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Tuesday, September 22, 2009

जयपुरियर स्कूल ने राष्ट्रभाषा हिंदी की प्रगति और विकास हेतु मनाया हिंदी सप्ताह



सानपाड़ा, नवी मुम्बई । 18 सितम्बर 2009

भाषा हमारे और आपके विचारों का माध्यम है। हिंदी को राष्ट्रीय भाषा का गौरव देने के लिए हिंदी में लिखते थे। बाल गंगाधर तिलक ने कहा "देश की अखंडता-आजादी के लिए हिंदी पुल है"।

पूरा देश 14 सितम्बर को 'हिंदी दिवस' के रूप में मनाता है। जयपुरियर स्कूल (अंग्रेजी माध्यम) ने हिंदी भाषा को बढावा देने के लिए उस दिन प्रार्थना सभा से लेकर सारे दिन का काम हिंदी में किया और हिंदी सप्ताह में छात्रों की क्षमतानुसार प्राथमिक और माध्यमिक कक्षाओं के लिए तरह-तरह की स्पर्धा रख जैसे कविता वाचन, एकांकी, नैतिक कहानी क्विज, पर्यायवाची, मुहावरे, पहेलियाँ, विलोम, हिंदी साहित्य के प्रश्न, सुलेख, चित्र देख कर नाम बताओ सही उच्चारण के साथ आदि स्पर्धा रखी गयी थी। विशेष कार्यक्रम में "भारत की विविधता में एकता" दर्शाने के लिए बच्चों ने कवि सम्मेलन किया था।

प्राथमिक और माध्यमिक कक्षाओं के लिए केवल एक विजेता ट्राफी थी। इस चमचामाती ट्राफी को कक्षा 2 ने जीता। इस कार्यक्रम के मुख्य अतिथि श्रीमती रश्मि (मैनेजर) और अध्यक्षा श्रीमती ज्योत्स्ना भटनागर (प्रचार्या) थी। रश्मि जी ने हिंदी का महत्व देते हुए प्रतिभागी छात्रों के मनोबल, कार्यक्रम की प्रसंशा की। स्कूल की प्रचार्या ने 'हिंदी सप्ताह' को सामाजिक, सांस्कृतिक एकता की कड़ी के रूप में चरितार्थ किया।

इस सफल कार्यक्रम का श्रेय हिंदी अध्यापिका, संचालिका मंजू गुप्ता को जाता है। जिन्होंने अपने अनुभवों से 'हिंदी सप्ताह' में चार चाँद लगाये और कहा- "हिंदी का भविष्य आनेवाली पीढ़ी के हाथों में सुरक्षित है"।

विविध स्पर्धाओं की फोटो भी संलग्न हैं-










Saturday, April 4, 2009

फिर हुया संगम कला-विज्ञान का


मुम्बई बी.ए.आर.सी. के साहित्य प्रेमियों ने कला, साहित्य और सामाजिक कार्यों के प्रोत्साहन हेतु "सबरस" नामक समूह की शुरुवात की है| साहित्य सृजन में अपने किये गए प्रयासों को आगे बढ़ाते हुए, २९ मार्च २००९ के दिन मुम्बई में चेम्बूर इलाके के कलेक्टर कालोनी में एक काव्य गोष्टी का आयोजन किया गया| इसमें प्रवासी भारतीय साहित्य प्रेमियों की मौजूदगी इसे अंतराष्ट्रीय स्तर का बना देती है|आइये गोष्टी का एक सुखद सफ़र करते हैं ...

मुख्य अतिथि- अमेरिका से आयी प्रवासी भारतीय श्रीमती डॉ सरिता मेहता और गजलकार श्रीमती देवी नांगरानी |

अन्य वरिष्ठ साहित्य सृजक- श्रीमती शुक्ला शाह जिन्होंने नारी साहित्य सृजन को एक सम्मानजनक स्थान दिलवाया है, रंजन नटराजन जो "कुतुबनुमा" नामक पत्रिका की संपादिका हैं।

आयोजक- " सबरस " समूह, जिनमें कवि कुलवंत, श्री गिरीश जोशी और प्रमिला शर्मा सक्रीय रहें|

संचालक- लोचन सक्सेना

काव्य गोष्टी रचना पाठ- शाम ५.३० बजे काव्य गोष्टी की शुरूआत हुयी| माँ शारदा को नमन करते हुए, संचालक ने मुख्य अतिथि का परिचय दिया| प्रमिला शर्मा ने सभी उपस्थित रचनाकारों को गुलाब पुष्प देकर स्वागत किया|
रचनाओं के सुनने और सुनाने का सिलसिला शुरू हुया और रात ८.४५ तक चलता ही रहा| देवी नांगरानी ने अपनी ग़ज़ल गा कर सुनाई| वरिष्ट रचनाकार कपिल कुमार ने दोहे कहे। नीरज गोस्वामी ने गज़लें गायीं | नंदलाल थापर ने अपनी रचना "चूड़ी" सुनाई| शकुन्तला शर्मा जी ने देश भक्ति रचना गायी| मानिक मूंदे, जो मराठी के भी रचनाकार हैं, अपनी हिन्दी की समसामयिक रचना सुनाकर लोगों का ध्यान आकर्षित करते रहे | मुख्य अतिथि डॉ सरिता मेहता ने भी अपनी ग़ज़ल सुनाई | कवि कुलवंत ने " मुखौटा " की बातें अपनी रचना से की| अवनीश तिवारी ने देवी सरस्वती पर अपने छंद कहे और बसंत पर रचना सुनाई |

इसके अतिरिक्त ओमप्रकाश चतुर्वेदी, प्रमिला शर्मा, मंजू गुप्ता, त्रिलोचन, कुमार जैन था अन्य कई रचनाकारों ने रचना पाठन किया | गीत, ग़ज़ल, शेर, छंद और दोहे से सजी इस महफ़िल का समापन सभी के मेल मिलाप और आशीष-आशीर्वाद से हुआ|

मुम्बई से अवनीश एस तिवारी