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Wednesday, July 28, 2010

स्मृति संगीत संध्या ’सत्य राग’ का आयोजन



नर्मदापुरम् (होशंगाबाद)। सांस्कृतिक, साहित्यिक, सृजनधर्मी संयोजन नर्मदापुरम् कला जगत द्वारा प्रसिद्ध गीतकार ‘सत्यकवि’ स्व. ठाकुर बृजमोहन सिंह के जन्म दिवस के अवसर पर स्मृति संगीत संध्या ’सत्य राग’ का आयोजन किया गया। स्थानीय एन. ई. एस. महाविद्यालय के सभागृह में हुये कार्यक्रम में ठाकुर बृजमोहन सिंह द्वारा रचित गीतांे की भव्य संगीतमय प्रस्तुति नर्मदापुरम् कला जगत के कलाकारों द्वारा दी गई।

समाजसेवी व पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष पं. भवानी शंकर शर्मा के मुख्य आतिथ्य, साध्वी राधामुनि जी के विशेष आतिथ्य एवं वरिष्ठ गायक श्री ओमप्रकाश शर्मा की अध्यक्षता में संपन्न इस गरिमामयी कार्यक्रम में सरस्वती आराधना, दीप प्रज्जवलन एवं बाल कलाकारों ज्ञानप्रिया, मनप्रीति व रीतिका द्वारा अतिथियों के सत्कार पश्चात् ‘सत्यकवि’ बृजमोहन द्वारा रचित गणेश वंदना ‘गणपति गिरजानंदन, स्वीकार करो वंदन‘ से आरंभ विविधता से परिपूर्ण कार्यक्रम में ‘सत्यकवि’ की कालजयी रचनाओं ‘घटा उतरी है, आंगनों के गांव में,‘ ‘जहॉं भी गये, हम अहम छोड़ आये,’ ‘कुछ अकारण कटा सा है मन इन दिनों,’ ‘छंदों की जंजीर,’ ‘छैला ज्वार के, पीर हरो रामा पीर,’ ‘धुआँ सांसों की काया का,’ ‘गोरी नर्मदा कछार की,’ ‘फूल दुपहरिया के’ आदि के मनमोहक प्रवाह में अंतिम प्रस्तुति के रुप में बृजमोहन सिंह की अमर कृति ‘शक्ति दे, भक्ति दे, सत्य दे, धर्म दे‘ दी गई।



श्रीमती जयश्री तरडे, श्री ओ.पी. शर्मा, श्री राम परसाई, श्री राकेश दुबे, श्री नमन तिवारी, सुश्री रागिनी तरडे, सुश्री नेहा दीक्षित, सुश्री रेणुका जैन के सुमधुर गायन के साथ बेहतरीन संगत श्री इंदर सोनी (तबला), श्री कमल झा(सिंथेसाइज़र), श्री उमाशंकर(श्री
रत्नेश साहू व श्री महाराज सिंह के सुव्यवस्थित कार्य प्रबंधन ने कार्यक्रम को अविस्मरणीय बना दिया। कार्यक्रम के अंत में आभार वरिष्ठ कवि रंगकर्मी श्री जगदीश वाजपेई ने व्यक्त किया।


देर रात तक चले इस कार्यक्रम में कार्यकारिणी सदस्य श्री राधेश्याम रावल, श्री तेजेश्वर प्रसाद मिश्र, श्री सजीवन ’मयंक’, श्री
रामकृष्ण दीक्षित सहित बड़ी संख्या में प्रबुद्ध श्रोताओं और आसपास के क्षेत्रों के ठाकुर बृजमोहन सिंह के प्रशंसकों की उपस्थिति में देर रात तक चले कार्यक्रम की सर्वत्र सराहना की जा रही है।

Tuesday, June 29, 2010

नगीना के सम्मान में बहुरंगी कार्यक्रम आयोजित



नर्मदापुरम्। सांस्कृतिक, साहित्यिक, सृजनधर्मी संयोजन नर्मदापुरम् कला जगत व्यापक रुप से साहित्य, संगीत, नाट्यकला, चित्रकला, मूर्तिकला, अभिनय, नृत्य आदि विभिन्न ललित कला क्षेत्रों में साधनारत् तथा कला प्रेमियों, कला मर्मज्ञों का समन्वित मंच है। नर्मदापुरम् कला जगत निरंतर प्रयासरत् है कि नर्मदापुरम् क्षेत्र के कला साधकों को उनकी साधना का यथोचित प्रतिसाद प्राप्त हो और उन्हें प्रतिष्ठित मंच व अवसर मिले। इसी श्रृखला में नर्मदापुरम् कला जगत द्वारा वरिष्ठ गीतकार श्री मगन लाल ‘नगीना’ के सम्मान में आयोजित उनके ही लिखे बहुरंगी गीतों पर आधारित सुरमयी संगीत सभा ’गीत नगीना के’ की भव्य प्रस्तुति नर्मदापुरम् कला जगत के कलाकारों ने दी। नर्मदापुरम् (होशंगाबाद) के कला इतिहास में संभवतः पहली बार ऐसा अवसर उपस्थित हुआ, जब किसी कवि विशेष पर केन्द्रित उच्च स्तरीय संगीत के कार्यक्रम को स्थानीय संगीतकारों, गायक-गायिकाओं तथा वादकों ने बेहतरीन ढंग से प्रस्तुत किया हो।
स्थानीय विधायक पं. गिरजा शंकर शर्मा के मुख्य आतिथ्य, पूर्व मंत्री श्री मधुकर राव हर्णे की अध्यक्षता तथा वरिष्ठ समाजसेवी श्री राकेश फौजदार के विशेष आतिथ्य में संपन्न इस गरिमामयी कार्यक्रम में अतिथियों द्वारा श्री मगन लाल ‘नगीना’ का शॉल व श्रीफल से सम्मान कर दीर्घायु होने की शुभकामनायें दी। कला के विविध आयामों के प्रचार-प्रसार व उन्नयन हेतु एवं कलाकारों के हितार्थ सक्रिय रुप से कार्यरत् नर्मदापुरम् कला जगत द्वारा स्थापित कलाकार कल्याण कोष के माध्यम से श्री ‘नगीना’ को साहित्य में उनके विशिष्ठ योगदान हेतु सम्मान स्वरूप ग्यारह हजार रुपये की राशि भेंट की गई। इस पुनीत कार्य में नगर के प्रबुद्ध कलाप्रेमी नागरिकों का सराहनीय सहयोग प्राप्त हुआ।



सरस्वती आराधना, दीप प्रज्जवलन एवं अतिथि सत्कार के पश्चात् श्री ‘नगीना’ द्वारा रचित गणेश वंदना ‘हे गजानन जगत तेरी पूजा करे‘ से आरंभ विविधता से परिपूर्ण कार्यक्रम में ‘प्रभु तुम कैसे खेल रचाये’, ‘गीत गाने का मौसम’, ‘प्यार मीठी चुभन जिंदगी के लिये’, ‘कदम उठे जहॉ जहॉ’, ‘तेज़ हवा है’, ‘मुझको भूली सी कोई याद’, ‘जिधर भी देखा नज़र उठा के’, ‘तुम गंध बनो मधुबन की’, ‘हर छंद सलौने हैं’, ‘भुला सको तो भुला दो’ आदि सुमधुर भजन, गीतों, ग़ज़लों, सूफीयाना कलाम के मनमोहक प्रवाह में अंतिम प्रस्तुति देशभक्ति से ओत-प्रोत गीत ‘सब मिल बोलो प्यार से वन्दे मातरम्‘ दी गई। संगीतकार श्रीमती जयश्री तरडे, श्री अयूब खॉन, सुश्री जया ‘नर्गिस’, श्री राम परसाई, श्री राकेश दुबे, श्री नमन तिवारी, श्री प्रियम पटैरिया सहित कार्यक्रम में सम्मिलित सभी सहयोगी कलाकारों को पं. महेश तिवारी, श्री राधेश्याम रावल, श्री तेजेश्वर प्रसाद मिश्र ने स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया गया। प्रतिवेदन श्री संतोष व्यास द्वारा प्रस्तुत किया गया। प्रो. रागिनी दुबे के सशक्त मंच संचालन एवं श्री रामकृष्ण दीक्षित व श्री रत्नेश साहू के सुव्यवस्थित कार्य प्रबंधन ने कार्यक्रम को अविस्मरणीय बना दिया। अंत में आभार श्री नित्य गोपाल कटारे ने व्यक्त किया। आयोजन को सफल बनाने में श्री ओम प्रकाश शर्मा, श्री जगदीश वाजपेई, श्री सजीवन ‘मयंक’, श्री मोहन वर्मा ’साहिल’, श्री सुभाष यादव का अथक सहयोग प्राप्त हुआ। बड़ी संख्या में प्रबुद्ध श्रोताओं की उपस्थिति में देर रात तक चले इस कार्यक्रम की सर्वत्र सराहना की जा रही है।

Tuesday, February 9, 2010

सजीवन मयंक की कृति पत्थर खिंची लकीर का लोकार्पण

होशंगाबाद । मध्य प्रदेश



नगर के वरिष्ठ रचनाकार सजीवन मयंक की काव्य कृति पत्थर खिंची लकीर (दोहा संग्रह) का लोकार्पण मेकलसुता दोहा पत्रिका के सम्पादक श्रीकृष्ण स्वरूप शर्मा मैथिलेन्द्र एवं डॉ. गिरिजा शंकर शर्मा के कर कमलों से शिव संकल्प साहित्य परिषद के भव्य आयोजन में किया गया। श्री कृष्ण स्वरूप शर्मा ने उक्त संग्रह को मील का पत्थर निरुपित करते हुए मयंक जी के दोहे-

लाख मिटाओ न मिटे पत्थर खिंची लकीर।
हम सबने पाई यहाँ ऐसी ही तकदीर।।

को संदर्भित किया, संग्रह में पर्यावरण जातिवाद, भाषावाद, दहेज, भ्रूण हत्या एवं सामाजिक विसंगतियों पर 520 दोहे संग्रहित हैं। इस अवसर पर प्रदेश से अनेक साहित्यकार श्रीमती प्रभा पाण्डे पुरनम (जबलपुर), आचार्य अमरनाथ दीपक (जालौन), पं. विष्णुदयाल गोस्वामी मुरैना, श्रीमती स्वराज ग्रोवर, श्री बाबूलाल खण्डेलवाल, श्री जगदीश वाजपेयी, श्री ब्रजमोहन पाण्डे, श्री प्रहलाद गायकवाड़ एवं नगर के अनेक गणमान्य नागरिक एवं साहित्य प्रेमी उपस्थित थे, इस अवसर पर गीत संगीत गोष्ठी का आयोजन हुआ। कार्यक्रम का संचालन पं. गिरि मोहन गुरु ने किया।

Friday, October 23, 2009

सजीवन मयंक की पुस्तक जिंदगी के स्वर का लोकार्पण



दिनांक 21 अक्टूबर 2009 को नगर होशंगाबाद के वरिष्ठ साहित्यकार सजीवन मयंक के 67वें जन्मदिन के अवसर पर उनके सातवे संकलन ‘‘जिंदगी के स्वर’’ का लोकार्पण नगर के नेहरू पार्क में वरिष्ठ साहित्यकार जगमोहन शुक्ल के कर कमलों द्वारा किया गया। श्री शुक्ला जी ने मयंक जी की रचनाओं को आज के दौर की वास्तविकताओं का काव्य रूप निरूपित किया तथा मयंक जी के इस शेर को संदर्भित किया ‘ कहते हैं हम जिसे जिंदगी, लगती एक मशीन है यारों’। इस अवसर पर नगर के होशंगाबाद के अनेक गणमान्य नागरिक एवं साहित्यकारों में मोहन वर्मा, गिरीमोहन गुरू, कृष्ण स्वरूप शर्मा, एम.पी.मिश्रा, एवं सुश्री जया नर्गिस विशेष रूप से उपस्थित थे। श्री मयंक के इस संकलन में 100 ग़ज़लें, 200 मुक्तक, एवं 40 क्षणिकाएं समाहित हैं।

Wednesday, December 31, 2008

व्यंग के पुरोधा राम ठाकुर 'दादा' नहीं रहे

जबलपुर, १९-१२-२००९ । हास्य-व्यंग के क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बनाने वाले अनूठे शिल्पी श्री राम ठाकुर 'दादा' के निधन से संस्कारधानी के साहित्य जगत में सन्नाटा व्याप्त है। वर्ष १९९४ में मध्य प्रदेश के मुख्य मंत्री श्री दिग्विजय सिंह एवं ख्यातिलब्ध साहित्यकार-शिक्षाविद श्री शिव मंगल सिंह 'सुमन' के कर कमलों से वागीश्वरी पुरस्कार से सम्मानित किए जा चुके दादा ने स्वातंत्र्योत्तर संस्कृत-काव्य में हास्य-व्यंग विषय पर शोधोपाधि प्राप्त की थी। उनका जन्म २८ जनवरी १९४६ को ग्राम बरंगी, तहसील सोहागपुर, जिला होशंगाबाद में हुआ था। उनके समृद्ध रचना संसार में हास्य-व्यंग संग्रह 'दादा के छक्के', लघुकथा संग्रह 'अभिमन्यु का सत्ताव्यूह', व्यंग निबंध संग्रह 'ऐसा भी होता है', व्यंग उपन्यास 'पच्चीस घंटे', गद्य संग्रह 'मेरी प्रतिनिधि व्यंग रचनाएं', व्यंग लेख संग्रह ' प से पर्स, पिल्ला और पति', हास्य खंड काव्य 'दादा की रेल यात्रा' आदि प्रमुख हैं।

दादा ने साहित्य निर्देशिका, पोपट तथा अभिव्यक्ति पत्रिकाओं का सम्पादन किया था। दूर संचार विभाग में वरिष्ठ दूरभाष पर्यवेक्षक रहे दादा की सरलता, सहजता तथा अपनापन आजकल दुर्लभ होता जा रहा है। दादा की अंत्येष्टि स्थानीय रानीताल स्थित श्मशान ग्रह में हुई। दादा को विनम्र श्रद्दाँजलि अर्पित करते हुए उनकी कुछ पंक्तियाँ पाठकों के लिए प्रस्तुत है--

मंहगाई को प्रथम मनाऊँ, जो सुरसा सम बढ़ती जाय।
भ्रष्टाचार को शीश झुकाऊँ, जिसकी जवानी चढ़ती जाय।
कथा बखानूं मैं रेलों कीश्रोता सुनियो कान लगाय।
सुमरन कर लूँ रेल मंत्री का, जिनकी रेल चले लहराय।