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Friday, November 18, 2011

हरियाणा साहित्य अकादमी द्वारा आयोजित प्रदेशस्तरीय युवा कहानी प्रतियोगिता में भाग लें

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Wednesday, March 31, 2010

श्री मध्यभारत हिन्दी साहित्य समिति ने आयोजित की एक अनूठी प्रतियोगिता

समिति द्वारा आयोजित अंतर विद्यालयीन लेखन प्रतियोगिता के परिणाम घोषित
विख्यात टी.वी.कलाकार नेहा शरद करेंगी विजेताओं को पुरस्कृत



इंदौर । 30 मार्च
स्कूली विद्यार्थियों की लेखन क्षमता और कल्पानाशीलता को नया आयाम देने के उद्देश्य से श्री मध्यभारत हिन्दी साहित्य समिति द्वारा आयोजित अंतरविद्यालयीन लेखन प्रतियोगिता के निर्णय घोषित कर दिए गए हैं। समिति के प्रधानमंत्री श्री बसंतसिंह जौहरी,प्रबंधमंत्री प्रो सूर्यप्रकाश चतुर्वेदी तथा प्रतियोगिता के समन्वयक युवा टी.वी. पत्रकार श्री सुबोध खन्डेलवाल ने बताया कि 3 अप्रैल, शनिवार को समिति में आयोजित एक समारोह में विख्यात टी.वी.कलाकार नेहा शरद विजेता विद्यार्थियों को पुरस्कृत करेंगी।

आपने बताया कि चौथी से नवीं तक के स्कूली बच्चों के लिये आयोजित ये लेखन प्रतियोगिता एक नई सोच के साथ आयोजित की गई थी। इस प्रतियोगिता के लिये बच्चों को कोई विषय नही दिया गया था बल्कि उन्हें एक अन्तर्राष्ट्रीय चित्रकला प्रदर्शनी मे बुलाया गया। इस प्रदर्शनी में दिल्ली की एक संस्था शन्कर्स इन्टरनेशनल द्वारा आयोजित अन्तरराष्ट्रीय चित्रकला प्रतियोगिता मे चयनित दुनिया के सत्रह देशों के बच्चों (14 साल तक के) द्वारा बनाये गये लगभग 130 चित्र नुमाया किये गये थे। लेखन प्रतियोगिता मे भाग लेने वाले बच्चों को इनमें से किसी एक चित्र का चयन कर उसके आधार पर अपना आलेख लिखना था। इस लेखन प्रतियोगिता में इन्दौर की प्रज्ञा गर्ल्स स्कूल की तान्या जैन प्रथम स्थान पर रहीं, एमरल्ड स्कूल के खुशाल रघुवंशी को द्वितीय स्थान मिला तथा अग्रसेन विद्यालय के सौरभ कुंवर तृतीय स्थान पर रहे। इनके अलावा एमरल्ड स्कूल की विन्नी मालिक, सन्मति स्कूल की ट्विंकल अग्रवाल, श्रुति उमठ और स्वाति चौधरी तथा अग्रसेन के सतपाल सिंह अजमानी सहित कुल पाँच विद्यार्थियों को प्रोत्साहन पुरकार हेतु चुना गया है।
इस अनूठी प्रतियोगिता में शहर के दस स्कूलों के एक सौ बीस विद्यार्थियों ने भाग लिया। इनके द्वारा भेजे गए आलेखों का मूल्यांकन भारत सरकार के केन्द्रीय हिन्दी निदेशालय, नई दिल्ली के सहायक निदेशक श्री अर्पण कुमार तथा समिति के श्री गिरेन्द्र सिंग भदोरिया ने किया।

श्री जौहरी ने कहा कि सुश्री नेहा शरद ने कई टी.वी. धारावाहिकों में अहम किरदार निभाये है, वे उन चुनींदा टी.वी. कलाकारों में से है जिन्हें उनके संजीदा अभिनय के कारण पहचाना जाता है और सबसे ख़ास बात ये है कि वो मालवा की माटी से जुड़े देश के सुप्रसिद्ध व्यंग्यकार स्व. श्री शरद जोशी की सुपुत्री हैं। उन्होंने कहा कि उनके हाथों पुरस्कृत होकर इन बच्चो की रचनात्मकता को और अधिक प्रोत्साहन मिलेगा।

प्रस्तुति-बसंतसिंह जौहरी, प्रधान मंत्री , हरेराम वाजपेयी, प्रचार मंत्री

Friday, January 15, 2010

मॉरीशस में विश्व हिन्दी दिवस 2010 समारोह

मॉरीशस की हिन्दी कविता के द्वार पर नई पीढ़ी की दस्तक

अनेक प्रतिष्ठित स्थानीय रचनाकारों का अब तक यही रोना रहा है कि युवा पीढ़ी हिन्दी लेखन के प्रति उदासीनता ली हुई है. अब तक की पाई जाने वाली रचनाओं का सृजन जाने-माने साहित्यिकों के द्वारा ही सम्पन्न हुआ है. परंतु कुछ दिनों से मॉरीशस की हिन्दी कविता की अविरल धारा को प्रवाहित करने में जुड़ गया है यह ‘उदासीन’ कवि-समुदाय. इस समुदाय में कविता-लेखन के प्रति चेतना तो बहुत पहले से ही जाग चुकी थी, अनेक युवा कवि व्यक्तिगत रूप से इस अथाह समुद्र में अपनी बूँद को अर्पित करते गए (बहुत कम recognition पाए हुए या कभी कभी बिना recognition के) मगर इस बार एक बहुत बड़े मंच ने इनका स्वागत किया. एक ऐसे मंच जिसकी तलाश यह पीढ़ी न जाने कब से करती आ रही थी.
मंच प्रदान किया हिन्दी दिवस 2010 के अवसर ने.

इन्दिरा गाँधी भारतीय सांस्कृतिक केन्द्र के सभागार में, रविवार 10 जनवरी 2010 को, विश्व हिन्दी सचिवालय, शिक्षा, संस्कृति एवं मानव संसाधन मन्त्रालय, भारतीय उच्चायोग, इन्दिरा गाँधी भारतीय सांस्कृतिक केन्द्र तथा हिन्दी संगठन के मिले-जुले सहयोग से विश्व हिन्दी दिवस 2010 मनाया गया जिसमें मुख्य अतिथि हंगरी के भारोपीय शिक्षा विभाग से आई हुई डॉ. मारिया नेज्यैशी थी. इस उपल्क्ष्य पर विश्व हिन्दी सचिवालय की एक रचना (एक विश्व हिन्दी पत्रिका) का भी लोकार्पण गणराज्य के राष्ट्रपति माननीय सर अनिरुद्ध जगन्नाथ जी के कर-कमलों द्वारा हुआ. इस अवसर पर भारतीय उच्चायोग द्वारा आयोजित राष्ट्रीय स्तर पर कविता-प्रतियोगिता के विजेताओं को भी सम्मानित किया गया. सम्मान उन सभी नवोदित कवियों का वास्तव में रहा जिनको अपनी कलात्मकता प्रेषित करने का एक मंच प्राप्त हुआ.
इस कविता प्रतियोगिता में सर्वश्रेष्ठ स्थान पर आए श्री गुलशन सुखलाल जिनकी कविता का शीर्षक ‘प्रगति’ रहा. अपनी कविता को हॉल से भरे श्रोताओं को सुनाते हुए गुलशन जी ने सभी लोगों को मुग्ध कर दिया. उन्हें अपनी रचना के ज़रिये अपने अतीत में ले गए और साथ ही साथ वर्तमान विकसित समाज/देश पर पुन: ग़ौर करने को विवश किया. 15,000 रु/- की धन-राशि पाने वाली गुलशन सुखलाल जी की कविता इस प्रकार है –

“प्रगति”

गाँव में
अब नहीं वे पेड़
जिनकी छाँव में
चितलपाटी बिछाए
कोमल ठण्डे पत्थर का तकिया बनाकर
गरमियों की दोपहर में आदमी
समुद्र में
बढ़ते ज्वार-भाटे से उठने वाली हवा की
गन्ध में
बेहोश
और वक्त बेवक्त बाँकने
वाले मुर्गों
जाने-अंजाने पर भोंकने वाले कुत्तों
किसी रसोईघर
में
ए.एम. रेडियो पर बजते
‘आप की पसन्द’ के जिंगल
और
फेरीवालों क...ी पैंक-पैंकू
के अलसाए सुरों की लोरी सुनता
दो पल ओठोंग जाए।

अब तो पेड़ों का हर झुर्मुट
अड्डा बना ताश का
जिसके आस-पास
घास काटने से डरती चाचियाँ
कि कहीं दोस्तों में हुई लड़ाई में
टूटी बोतलों के टुकड़े
पैरों में न चुभ जाएँ ।

अब नहीं खेले जाते वे फुटबॉल-मैच
जहाँ पिताजी के साथ साईकल पर
आस-पड़ोस के चार-पाँच बच्चे सवार
हो पहुँचते
जहाँ हर
गेंद के साथ दिल उछलता
जहाँ उबले
चने और ‘पिकसीदू’
‘कालामिन्दास’
और ‘सिपेक’ के लिए
इकट्ठा
किए पैसे खर्च किए जाते
जब हर जीत
पर
गाँव भर
में
जुलूस
निकाले जाते

अब तो
नुक्कड़ पर ही खेले जाते हैं मैच
और इनाम
होते हैं
शराब की
बोतलें

अब...
मुहल्ले के आर-पार जाने वाली
सड़क के दोनों छोह जैसे
शराबख़ाने के दो द्वार बने हों
जिनसे प्रवेश करने के बाद
गाँव की ही महिलाओं की
नज़रें झुक जाती हैं
तेज़ चलने लगते
और वे अपने-आप को
सभी कोणों से झाँकती
‘अपने’ लोगों की बेशर्म आँखों के नुकीले भालों को
अपने शरीर के अंग-प्रत्यंग भेदती हुई पाकर
मैला मेहसूस करती हैं

अब नहीं जाता कोई
पड़ोस में
चीनी, दाल, नमक की
कभी न वापस होने वाली
उधारी माँगने
टिन की डिबिया लिए हुए
‘बूयों’ के लिए माढ़ माँगने
मुरूंग के पत्ते सुरुकने
लटपट सब्ज़ी के लिए
करीपत्ता माँगने

अब घर-घर के फ्रिज में
फ़्रोज़न रखा होता है सब कुछ
भाजी, करीपत्ता, टमाटर की ‘प्यूरी’,
ठण्डे,
सम्बन्धों की तरह...
अब गाँव में...

- गुलशन सुखलाल

द्वितीय स्थान पर राधा माथुर की कविता ‘बेकार की बहस’ रही जिनको भारतीय उच्चायोग द्वारा 10, 000 रुपये की धन-राशि प्राप्त हुई.
तृतीय स्थान पर कल्पना लालजी की कविता ‘बाबुल का आंगन’ जिन्हें 8,000 रु/- की धन-राशि प्राप्त हुई.
तीन सांत्वना पुरस्कार रखे गए जिनको प्रत्येक 5,000 रु/- की धन-राशि प्राप्त हुई जिनमें धनराज शम्भू, विनय गुदारी, और एक भारतीय भाई साहब की कविताएँ रहीं.
ध्यातव्य है कि राष्ट्रीय स्तर पर आयोजित इस कविता-लेखन प्रतियोगिता में करीब बीस कविताओं का चयन किया गया था. उन कवियों ने 19 दिसम्बर 2009 को अपनी कविताओं को जूरी सदस्यों - भानुमति नागदान, सूर्यदेव सिबोरत तथा रामदेव धुरन्धर जी – के समक्ष पढ़ा था.
एक और विशेष बात, अनेक नए कवि भी सामने आए, उसी तथाकथित ‘उदासीन युवा-पीढ़ी’ से जिनमें कुछ नाम ऐसे हैं जो निकट भविष्य में ही मॉरीशस के हिन्दी-साहित्य के आधार-स्तम्भ को अधिक पुष्ट करने में अपनी महत्वपूर्ण योगदान निभाएँगे. ये नाम हैं – अंजलि हजगैबी, अर्विन्दसिंह नेकितसिंग, वशिष्ठ झम्मन, सहलील तोपासी, जीष्णु होरीशरण, रीतेश मोहाबीर आदि.
इन्दिरा गाँधी भारतीय सांस्कृतिक केन्द के छात्रों के द्वारा संगीत के कुछ मनोरम प्रस्तुतीकरण भी हुए.
हंगरी की डॉ. मारिया नेज्यैशी ने अपने भाषण में हिन्दी के प्रति अपने विचार व्यक्त किये. हंगरी में हिन्दी की स्थिति पर चर्चा करते हुए उन्होंने यह भी कहा कि विदेश में बसे हिन्दी के शिक्षकों को विश्व हिन्दी सचिवालय की तरफ से प्रशिक्षण सम्बन्धी सहयोग की प्राप्ति होनी चाहिए.
गणराज्य के राष्ट्रपति ने अपना भाषण हिन्दी में दिया. इसके अलावा, भारतीय उच्चायुक्त, महामहिम श्री मधुसुदन गणपति ने मॉरीशस में हिन्दी के प्रचार-प्रसार के लिए व्यक्तिगत तथा संस्थागत प्रयासों की प्रशंसा की.
पूरे कार्यक्रम का संचालन भारतीय उच्चायोग के द्वितीय सचिव एवं शिक्षा अधिकारी तथा वरिष्ठ दलित साहित्य के रचनाकार एवं आलोचक, डॉ. जयप्रकाश कर्दम जी ने किया.

Tuesday, September 22, 2009

जयपुरियर स्कूल ने राष्ट्रभाषा हिंदी की प्रगति और विकास हेतु मनाया हिंदी सप्ताह



सानपाड़ा, नवी मुम्बई । 18 सितम्बर 2009

भाषा हमारे और आपके विचारों का माध्यम है। हिंदी को राष्ट्रीय भाषा का गौरव देने के लिए हिंदी में लिखते थे। बाल गंगाधर तिलक ने कहा "देश की अखंडता-आजादी के लिए हिंदी पुल है"।

पूरा देश 14 सितम्बर को 'हिंदी दिवस' के रूप में मनाता है। जयपुरियर स्कूल (अंग्रेजी माध्यम) ने हिंदी भाषा को बढावा देने के लिए उस दिन प्रार्थना सभा से लेकर सारे दिन का काम हिंदी में किया और हिंदी सप्ताह में छात्रों की क्षमतानुसार प्राथमिक और माध्यमिक कक्षाओं के लिए तरह-तरह की स्पर्धा रख जैसे कविता वाचन, एकांकी, नैतिक कहानी क्विज, पर्यायवाची, मुहावरे, पहेलियाँ, विलोम, हिंदी साहित्य के प्रश्न, सुलेख, चित्र देख कर नाम बताओ सही उच्चारण के साथ आदि स्पर्धा रखी गयी थी। विशेष कार्यक्रम में "भारत की विविधता में एकता" दर्शाने के लिए बच्चों ने कवि सम्मेलन किया था।

प्राथमिक और माध्यमिक कक्षाओं के लिए केवल एक विजेता ट्राफी थी। इस चमचामाती ट्राफी को कक्षा 2 ने जीता। इस कार्यक्रम के मुख्य अतिथि श्रीमती रश्मि (मैनेजर) और अध्यक्षा श्रीमती ज्योत्स्ना भटनागर (प्रचार्या) थी। रश्मि जी ने हिंदी का महत्व देते हुए प्रतिभागी छात्रों के मनोबल, कार्यक्रम की प्रसंशा की। स्कूल की प्रचार्या ने 'हिंदी सप्ताह' को सामाजिक, सांस्कृतिक एकता की कड़ी के रूप में चरितार्थ किया।

इस सफल कार्यक्रम का श्रेय हिंदी अध्यापिका, संचालिका मंजू गुप्ता को जाता है। जिन्होंने अपने अनुभवों से 'हिंदी सप्ताह' में चार चाँद लगाये और कहा- "हिंदी का भविष्य आनेवाली पीढ़ी के हाथों में सुरक्षित है"।

विविध स्पर्धाओं की फोटो भी संलग्न हैं-