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Tuesday, October 5, 2010

प्रो. हर्मन वॉन आल्‍फन का ‘अमेरिका में हिन्दी’ पर विशेष व्‍याख्‍यान



गुड़गाँव
विश्‍व नागरी विज्ञान संस्‍थान के तत्‍वावधान में 19 अगस्‍त, 2010 को के.आई.आई.टी. एजुकेशन वर्ल्‍ड के के.आई.आई.टी. कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग के परिसर में टेक्‍सॅस विश्‍वविद्यालय, ऑस्टिन (यू.एस.ए.) के दक्षिण एशियाई अध्‍ययन संस्‍थान के हिन्दी-उर्दू फ्लैगशिप के निदेशक प्रो. हर्मन वॉन आल्‍फन का व्‍याख्‍यान ‘अमेरिका में हिन्दी की स्थिति’ पर नागरी विज्ञान संस्‍थान के अध्‍यक्ष श्री बलदेवराज कामराह की अध्‍यक्षता में आयोजित हुआ। नागरी विज्ञान संस्‍थान के उपाध्‍यक्ष और के.आई.आई.टी. कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग के कार्यपालक निदेशक डॉ. श्‍याम सुंदर अग्रवाल ने प्रो. वॉन आल्‍फन का स्‍वागत किया। नागरी विज्ञान संस्‍थान के महासचिव ओर निदेशक प्रो. कृष्‍ण कुमार गोस्‍वामी ने संस्‍थान का परिचय देते हुए और प्रो. वॉन आल्‍फन के कृतित्‍व पर भी प्रकाश डालते हुए कहा कि अंतरराष्‍ट्रीय संदर्भ में हिन्‍दी की विशिष्‍ट भूमिका हो गई है और विश्‍वजनीन भाषा के रूप में यह विभिन्‍न कार्यक्षेत्रों में भी प्रयुक्‍त होने लगी है।

प्रो. वॉन आल्‍फन ने हिन्‍दी के महत्‍व की चर्चा करते हुए कहा कि हिन्‍दी विश्‍व की तीन बड़ी भाषाओं –चीनी, हिन्‍दी और अंग्रेजी में मानी जाती है। हिन्‍दी की व्‍यापकता को देखते हुए अमेरिका में विश्‍ववि़द्यालयों के अतिरिक्‍त हिन्‍दी स्‍कूलों में भी पढ़ाई जाती है। ह्यूस्‍टन में एक हिन्‍दी स्‍कूल है जिसमें स्‍पे‍निश, गोरे और प्रवासी भारतीय बच्‍चे पढ़ाए जा रहे हैं। उत्तर टेक्‍सॅस में तीन साल से व्‍यापार से संबद्ध हिन्‍दी और चीनी में से किसी एक भाषा का चयन कर सकते हैं। ग्रीष्‍मकाल में अटलांटा में एक सौ अमरीकी बच्‍चों को दस दिन हिन्‍दी सिखाई जाती है। टेक्‍सॅस विश्‍वविद्यालय में भी भाषा संबंधी फ्लैगशिप कार्यक्रम चलाए जाते हैं। यह कार्यक्रम सन् 2002 में प्रारंभ हुआ था। पहले चीनी और अरबी फ्लैगशिप का श्रीगणेश हुआ था, बाद में हिन्‍दी-उर्दू फ्लैगशिप की स्‍थापना हुई। इस हिन्‍दी-उर्दू फ्लैगशिप कार्यक्रम का उद्ददेश्‍य शिक्षार्थियों को वैश्विक व्‍यवसायी (ग्‍लोबल प्रोफेशनल) बनाना है जिसमें चार वर्ष तक डॉक्‍टर, इंजीनियर, प्रशासनिक आदि लोग हिन्‍दी सीखते हैं। इसका यह भी लक्ष्‍य है कि इन व्‍यवसायों के लोग अंग्रेजी में तो काम करते ही हैं, हिन्‍दी में भी काम करें।

प्रो. हर्मन वॉन आल्‍फन ने इस बात का उल्लेख किया कि हिन्‍दी एक गंभीर मामला है, यह कोई मनोरंजन का विषय नहीं है। ऐसा आवश्‍यक है कि सभी गंभीर कार्य अंग्रेजी में किया जाए। उन्‍होंने यह भी बताया कि भारत में राष्‍ट्रमंडल खेलों के दौरान विदेशियों को ऐसा न लगे कि भारत में अंग्रेजी ही प्रयुक्‍त होती है। अत: अपनी भाषा का विशिष्‍ट स्‍थान होता है और इस दृष्टि से दुनिया के सभी लोग भारत की ओर देख रहे हैं और इसमें हिन्‍दी की विशेष भूमिका है।

अंत में के.आई.आई.टी. कॉलेज ऑफ एजुकेशन के प्राचार्य प्रो. मंजीत सेनगुप्‍ता ने धन्‍यवाद ज्ञापन किया। इस व्‍याख्‍यान में नागरी लिपि परिषद् के सचिव डॉ. परमानंद पांचाल, के.आई.आई.टी. एजुकेशन वर्ल्‍ड के चीफ एक्‍जीक्‍यूटिव डॉ. हर्ष वर्धन, प्रो. आर.के.जैन, प्रो. वी.के. स्‍याल की उपस्थिति उल्‍लेखनीय रही है।

व्‍याख्‍यान से पूर्व विश्‍वनागरी विज्ञान संस्‍थान की कार्यकारिणी स‍मिति की बैठक हुई, जिसमें प्रो. हर्मन वॉन आल्‍फन का स्‍वागत हुआ और उन्‍हें अमेरिका के प्रतिनिधि के रूप में कार्यकारिणी समिति का सदस्‍य घोषित किया गया। संस्‍थान के महासचिव प्रो. कृष्‍ण कुमार गोस्‍वामी ने संस्‍थान की गतिविधियों की जानकारी देते हुए इसके भावी कार्यक्रमों की भी चर्चा की। अंत में संस्‍थान के अध्‍यक्ष श्री बलदेवराज कामराह ने नागरी लिपि को सूचना प्रौद्योगिकी से जोड़कर विश्‍व स्‍तर पर लाने पर बल दिया।

रिपोर्ट- प्रो. कृष्‍ण कुमार गोस्‍वामी

Friday, August 6, 2010

गांधी दर्शन से ही भय, हिंसा, गरीबी, आतंकवाद से मुक्ति

असगर अली इंजीनियर का उद्‍बोधन



उदयपुर। हिंसा मानव स्वभाव है, मानव की प्रकृति है लेकिन सत्य पर डटे रहने, इच्छाओं के शमन तथा लोभ, लालच की मुक्ति से अहिंसा को जिया जा सकता है। इसके लिए सत्ता व शक्ति को प्राप्त करने के मोह को छोडकर मानव सेवा को जीवन का लक्ष्य बनाना होगा ।
यह विचार प्रसिद्ध सुधारवादी चिंतक डॉ0 असगर अली इंजीनियर ने डॉ0 मोहनसिंह मेहता मेमोरियल ट्रस्ट द्वारा आयोजित संगोष्ठी में व्यक्त किए। असगर अली ने धर्म, मजहब की विस्तृत विवेचना करते हुए कहा कि हर धर्म, मजहब सत्य, अहिंसा, मानवीय गरिमा, मूल्य आधारित व्यवहार व स्वतंत्रता पर जोर देता है। लेकिन वर्तमान में धर्म-मजहब रिति-रिवाजों, कथित परम्पराओं, कर्मकाण्डों में जकड कर रह गया है। उन्होंने खात पंचायतों, ऑनर किलिंग के संदर्भ में कहा कि इन कथित परम्पराओं, जाति व समाज के अहम तथा पहचान के अभिमान का परिणाम है कि एक मां अपने बच्चे की हत्या कर देने में गर्व महसूस करती है।
वैश्वीकरण व उदारीकरण के संदर्भ में इंजीनियर ने कहा कि आधुनिक तकनीकी इच्छाओं, कृत्रिम आवश्यकताओं को जन्म देती है। इसकी पूर्ति के लिये अधिक उत्पादन होता है तथा उत्पादन के लिए कच्चा माल, सस्ता मानव श्रम हासिल करने में युद्ध व शोषण होते है। अमेरिका इसी कारण कांगो, वियतनाम, इराक पर बम युद्ध थोपता है। असगर अली ने नागरिकों से अपील करते हुए कहा कि जमीर, अन्तकरण की आवाज पर चलने, गांधी की तरह सियासत, राजनीति के बीच रहते हुए सत्य व अहिंसा को जीने तथा सत्याग्रह के पवित्र हथियार है। यंत्र से ही हम मानव समाज को अच्छा तथा भय, गरीबी, युद्ध से मुक्ति दिला सकते है।
संगोष्ठी के प्रारम्भ में ट्रस्ट के सचिव नन्दकिशोर शर्मा ने गांधीजी के जीवन मूल्यों, सत्य के साथ प्रयोग तथा हिन्द स्वराज के विचार पर विस्तृत प्रकाश डाला तथा असगर अली व विषय से संभागियों को परिचित कराया। अध्यक्षता गांधीवादी चिंतक किशोर सन्त ने की तथा धन्यवाद ट्रस्ट के अध्यक्ष विजयसिंह मेहता ने ज्ञापित किया । संगोष्ठी में स्वतंत्रता सेनानी एम0पी0 बया सहित मन्सूर अली, सज्जनकुमार ने भी विचार व्यक्त किए। संचालन डॉ0 जेनब बानू ने किया ।

नीतेश सिंह

Thursday, May 6, 2010

''ग्लोबलाइज्ड अर्थव्यवस्था में हिंदी की भूमिका'' पर व्याख्यान संपन्न



हैदराबाद । 6 मई, 2010
केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड के राजभाषा प्रभाग के तत्वावधान में आयकर निदेशालय के अंतर्गत देश भर में कार्यरत हिंदी अनुवादकों के लिए 'आयकर शिखर' में आयोजित त्रिदिवसीय अखिल भारतीय सेमिनार के दूसरे दिन विशेष वक्ता के रूप में पधारे प्रो.ऋषभ देव शर्मा ने ''ग्लोबलाइज्ड अर्थव्यवस्था में हिंदी की भूमिका'' पर व्याख्यान दिया।

अतिथि व्याख्याता ऋषभ देव शर्मा ने विस्तार से यह स्पष्ट किया कि ग्लोबलाइज्ड अर्थव्यवस्था में भारत केवल दुनिया भर के माल की खपत के लिए मंडी ही न रहकर उत्पादक और विक्रेता के रूप में भी उभर रहा है। उन्होंने वैश्विक कारोबार,सूचना प्रौद्योगिकी और बाज़ार की दृष्टि से हिंदी की आवश्यकता और क्षमता के बारे में बताते हुए आगे यह भी कहा कि कंप्यूटर और मोबाइल का जितना प्रसार होगा तथा आर्थिक विकास जितनी जल्दी गाँवों को लक्षित करेगा , हिन्दी सहित सभी स्थानीय भाषाओं के लिए उतना ही अनुकूल माहौल बनेगा क्योंकि गाँवों तक व्यवसाय इन्हीं भाषाओं के माध्यम से प्रसारित हो सकता है।

आरम्भ में आयकर निदेशालय के राजभाषा अधिकारी आर के शुक्ल ने प्रो.शर्मा का परिचय देते हुए स्वागत किया। सुश्री साहू के धन्यवाद प्रस्ताव के साथ चर्चा संपन्न हुई।