गोष्टी का आयोजन किया गया| इसमें प्रवासी भारतीय साहित्य प्रेमियों की मौजूदगी इसे अंतराष्ट्रीय स्तर का बना देती है|आइये गोष्टी का एक सुखद सफ़र करते हैं ...

मुख्य अतिथि- अमेरिका से आयी प्रवासी भारतीय श्रीमती डॉ सरिता मेहता और गजलकार श्रीमती देवी नांगरानी |

अन्य वरिष्ठ साहित्य सृजक- श्रीमती शुक्ला शाह जिन्होंने नारी साहित्य सृजन को एक सम्मानजनक स्थान दिलवाया है, रंजन नटराजन जो "कुतुबनुमा" नामक पत्रिका की संपादिका हैं।

आयोजक- " सबरस " समूह, जिनमें कवि कुलवंत, श्री गिरीश जोशी और प्रमिला शर्मा सक्रीय रहें|

संचालक- लोचन सक्सेना

काव्य गोष्टी रचना पाठ- शाम ५.३० बजे काव्य गोष्टी की शुरूआत हुयी| माँ शारदा को नमन करते हुए, संचालक ने मुख्य अतिथि का परिचय दिया| प्रमिला शर्मा ने सभी उपस्थित रचनाकारों को गुलाब पुष्प देकर स्वागत किया|
रचनाओं के सुनने और सुनाने का सिलसिला शुरू हुया और रात ८.४५ तक चलता ही रहा| देवी नांगरानी ने अपनी ग़ज़ल गा कर सुनाई| वरिष्ट रचनाकार कपिल कुमार ने दोहे कहे। नीरज गोस्वामी ने गज़लें गायीं | नंदलाल थापर ने अपनी रचना "चूड़ी" सुनाई| शकुन्तला शर्मा जी ने देश भक्ति रचना गायी| मानिक मूंदे, जो मराठी के भी रचनाकार हैं, अपनी हिन्दी की समसामयिक रचना सुनाकर लोगों का ध्यान आकर्षित करते रहे | मुख्य अतिथि डॉ सरिता मेहता ने भी अपनी ग़ज़ल सुनाई | कवि कुलवंत ने " मुखौटा " की बातें अपनी रचना से की| अवनीश तिवारी ने देवी सरस्वती पर अपने छंद कहे और बसंत पर रचना सुनाई |

इसके अतिरिक्त ओमप्रकाश चतुर्वेदी, प्रमिला शर्मा, मंजू गुप्ता, त्रिलोचन, कुमार जैन था अन्य कई रचनाकारों ने रचना पाठन किया | गीत, ग़ज़ल, शेर, छंद और दोहे से सजी इस महफ़िल का समापन सभी के मेल मिलाप और आशीष-आशीर्वाद से हुआ|

मुम्बई से अवनीश एस तिवारी