Showing posts with label Hindyugm prakashan. Show all posts
Showing posts with label Hindyugm prakashan. Show all posts

Monday, October 25, 2010

डाला-उत्सव में 'अनाम' का लोकार्पण

श्री अचलेश्‍वर महादेव मंदिर फाउन्‍डेशन,डाला,सोनभद्र ने श्री अचलेश्‍वर महादेव मंदिर के 43वें स्‍थापना दिवस के अवसर पर भारतीय शास्‍त्रीय संगीत के भव्‍य कार्यक्रम का आयोजन किया। इस आयोजन में मुकुल शिवपुत्र जी, सारस्‍वत मंडल, कुशलदास सरीख्‍ो साधक कलाकारों ने शिरकत की।

हर-हर महादेव की ध्‍वनि के साथ आरम्‍भ और समाप्‍त होने वाले इस समारोह की अलौकिकता अनुपम रही। कार्यक्रम की शुरूआत सारस्‍वत मंडल नें राग मारवा में "झाँझर मोरा झनकायी" (विलम्‍बित एक ताल) तथा "माई री साँझ भये" (द्रुत एक ताल) बंदिश्‍ों सुनाकर की। इन बंदिशों नें वातावरण में अलख जगाने जैसा माहौल स्‍थापित कर दिया। इसके बाद सारस्‍वत मंडल जी नें एक टप्‍पा सुनाया। इस टप्‍पे में गायन की ऐसी कुशलता थी कि श्रोतागण झूमने पर मजबूर हो गये।

पंडित मुकुल शिवपुत्र जी ने राग बसंत मध्‍य तीन ताल में "सपनें में मिलते तोरे पिया" तथा द्रुत में तराना सुनाया। सारे श्रोता पंडित मुकुल शिवपुत्र जी को श्रद्धा तथा आश्‍चर्य के मिश्रित भाव से अभिभूत होकर स्‍तब्‍धता के साथ सुन रहे थ्‍ो। इसके उपरान्‍त पंडित मुकुल शिवपुत्र जी ने अपने पिता (पंडित कुमार गन्‍धर्व)जी द्वारा रचित ठुमरी "बाली उमर लरिकइयाँ" सुनाई। कुशलदास जी ने राग बागेश्री, मिश्र खमाज तथा भ्‍ौरवी में मनोहारी सितार वादन किया। क्ष्‍ोत्र के आमंत्रित तमाम बुद्धिजीवी तथा सुधी श्रोता गणों ने कार्यक्रम का आनन्‍दलाभ लिया।



इसी आयोजन के दौरान हिन्‍द युग्‍म द्वारा प्रकाशित राक़िम के ग़ज़ल संग्रह अनाम का लोकार्पण पंडित मुकुल शिवपुत्र जी के हाथों सम्‍पन्‍न हुआ।

प्रेषक-चन्‍द्र प्रकाश तिवारी

Thursday, August 5, 2010

पंकज त्रिवेदी के निबंध संग्रह 'झरोखा' का विमोचन संपन्न


पंकज त्रिवेदी के निबंध संग्रह "झरोखा" का विमोचन करते कार्यक्रम अध्यक्ष और आलोचक श्री धनंजय वर्मा, श्री नंदकिशोर आचार्य और कार्यक्रम के मुख्य आयोजक, साहित्यकार व छत्तीसगढ़ के डी.जी.पी. विश्वरंजन। विमोचन करा रहे पंकज त्रिवेदी। साथ हैं जानीमानी पत्रकार और साहित्यकार जया केतकी

रायपुर।
छत्तीसगढ़ की प्रतिष्ठित साहित्यिक संस्था प्रमोद वर्मा स्मृति संस्थान द्वारा प्रेमचंद जयंती के अवसर पर देश के दो मूर्धन्य रचनाकार अज्ञेय और शमशेर पर राष्ट्रीय संगोष्ठि का आयोजन किया। 2 दिन चले इस कार्यक्रम में दुनिया भर के 200 से अधिक साहित्यकारों ने भाग लिया। एक राष्ट्रीय कवि संध्या का भी आयोजन किया।

इसी कार्यक्रम में बहुत सी किताबों का लोकार्पण भी हुआ, जिनमें हिन्द-युग्म द्वारा प्रकाशित पंकज त्रिवेदी के ललित निबंधों के संग्रह 'झरोखा'का विमोचन भी शामिल है। पंकज त्रिवेदी की पुस्तक 'झरोखा' में कुल 25 ललित निबंध हैं। पंकज त्रिवेदी मूल रूप से गुजराती भाषा के लेखक हैं। इस पुस्तक में बहुत से निबंध पहले गुजारती में ही लिखे गये, बाद में पंकज ने खुद ही हिन्दी में अनुवाद किया। पुस्तक के शीर्षक के ही नाम का एक स्तम्भ 'सृजनगाथा' पत्रिका में लगातार प्रकाशित होता है, जिसमें पंकज त्रिवेदी के ललित निबंध प्रकाशित होते हैं। इस पुस्तक में सम्मिलित निबंध सृजनगाथा पर प्रकाशित हैं।




इसी अवसर पर दिनेश कुमार माली द्वारा अनूदित उपन्यास "पक्षी-वास" (मूल उडिया उपन्यास–सरोजिनी साहू) का भी विमोचन हुआ। विमोचन श्री नंदकिशोर आचार्य-जयपुर, डॉ. दिविक रमेश-दिल्ली, डॉ. धनंजय वर्मा-भोपाल, श्री ज्योतिष जोशी-दिल्ली, श्री मधुरेश-कानपुर, श्री त्रिभुवन नाथ शुक्ल-भोपाल, छत्तीसगढ़ के पुलिस महानिदेशक एवं कवि विश्वरंजन के कर कमलों द्वारा हुआ।

Tuesday, July 20, 2010

डॉ॰ रमा द्विवेदी कृत 'रेत का समंदर' का विमोचन सम्पन्न



अखिल भारतीय भाषा साहित्य सम्मेलन, भोपाल का 22वाँ राष्ट्रीय अधिवेशन 10/7/2010-11/7/2010 भोपाल के अरेरा कालोनी स्थित चित्रांश महाविद्यालय के परिसर में संपन्न हुआ। इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में पं. श्री लक्ष्मीकान्त शर्मा, मंत्री, संस्कृति, जनसंपर्क, उच्चशिक्षा एवं खनिज संसाधन, मध्य प्रदेश, मंचासीन हुए। राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री सतीश चतुर्वेदी ने अध्यक्षता की। राष्ट्रीय महासचिव पं. सुरेश नीरव, कर्नल विपिन चतुर्वेदी, प्रो. यासमीन सुलताना नक़वी (ओसाका वि.वि.,जापान), डा. मधु चतुर्वेदी ने उद्गाटन सत्र में भाग लिया और अपने विचार व्यक्त किए। राष्ट्रीय अध्यक्ष ने सभी का स्वागत किया। पं. लक्ष्मी कान्त शर्मा के कर कमलों से संस्था द्वारा प्रदत्त विविध सम्मानों से प्रान्त-प्रान्तान्तर से आए साहित्यकारों का सम्मान किया गया। तत्पश्चात मंत्री जी के द्वारा विविध विधाओं की पुस्तकों का लोकार्पण किया गया।
इसी क्रम में हैदराबाद की वरिष्ठ कवयित्री डॉ.रमा द्विवेदी के काव्य संग्रह ‘रेत का समन्दर’ का विमोचन माननीय मंत्री श्री पं. लक्ष्मी कान्त शर्मा के कर कमलों द्वारा किया गया। डॉ. अहिल्या मिश्र ने कवयित्री डॉ. रमा द्विवेदी के काव्य संग्रह की जानकारी दी और अपनी शुभकामनाएँ प्रेषित की। पं. लक्ष्मी कान्त शर्मा ने अपने उद्बोधन में कहा -‘साहित्यकार प्रणम्य होते हैं। साहित्य लेखन के माध्यम से जनजागृति एवं समाज निर्माण की महती भूमिका निभाते हैं। द्वितीय सत्र में बहु भाषा कवि सम्मेलन आयोजित किया गया जिसमें स्थानीय लोगों के साथ-साथ बाहर से आए अनेक कवियों ने काव्य पाठ किया, जिसमें प्रमुख नाम इस प्रकार हैं- डॉ. यासमीन सुलताना नक़वी, डॉ. राजश्री रावत, जगदीश श्रीवास्तव, जगदीश किंजल्क, डा. संध्या भराडे, रमा कान्त पूनम, पं. सुरेश नीरव, डॉ. मधु चतुर्वेदी, श्याम बिहारी सक्सेना, डॉ. प्रेमलता नीलम, उषा रानी, राजेश टैगोर, क्रान्ति चतुर्वेदी, डॉ. सरोज ललवानी, डा. शशि नायक, डॉ. अहिल्या मिश्र, डॉ. रमा द्विवेदी, कृति चतुर्वेदी, रजनी कान्त राजन, रिचा अनुरागी, देवकी नंदन शुक्ल, तपन बंद्यौपाध्याय, अंजना अनिल, यतींद्र राही, वीरेन्द्र सिंह, राम स्वरूप शाह, बनवारी लाल वर्मा, मधु सक्सेना, वैभव कोतवाल, डॉ. एन.एम मूर्ति, अश्विनी वर्मा इत्यादि ने भाग लिया ।



11/7/2010 के प्रात: प्रथम सत्र राष्ट्रीय महिला साहित्यकार सम्मेलन के नाम रहा और इस अवसर पर मंचासीन हुईं डॉ. सरोज ललवानी (अध्यक्ष), डॉ. यासमीन सुलताना नक़वी, डॉ. अहिल्या मिश्र एवं डॉ. मधु चतुर्वेदी विशेष अतिथि के रूप में भाग लिया। डॉ. अहिल्या मिश्र ने अपने उद्बोधन में सभ्यता, संस्कृति एवं भाषात्मक संकट से आगाह करते हुए इससे निपटने हेतु साहित्यकारों को एक जुट होकर आगे बढ़ने का आह्वान किया। इस सत्र में महिलाओं की समस्याओं पर चर्चा की गई एवं कवयित्री सम्मेलन में डॉ. रमा द्विवेदी, डॉ. प्रेमलता नीलम, डॉ. राजश्री रावत, डॉ. मधु चतुर्वेदी, डॉ. शशि नायक, डॉ. शीला तिवारी, डॉ. रिचा अनुरागी, डॉ. कमला सक्सेना, आदि ने गीत-ग़ज़ल कविताओं के माध्यम से अपना संदेश प्रेषित किया। अपरान्ह सत्र में राष्ट्रीय परिसंवाद में ‘भारतीय भाषाओं की उपेक्षा और समन्वय, आंग्ल भाषा का बढ़ता प्रभाव' लेखकों की समस्याओं पर चर्चा संपन्न हुई। इस सत्र के मुख्य अतिथि श्री बाबूलाल जैन, अध्यक्ष निर्धन वर्ग कल्याण आयोग, म. प्र. विशिष्ट अतिथि श्री आशीष उपाध्याय, आई ए. एस., आयुक्त उच्च शिक्षा, म.प्र. थे। सायं समापन समारोह के मुख्य अतिथि डॉ. संतोष चौबे, कुलपति, सी.वी. रमन विश्वविद्यालय, रायपुर रहे। अधिवेशन के अन्त में सांस्कृतिक कार्यक्रम हुआ और कृति चतुर्वेदी के आभार से कार्यक्रम समाप्त हुआ ।

प्रस्तुति: डा.रमा द्विवेदी