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Tuesday, April 20, 2010

हृषिकेश सुलभ को मिलेगा साल 2010 का कथा (यूके) सम्मान

इस साल के इंदु शर्मा कथा सम्मान और पद्मानंद साहित्य सम्मान की घोषणा

कथा (यू के) के महा सचिव एवं प्रतिष्ठित कथाकार श्री तेजेन्द्र शर्मा ने लंदन से सूचित किया है कि वर्ष 2010 के लिए अंतर्राष्ट्रीय इंदु शर्मा कथा सम्मान कहानीकार और रंगकर्मी हृषीकेश सुलभ को राजकमल प्रकाशन से 2009 में प्रकाशित उनके कहानी संग्रह वसंत के हत्यारे पर देने का निर्णय लिया गया है। इस सम्मान के अन्तर्गत दिल्ली-लंदन-दिल्ली का आने-जाने का हवाई यात्रा का टिकट (एअर इंडिया द्वारा प्रायोजित) एअरपोर्ट टैक्स़, इंगलैंड के लिए वीसा शुल्क़, एक शील्ड, शॉल, लंदन में एक सप्ताह तक रहने की सुविधा तथा लंदन के खास-खास दर्शनीय स्थलों का भ्रमण आदि शामिल होंगे। यह सम्मान श्री हृषीकेश सुलभ को लंदन के हाउस ऑफ कॉमन्स में 08 जुलाई 2010 की शाम को एक भव्य आयोजन में प्रदान किया जायेगा। सम्‍मान समारोह में भारत और विदेशों में रचे जा रहे साहित्‍य पर गंभीर चिंतन भी किया जायेगा।

इंदु शर्मा मेमोरियल ट्रस्ट की स्थापना संभावनाशील कथा लेखिका एवं कवयित्री इंदु शर्मा की स्मृति में की गयी थी। इंदु शर्मा का कैंसर से लड़ते हुए अल्प आयु में ही निधन हो गया था। अब तक यह प्रतिष्ठित सम्मान चित्रा मुद्गल, संजीव, ज्ञान चतुर्वेदी, एस आर हरनोट, विभूति नारायण राय, प्रमोद कुमार तिवारी, असग़र वजाहत, महुआ माजी, नासिरा शर्मा और भगवान दास मोरवाल को प्रदान किया जा चुका है।

15 फ़रवरी 1955 को बिहार के छपरा में जनमे कथाकार, नाटककार, रंग-समीक्षक हृषीकेश सुलभ की विगत तीन दशकों से कथा-लेखन, नाट्‌य-लेखन, रंगकर्म के साथ-साथ सांस्कृतिक आन्दोलनों में सक्रिय भागीदारी रही है। आपके तीन कहानी संग्रह बँधा है काल, वधस्थल से छलाँग और पत्थरकट - एक जिल्द में तूती की आवाज़ के नाम से प्रकाशित।

आपको अब तक कथा लेखन के लिए बनारसी प्रसाद भोजपुरी सम्मान, नाट्‌यलेखन और नाट्‌यालोचना के लिए डा. सिद्धनाथ कुमार स्मृति सम्मान, और रामवृक्ष बेनीपुरी सम्मान मिल चुके हैं।

इस कार्यक्रम के दौरान भारत एवं विदेशों में रचे जा रहे हिन्दी साहित्य के बीच के रिश्तों पर गंभीर चर्चा होगी।

वर्ष 2010 के लिए पद्मानन्द साहित्य सम्मान इस बार संयुक्‍त रूप से श्री महेन्‍द्र दवेसर दीपक को मेधा बुक्‍स, दिल्‍ली से 2009 में प्रकाशित उनके कहानी संग्रह अपनी अपनी आग के लिए और श्रीमती कादम्‍बरी मेहरा को सामयिक प्रकाशन से प्रकाशित उनके कहानी संग्रह पथ के फूल के लिए दिया जा रहा है। दिल्‍ली में 1929 में जन्‍मे श्री महेन्‍द्र दवेसर ‘दीपक’ के इससे पहले दो कहानी संग्रह पहले कहा होता और बुझे दीये की आरती प्रकाशित हो चुके हैं। दिल्ली में ही जन्‍मी श्रीमती कादम्‍बरी मेहरा अंग्रेज़ी में एम.ए. हैं और उन्‍हें वेबज़ीन एक्सेलनेट द्वारा साहित्य सम्मान मिल चुका है। इससे पहले उनका एक कहानी संग्रह कुछ जग की प्रकाशित हो चुका है।

इससे पूर्व इंगलैण्ड के प्रतिष्ठित हिन्दी लेखकों क्रमश: डॉ सत्येन्द श्रीवास्तव, सुश्री दिव्या माथुर, श्री नरेश भारतीय, भारतेन्दु विमल, डा.अचला शर्मा, उषा राजे सक्‍सेना,गोविंद शर्मा, डा. गौतम सचदेव, उषा वर्मा और मोहन राणा को पद्मानन्द साहित्य सम्मान से सम्मानित किया जा चुका है।

कथा यू.के. परिवार उन सभी लेखकों, पत्रकारों, संपादकों मित्रों और शुभचिंतकों का हार्दिक आभार मानते हुए उनके प्रति धन्यवाद ज्ञापित करता है जिन्होंने इस वर्ष के पुरस्कार चयन के लिए लेखकों के नाम सुझा कर हमारा मार्गदर्शन किया और हमें अपनी बहुमूल्य संस्तुतियां भेजीं।


सूरज प्रकाश

Monday, May 11, 2009

भगवानदास मोरवाल को कथा (यू. के.) तथा मोहनराणा को पद्मानंद सम्मान

पन्द्रहवाँ कथा यू.के. सम्मान हाउस ऑफ़ कामन्स में

कथा (यू के) के मुख्य सचिव एवं प्रतिष्ठित कथाकार तेजेन्द्र शर्मा ने लंदन से सूचित किया है कि वर्ष 2009 के लिए अंतर्राष्ट्रीय इंदु शर्मा कथा सम्मान उपन्‍यासकार भगवान दास मोरवाल को राजकमल प्रकाशन से 2008 में प्रकाशित उपन्यास रेत पर देने का निर्णय लिया गया है। इस सम्मान के अन्तर्गत दिल्ली-लंदन-दिल्ली का आने जाने का हवाई यात्रा का टिकट (एअर इंडिया द्वारा प्रायोजित) एअरपोर्ट टैक्स़, इंगलैंड के लिए वीसा शुल्क़, एक शील्ड, शॉल, लंदन में एक सप्ताह तक रहने की सुविधा तथा लंदन के खास खास दर्शनीय स्थलों का भ्रमण आदि शामिल होंगे। यह सम्मान श्री मोरवाल को लंदन के हाउस ऑफ कॉमन्स में 09 जुलाई 2009 की शाम को एक भव्य आयोजन में प्रदान किया जायेगा।

इंदु शर्मा मेमोरियल ट्रस्ट की स्थापना संभावनाशील कथा लेखिका एवं कवयित्री इंदु शर्मा की स्मृति में की गयी थी। इंदु शर्मा का कैंसर से लड़ते हुए अल्प आयु में ही निधन हो गया था। अब तक यह प्रतिष्ठित सम्मान चित्रा मुद्गल, सर्वश्री संजीव, ज्ञान चतुर्वेदी, एस आर हरनोट, विभूति नारायण राय, प्रमोद कुमार तिवारी, असग़र वजाहत, महुआ माजी एवं नासिरा शर्मा को प्रदान किया जा चुका है।

23 जनवरी 1960 को नगीना, मेवात में जन्मे भगवान दास मोरवाल ने राजस्थान विश्वविद्यालय से एम.ए. की डिग्री हासिल की। उन्हें पत्रकारिता में डिप्लोमा भी हासिल है। मोरवाल के अन्य प्रकाशित उपन्यास हैं काला पहाड़ (1999) एवं बाबल तेरा देस में (2004)। इसके अलावा उनके चार कहानी संग्रह, एक कविता संग्रह और कई संपादित पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं। दिल्ली हिन्दी अकादमी के सम्मानों के अतिरिक्त मोरवाल को बहुत से अन्य सम्मान प्राप्त हो चुके हैं। उनके लेखन में मेवात क्षेत्र की ग्रामीण समस्याएं उभर कर सामने आती हैं। उनके पात्र हिन्दू-मुस्लिम सभ्यता के गंगा जमुनी किरदार होते हैं। कंजरों की जीवन शैली पर आधारित उपन्यास रेत को लेकर उन्हें मेवात में कड़े विरोध का सामना करना पड़ा।

वर्ष 2009 के लिए पद्मानन्द साहित्य सम्मान मोहन राणा को उनके कविता संग्रह धूप के अन्धेरे में (2008 – सूर्यास्त्र प्रकाशन, नई दिल्ली) के लिए दिया जा रहा है। मोहन राणा का जन्म 1964 में दिल्ली में हुआ. वे दिल्ली विश्वविद्यालय से मानविकी में स्नातक हैं, आजकल ब्रिटेन के बाथ शहर के निवासी हैं। उनके 6 कविता संग्रह प्रकाशित हो चुके हैं। भारत में साहित्य की मुख्यधारा के आलोचक उन्हें हिन्दी का महत्वपूर्ण लेखक मानते हैं। कवि-आलोचक नंदकिशोर आचार्य के अनुसार - हिंदी कविता की नई पीढ़ी में मोहन राणा की कविता अपने उल्लेखनीय वैशिष्टय के कारण अलग से पहचानी जाती रही है, क्योंकि उसे किसी खाते में खतियाना संभव नहीं लगता।

इससे पूर्व इंगलैण्ड के प्रतिष्ठित हिन्दी लेखकों क्रमश: डॉ सत्येन्द श्रीवास्तव, दिव्या माथुर, नरेश भारतीय, भारतेन्दु विमल, डा.अचला शर्मा, उषा राजे सक्‍सेना,गोविंद शर्मा, डा. गौतम सचदेव और उषा वर्मा को पद्मानन्द साहित्य सम्मान से सम्मानित किया जा चुका है।

कथा यू.के. परिवार उन सभी लेखकों, पत्रकारों, संपादकों मित्रों और शुभचिंतकों का हार्दिक आभार मानते हुए उनके प्रति धन्यवाद ज्ञापित करता है जिन्होंने इस वर्ष के पुरस्कार चयन के लिए लेखकों के नाम सुझा कर हमारा मार्गदर्शन किया और हमें अपनी बहुमूल्य संस्तुतियां भेजीं।



सूरज प्रकाश : भारत में कथा यूके के प्रतिनिधि, email: kathaakar@gmail.com mob: 9860094402
74-A, Palmerston Road, Harrow & Wealdstone (Middx.) HA3 7RW
E-mail: kathauk@gmail.com website: www.kathauk.connect.to Mobile: 07868 738 403

Monday, April 6, 2009

दिल्ली में हुआ तेजेन्द्र शर्मा पर केन्द्रित पुस्तक 'वक़्त के आइने में' का विमोचन



लंदन के चर्चित हिन्दी कहानीकार तेजेन्द्र शर्मा पर प्रकाशित अभिनंदन-ग्रंथ 'वक़्त के आइने में' का लोकार्पण नई दिल्ली के राजेन्द्र भवन सभागार में हुआ। पुस्तक का विमोचन वरिष्ठ आलोचक प्रो॰ नामवर सिंह, वरिष्ठ कहानीकार कृष्णा सोबती और हंस के संपादक राजेन्द्र यादव ने किया। इस अभिनंदन-ग्रंथ के संपादक हरि भटनागर हैं जो एक वरिष्ठ कथाकार हैं और चर्चित साहित्यिक पत्रिका रचना-समय के संपादक भी हैं। इस पुस्तक में देश-विदेश के कथा आलोचकों तथा कहानीप्रेमियों की तेजेन्द्र की कहानियों पर रायों को संकलित किया गया है। अपने सम्पादकीय वक्तव्य में हरि भटनागर ने कहा कि जब वे इंडिया टुडे के लिए पिछले साठ सालों में प्रकाशित श्रेष्ठ २५ कहानियों का संकलन कर रहे थे तो उन्होंने तेजेन्द्र की एक कहानी 'कब्र का मुनाफ़ा' को भी इसमें ज़गह दी थी। यह जानने के बाद उनको कई धमकी भरे खत और फोन आए। उन्हें बहुत अफसोस था कि ज्यादातर पाठक-लेखक नाम से कहानियाँ पढ़ते हैं और उसपर अपनी राय बनाते हैं।

आधारवक्तव्य देते हुए युवा कहानीकार और जामिया मिल्लिया इस्लामिया में प्राध्यापक अजय नावरिया ने कहा कि तेजेन्द्र की कहानियाँ समय की उपज हैं जो भारत के बाहर भारतीयों की ज़िदगियों को देखने का अवसर देती हैं। तेजेन्द्र की कहानियों और उनके व्यक्तित्व के कई आयाम हैं, जिन्हें इस पुस्तक में सुसंकलित किया गया है। उन्हें यह ग्रंथ बहुत ज़रूरी लगता है।

कार्यक्रम के संचालक अजीत राय ने बताया कि वे २ साल पहले तक तेजेन्द्र शर्मा को कथाकार नहीं मानते थे। वे उन्हें विश्व हिन्दू परिषद का समर्थक और कट्टर हिन्दूवादी मानते थे। जब वे लंदन गए तो तेजेन्द्र ने उन्हें कुछ कहानियाँ पढ़ने को दी, लेकिन उन्होंने उसे कूड़े में फेंक दिया। लेकिन जब पढ़ा तो पढ़ते चले गए, उनके सामने एक नई दुनिया खुल गई।

कार्यक्रम के मुख्य-अतिथि प्रो॰ नामवर सिंह ने तेजेन्द्र को एक समर्थ कथाकार बताया और यह उम्मीद व्यक्त की कि वे भविष्य में और भी प्रौढ़ कहानियाँ लिखेंगे। हरि भटनागर ने कहा कि वे आने वाले समय में अन्य साहित्यकारों के व्यक्तित्व और कृतित्व पर भी इस तरह के संकलन के प्रकाशन की योजना बना रहे हैं।

नूर ज़हीर ने इस ग्रंथ में संकलित सुधा ओम धींगरा का तेजेन्द्र के नाम पत्र पढ़कर सभी दर्शकों को भाव-विभोर कर दिया। राजेन्द्र यादव ने भी इस कार्यक्रम तथा इस अभिनंदन-ग्रंथ का स्वागत किया। उन्होंने प्रवासी रचनाकार से यह सवाल भी पूछा कि बाबरी मस्जिद विध्वंस के बाद भारत में लगातार उपजी तनाव की स्थिति के लिए क्या उनका सोने की ईंटें भेजना जिम्मेदार नहीं है। प्रवासी साहित्यकारों को अपनी लेखनी को कभी इस गुत्थी को सुलझाने में भी इस्तेमाल करना चाहिए।

कृष्णा सोबती ने तेजेन्द्र को एक कुशल कहानीकार बताया और कुछ-एक कहानियों के दृश्य तथा वक्तव्य पढ़कर सुनाए। उनकी एक कहानी 'टेलीफोन लाइन' को उन्होंने 'पहले हाथ का माल' यानी भोगी गई कहानी बताया और कहा कि लेखन-पाठन के इतने लम्बे तजुर्बे के बावज़ूद उन्हें यह बिलकुल अंदाज़ा नहीं था कि यह कहानी यहाँ खत्म होगी।

कार्यक्रम में कहानीकार कन्हैयालाल नंदन, लीलाधर मंडलोई, मुम्बई से सूरज प्रकाश, मधु अरोरा, जमशेदपुर से विजया शर्मा, भोपाल से आशा सिंह, हंगरी की हिन्दी विद्वान मारिया, सुभाष नीरव इत्यादि साहित्यकार उपस्थित थे।