Tuesday, September 22, 2009

भारत से 16000 किमी दूर मनाया गया हिन्दी पखवाडा़



सूरीनाम में हिंदी पखवाड़ा

सूरीनाम स्थित भारत के राजदूतावास में 1-09-09 से 14-09-09 तक बड़े हर्षोल्लास के साथ हिंदी पखवाड़ा मनाया गया। इस दौरान सूरीनाम के चार जिलों निकेरी, कौमवेना, सरमक्का व पारामारीबो में हिंदी सुलेख और भाषण प्रतियोगिताएँ आयोजित की गईं। 1-09-09 को राजदूतावास व भारतीय सांस्कृतिक केंद्र में एक परिपत्र जारी किया गया जिसमें सभी भारतीय अधिकारियों व कर्मचारियों को हिंदी में काम करने का अनुदेश दिया गया।

वीज़ा, पासपोर्ट लेने आने वाले व्यक्तियों के लिए भी नोटिस बोर्ड पर सूचना लगाई गई- यदि आप हिंदी में बात करेंगे तो हमें प्रसन्नता होगी। इसका काफी सकारात्मक प्रभाव पड़ा और अधिकांश आगंतुको ने हिंदी में बात की।

14 सितंबर 2009 को सायंकाल 7.30 बजे भारतीय सांस्कृतिक केंद्र के सभागार में समापन समारोह में एक साहित्यिक गोष्ठी का आयोजन किया गया और प्रतियोगिताओं के विजेताओं को पुरस्कार वितरित किए गए। गोष्ठी में चर्चा के विषय थे-

साहित्य मानव जीवन का दर्पण
सूरीनाम में रचित साहित्य
हिंदी और सरनामी- परिचय व संबंध
हिंदी और सरनामी- वर्तमान स्थिति (स्थानीय संदर्भ)
साहित्यकारों के समक्ष कठिनाइयाँ- स्थानीय संदर्भ


इन विषयों पर सूरीनाम के जाने-माने विद्वान नारायणदत्त गंगाराम पांडेय, पं. हरिदेव सहतू, हिंदी छात्रा कृष्णा भिखारी और दो युवा हिंदी कर्मियों धीरज कंधई व निशा झाखरी ने अपने विचार व्यक्त किए।

भारत के राजदूतावास की अताशे (हिंदी व संस्कृति) भावना सक्सैना ने अपने स्वागत भाषण में कहा कि भारत से 16,000 कि.मी दूर हिंदी का यह उत्सव हिंदी कर्मियों को नमन करने और हिंदी के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दर्शाने के लिए है। उन्होंने सूरीनामवासियों से आग्रह किया कि वे हिंदी भाषा के साथ-साथ देवनागरी लिपि को भी अपनाएँ क्योंकि लिपि में भाषा के प्राण हैं।

सूरीनाम में भारत के राजदूत, कँवलजीत सिंह सोढी ने भारत की सर्वशिक्षा प्रणाली का उल्लेख करते हुए हर हिंदी जानने वाले से एक और व्यक्ति को हिंदी सिखाने का आग्रह किया।

इस कार्यक्रम में लगभग 200 हिंदी कार्यकर्ताओं व हिंदी प्रेमियों ने उपस्थित होकर आयोजन को सफल बनाया।





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4 पाठकों का कहना है :

Manju Gupta का कहना है कि -

ग्लोबलाइजेशन के इस जमाने में सूरीनाम में 'हिंदी पखवाडे' में नई -नई स्पर्धा रख हिंदी को नई उडान दी . विविध सुंदर फोटो देख कर कार्यक्रम में हिंदीप्रेमियों ,हिंदीभाषियों
दबदबा लगा .बधाई .

शैलेश भारतवासी का कहना है कि -

इतनी दूर हिंदी भाषा की धूम देखकर ख़ुशी होती है

Shamikh Faraz का कहना है कि -

हिंदी के प्रचार प्रसार प्रचार की बात इतने दूर देश में सुनकर अच्छा लगा. बहुत ही अच्छी खबर.

Deepak का कहना है कि -

apane desh se bahar aisi khabaren sunakar bahut prasannata hoti hai.surinaam me hindi ka prayoga sarahaniya hai aur hindi pakhawada ka aayojana sunakar dil bagabaag ho gaya. china me bhi hindi ke vidwaanon ko sammaanit kiya gaya,yah bhi apne aap me hindi ka sammaan aur gaurav hai. isake liye sabhi ko hardik badhai!

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