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Friday, May 21, 2010

देश के सिस्टम पर प्रहार करता नाटक ‘फुटबाल के बराबर अंडा’ ......

वीडिओ संपादन एवं प्रस्तुति श्रीकन्त मिश्र 'कान्त'



चंडीगढ़। ‘बेशक देश में लोकतांत्रिक प्रणाली है, लेकिन आम जनता क्या आजादी से अपने बारे में सोच सोचती है। क्या लोग आजादी से काम कर सकते हैं। इंसाफ पाने के इंतजार में आम आदमी मौत के द्वार तक पहुंच जाता है,लेकिन इंसाफ नहीं मिल पाता। इस सबके बावजूद आम जनता इसी सिस्टम का पालन करने को मजबूर है और मिलकर इस सिस्टम के खिलाफ आवाज नहीं उठाती।’ देश के सिस्टम पर प्रहार करता नाटक ‘फुटबाल के बराबर अंडा’ सेक्टर-17 स्थित आईटीएफटी की बेसमेंट के मंच पर पेश किया आईटीएफटी के कलाकारों ने। नाटक की कहानी में पुलिस तंत्र में फैले भ्रष्टाचार पर कटाक्ष किया गया

एसएचओ बेनीवाल अपने नए स्टेशन में आकर उस समय परेशान हो जाता है जब उसे पता चलता है कि उस थाना क्षेत्र में कोई चोरी या अन्य अपराध नहीं होता। वह अपने हवलदारों के माध्यम से डकैतों तक यह संदेश पहुंचाता है कि वे बेफिक्र होकर उसके क्षेत्र में अपनी गतिविधियां चला सकते हैं। इतना ही नहीं, वह हवलदार से किसी भी व्यक्ति को पकड़ लाने का आदेश देता है तो हवलदार एक तमाशा दिखाने वाले को पकड़ लाता है। एसएचओ तमाशे वाले की बुरी तरह पिटाई करवाता है जिस पर तमाशे वाले उसके खिलाफ कोर्ट में केस कर देता है। लेकिन 30 साल तक इंतजार के बाद भी उसे इंसाफ नहीं मिल पाता और अंत में इंसाफ मिलने की उम्मीद लिए ही उसकी मौत हो जाती है। तमाशे वाले का किरदार निभाने वाले अंश ने दर्शकों के दिल पर अमिट छाप छोड़ तो अन्य पात्रों एसएचओ बने जगमीत, पत्रकार बनी अपराजिता, हवलदार बने नम्रता और अमन ने भी अपने-अपने पात्रों के साथ बखूबी न्याय किया। नाटक का लेखन और निर्देश चक्रेश कुमार का था ।

‘फुटबाल के बराबर अंडा’

Sunday, July 19, 2009

शिमला के एतिहासिक गेयटी थियेटर में देवदास नाटक की सफल प्रस्तुतियां

प्रसिद्ध रंग कर्मी हबीब तनवीर और मनोहर सिंह को समर्पित

चुन्नी बाबू के रूप में गिरीश और पारो के रूप में प्रभा

शिमला।

पिछले दिनों शिमला के ऐतिहासिक गेयटी थियेटर में अखिल भारतीय रंग एवं कला मंच ’डिजाइन इंडिया’ द्वारा भारत में पहली बार, बांग्ला उपन्यासकार शरत्‌चन्द्र की अमर कृति देवदास पर आधारित तथा प्रख्यात लेखक श्री जगदम्बा प्रसाद दीक्षित द्वारा मंच के लिए रूपान्तरित नाटक देवदास की दो सफल प्रस्तुतियां अभिमन्यु पांडेय के निर्देशन में की गई। अभिमन्यु पिछले कई वर्षों से मुम्बई में रंगमंच तथा छोटे पर्दे की गतिविधियों से सक्रिय रूप से जुड़े रहे हैं। हाल ही में उनके द्वारा निर्देशित नाटक ’मैं एकाकी’ काफी चर्चा में रहा है जिसके अब तक 19 मंचन हो चुके हैं।

इस नाटक को करने का श्रेय शिमला के कलाकार गिरीश हरनोट को जाता है जो पिछले पांच सालों से मुम्बई में कई सीरियलों में अभिनय कर चुके है और बड़े कमर्शियल ब्रांडों के विज्ञापनों में मॉडल के रूप में अपनी व्यावसायिक पहचान बना चुके हैं। दीक्षित ने इस नाटक के मंचन का उत्तरदायित्व गिरीश को सौंपा जिन्होंने इसके मंचन के लिए अपनी गृहभूमि शिमला चुनी और गेयटी थियेटर के जिर्णोद्धार के ऐतिहासिक अवसर पर स्थानीय कलाकारों के साथ इसकी दो सफल प्रस्तुतियां 6 और 10 जुलाई, 2009 को बिना किसी सरकारी सहयोग से कीं। इन प्रस्तुतियों का सम्पूर्ण संयोजन ’डिजाइन इंडिया’ के मुख्य संरक्षक एवं समन्वयक एस.आर हरनोट किया। इन प्रस्तुतियों को प्रसिद्ध रंग कर्मी हबीब तनवीर और हिमाचल वासी मनोहर सिंह को समर्पित किया गया।


कलाकारों के साथ मुख्य अतिथि कृष्ण किशोर

डिजाइन इंडिया द्वारा प्रस्तुत नाटक देवदास का प्रतिपादन रूपान्तरकार ने आज के देशकाल के सामाजिक सरोकारों के दृष्टिगत अलग ढंग से किया है जिसकी वजह से इस कथा को एक नया रूप मिला है। क्षरित हो रहे ठेठ रूढ़िग्रस्त बांगला समाज और सांस्कृतिक परिवेश की कथा होते हुए भी नाटक का यह संस्करण मूलतः एक अति यर्थाथवादी मंचीय निष्पादन है जो हमारे समय की नई पीढ़ियों के आंतरिक आक्रोश और भावोन्नयन को जाहिर करता है। यह नाटक बीती सदी के पहले दशक में लिखा गया था जिसका अब तक तीन बार फिल्मांकन हुआ है। हर बार एक नए देवदास की कल्पना लेकर। नाटक के इस रूप में इसका पहली बार मंचन हुआ है, एक बिल्कुल नए और समसामयिक भावबोध के साथ। प्रस्तुत नाटक की विशेषता यह है कि इसका स्थायी भाव प्रेम की असफलता के साथ-साथ उससे उत्पन्न मनुष्य के अस्तित्व की दुश्वारियां भी हैं जिन्हें नाटककार दीक्षित ने मूलतः जीवन और मरण के विचारबिन्दुओं के माध्यम से हल किया है। यह एक श्रेण्य नाटक है जिसे समझने और सही आस्वादन के लिए आम और सुधि दर्शक को इसके एब्सर्ड शैली-शिल्प और ठोस विचार-दर्शन की गहराईयों व जटिलताओं से भी गुजरना होगा तथा नाटक की विलक्षण विरूपता से साक्षात्कार करना होगा।

पारो के रूप में स्वाति और चौधरी के रूप में राकेश
नाटक में अभिमन्यु पांडेय-देवदास, गिरीश हरनोट-चुन्नी बाबू और चैधरी महाशय की भूमिका में राकेश शर्मा थे जबकि पहली प्रस्तुति में पार्वती का किरदार उषा और चन्द्रमुखी का रितिका ने निभाया और दूसरी प्रस्तुति में ये भूमिकाएं उषा और प्रभा ने निभाई। ये चारों लड़कियां कथक की छात्राएं हैं जिनके सुलझे हुए अभिनय से यह कदापि नहीं लगा कि इन्होंने पहली बार किसी नाटक में अभिनय किया हैं। अभिमन्यु पांडेय ने जहां देवदास का किरदार अत्यन्त गंभीर और कलात्मक मुद्रा में निभाया वहां चुन्नी बाबू के किरदार में गिरीश हरनोट ने दर्शकों को बेहतरीन अभिनय से खूब हंसाया। महाशय की भूमिका में राकेश शर्मा ने दर्शकों के मन में अच्छी छाप छोड़ी। राकेश शिमला दूरदर्शन में समाचार वाचक के रूप में कार्यरत हैं। नाटक के प्रचार संयोजक जगदीश हरनोट थे। इस नाटक के लिए गीत व संगीत मुम्बई में ही तैयार किया गया है। गीतकार वी.के.मेहता हैं जिन्हें पामेला जैन, परमानंद यादव और रमीन्द्र जैसे प्रसिद्ध गायकों ने अपनी मधुर आवाज़ से संवारा है।

पहली प्रस्तुति में मुख्य अतिथि श्री कृष्ण किशोर, आस्टिन यूएसए से प्रकाशित इण्डो-अमेरिकन पत्रिका ’अन्यथा’ एवं अंग्रेजी पत्रिका 'Otherwise' के संपादक थे जिन्होंने डिजाइन इंडिया को पच्चास हजार रूपए के सहयोग देने की घोषणा की। उनके साथ प्रसिद्ध दलित लेखक व चिंतक मोहनदास नैमिशराय भी मौजूद थे। दूसरी प्रस्तुति में मुख्य अतिथि-श्रीमती आशा स्वरूप, मुख्य सचिव, हि॰प्र॰ सरकार एवं विशेष अतिथि के रूप में श्री मंजूर एहतेशाम, प्रख्यात कहानीकार पधारे जिन्होंने नाटक और कलाकारों की भूमिकाओं को खूब सराहा।


चुन्नी बाबू के रूप में गिरीश

प्रस्तुति- एस.आर.हरनोट
ओम भवन, मोरले बैंक इस्टेट, निगम विहार, शिमला-171002 मोः 098165 66611