Tuesday, July 20, 2010

डॉ॰ रमा द्विवेदी कृत 'रेत का समंदर' का विमोचन सम्पन्न



अखिल भारतीय भाषा साहित्य सम्मेलन, भोपाल का 22वाँ राष्ट्रीय अधिवेशन 10/7/2010-11/7/2010 भोपाल के अरेरा कालोनी स्थित चित्रांश महाविद्यालय के परिसर में संपन्न हुआ। इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में पं. श्री लक्ष्मीकान्त शर्मा, मंत्री, संस्कृति, जनसंपर्क, उच्चशिक्षा एवं खनिज संसाधन, मध्य प्रदेश, मंचासीन हुए। राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री सतीश चतुर्वेदी ने अध्यक्षता की। राष्ट्रीय महासचिव पं. सुरेश नीरव, कर्नल विपिन चतुर्वेदी, प्रो. यासमीन सुलताना नक़वी (ओसाका वि.वि.,जापान), डा. मधु चतुर्वेदी ने उद्गाटन सत्र में भाग लिया और अपने विचार व्यक्त किए। राष्ट्रीय अध्यक्ष ने सभी का स्वागत किया। पं. लक्ष्मी कान्त शर्मा के कर कमलों से संस्था द्वारा प्रदत्त विविध सम्मानों से प्रान्त-प्रान्तान्तर से आए साहित्यकारों का सम्मान किया गया। तत्पश्चात मंत्री जी के द्वारा विविध विधाओं की पुस्तकों का लोकार्पण किया गया।
इसी क्रम में हैदराबाद की वरिष्ठ कवयित्री डॉ.रमा द्विवेदी के काव्य संग्रह ‘रेत का समन्दर’ का विमोचन माननीय मंत्री श्री पं. लक्ष्मी कान्त शर्मा के कर कमलों द्वारा किया गया। डॉ. अहिल्या मिश्र ने कवयित्री डॉ. रमा द्विवेदी के काव्य संग्रह की जानकारी दी और अपनी शुभकामनाएँ प्रेषित की। पं. लक्ष्मी कान्त शर्मा ने अपने उद्बोधन में कहा -‘साहित्यकार प्रणम्य होते हैं। साहित्य लेखन के माध्यम से जनजागृति एवं समाज निर्माण की महती भूमिका निभाते हैं। द्वितीय सत्र में बहु भाषा कवि सम्मेलन आयोजित किया गया जिसमें स्थानीय लोगों के साथ-साथ बाहर से आए अनेक कवियों ने काव्य पाठ किया, जिसमें प्रमुख नाम इस प्रकार हैं- डॉ. यासमीन सुलताना नक़वी, डॉ. राजश्री रावत, जगदीश श्रीवास्तव, जगदीश किंजल्क, डा. संध्या भराडे, रमा कान्त पूनम, पं. सुरेश नीरव, डॉ. मधु चतुर्वेदी, श्याम बिहारी सक्सेना, डॉ. प्रेमलता नीलम, उषा रानी, राजेश टैगोर, क्रान्ति चतुर्वेदी, डॉ. सरोज ललवानी, डा. शशि नायक, डॉ. अहिल्या मिश्र, डॉ. रमा द्विवेदी, कृति चतुर्वेदी, रजनी कान्त राजन, रिचा अनुरागी, देवकी नंदन शुक्ल, तपन बंद्यौपाध्याय, अंजना अनिल, यतींद्र राही, वीरेन्द्र सिंह, राम स्वरूप शाह, बनवारी लाल वर्मा, मधु सक्सेना, वैभव कोतवाल, डॉ. एन.एम मूर्ति, अश्विनी वर्मा इत्यादि ने भाग लिया ।



11/7/2010 के प्रात: प्रथम सत्र राष्ट्रीय महिला साहित्यकार सम्मेलन के नाम रहा और इस अवसर पर मंचासीन हुईं डॉ. सरोज ललवानी (अध्यक्ष), डॉ. यासमीन सुलताना नक़वी, डॉ. अहिल्या मिश्र एवं डॉ. मधु चतुर्वेदी विशेष अतिथि के रूप में भाग लिया। डॉ. अहिल्या मिश्र ने अपने उद्बोधन में सभ्यता, संस्कृति एवं भाषात्मक संकट से आगाह करते हुए इससे निपटने हेतु साहित्यकारों को एक जुट होकर आगे बढ़ने का आह्वान किया। इस सत्र में महिलाओं की समस्याओं पर चर्चा की गई एवं कवयित्री सम्मेलन में डॉ. रमा द्विवेदी, डॉ. प्रेमलता नीलम, डॉ. राजश्री रावत, डॉ. मधु चतुर्वेदी, डॉ. शशि नायक, डॉ. शीला तिवारी, डॉ. रिचा अनुरागी, डॉ. कमला सक्सेना, आदि ने गीत-ग़ज़ल कविताओं के माध्यम से अपना संदेश प्रेषित किया। अपरान्ह सत्र में राष्ट्रीय परिसंवाद में ‘भारतीय भाषाओं की उपेक्षा और समन्वय, आंग्ल भाषा का बढ़ता प्रभाव' लेखकों की समस्याओं पर चर्चा संपन्न हुई। इस सत्र के मुख्य अतिथि श्री बाबूलाल जैन, अध्यक्ष निर्धन वर्ग कल्याण आयोग, म. प्र. विशिष्ट अतिथि श्री आशीष उपाध्याय, आई ए. एस., आयुक्त उच्च शिक्षा, म.प्र. थे। सायं समापन समारोह के मुख्य अतिथि डॉ. संतोष चौबे, कुलपति, सी.वी. रमन विश्वविद्यालय, रायपुर रहे। अधिवेशन के अन्त में सांस्कृतिक कार्यक्रम हुआ और कृति चतुर्वेदी के आभार से कार्यक्रम समाप्त हुआ ।

प्रस्तुति: डा.रमा द्विवेदी

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2 पाठकों का कहना है :

डा. अरुणा कपूर. का कहना है कि -

' रेत का समंदर..' काव्य-संग्रह के लिए बधाई हो!... कार्यक्रम की प्रस्तुति सुंदर है!

sumita का कहना है कि -

डा.रमा द्विवेदी जी को उनकी कृति के लिए बहुत-बहुत बधाई!!

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