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Friday, November 5, 2010

अमेरिका का सबसे बड़ा दिवाली मेला



हरगोविंद जी का मुक्त दिवस हो
या स्वामी महावीर को निर्वाण मिला हो
राम जी अयोध्या आ पहुंचे हों
या पांडव ने पूरा बनवास किया हो
हो कारण कोई भी
प्रेम का तोरण हर द्वार सजाएँ
आओ एक दीप जलाएं

दीपावली एक ऐसा त्यौहार है जो अलग अलग नामो से विभिन्न कारणों से बहुत सी धर्मो में मनाया जाता है। अंधकार पर प्रकाश की, अज्ञान पर ज्ञान की और बुराई पर अच्छाई जी विजय का प्रतीक है दीपावली। प्रकाश के इस त्यौहार को डी अफ डब्लू इंडियन कल्चरल सोसईटी ने एक बड़े मेले के रूप में २००६ में मानना प्रारंभ किया था। तब से ये पारम्पर निरंतर चली आ रही है। इसी परंपरा के तहत इस बार पांचवां दीवाली मेला बहुत ही धूमधाम और शान से मनाया गया ,इस मेले में करीब ८० से ९० हजार लोग शामिल हुए। लोगों का आना जाना शाम से ही प्रारंभ होगया था। खाने पीने के ९० स्टौल थे जहाँ भारत के हर प्रदेश का खाना था। खाने की महक पूरे वातावरण को और भी मेले जैसा बना रही थी।किड्स कौर्नर में बच्चों ने बहुत आनन्द उठाया। मेले में कहीं बन्जी जम्पिंक हो रही थी तो कहीं बच्चे हाथी और ऊंट की सवारी कर रहे थे। बाहरी स्टेज पर देश के विभिन प्रान्त का नृत्य हो रहा था जिसको लोगो ने बहुत सराहा तथा गरबा और भांगड़ा का खूब लुत्फ़ उठाया। इस के लिए श्री कृष्ण परमार बधाई के पात्र हैं।
दी ऍफ़ वाब्लू इंडियन कल्चरल सोसाईंटी के अध्यक्ष श्री सतीश गुप्ता जी जो की स्वयं स्टेडियम के अन्दर और बाहर के स्टेज के कार्यक्रम की देख भाल कर रहे थे से जब मेले की सफलता के बारे में बात की तो उन्होंने कहा की "ये हमारा पांचवां मेला है और हर बार ये पहले से बेहतर हुआ है। लोगों की संख्या में भी निरंतर वृद्धि हुई है। इस बार ये मेला कॉटन बौल स्टेडियम में हुआ और बहुत हो सफल रहा। इस बार हमको डैलस के मेयर और आसपास के शहरों के मेयर का बहुत ज्यादा सहयोग मिला है। पहले जब हमने ये प्रारंभ किया था तो मन में शंका थी कि पता नहीं लोगों को पसंद आएगा या नहीं यहाँ के लोग क्या कहेंगे पर जैसे जैसे देसी लोग बढ़ते जा रहे हैं। लोगों को हमारी सभ्यता और संस्कृति के बारे में पता चलता जा रहा है।और अब हम को सभी का सहयोग मिलने लगा है। इस मेले की सफलता का श्रेय मेरे साथियों और स्वयं सेवियों को जाता है जिन्होंने दिनरात मेहनत की है।"
डैलस रंगमंच द्वारा इस मौके पर रामलीला का आयोजन किया गया था। जैसे ही रामलीला प्रारंभ हुई सभी लोग अन्दर हौल में आ के बैठ गए। एक घंटे चली इस रामलीला ने सभी को मन्त्र मुग्ध कर दिया। रामायण के पात्रों की वेश-भूषा, मंच सज्जा और पत्रों का अभिनय ऐसा था कि अमरीका में बसे भारतीयों को अपने बचपन के दिनों की रामलीला याद आ गई। लेखक, निर्देशक जयंत चौधरी, और सोनल की कल्पनाशीलता ने रामलीला को दर्शकों के दिलो-दिमाग में ऐसा बसा दिया कि बच्चों से लेकर बूढ़े तक इसके एक एक दृश्य, संवाद और सुंदर प्रस्तुति को लेकर अपनी प्रशंसा के भाव छुपा नहीं पा रहे थे। सूत्रधार सोनल पौद्दार और सौम्या सरन ने बहुत खूबी से इस भूमिका का निर्वाह किया। जिस की वजह से रामलीला और भी उत्तम हुई कल्पना फ्रूटवाला। डॉ श्री प्रकाश कागाल, श्री अरुण रावत, सुश्री वन्दिता पारिख, श्री राज त्रिपाठी, श्री तरुण सरन, डॉ श्री थीरू विजय, सुश्री नूतन अरोरा, सुश्री ज्योति कुमार, श्री तरुण धाम, सुश्री पारुल भाटिया आदि ने रामलीला के मुख्य पात्रों की भूमिका का निर्वाह किया। बाल कलाकारों में मुख्य थे अर्पित, सोनाक्षी, लक्ष्य, आदित्य, मेहर, मलिका, पंकज, रोहन शिवम् संजना मेघना मुकुंद, विवेक, विनायक, राघव। रामलीला की स्वयंसेवी टीम में थे श्री राम साहनी, श्री विनय सक्सेना, नूतन अरोरा, सुश्री राधिका गोयल, सुश्री शारदा रावत, श्री राजेश रैना, सुश्री नीरजा शेठ, सुश्री रश्मि भाटिया, सुश्री मंजू श्रीवास्तव, सुश्री किनी परिवार, श्री किशोर फ्रूटवाला इन सभी के सहयोग के बिना रामलीला का संम्पन हो पाना अकल्पनीय था। रावन दहन के साथ ही पूरा स्टेडियम जय श्रीराम के नारों से गुंजायेमान हो उठा।
दीवाली मेले को सफल बनाने में श्री रमेश गुप्ता जी का बहुत बड़ा योगदान है।रमेश जी ने प्रायोजकों से ले के बौलीवुड शो तक सभी कुछ का बखूबी इंतजाम किया। इनकी कार्य कुशलता की जितनी प्रशंसा की जाये कम है। श्री रमेश गुप्ताजी जो हर साल भारत से अमेरिका दिवाली मेले का आयोजन करने ही आते हैं। उन्होंने बताया अमेरिका से भारतीय सर्दियों की और गर्मी की छुट्टियों में मुख्यतः भारत जाते हैं, तो उनको कभी भी रामलीला देखने को नहीं मिल पाती है तो सोचा की हमारे बच्चे अपनी इस संस्कृति को भी देखें और इस का आनन्द लें। यही सोच के हम हर साल ये मेला सजाते हैं। रमेश गुप्ता जी ने आगे कहा की बिना प्रायोजकों के सहयोग से कार्यक्रम सफलता पूर्वक करना कठिन था। हम सिटी बैंक वालमार्ट जी टीवी, स्टार टी वी, सबवे, पेप्सिको, टी एक्स यु एनर्जी, देसी प्लाज़ा टेक्सस इंस्ट्रुमेंट्स, एस बी इंटरनेशनल, एकल विद्यालय, फेन एसिया, देसी प्लाजा। गुप्ता एंड एसोसियेट इंक, पटेल ब्रदर्स, गुप्ता अग्रवाल फाउन्डेशन, गिडो मैथ्स एंड लर्निंग। राज विडिओ फोटोग्राफी डॉ राज एंड प्रतिभा तन्ना के बहुत बहुत आभारी हैं। मै हृदय से सभी का धन्यवाद करता हूँ। राजन और उनकी टीम ने हमारी बहुत सहायता की है मै उनका भी बहुत आभारी हूँ।



मेले का अंतिम चरण था सुनिधि चौहान का कंसर्ट। लोग बेताबी से अपनी चाहिती गायिका का इंतजार कर रहे थे। उनके स्टेज पर आते ही पूरा स्टेडियम तालियों की गडगडाहट से गूंजा उठा। सुनिधि ने लोगों का भरपूर मनोरंजन किया। इसके बाद इंडियन आइडल और बदमाश कम्पनी के मियांग चेंग और अयूब पटेल ने भी लोगों का बहुत मनोरंजन किया। उनके गाये गानों पर लोग झूमते नजर आये। यहाँ का साउंड सिस्टम बहुत अच्छा था श्री चाट गणेश जी ने। जिसका पूरा इंतजाम किया था। वो बधाई के पात्र हैं।
स्टेडियम की सारी व्यवस्था अति उत्तम थी। श्री यू के गुप्ता जी जो की बहुत अच्छे समझौता वार्ताकार (निगोशियेटर ) माने जाते हैं। उनके कुशल मेनेजमेंट और निगोशियेशन कि वजह से स्टेडियम की अच्छी व्यवस्था संभव हो सकी। पूरा मेला बहुत ही अच्छी तरह से प्लान किया गया था। सब कुछ सुनियोजित ढंग से हुआ। ये विभाग श्री वी के गुप्ता जीके पास था जिन्होंने बहुत अच्छी तरह इतने विभिन्न कार्यक्रमों को एक सूत्र में पिरो के माला सा बना दिया। .डॉ नरेश गुप्ता जी जो की कैंसर क्लिनिक चलाते हैं उन लोगों की सहायता के लिए जिनके पास इन्शोरेंश नहीं है।इस तरह से सांस्कृतिक कार्यक्रमों में बहुत उत्साह से भाग लेते हैं और तन मन धन से सहायता करते हैं।




रमेश गुप्ता जी ने एक बहुत सुंदर बात की उन्होंने कहा की वो अब मेले की सांस्कृतिक बागडोर नवजवान बच्चों को सौपना चाहते हैं। इस बार मेले में यंग बच्चों ने बहुत मेहनत से काम किया जिनमे हैं अरिश गुप्ता अर्नव गुप्ता, सुनैना, विवेक गुप्ता और देव गुप्ता।

कौन्सर्ट की समाप्ति पर जी आतिशबाजी हुई बहुत देर तक चली। ऐसा लगता था कि पूरा आकाश दुधिया प्रकाश से भर गया हो और लाल, सफ़ेद, हरे, सुनहरे रंगों के फूल आकाश में खिल उठे हो। ये पूरा समां दर्शनीय था। मेले के बारे में जब लोगों से पूछा तो किसीने कहा की मुझको तो अपना बचपन याद आ गया, किसी ने कहा मेरे बच्चों को हाथी और ऊंट की सवारी कर के बहुत आनद आया, तो किसीने कहा मेले का पूरा आन्नद उठाया फिर रामलीला और सुनिधि का गाना गाना अन्त में आतिशबाजी मनोरंजन के लिए इससे ज्यादा कोई और क्या मांगेगा।हम तो अगले दिवाली मेला का इंतजार करेंगे।



मेला देखने के लिए लिटिल रौक अरकेंसा, अर्डमोर, फेड्विल, हीयूस्टन, औसटिन, शिकागो न्यू योर्क, कैलिफोर्निया से लोग आये थे। इस मेले की खास बात ये थी कि इसमें भारतियों के अलावा पाकिस्तानी, नेपाली और अमेरिकन भी शामिल हुए।

प्रस्तुति- रचना श्रीवास्तव

Wednesday, October 20, 2010

अमेरिका के सबसे बड़े रावण के दहन और रामलीला की धूम



अक्तूबर १७, २०१० को हिंदी विकास मंडल एवं हिन्दू सोसाईटी (नार्थ कैरोलाईना) ने मौरिसविल (नार्थ कैरोलाईना) के हिन्दू भवन के खुले ग्राउंड में दशहरा उत्सव बड़ी धूमधाम से मनाया| ३८ फुट का रावण (जिसका शरीर ३० फुट का, सिर ६ फुट का, मुकुट १.८ फुट का और कलगी ०.२ फुट की थी) सबके आकर्षण का केंद्र था| अमेरिका में यह सबसे बड़ा रावण था| इसका डिजाइन और ढांचा स्वयं-सेवकों की टीम (अशोक एवं मधुर माथुर, रमणीक कामो, अजय कौल, डॉ. ध्रुव कुमार, सतपाल राठी, डॉ. ओम ढींगरा, मदन एवं मीरा गोयल, ममता एवं प्रदीप बिसारिया, तुषार घोष, उत्तम डिडवानिया, लुईस और रमेश माथुर) ने तीन महीने की मेहनत और लगन से तैयार किया|
रावण दहन से पहले राम और रावण के द्वन्द्व युद्ध का मंचन किया गया| ध्वनी और प्रकाश के प्रयोग ने इसे बहुत प्रभावित बना दिया| राम जी की भूमिका (अतीश कटारिया), सीता जी (स्मिता कटारिया), लक्ष्मण (रमेश कलाज्ञानम), हनुमान (डॉ. ध्रुवकुमार), ब्राह्मण (रमेश माथुर ) और रावण (डॉ. अफ़रोज़ ताज) ने किया| रामलीला के इस अंश को लिखा और प्रस्तुत किया डॉ. सुधा ओम ढींगरा ने और निर्देशन दिया रंगमंच के प्रसिद्ध कलाकार और निर्देशक हरीश आम्बले ने| बिंदु सिंह और डॉ. सुधा ओम ढींगरा ने पात्रों का मेकअप कर उन्हें सजीव कर दिया| प्रकाश का सञ्चालन किया शिवा रघुनानन ने और ध्वनी का संयोजन किया जॉन कालवेल ने| राम और रावण को आवाज़ें दीं रवि देवराजन और डॉ. अफ़रोज़ ताज ने| राम जी की शांत और ठहराव वाली आवाज़, रावण की विद्रूप हँसी के मिश्रण पर बच्चों और बड़ों ने बहुत तालियाँ बजाईं|



राम-लक्ष्मण तथा हनुमान जी के तिलक से उत्सव का आरंभ हुआ| स्टेशन वैगन को सजा कर "इन्द्र वाहन" बनाया गया और उसकी छत पर बैठ कर पूरा काफिला रामलीला ग्राउंड में पहुंचा| पीछे छोटे बच्चों की बानर सेना, हनुमान जी की तरह सजे- धजे "जय सिया राम" का उच्चारण करते चले| अमेरिका की धरती पर समय बंध गया| हज़ारों लोग राम जी की सवारी, रामलीला और रावण दहन में शामिल हुए| इस सारे कार्यक्रम को हिंदी विकास मंडल की अध्यक्ष श्री मति सरोज शर्मा के मार्ग दर्शन में तैयार किया गया|

रामलीला का एक छोटा सा वीडियो भी देखें-


प्रस्तुति- कुबेरनी हनुमंथप्पा

Sunday, September 26, 2010

डैलस में छाया ए आर रहमान का ज़ादू

हम अनेकों कार्यक्रमों में जाते है बहुत से शो देखते हैं पर उनमे से कुछ ऐसे होते हैं जो एक सुनहरी याद बन आँखों में समाजाते हैं. ऐसा ही कुछ खास अनुभव रहा ऐ आर रहमान का कौन्सर्ट "दा जरनी होम वर्ड टुअर "स्काई पास इंटरटेनमेंट के तत्वाधान में प्रस्तुत इस शो ने डैलस में इतिहास रच डाला. डैलस का आज तक का सबसे बड़ा और सफल शो कहा जाये तो गलत न होगा. अमेरिकन एयर लाइनस सेंटर में करीब १३००० से भी ज्यादा लोगों ने इस शो का आनन्द उठाया शो थोडा देर से प्रारंभ हुआ जब इस शो के करता धरता "स्काई पास इंटरटेनमेंट के सी ई ओ श्री विक्टर इब्राहीम जी से इस देरी का कारण पूछा गया तो उन्होंने बताया की पहले ये कॉन्सर्ट ४ जुलाई को होने वाला था पर कुछ कारणों से ये स्थगित हो गया उस समय हम बहुत दुखी हो गये थे. पर हमारे बहुत से टिकट बिक चुके थे और उस पर शो प्रारंभ होने का समय लिखा था ८ बजे फिर जब अभी शो की नई तारीख मिली तो जो नए टिकट बिके उसमे शो प्रारंभ होने का समय लिखा था ७ बजे। बस यही गलतफहमी हो गई। यदि हम शोए ७ बजे शुरू करते तो आधे लोगों का शो छूट जाता। इसी कारण शो देर से शुरू करना पड़ा।"

ऐ आर रहमान का ये शो आज कल पूरे अमेरिका में धूम मचा रहा है इस कार्यक्रम की खास बात है इसकी प्रस्तुति। और स्टेज सज्जा। जिसकी जिम्मेदारी सम्भाली थी सुप्रसिद्ध निर्देशक अमय(amy )टिंकमेन ने जो मारीअह केरे (mariah carey ), ब्रिटनी स्पेअर्स और बैकस्ट्रीट बॉय्स के साथ काम कर चुके हैं, पूरे स्टेज को कुछ यूँ बनाया गया था की समय समय पर उसमे परिवर्तन किये जा सकें ये परिवर्तन स्टेज को हर पल एक नया रूप दे रहा था और शो को भव्य बना रहा था। ध्वनि और प्रकाश की व्यवस्था अति उत्तम थी। लेजर का प्रयोग बहुत अच्छी तरह से किया गया था जो सभी के मन को लुभा रहा था। स्टेज के झीने परदे पर भव्य दृश्य आते जा रहे थे जो कार्यक्रम में चार चाँद लगा रहे थे।

रहमान जी ने हिदी के आलावा तमिल मलयालम तेलगू और इंग्लिश के भी गाने गाये उनके एक एक गाने पर लोग झूम रहे थे और ख़ुशी में चीख रहे थे। कुछ नये प्रयोग भी इस कार्यक्रम में देखने को मिले। रंग दे बसंती का गीत "लुका-छुपी बहुत हुई सामने आजा न" में रहमान जी के साथ लता जी ने भी गया है। यहाँ पर्दे पर लता जी को अपना हिस्सा गाते हुए दिखाया गया और रहमान जी ने अपना हिस्सा गया तो ऐसा लग रहा था कि लता जी सामने गा रही है सभी ने इस प्रयोग को बहुत सराहा। इस शो में हिन्दू, मुस्लिम और सिख धर्मो की दुआओं का संगम प्रस्तुत किया गया जो दर्शको को आत्मा तक भिगोगाया।
विभिन्न त्योहारों को भी बहुत सुंदर ढंग से इस शो की माला में पिरोया गया था।


(विक्टर अब्राहिम)

रहमान जी ने अपनी अल्बम का एक गीत जो कि सूफियाना कलाम था गया तो वि स्वयं इतने भावविभोर हो उठे कि उनकी आँखें छलक उठीं। ये दर्शाता ही कि वो संगीत में कितना डूब जाते हैं। रहमान जी की उंगलिया तबला, गिटार, हारमोनियम, पियानो, किसी वो वाद्य यंत्र को छूती है तो चमत्कारी संगीत निकलता है जब उन्होंने अपने इस गुण को दर्शाया तो लोग वाह वाह कर उठे। रहमान जी में स्लम डॉग मिलिनेयर, लगान, जाने तू या जाने न, दिल से, राग दे बसंती और रोज़ा फिल्म के गाने गाये और लोगों को आनंदित किया।
रहमान जी के साथ इस शो में श्री हरिहरन जी, विजय प्रकाश, हर्षदीप कौर, असद खान, बेन्नी दयाल, ब्लाज़े, श्वेता पंडित, नीति मुहान ने भी गाने गाये और लोगों का मनोरंजन किया।
हरिहरन जी ने तू ही रे, चंदा रे गया उस के बाद उहोने कुछ ग़ज़लें और शास्त्रीय संगीत को अपने सुरों से साध के एक समां बांध दिया उनकी हृदय स्पर्शी आवाज ने सभी को मन्त्र मुग्ध कर दिया।
स्वेता पंडित निती और हर्षदीप की मखमली सुरीली आवाज का जादू सभी को सम्मोहित कर गया। ससुराल गेंदा फूल, बरसो रे मेघा, मेहदी है रचने वाली, चल छईयां छईयां या प्रार्थना हो सभी में इनकी आवाज ने मानो सुरों का इन्द्रधनुष बिखेर दिया। बेन्नी दयाल के पप्पू कांट डांस "पर सभी ने खूब डांस किया। कहने को जश्ने बहारा है और गुज़ारिश से प्रसिद्ध ब्लाज़े के गाने भी लोगों ने बहुत पसंद किये।



घडी में ११ बजने को थे शो के समाप्त होने का समय पास आरहा था और लोगों को इंतजार था उस गाने का जिस के लिए रहमान जी को आस्कर मिला था । जब रहमान जी ने गाना प्रारंभ किया तो स्टेडियम का नज़ारा देखने वाला था कोई शायद ही अपनी सीट पर बैठा हो सभी खड़े होके तालियाँ बजा रहे थे और मस्ती में झूम रहे थे।
शो के डारेक्टर ऑफ़ ऑपरेशन श्री ताहिर अली जी ने कहा "जब ये कार्यक्रम स्थगित हुआ था तो बहुत निराशा हुई थी। पर डैलस कि जनता ने बहुत सहयोग दिया। लोग हमको जानते थे तो उनका यकीन नहीं टुटा अभी अंतिम तीन हफ्ते बहुत अच्छे बीते। १३ हज़ार से भी ज्यादा लोगों ने इस कार्यक्रम में शिरकत की। रहमान ने हमें अपने फन की नोज़ियत से नवाज़ा। इस पूरे शो में जितना सामने दिख रहा था उससे ज्यादा स्टेज के पीछे कि मेहनत थी। पूरा क्रू को दो भागों में बटा था हियूसटन का शो करने के बाद वो क्रू बोस्टन चला गया और यहाँ डैलस का क्रू वेंकुअर चला गया। दोनों ग्रुप को अलग-अलग दो कोच दिए गाये हैं जो सारी सुख सुविधा उक्त थे। इतने अच्छे प्रबंध के लिए मै मुख्य प्रबंधक को बधाई देता हूँ "



स्काई पास इंटरटेनमेंट के उपाध्यक्ष श्री जे सी वर्गिस जी का ये पहला शो था इसकी सफलता को ले के वो बहुत उत्साहित थे .
शो की सफलता के बारे में जब श्री विक्टर जी से पूछा गया तो उहोने कहा कि "सभी लोगों ने शो की तारीफ की है मुझे बधाई के बहुत से फ़ोन .,एस ऍम एस और इ मेल आये है मै अपने सभी प्रायोजकों को बहुत बहुत धन्यवाद देता हूँ और अपनी पूरी टीम और स्वयं सेविकों का आभार व्यक्त करता हूँ क्योकि उनकी मेहनत के बिना ये शो कभी भी कामियाब नहीं हो सकता था"
शो की समाप्ति पर जब मैने कुछ लोगों की राय जाने के लिए पूछा तो उनका कहना था कि ये जीवन भर का अनुभव है। बहुत अच्छा और मनोरंजक शो था। किसीने कहा पैसा वसूल शो था। किसी ने कहा की ऐसा शो उहोने कभी पहले नहीं देखा था सभी ने शो की सफलता के लिए श्री विक्टर अब्राहिम को और उनकी टीम को बधाई दी।




प्रस्तुति- रचना श्रीवास्तव

Monday, August 30, 2010

अमेरिका के शहर डैलस का 15 अगस्त



जब १५ अगस्त आता है तो पूरा देश तीन रगों में रंग जाता है। इस बार अमेरिका भी इस बात से अछूता नहीं रहा न्यू योर्क का टाईम्स स्क्व्यर १५ अगस्त को तीन रंगों (केसरिया सफ़ेद और हरा) से रंग था।
डैलस में भी हर बार की तरह इस बार भी स्वतंत्रता दिवस बहुत ही धूम-धाम से मनाया गया। इण्डिया असोशियेशन ऑफ़ नोर्थ टेक्सस हर साल १५ अगस्त मनाने के लिए आनंद बाजार सजाती है। इस बार भी लोन स्टार पार्क में शाम से ही लोगों का आना प्रारंभ हो गया था। कार्यक्रम का प्रारंभ परेड से हुआ। जिसमें सबसे आगे स्वामी नारायण संस्था शानदार बैंड था। अभिनेता शर्मन जोशी और सा रे गा म पा लिटिल चैम्प की विजेता ऐश्वर्या मजुमदार इस कार्यक्रम के मुख्य अतिथि थे। मंच का कुशल संचालन शबनम जी और वैभव ने किया। शर्मन जोशी ने यहाँ उपस्थित सभी लोगों से मिले और साथ में फोटो भी खिचाई।
इण्डिया असोशियेशन ऑफ़ नोर्थ टेक्सस के प्रेसिडेंट श्री निरंजन पटेल जी, पेप्सिको के श्री राजगोपालन जी स्काई पास ट्रेवल्स के श्री विक्टर इब्राहीम जी, ने लोगों को संबोधित किया। मंच पर फन एसिया के जॉन हामिद जी, न्यू योर्क लाइफ इंशोरेंस के सुधीर पारिख जी और कमल कौशल जी ने उपस्थित हो के कार्यक्रम की शोभा बढ़ाई। इस कार्यक्रम के एक मात्र मिडिया सहयोगी रहे फन एसिया।
पूरा मैदान भारतियों से भरा था। २० हजार से भी ज्यादा लोग अपने देश का स्वतंत्रता दिवस माने के लिए यहाँ उपस्थित थे। जब राष्ट्रीय गान प्रारंभ हुआ तो सभी अपनी जगह पर खड़े हो गए और सुर में सुर मिलाने लगे। एक अजीब सी ख़ुशी और उत्साह था पूरे मौहोल में .यहाँ २०० से भी ज्यादा बूथ लगे थे। जिनमें से करीब ४० खाने के स्टाल थे। भारत के हर प्रान्त का खाना यहाँ मौजूद था। नारियल पानी, पान, चाय आनन्द बाजार में हर छोटी छोटी चाहतों का ध्यान रखा गया था। यहाँ बच्चों के लिए किड्स कोर्नर था। जहाँ बच्चों ने बहुत मजा किया।
रात्रि में बहुत सुंदर आतिशबाजी हुई जिस को देख सभी का मन आनंदित हो गया। आनन्द बाजार की व्यवस्था की सभी ने भूरी भूरी प्रशंशा की। लोगों के अनुसार उनके जीवन में ये अनूठा अनुभव था देश से दूर यहाँ अमेरिका में कभी अपना स्वतंत्रता दिवस मना पाएंगे सोचा न था। यहाँ आ के लगा ही नहीं कि हम भारत से इतनी दूर हैं ।
इण्डिया असोशियेशन ऑफ़ नोर्थ टेक्सस के प्रेसिडेंट इलेक्ट और आनंद बाज़ार के चेयर श्री जगदीश गोधवानी जी ने बताया कि "ये ३४ वाँ आनन्द बाज़ार था। जोकि बहुत ही सफल रहा, मैं यहाँ आने वाले सभी लोगों का हृदय से धन्यवाद करता हूँ। ये लोगों का प्यार और विश्वास ही है जो वो यहाँ आये और इस आयोजन को सफल बनाया। इण्डिया असोशियेशन ऑफ़ नोर्थ टेक्सस की स्थापना १९६२ में हुई थी। मेरे ख्याल से ये अमेरिका में भारतियों के द्वारा स्थापित ये सबसे पुरानी संस्था है। इतना बड़ा आयोजन बिना सहयोग के सम्पन नहीं हो सकता, मैं अपने सभी प्रायोजकों का धन्यवाद करता हूँ। यहाँ आये सभी भारतियों से उम्मीद करता हूँ कि अगले साल पुनः हम सभी इसी तरह मिल कर अपना स्वतंत्रता दिवस मनाएंगे"।
देश भक्ति गीत गाते सभी भारतीय पुनः अगले साल आने की तम्मना अपने मन में लिए घरो को रवाना हो गए।













प्रस्तुतिः- रचना श्रीवास्तव

Tuesday, May 11, 2010

अमेरिका और भारत में एक साथ हुआ धूप से रूठी चाँदनी का विमोचन


अमेरिका में विमोचन
प्रतिष्ठित पत्रकार, कवयित्री, कहानीकार, उपन्यासकार डॉ. सुधा ओम ढींगरा का काव्य संग्रह "धूप से रूठी चांदनी" (शिवना प्रकाशन) का विमोचन समारोह अमेरिका और भारत में एक साथ हुआ. अमेरिका में हिन्दू भवन (मौरिसविल, नॉर्थ कैरोलाईना) के सांस्कृतिक भवन के भव्य प्रांगण में हिंदी विकास मंडल और अंतर्राष्ट्रीय हिंदी समिति की नॉर्थ कैरोलाईना शाखा के तत्वावधान में बहुत धूमधाम से संपन्न हुआ। हिंदी विकास मंडल के संरक्षक श्री गंगाधर शर्मा जी ने ज्योति प्रज्जवलित कर कार्यक्रम को आरंभ किया। 600 से अधिक श्रोतागणों के सम्मुख स्थानीय कवयित्री बिंदु सिंह ने डॉ. सुधा ओम ढींगरा के रचना संसार की झलक लोगों को दी और हिंदी के प्रति उनकी निष्ठा और कार्यों का चित्रात्मक वर्णन किया। उनके काव्य संग्रह "धूप से रूठी चांदनी" की कविताओं से श्रोताओं का परिचय करवाया और स्टेज पर श्रीमती सरोज शर्मा (अध्यक्ष हिंदी विकास मंडल ), अफ़रोज़ ताज(प्रोफेसर यू.एन.सी चैपल हिल), कवि आश कर्ण अटल, कवि महेन्द्र अजनबी और कवि अरुण जैमिनी जी को पुस्तक के विमोचन के लिया बुलाया और आप सब ने ''धूप से रूठी चांदनी'' का विधिवत विमोचन किया। नई नवेली दुल्हन का घूँघट हटाया गया। तीनों कवियों को स्मृति चिन्ह प्रदान किया गया और उसके बाद फिर शुरू हुआ कवि सम्मलेन। आश कर्ण अटल, महेन्द्र अजनबी और अरुण जैमिनी जी ने हास्य और व्यंग्य के तीरों से श्रोताओं का तीन घंटे खूब मंनोरंजन किया। श्रोतागण उठने को तैयार नहीं थे, पर धन्यवाद और बधाइयों के साथ समरोह का समापन हुआ।

बिन्दु सिंह
भारत में डॉ. सुधा ओम ढींगरा की पुस्तक "धूप से रूठी चाँदनी" (शिवना प्रकाशन) का विमोचन सीहोर की अग्रणी साहित्य प्रकाशन संस्था शिवना प्रकाशन तथा मध्य प्रदेश उर्दू अकादमी के संयुक्त तत्वावधान में किया गया। सुकवि मोहन राय की स्मृति में अखिल भारतीय मुशायरे का आयोजन भी किया गया। सीहोर के कुइया गार्डन में आयोजित कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि विधायक श्री रमेश सक्सेना, सुकवि स्व. मोहन राय की धर्मपत्नी श्रीमती शशिकला राय सहित पद्मश्री बशीर बद्र, पद्मश्री बेकल उत्साही, डॉ. राहत इन्दौरी तथा मध्यप्रदेश उर्दू अकादमी की सचिव नुसरत मेहदी सहित सभी शायरों ने माँ सरस्वती की प्रतिमा पर माल्यार्पण तथा सुकवि स्व. मोहन राय के चित्र पर पुष्पाँजलि तथा दीप प्रज्जवलित करके किया। सभी अतिथियों का स्वागत संयोजक श्री राजकुमार गुप्ता द्वारा तथा आयोजन प्रमुख श्री पुरुषोत्तम कुइया ने किया। शिवना प्रकाशन की नई पुस्तकों का विमोचन सभी अतिथियों द्वारा किया गया. कार्यक्रम में शिवना प्रकाशन की नई पुस्तकों मोनिका हठीला की ''एक खुशबू टहलती रही'', सीमा गुप्ता की ''विरह के रंग'', मेजर संजय चतुर्वेदी की ''चाँद पर चाँदनी नहीं होती'' का भी विमोचन किया गया, साथ ही डॉ. आजम को सुकवि मोहन राय स्मृति पुरस्कार प्रदान किया गया। विमोचन के पश्चात तीनों उपस्थित लेखकों मोनिका हठीला, सीमा गुप्ता तथा संजय चतुर्वेदी का शिवना प्रकाशन तथा भोजक परिवार भुज द्वारा शाल, श्रीफल तथा स्मृति चिन्ह भेंट कर किया गया। सुधा ओम ढींगरा की अनुपस्थिति में उनका शाल, श्रीफल तथा स्मृति चिन्ह उर्दू अकादमी की महा सचिव नुसरत मेहदी जी ने स्वीकार किया। सुकवि स्व. मोहन राय स्मृति पुरस्कार की घोषणा तथा पुरस्कृत होने वाले कवि डॉ. आजम का संक्षिप्त परिचय चयन समिति की अध्यक्ष तथा स्थानीय महाविद्यालय में हिंदी की प्रोफेसर डॉ. श्रीमती पुष्पा दुबे द्वारा दिया गया। पंडित शैलेष तिवारी के स्वस्ति वाचन के बीच अतिथियों द्वारा डॉ. आजम को मंगल तिलक कर, शाल श्रीफल, सम्मान पत्र तथा स्मृति चिन्ह भेंटकर सुकवि स्व. मोहन राय स्मृति पुरस्कार प्रदान किया गया। मुख्य अतिथि विधायक श्री रमेश सक्सेना जी ने इस अवसर पर बोलते हुए कहा कि धन्य हैं शिवना के साथी गण जो कि अपने साथी की स्मृति में इतना भव्य आयोजन कर रहे हैं। श्री सक्सेना ने शिवना प्रकाशन के आयोजन की भूरि-भूरि प्रशंसा की। पद्मश्री डॉ. बशीर बद्र ने कहा कि सीहोर आना हमेशा से ही मेरे लिये आकर्षण का विषय रहता है क्योंकि यहां पर मुझे बहुत प्यार मिलता है। नुसरत मेहदी ने अपने संबोधन में कहा कि शिवना प्रकाशन के साथियों ने सीहोर में जो भव्य आयोजन रचा है वैसा कम ही देखने को मिलता है। शिवना प्रकाशन ने सीहोर में आज इतिहास रच दिया है।


भारत में विमोचन

कार्यक्रम के सूत्रधार द्वय रमेश हठीला तथा पंकज सुबीर ने सभी अतिथियों को शिवना प्रकाशन की ओर से स्मृति चिन्ह प्रदान किये, साथ ही कार्यक्रम संचालक श्री प्रदीप एस चौहान को सभी विशिष्ट अतिथियों द्वारा प्रतीक चिन्ह भेंट किया गया। कार्यक्रम के द्वितीय चरण में अखिल भारतीय मुशायरे का आयोजन किया गया। शायरों का स्वागत बैज, पुष्पमाला तथा स्मृति चिन्ह प्रदान कर श्री सोनू ठाकुर, विक्की कौशल, सनी गौस्वामी, सुधीर मालवीय, नवेद खान, प्रवीण विश्वकर्मा, प्रकाश अर्श, वीनस केसरी, अंकित सफर, रविकांत पांडे आदि ने किया। पद्मश्री बेकल उत्साही, डॉ. राहत इन्दौरी, नुसरत मेहदी, शकील जमाली, खुरशीद हैदर, अख्तर ग्वालियरी, शाकिर रजा, सिकन्दर हयात गड़बड़, अतहर सिरोंजी, सुलेमान मज़ाज, जिया राना, सुश्री राना जेबा, फारुक अंजुम, काजी मलिक नवेद, ताजुद्दीन ताज, मोनिका हठीला, मेजर संजय चतुर्वेदी, सीमा गुप्ता, डॉ. आजम जैसे शायरों की रचनाओं का कुइया गार्डन में उपस्थित श्रोता रात तीन बजे तक आनंद लेते रहे। डॉ. राहत इन्दौरी, बेकल उत्साही, खुर्शीद हैदर जैसे शायरों की गज़लों का श्रोताओं ने खूब आनंद लिया। श्रोताओं से खचाखच भरे मैदान पर देर रात तक काव्य रस की वर्षा होती रही। श्रोताओं ने अपने मनपसंद शायरों से खूब फरमाइश कर करके ग़ज़लें सुनीं। कार्यक्रम संचालन प्रदीप एस चौहान ने किया। अंत में आभार शिवना प्रकाशन के पंकज सुबीर ने किया।

प्रस्तुति- कुबेरनी हनुमंथप्पा ( यू .एस. ए)

Wednesday, April 14, 2010

डैलस, अमेरिका में अंतरराष्ट्रीय हिन्दी समिति ने आयोजित किया अपना 25वाँ कवि सम्मेलन

डैलस।


कविता सुनाते आश करण अटल

अंतरराष्ट्रीय हिंदी समिति (अमेरिका) के कवि सम्मेलनों की शृंखला का आरम्भ 9 अप्रैल 2010 को डैलस से हुआ। उत्तरी अमेरिका में यह संस्था प्रत्येक वर्ष तक़रीबन पंद्रह से सत्रह कार्यक्रम करवाती है। डॉ नन्दलाल सिंह, डॉ सुधा ओम ढींगरा और श्री अलोक मिश्रा इस संस्था के आधार स्तम्भ हैं। इन्हीं के अथक प्रयास से इस बार भी कवि सम्मेलनों के सोलह कार्यक्रम विभिन्न शहरों में संपन्न होंगे। अंतर्राष्ट्रीय हिंदी समिति के तत्वावधान में प्रस्तुत हास्य कवि सम्मलेन में भारत के बहुचर्चित हास्य कवि श्री महेंद्र अजनबी, श्री आश करण अटल और श्री अरुण जेमिनी जी ने भाग लिया। डैलस संभाग की अध्यक्षा श्रीमती निशि भाटिया को श्री जयन्त चौधरी ने मंच पर आमंत्रित किया। निशि जी ने सभी स्वयंसेवकों के नाम बताते हुए उनको धन्यवाद दिया और कार्यक्रम को विधिवत तरीके से आरम्भ कराया। कार्यक्रम का प्रारंभ परम्परागत तरीके से एकल विद्यालयों के शुभचिंतक श्रीमती कल्पना फ्रूटवाला और श्री किशोर फ्रूटवाला ने दीप प्रज्वलित कर तथा श्रीमती कुसुम गुप्ता के नेतृत्व में सरस्वती वंदना से हुआ। आगे मंच संचालन के लिए निशि जी ने अंतरराष्ट्रीय हिंदी समिति के संयोजक डॉ.नन्दलाल सिंह को आमंत्रित किया। नन्दलाल जी की वाक्पटुता और हास्य मिश्रित कथन ने लोगों का खूब मनोरंजन किया और मन मोह लिया। डैलस में आयोजित ये 25वां कवि सम्मलेन था। आज के इस फ़िल्मी युग में जब 700 से भी ज्यादा लोग कवि सम्मलेन का आनंद लेते हैं तो मन असीम आनंद से भर जाता है। इस का पूरा श्रेय नन्दलाल जी को जाता है। आज से 25 साल पहले इसका प्रारंभ हुआ था, तब कुछ लोग ही ऐसे कार्यक्रमों में आते थे, पर धीरे-धीरे लोग आते गए और कारवाँ बनता गया और आज ये कारवाँ काव्यप्रेमियों के जत्थे में परिवर्तित हो चुका है। नन्दलाल जी के शब्दों में "आज कवि सम्मलेन का रजत जयंती समारोह है। डैलस में दिसम्बर 85 में पहले कवि सम्मलेन का आयोजन किया गया था। स्वयं सेवकों/सेविकाओं की कार्य निष्ठा से ही हम आज यहाँ तक पहुंचे हैं। आज के इस कार्यक्रम के प्रचार और प्रसार के लिए मैं फन एशिया और जैक गोदवानी का आभारी हूँ"। नन्दलाल जी ने कवियों को सारगर्भित परिचय के साथ मंच पर आमंत्रित किया। पुष्पगुच्छ भेंट कर महेंद्र अजनबी जी का स्वागत श्रीमती अनीता सिंघल ने, आश किरण अटल जी का श्रीमती नीतू अग्रवाल ने और अरुण जेमिनी जी का श्रीमती परम अग्रवाल ने किया। मंच पर कवियों के आते ही पूरा हॉल करतल ध्वनि से गुंजायमान हो उठा।
कवि सम्मलेन का संचालन श्री अरुण जेमिनी जी ने किया। अरुण जेमिनी जी ने श्री नन्दलाल जी, श्री अशोक जी और ज्योति जी, करिश्मा हिम्मत सिंघानी जी के साथ सभी का धन्यवाद किया। इन पंक्तियों के साथ किया उन्होंने महेन्द्र अजनबी जी को मंच पर आमंत्रित किया.....

मुस्कुराती जिंदगानी चाहिए
काव्य में ऐसी रवानी चाहिए
सारी दुनिया अपनी हो जाती है बस
एक उसकी मेहरबानी चाहिए


महेंद्र अजनबी जी ने बच्चों की बातों को बहुत ही रोचक ढंग से प्रस्तुत किया। जिनको सुनकर हँसते-हँसते पेट में बल पड़ गए एक उदाहरण देखिये-

एक बच्ची से पूछा गया कि राम-लक्ष्मण तो ठीक पर सीता जी वन क्यों गईं?
बच्ची ने कहा,
सीता जी के वनवास जाने में बहुत बड़ी सीख है..
तीन-तीन सास जब घर में हो तो जंगल ही ठीक है..


ट्रक के पीछे लिखी पंक्तियों और समाचार पत्र के शीर्षकों से हास्य की उत्पति कैसे होती है बताया। जब कवि एक पंक्ति पढ़ता है और श्रोता उस को पूरी कर देता है, उससे किस तरह हास्य उत्पन्न होता है, एक उदाहण देखिये---

जेल में कवि सम्मलेन हो रहा था ...
कवि बोला आदमी यूँ हालातों में जकड़ा नहीं जाता
कैदी बोला कुत्ते की पूँछ पे पैर पड़ा न होता तो मैं पकड़ा नहीं जाता

ट्रेन की भीड़ पर सुनाई गईं उनकी हास्य व्यंग्य की कविता खूब सराही गई...

ट्रेन में इतनी भीड़ थी भाई
कि हाथ को मुँह भी नहीं देता था दिखाई
एक आदमी ने बीड़ी सुलगाई
और मेरे मुहँ में लगाई


हास्य रस की डरावनी कविता सुनाने जा रहा हूँ, कह के महेंद्र जी ने भूतों पर लिखी अपनी कविता सुनाई जिसमें व्यंग्य के नुकीले बाण थे-

वे एक दूसरे से बतिया रहे थे
आदमियों के एक से बढ़ के एक भयानक किस्से सुना रहे थे
ये कल रात ही शहर हो के आया है
इस पर जरूर किसी आदमी का साया है
किसी झाड़ फूँक वाले को बुलाओ इस पर से आदमी उतरवाओ
-------
पेड़ से उल्टा लटका देगा और वोट माँगेगा
और याद रख अपने इलाके की वोटर लिस्ट में तो
तू वैसे भी अभी तक नहीं मरा होगा
---
एक वरिष्ठ भूत बोला उन इन्सानों की बस्तियों के बारे में सोच
जो साथ-साथ होते हुए भी वीरान है
उनसे ज्यादा आबाद तो कब्रिस्तान और श्मशान हैं....



लोगों को हँसाते महेन्द्र अजनबी

इस के बाद अरुण जेमिनी जी ने आश करण अटल जी को मंच पर ये कहते हुए बुलाया कि इनके नाम को लिखने में हमेशा गलती हुई है, इन के नाम में आशा भोंसले वाला आश है, कुम्भकर्ण वाला करण है, और अटल बिहारी बाजपेई वाला अटल है... तीन-तीन नामों का सम्मिश्रण हैं।
मिडिया पर सुनाई उनकी कविता ने सभी का मन मोह लिया....

क्या उनको पता था कि अंतिम साँस लेने के बाद वो मर जायेंगे...
जी पता था...
जब उनको पता था कि अंतिम साँस लेने के बाद वो मर जायेंगे तो उन्होंने अंतिम साँस क्यों ली?
जी राष्ट्रहित में ..


"हाइवे के हमदम" शीर्षक की कविता ने लोगों को इतना हँसाया की आँखें झलक उठीं ...

ये है दुनिया का सब से बड़ा ओपन एयर शौचालय
आप यहाँ क्या कर रहे है?
जी में यहाँ क्या कर रहा हूँ ये तो आप देख ही रहे हैं...
पर आप यहाँ क्या कर रहे हैं?


इसके बाद उन्होंने अपनी कविता "क्या हमारे पूर्वज बंदर थे" सुनाई। ये कविता राजिस्थान में कक्षा 11 की पाठ्यपुस्तक में पढ़ाई जाती है।
अरुण जेमिनी जी ने हँसीवर्षा के इस क्रम को जारी रखा। उनके हरयाणवी अन्दाज ने कविता को और भी मनोरंजक बना दिया।

एक आदमी कुत्ते को घुमा रहा था दूसरे ने पूछा----
ताऊ कुत्ते को घुमरिया है के
नहीं ये तो ऊंट है कद छोटा रह गया है



संयोजक नंदलाल और संचालक अरुण जैमिनी

अरुण जेमिनी जी की कविता "21वीं में सदी में ढूँढ़ते रह जाओगे" ने हास्य के साथ लोगों को सोचने पर भी विवश कर दिया।

चीजों में कुछ चीजें बातों में कुछ बातें वो होंगी
जिन्हें कभी देख नहीं पाओगे
21वीं में सदी में ढूँढ़ते रह जाओगे
अध्यापक जी सचमुच पढ़ाये
अफसर जो रिश्वत न खाये
बुद्धिजीवी जो राह दिखाये
कानून जो न्याय दिलाये
बाप जो समझाए
और ऐसा बेटा जो समझ जाये
ढूँढ‌़ते रह जाओगे
नेहरु जैसी इज़्ज़त
सुभाष जैसी हिम्मत
पटेल के इरादे
शास्त्री सीधे-साधे
पन्ना धाय का त्याग
राणा प्रताप की आग
अशोक का बैराग
तानसेन का राग
चाणक्य का नीति ज्ञान
इन्दिरा गाँधी जैसी बोल्ड
और महात्मा गाँधी जैसा गोल्ड
ढूँढ़ते रह जाओगे

कार्यक्रम के प्रारंभ में श्री अखिल कुमार जी ने पिछले कवि सम्मेलनों का स्लाइड शो दिखाया, जिस को दर्शकों ने खूब सराहा। श्री संजीव अग्रवाल, श्री मोती अग्रवाल और श्री अभय गर्ग का ही प्रयास था की सुव्यवस्थित हॉल, सुसज्जित मंच और सुस्वादिष्ट भोजन की सभी ने भूरि-भूरि प्रशंसा की।


उपस्थित श्रोतागण

अंतरराष्ट्रीय हिंदी समीति ने हिंदी का नन्हा सा जो दिया जलाया था, वो आज सूरज बन चमक रहा था। इस का भान इसी बात से हो रहा था कि आज 700 से भी अधिक लोग इस हास्य कविसम्मेलन का आन्नद लेने के लिए यहाँ एकत्रित थे। लगातार तीन घंटा तीस मिनट चले इस कवि सम्मलेन में हँसते-हँसते लोगों के पेट में बल पड़ गए। जीवन की आपाधापी में हम हँसना लगभग भूल ही गए हैं, इस तरह के आयोजन हमें जीने की नई उर्जा देते हैं। कुछ लोगों के अनुसार तो वो आज जितना हँसे हैं, उतना जीवन में शायद ही कभी हँसे हों। उनका ये भी कहना था कि बड़े-बड़े कॉन्सर्ट में जाने से अच्छा है कि कवि सम्मेलनों में जाया जाए। मिडलैंड और ह्यूस्टन के कार्यक्रम भी बहुत सराहनीय रहे। 9 मई तक इनके कार्यक्रम चलेंगे। इन कवि सम्मेलनों में हिन्दी भाषी जब एक छत तले इकट्ठे होते हैं तो अमेरिका में भी भारत बसा महसूस होता है। चारों तरफ देश की महक फैली महसूस होती है।

रिपोर्ट- रचना श्रीवास्तव

Saturday, February 27, 2010

हिंदी दिवस की महत्ता में एक नया मोर पंख - "नवतरंग" का लोकार्पण एवं काव्यगोष्ठी

दिनांक रविवार, २१ फरवरी २०१० अंतराष्ट्रीय हिंदीं समिति, न्यू जर्सी शाखा के अध्यक्ष श्री रामबाबू गौतम जी द्वारा संपादित प्रवासी साहित्यकारों का संग्रह "नवतरंग" साहित्य के कैनवास पर एक नया अयाम प्रदान करता रहा. अंतर्राष्ट्रीय. हिन्दी दिवस के उपलक्ष में एक इन्द्र-धनुषी कवि सम्मलेन का सफ़ल आयोजन हुआ जिसमें मुख्य अतिथि सम्माननीय डॉ. विजय कुमार मेहता, न्यूयार्क (अखिल विश्व समिति) ने अध्यक्षता की. अन्य मुख्य महमान रहे, श्री देवेन्द्र सिंह, रचयिता सिंह, एस.मलिक, श्री अनूप भार्गव, श्री शेरबहादुर सिंह एवं डा. रेखा रस्तोगी.



डॉ. मेहता तथा श्री रामबाबू गौतम ने माँ सरस्वती के चरणों में दीप प्रज्ज्वलित करके इस आयोजन की शुरूवात स्वागत स्वरूप यह कहते हुए किया -

"निज भाषा उन्नति अहे, करता हूँ प्रणाम
न्यू जर्सी में सरस्वती बढी, ले कविता की शाम
कोटि- कोटि हिंदी अहे, दे प्रवासी सम्मान,
रूख- रूख उभरी यहाँ, कर कवियों का सम्मान

इसके बाद अमेरिका में जन्में दो भारतीय बच्चे प्राची व् उसके भाई सूर्य ने अपने साज़ और आवाज़ के संगम से सुर लय ताल में मधुर राष्ट्रीय गान "वन्दे मातरम" गाकर श्रोताओं का मन मोह लिया.

शुरुवाती वक्तव्य में श्री शेरबहादुर सिंह जी.. अंतराष्ट्रीय हिंदीं समिति.के पूर्व अध्यक्ष... ने कहा कि 'यह एक स्वर्ण युग है हिंदी भाषा के लिए. इतने हिंदी सेवी निष्टा से इस प्रचार प्रसार के आन्दोलन में जुटे हुए हैं, अब हिंदी के प्रवाह को कोई नहीं रोक सकता. अब अपने संगठित प्रयासों से भाषा जी जड़ों को और मज़बूत करना है.



हिंदी USA के संस्थापक श्री देवेन्द्र सिंह एवं रचिता सिंह भी इस अवसर पर मौजूद रहे. अपने विचारों को व्यक्त करते हुए रचयिता जी ने कहा "जब तक हम मिलकर हिंदी भाषा के लिए काम नहीं करेंगे, तब तक आने वाली पीढ़ियों को उनकी विरासत देने का प्रयास सफल नहीं होगा" श्री देवेन्द्र सिंह ने हिंदी के कार्यों का विवरण देते हुए उनमें और सक्रियता की आशा की. इससे साफ़ ज़ाहिर होता है की वे हिंदी को प्रवास में स्थापित करने के स्वप्न को लेकर कितने सक्रिय रूप से जुटे हुए हैं. जोश भरी इस रचना से उन्होंने श्रोताओं, कविओं में जोश का संचार किया...

हिन्दू जागो हिंदी सीखो हिन्दोस्तान बचाना है/

भारत मान की आन बाण का डंका हमें बजाना है.

भावों के आदान प्रदान के पश्चात् काव्य गोष्टी प्रारंभ हुई. कवि- सम्मेलन के प्रथम सत्र के शामिल कवि इस प्रकार थे -



श्री अशोक सिंह, डॉ. सरिता मेहता, श्रीमती पूर्णिमा देसाई, श्री हिमांशु ओम पाठक, श्रीमती शशी पाधा, श्रीमती सुषमा मल्होत्रा. राम बाबू गौतम जी के संचालन में पाठ का आगाज़ किया श्री अशोक व्यास जी ने अपने वतन के प्रति एक निष्टावान पंक्तियों से " मेरा भारत महान" और पाठ करने वाले वरिष्ठ रचनाकार, शायर, अपनी अपनी अनुभूतियों से महफ़िल को सजीव व् रुचिकर करने में सफल रहे. डा. सरिता मेहता ने इस दौर में बचपन की हंसी की कमी की ओर विशेष ध्यानर देते हुए सुंदर रचना से माहौल को रौनक प्रदान की. कवियित्री शशि पाधा एक सैनिक की पत्नि है, जिन्होंने एक मार्मिक, हृदयस्पर्शी रचना उन सैनिकों की ओर से पढ़ी जो जी-जान से भारत माँ की शान पर अपनी निष्टा के सुमन चढ़ा कर वहीँ सरहदों पर शहादत का परचम फहरा गए. अंत की ओर आते आते सुश्री सुषमा मल्होत्रा ने इन्द्रधनुषी रचना से रंगों के बिम्ब खींचते हुए होली के त्यौहार को सजीव व् सकारात्मक स्वरुप प्रदान किया.



दूसरे सत्र के पहले "नवतरंग" का लोकार्पण डा. विजय मेहता, अथवा अन्य मुख़्य महमान के हाथों

संपूर्ण हुआ. उस संकलन में शामिल रचनाकार रहे श्रीमती अनंत कौर, डॉ. बबीता श्रीवास्तव , श्रीमती देवी नागरानी, श्रीमती बिंदु भट्ट , श्री रामबाबू गौतम, डॉ. रेखा रस्तोगी 'कल्प' , स्व. श्रीमती सीमा अरोरा , लेखक डॉ. हेमंत शर्मा. नवतंरंग के साहित्यकारों का सन्मान सुमन शाल और हिंदी दिवस प्रमाण पत्र से किया गया..



दुसरे सत्र में काव्य गोष्टी का संचालन किया डॉ.सरिता मेहता ने किया . इस सूत्र के कवि रहे डॉ. रानी नगिंदर, श्रीमती अनंत कौर, डॉ. बबीता श्रीवास्तव , श्रीमती देवी नागरानी, अनुराधा चंदर, वीरेन्द्र कुमार चौधरी, डॉ. रेखा रस्तोगी, रामबाबू गौतम, ललित अहुलवालिया, डॉ. हेमंत कुमार शर्मा, वी.के चौधरी, जिन्होंने अपने अपने गीत ग़ज़ल की सरिता से महफिल में रंग भरा.

अंत में अपने अध्यक्षता के दौर में डॉ. विजय मेहता ने अनेकों शेर' का पाठ करते हुए अच्छा समां बांधा . अन्य कई श्रोता मौजूद रहे जिनमें खास रहे अर्चना जी, अशोक ओझा जी, श्री देव मक्कड़, रश्मी मक्कड, राकेश जी अपने परिवार, साहित और सरिता मेहता ने इस आयोजन में सक्रिय भागीदारी के साथ इसे सफ़ल बनाया. रामबाबू गौतम ने सभी उपस्थित गण का अभार प्रकट किया. कार्यक्रम की समाप्ति भोजन के साथ हुई.

देवी नागरानी

Friday, January 22, 2010

हिंदी यू.एस.ए की ओर से कविता पाठ प्रतियोगिता



दिनांक शनिवार, १६ जनवरी २०१० Hindi USA जिसके संस्थापक हैं श्री देवेन्द्र सिंह एवं रचिता सिंह, उसकी अनेक शाखाओं से अपने आप में सर्वोतम काम करती शाखा जिसके संचालक श्री राज मित्तल हैं "एडिसन हिन्दी पाठशाला" के छात्रों की कविता पाठ प्रतियोगिता सफलतापूर्ण संपन हुई जिसमें एडिसन हिदी पाठशाला के १६० छात्र / छात्राओं ने जो अमेरिका में ही जन्मे तथा पले हैं उन्होंने भाग लिया। अधिकांश छात्र ६ वर्ष से १२ वर्ष की आयु के बीच के हैं। कविता पाठ प्रतियोगिता २ समूहों में विभाजित की गयी है. प्रत्येक समूह में तीन निर्णायकों की एक मंडली रही. इस विभाग के सेनानी संचालक है राज मित्तल, मानक काबरा, अजय कुमार, और गोपाल चतुर्वेदी।

कविता पाठ प्रतियोगिता २ समूहों में विभाजित की गयी। प्रत्येक समूह में तीन निर्णायकों की एक मंडली रही। १२:०० से २:०० बजे निर्णय करने वाले थे-



पहले समूह में रहे श्री रामबाबू गौतम, सुश्री देवी नागरानी जी, डा. श्री उमेश शुक्ला और दूसरे समूह में २.०० से ४.०० तक रहे डा. श्री हिमांशु ओम पाठक , डा. श्री नरेश शर्मा, डा. श्री सुशील श्रीवास्तव.बच्चों के मापदंड की श्रेणियां थीं उच्चारण , आत्मविश्वास, शैली, अभिव्यक्ति, स्मरण।

पहले समूह के तीन सत्र रहे जिन में अलग अलग उम्र के हिसाब से बच्चों को मौका दिया गया था। और उन तीनों सत्रों के संचालन का भार संभाला शशि शर्मा, प्रतिभा जी, और अंजलि मलिक ने। बच्चों ने अनेकों कविताएं पढ़ीं जिनमें कुछ महादेवी वर्मा की और श्याम सुंदर अग्रवाल जी की भी शामिल थी, जिनके उन्वान रहे कोयल, चंदामामा, कछुआ, हाथी राजा, घड़ी, सारी दुनिया गोल है, तोता, मेरा घर, दिवाली, सारे जहाँ से अच्छा। कई कविताएँ सुनी हुई फिर से बच्चों के मुख से सुनने में भली लगी।

कविता पाठ से झलक रही थी हिंदी सिखाने वाले निस्वार्थ भावी हिंदी सेवक-सेविकाएँ की निष्ठा जो शुक्रवार के दिन इन कक्षाओं की बागडोर संभल लेते हैं।

अंत की ओर आते मन को छूने वाली कविता का पाठ किया कुमारी सुमेघा दुबे ने अपने दादा जी श्री सूर्यदत्त दुबे जी ( उनका दुखद निधन १५, जनवरी २०१० को हुआ) की एक रचना उन्हें ही श्रधांजलि स्वरूप अर्पित करते हुए पढ़ी

दीनानाथ दया निधि
दीजे कोई ऐसी संधि

यह प्रतियोगता सिर्फ बच्चों की ही नहीं थी, इस सफ़लता के भागीदार रहे उनके माता-पिता, उनके शिक्षक जिन्होंने इन बच्चों को वतन की मिट्टी और उसके परिवेश के साथ जोड़ने में सहयोगी और सहभागी बने हैं. हिंदी भाषा के माध्यम से ये बच्चे अपने मनोबल को बढ़ाते हुए अपनी संस्कृति के साथ परिचित हो पाए हैं जिसका श्रेय इन हिंदी सेवकों को जाता है जिन्होंने अपने कन्धों पर मातृभाषा को यहाँ इस परिवेश में स्थापित करने की ठान ली है। इस समारोह के सफल कार्यकर्ता रहे : राज मित्तल, मानक काबरा, अजय कुमार, गोपाल चतुर्वेदी, अर्चना कुमार, अरुण कुमार , सीमा गुप्ता, शिव एवं सुधा अग्रवाल, सुशील एवं वन्दना अग्रवाल, दीपक एवं नूतन लाल, तथा अन्य तरुण कार्यकर्ता, अमर्पित अध्यापक एवं अभिभावक। ऐसे देश के सिपाहियों को मेरी शुभकामनयें और हार्दिक बधाई . जय हिंद




प्रस्तुतकर्ताः
देवी नागरानी, न्यू जर्सी, dnangrani@gmail.com

Monday, November 16, 2009

सिन्धी असोसिएशन ऑफ़ शिकागो द्वारा मनाया गया गुरु नानक देव जी का जन्मदिन



14 नवम्बर, शिकागो के मदीना (Madina) उपनगर के "ॐ शांति मंदिर" में सिन्धी असोसिएशन ऑफ़ शिकागो की तरफ से श्री गुरु नानक देव जी का जन्म दिन धूमधाम से मनाया गया, जिसमें लगभग 300 के करीब लोगों की भागीदारी रही। शाम के 6.00 बजे से रात के 10.00 बजे तक कार्य की समाप्ति हुई।

शुरूआत का पहला चरण गुरुबानी व अन्य भजन कीर्तन से हुआ जिसमें पूरी संगत तन्मय होकर साथ देती रही। 8.00 बजे गुरु दर्शन की रस्म की अदायगी हुई और शंख व फूलों की बरखा हुई। अंत में आनंद साहब का पाठ हुआ और फिर आरती की रस्म पूरी हुई। गुरु ग्रन्थ से वचन लेकर समारोह की समाप्ति की गयी।

अंत में लंगर का आरंभ हुआ और सभी लोग एल दूजे से मिलते मिलाते हुए प्रसाद ग्रहण करते रहे। व्यवस्था असोसिएशन के प्रेजिडेंट श्री हरेश हर्पलानी जी की देख-रेख में की गयी जिसकी बागडोर आज की नव पीढ़ी अपने साथ से बखूबी पूर्ण कर पाई।


पूरी रस्मों के तहद देश से दूर लोग अपने धर्म और संस्कृति के प्रति भारतीय प्रवासी आज भी उतने ही जागरूक हैं जितने की हिंदुस्तान में। इन भारतीय संस्कारों की बुलंदिओं का चराग़ जहाँ भी रौशन होगा वह स्थान, वह धरती हमारे देश की धरती से किसी भी प्रकार भी कम न होगी। जहाँ-जहाँ एक भी हिन्दोस्तानी का दिल धड़केगा, सच में वहीँ वहीँ देश की सौंधी मिट्टी की महक फिजाओं में पाई जायेगी।

प्रेषक-
देवी नागरानी
न्यू जर्सी

Tuesday, June 23, 2009

भारतीय विद्या भवन के सभागार में हिंदी भाषा की धाराओं का संगम



न्यूयॉर्क।

डॉ. कृष्ण कुमार एवं श्री अनूप भार्गव के सम्मिलित प्रयास से २९ मई, २००९ रविवार की सांध्यवेला में न्यूयॉर्क के भारतीय विद्या भवन में अमेरिका की हिंदी विकास मंच और इंग्लैंड की गीतांजलि नामक संस्थाओं के सौजन्य से एक अद्वितीय काव्य-संध्या का आयोजन सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। यह कार्यक्रम इस दृष्टिकोण से अद्वितीय था कि यह विश्व के एक भूभाग (इंग्लैंड) के हिन्दी प्रेमियों द्वारा दूसरे भूभाग (उत्तरी अमरीका) की सद्‍भावना यात्रा का एक महत्वपूर्ण अंग था।

भारतीय विद्या भवन के श्री दीपक दवे ने सभागार में उपस्थित व्यक्तियों का स्वागत करते हुए डॉ० जयरामन की ओर से कार्यक्रम के लिये शुभकामनाएं दीं और भविष्य में भी होने वाले ऐसे आयोजनों में भवन की ओर से पूर्ण सहयोग का आश्वासन दिया।

इंग्लैंड से आये इस सद्‌भावना-मण्डल में डॉ० कृष्ण कुमार के नेतृत्व में आये अन्य कवि-कवियित्रियों के नाम इस प्रकार हैं: श्री परवेज़ मुज़फ्फर, डॉ. कृष्ण कन्हैया, श्रीमती नीना पॉल, श्रीमती अरुण सब्बरवाल, श्री नरेन्द्र ग्रोवर, श्रीमती जय वर्मा, श्रीमती स्वर्ण तलवाड़। डॉ० कृष्ण कुमार ने अपने दल के सदस्यों का संक्षिप्त परिचय दिया और गीतांजलि संस्था के विषय में भी जानकारी दी। उन्होंने बताया कि गीतांजलि एक बहुभाषी साहित्यिक समुदाय है जो मुख्य रूप से बरमिंघम, यू.के., में स्थित है पर अब इसकी शाखायें अन्य शहरों में भी शुरू हो रही हैं। यह संस्था अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर साहित्य के विकास की दिशा में निष्ठा के साथ सेवा करती आई है। हिंदी की सेवा करने का महत्वपूर्ण कार्य साहित्य लेखन के माध्यम से हो रहा है। प्रवासी भारतीय अनेक हिंदी कार्यक्रमों की रूप-रेखा रचते चले आ रहे हैं। उनका अपने देश की मिट्‍टी से प्रेम और हिंदी भाषा व संस्कृति से लगाव प्रशंसनीय है।

डॉ० कृष्ण कुमार ने अपना विश्वास प्रकट करते हुए कहा कि "भारत से दूर रहकर अपनी भाषा को कैसे जीवित रखा जाये, इस प्रयास में आने वाली कठिनाइयों से कैसे जूझा जाय, और संभावनाओं को कैसे साकार किया जाय इस दिशा में प्रवासी भारतीय साहित्यकारों का योगदान सराहनीय है। यही वे भारतीय है जो भारतीयों में बची भारतीयता को बचाने की कोशिश कर रहे हैं"। उन्होंने यह चिंता व्यक्त की कि "हम भारतीय अपनी छोटी समझ के कारण खुद को छोटे-छोटे भागों में बाँट रहे हैं और केवल एकता का नारा पीट रहे हैं"। उनका कहना है कि विचार व्यक्ति से बढ़ता है। गाँधी एक विचार लेकर चले और आज़ादी हासिल की। एक व्यक्ति दीवाली में एक दीपक घर में जलाये, तो घर प्रज्वलित होता है।

हिंदी विकास मंच की ओर से श्री अनूप भार्गव ने समयाभाव के कारण संक्षेप में ही ई‌‌-कविता याहू ग्रुप के सफल प्रयोग के विषय में बताया। अन्तर्जाल पर जाना-माना यह मंच कई वर्षों से हिंदी साहित्य, विशेषकर कविता के क्षेत्र में, प्रगतिशील है और इसके सदस्यों की संख्या लगभग ६०० हो चुकी है। सदस्य विश्व के कोने-कोने से इस गुट से जुड़े हैं। हिन्दी विकास मंच की परिकल्पना हिन्दी के विकास में योगदान दे रही संस्थाओं को एक सूत्र में बाँधने के विचार से की गई है। इंग्लैंड से कवियों को उत्तरी अमेरिका की यात्रा करने का निमंत्रण इसी विचार की पहली कड़ी है। अनूप जी ने बताया कि न्यूयॉर्क के अतिरिक्त कनाडा के टोरंटो शहर में होने वाले कार्यक्रम में भी कवियों का यह दल भाग लेगा।

विचारों के आदान प्रदान के उपरान्त डॉ० कृष्ण कुमार की अध्यक्षता में काव्य पाठ का आरम्भ हुआ। श्रीमती स्वर्ण तलवाड़ ने अपने साथियों का परिचय करवाते हुए उन्हें मंच पर आमांत्रित करने का संचालन-भार बखूबी निभाया। उनके साथ आए हुए यू.के. के सभी साथियों ने अपनी रचनाएं प्रस्तुत कीं। बीच-बीच में श्री अनूप भार्गव ने न्यूयॉर्क, न्यू जर्सी, और फिलाडेल्फिया में रहने वाले स्थानीय कवियों को भी संक्षिप्त परिचय के साथ काव्य पाठ के लिये आमंत्रित किया। इन कवियों में थे डा॰ सरिता मेहता, श्री घनश्याम चंद्र गुप्त, श्रीमती बिन्देश्वरी अग्रवाल, श्री राम गौतम, डा॰ अंजना संधीर, देवी नागरानी, और स्वयं श्री अनूप भार्गव। अंत में अध्यक्ष डॉ० कृष्ण कुमार ने अपनी रचनाओं और उत्कीर्ण विचारों से इस साहित्य सरिता को समेटा। अंतर्राष्ट्रीय हिंदी समिति की न्यूयॉर्क शाखा के पूर्वाध्यक्ष मेजर शेर बहादुर सिंह भी श्रोताओं में उपस्थित रहे।

कार्यक्रम का समापन भारतीय विद्या भवन के श्री दीपक दवे ने आगन्तुक कवियों और श्रोताओं को धन्यवाद देते हुए किया। श्री दवे ने कहा कि पूरा कार्यक्रम उनके लिये एक सुखद अनुभव था। इस प्रकार एक सफल काव्य-संध्या सम्पन्न हुई। सभागार में श्रोताओं की उपस्थिति शोचनीय रूप से कम रहने के विषय में कई लोग असंतुष्ट दिखाई-सुनाई दिये। इस विषय में विचार और प्रयत्न करने की आवश्यकता है।

प्रस्तुति- देवी नागरानी

Saturday, June 13, 2009

न्यूयॉर्क की एक शाम अंजना संधीर के नाम

न्यूयॉर्क । संयुक्त राज्य अमेरिका

दिनांक 7, जून 2009 को पूर्णमासी के दिन श्रीमती पूर्णिमा देसाई के शिक्षायतन के देवालय में डॉ अंजना संधीर के सम्मान में एक काव्य गोष्ठी का आयोजन सफलता पूर्ण संपूर्ण हुआ। वातावरण की पवित्रता में माँ की स्तुति गायन वन्दनीय रहा।

आगाज़ी शब्दों में पूर्णिमा देसाई शिक्षायतन की संस्थापिका एवं निर्देशिका ने ये कहते हुए "मैं एक ऐसी विभूति को बुला रही हूँ जिन्होंने साहित्य के प्रचार में, संस्कृति के प्रचार में अपना योगदान दिया है और वह है डा. अंजना संधीर, जिन्होंने मंच की शान बढाते हुए दीप प्रज्वलित किया। शिक्षायतन संस्था के संगीत विभाग से जुड़े सुर-सागर के माहिर पंडित कमल मिश्रा जी ने माता के चरणों में गुलाब के फूलों को अर्पित करते हुए सरस्वती वंदना की।

अपने भावों को व्यक्त करते हुए अंजना जी ने कहा " मै यहीं हूँ, यहीं थी और यहाँ से कहीं नहीं गयी" और अपनी व्याख्यान में कुछ न कहते हुए उन्होने यू. के. से आए श्री कृष्ण कुमार जो को सादर आमंत्रित किया, जिन्होंने अपने विचार प्रस्तुत करने से पहले पूर्णिमा जी को बधाई की पात्र मानते हुए अंजना के लिये कहा कि " अंजना जी का काम बोलता है" यह हर नारी जाति के लिए गर्व की बात रही जो "प्रवासिनी के बोल" और "प्रवासी आवाज़" के मंच पर अपने आपको स्थापित कर पाई है। अंजना जी का कहना और मानना है कि अमेरिका के हर शहर में उसका एक घर है और सीमाओं से परे उनके रिश्ते हैं जिनकी कोई सरहद नहीं बाँध पाएगी।

भावों के आदान-प्रदान के पश्चात काव्य गोष्ठी का आरंभ हुआ, जिसका स्वरूप अंतर्राष्ट्रीय गोष्ठी से कम न था। रचना-पाठ का शुरूआत डा. दाऊजी गुप्त ने किया, जो लखनऊ से पधारे थे। यू. के. से आये डा. कृष्ण कुमार ने अपनी रचना पाठ के बाद अपने साथी साहित्यकारों और कविगणों को आवाज़ दी जिनमें वहां मौजूद थे श्री कृष्ण कन्हैया, श्री नरेन्द्र कोहली, जय वर्मा, श्रीमती स्वर्ण तलवाड़। उसके ही पश्चात अनूप और रजनी भार्गव ने अपनी नन्हीं नन्हीं कविताओं के कपोलों से ज़िन्दगी के अंकुरित नए रंग माहौल में भर दिए। टोरंटो से श्री गोपाल बगेल जी ने सुरमई धुन में अपनी रचना सुनाई। फिर मंच को थामा न्यू यार्क तथा न्यू जर्सी के कविओं में जिनमें शामिल रही श्री अशोक व्यास, श्री ललित अहलुवालिया, मंजू राई, बिन्देश्वरी अग्रवाल, अंजना संधीर, पूर्णिमा देसाई, गौतमजी, पुष्पा मल्होत्रा, नीना वाही, अनुराधा चंदर, डा. अनिल प्रभा, गिरीश वैद्य, देवी नागरानी, लखनऊ से आई श्रीमती शशि तिवारी और उनकी सुपुत्री शिवरंजनी। श्रोताओं में रहे श्री कथूरिया जी, परवीन शाहीन, रेनू नंदा और अनेक साहित्यप्रेमी। यहाँ डॉ. सरिता मेहता का ज़िक्र करना भी ज़रूरी होहगा, जो खुद विध्याधाम संस्था की निर्देशिका है और साथ में एक अच्छी कवयित्री भी और इस काव्य सुधा की शाम में उनका पूरी तरह से सहकार रहा।

अंत में पूर्णिमा जी ने अंजना जी का सम्मान "साहित्य मणि' की उपाधि से श्री दाऊजी गुप्त के हाथों से करवाया और सभी कविगणों का साधुवाद किया। अंत में रात्रि-भोजन का भी उत्तम प्रबंध था।

प्रस्तुति- देवी नागरानी

Saturday, May 9, 2009

न्यूयार्क विश्वविद्यालय में हिंदी-उर्दू का ग्रीष्म कालीन प्रशिक्षण

(समाचार-सौजन्यः डॉ.बिन्देश्वरी अग्रवाल, न्यूयार्क)

आगमी 7 जुलाई 2009 से 17 जुलाई 2009 तक से न्यूयार्क विश्वविद्यालय, अमेरिका में 10 दिनों का ग्रीष्म कालीन हिंदी-उर्दू का शिक्षक-प्रशिक्षण वर्कशॉप होने जा रहा है। यह वर्कशॉप अमेरिका में सूचीबद्ध विदेशी भाषायों को बढ़ावा देने हेतु हर वर्ष अलग-अलग कैम्पस में किया जाता है। हिंदी-उर्दू के अलावा स्टॉरटाक अरबी और फारसी में यह प्रशिक्षण देने का कार्य करता है। इस बार यह कार्यशाला न्यूयार्क विश्वविद्यालय एवं अमेरिका की "स्टारटाक प्रोग्राम" के संयुक्त तत्वाधान में आयोजित किया जा रहा है। जिसके अंतर्गत प्रशिक्षु को विदेशी भाषा पढाने के नए तकनीक एवं भाषा का अनुवाद करने के तरीकों से अवगत कराया जाता है। इसमें प्रक्षिणुओं को अपने आस-पास के उपलब्ध उपकरणों, दृश्य-श्रव्य माध्यमों को पहचानने और इनका इस्तेमाल अपने विद्यार्थियों को भाषा की समझ विकसित करने की तरीके का प्रशिक्षण दिया जाता है। इसे न्यूयार्क राज्य द्वारा मान्यता प्राप्त कोर्स का दर्जा भी प्राप्त है।

इस वर्कशॉप में स्नातक पास विद्यार्थी भाग ले सकते हैं। साथ-साथ वर्कशॉप के लिए कई सुविधाएँ हैं-
स्थान- न्यूयार्क विश्वविद्यालय, कैम्पस
तिथि- 7-17 जुलाई, 2009
प्रशिक्षण शुल्क- 900 डॉलर मात्र (जिसमें "स्टारटाक" को सरकार से 700 डॉलर का अनुदान प्राप्त है)
अत: हर प्रशिक्षु को मात्र 200 डॉलर देना होगा।
आवेदन-पत्र भेजने की अन्तिम तिथि 18 मई 2009 है ।
विशेष सुविधा- 10 दिनों की रहने की एवं भोजन की नि:शुल्क सुविधा है।

विदेशी भाषा को बढ़ावा देने का अमेरिकी सरकार का एक अच्छा कार्यक्रम है। विशेष जानकारी हेतु, कृपया यहाँ संपर्क करें-
STARTALK
Middle Eastern and Islamic Studies
New York University
50 Washington Square South, Room 200
New York, NY 10012

आवेदन पत्र डाउनलोड करने के लिए तथा इस कोर्स के बारे में अधिक जानकारी के लिए यहाँ क्लिक करें।