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Tuesday, October 26, 2010

राजभाषा हिन्दी संगोष्ठी एवं पुरस्कार वितरण समारोह



नई दिल्ली। यहॉं विस्तार निदेशालय में राजभाषा हिन्दी के प्रचार-प्रसार एवं सरकारी कामकाज में हिन्दी के प्रयोग को बढ़ावा देने के उद्वेश्य से एक राजभाषा संगोष्ठी का आयोजन किया गया। इसमें बोलते हुए संगोष्ठी के मुख्य अतिथि एवं भारत सरकार के पूर्व संयुक्त सचिव श्री बुध प्रकाश ने सरकारी कामकाज में हिन्दी के प्रयोग को बढ़ाने पर ज़ोर देते हुए सभी कर्मियों से अपना सरकारी काम मौलिक रूप से हिन्दी में करने का आवाह्न किया। उन्होंने इसके लिए अनुवाद पर निर्भरता कम करने की सलाह भी दी। संगोष्ठी की
अध्यक्षता करते हुए विभाग के अपर आयुक्त श्री वाई आर मीना ने इस बात पर प्रसन्नता व्यक्त की कि निदेशालय में हिन्दी के प्रयोग को बढ़ावा देने के लिए समय-समय पर राजभाषा हिन्दी के इस तरह के कार्यक्रम चलते रहते हैं। और इनसे यहाँ के अधिकारी एवं कर्मचारीगण लाभान्वित होते रहते हैं।

इस अवसर पर निदेशक (विस्तार प्रबंध) डा. आर. के. त्रिपाठी ने भी सरकारी कार्यालय में हिन्दी के प्रयोग को लेकर अपने उद्गार प्रस्तुत किए।इससे पूर्व संगोष्ठी के प्रारम्भ में कार्यालय के सहायक लेखा अधिकारी श्री नन्द कुमार ने सुमधुर सरस्वती वंदना प्रस्तुत की। इस अवसर पर राष्ट्रभाषा हिन्दी एवं विभिन्न सामाजिक व राष्ट्रीय विषयों पर एक काव्य गोष्ठी का आयोजन भी किया गया। इसमें दिल्ली निवासी देश के अनेक नामीगिरामी कवि व शायरों ने अपनी सारगर्भित रचनाएं प्रस्तुत की। इनमें शामिल रहे सर्वश्री बागी चाचा, वीरेन्द्र कमर, डा. रवि शर्मा, अनुराग, रसीद सैदपुरी एवं अंजू जैन। गोष्ठी का सफल संचालन श्रीमती ममता किरन ने किया।

इस अवसर पर विगत दिनो संपन्न हिन्दी पखवाड़े के दौरान राजभाषा हिन्दी की विभिन्न प्रतियोगिताओं में सफल रहे अधिकारियों व कर्मचारियों को अतिथियों द्वारा पुरस्कार भी प्रदान किया गया। इन समस्त कार्यक्रमों का संचालन कार्यालय के सहायक निदेशक (राजभाषा) श्री किशोर श्रीवास्तव ने किया। अंत में संयुक्त निदेशक श्री पी. एस. आरमोरीकर ने सभी अतिथियों के प्रति निदेशालय की ओर से आभार व्यक्त किया।

प्रस्तुतिः इरफान सैफी राही (पत्रकार), नई दिल्ली मो. 9971070545

Saturday, September 25, 2010

हिंदी पखवाड़ा संसद भवन के केंद्रीय सभागार में ‘राष्ट्रभाषा उत्सव – 2010’ का शानदार आयोजन





‘संसदीय हिंदी परिषद’, ‘परिचय साहित्य परिषद’ व ‘विधि भारती परिषद’ के तत्वावधान में दि. 21 सितम्बर 2010 को ‘राष्ट्रभाषा उत्सव – 2010’ का शानदार आयोजन किया गया. इस अवसर पर ‘वैज्ञानिक एवं तकनीकी शब्दावली आयोग’ के अध्यक्ष प्रो. (डॉ.) विजय कुमार ने अध्यक्षता की. पूर्व सांसद श्री उदय प्रताप सिंह, ‘दैनिक जागरण’ के मुख्य महा-प्रबंधक श्री निशिकांत ठाकुर, व पूर्व सांसद सत्या बहन विशिष्ट अतिथि थे. कार्यक्रम का प्रारंभ ‘सर्वोदय बालिका विद्यालय, समालखा’ की छात्राओं द्वारा ‘वंदे मातरम’ गान से हुआ. इसके अतिरिक्त इन बालिकाओं ने अन्य मधुर गीत भी प्रस्तुत किये. बालिकाओं ने जब हिंदी का गुणगान करते हुए गाया:
हृदय के उद्गारों को / होंठों पर सजा ले आए जो वाणी /वह भाषा हमारी हिंदी है...

तब सभागार में उपस्थित जनसमूह पर हुई सुखद प्रतिक्रिया को सहज ही समझा जा सकता है.

पूर्व केंद्रीय मंत्री डॉ. सरोजिनी महिषी ने सभी गणमान्य अतिथियों व श्रोतागण का स्वागत करते हुए कहा कि हिंदी भाषा विश्व की सभी भाषाओँ के समकक्ष हो कर निरंतर गतिशील रही है तथा मानव सभ्यता की प्रगति में उसका प्राचीन काल से ही सशक्त योगदान रहा है. डॉ. सरोजिनी महिषी राजनीतिक जीवन में लगभग 25 वर्ष लोकसभा व राज्यसभा की सदस्या रही तथा पर्यटन व नागरिक उड्डयन, परमाणु ऊर्जा व विधि मंत्रालयों के अतिरिक्त उन्होंने प्रधान मंत्री कार्यालय में ‘पब्लिक रिलेशंस’ का कार्यभार भी संभाला. मौसम विज्ञान विभाग जब उनके अधीन आया तब देश भर में ‘चक्रवात चेतावनी’ के 8 रडार उन्होंने स्थापित करवाए जो उस से पूर्व इस विभाग के पास नहीं थे. वे पिछले 48 वर्षों से संसद के इसी सभागार में हिंदी भाषा सेविका के रूप में ‘संसदीय हिंदी परिषद’ का संचालन कर रही हैं. अपने स्वागत भाषण में उन्होंने भारत व विश्व में हिंदी की मज़बूत स्थिति पर बेहद प्रसन्नता व्यक्त की.
समारोह में कुछ गणमान्य साहित्यकारों को ‘राष्ट्रभाषा गौरव सम्मान’ से सम्मानित किया गया तथा इस वर्ष पहली बार मीडिया-कर्मियों को भी ‘राष्ट्रभाषा मीडिया सम्मान’ से सम्मानित किया गया. साहित्यकारगण श्रीमती शान्ति अग्रवाल, श्री अशोक खन्ना, श्रीमती सविता चड्ढा, डॉ. धर्मवीर, श्री अनिल वर्मा ‘मीत’ व सुश्री सूरज मणि स्टेला को ‘राष्ट्रभाषा गौरव सम्मान’ से सम्मानित किया गया. मीडिया से जुड़े विश्षिट हस्ताक्षरों: श्रीमती रमा पाण्डेय व सुश्री कनुप्रिया को ‘राष्ट्रभाषा मीडिया सम्मान’ से सम्मानित किया गया. इसके अतिरिक्त कुछ पुस्तकों: ‘जीवन का सच’ (कविता संग्रह - डॉ. शारदा वर्मा), ‘जात्रूलैन’ (यात्रा संस्मरण - चमेली जुगरान), ‘कौन जाए गालिब दिल्ली की गलियां छोड़कर’ (कविता संग्रह - डॉ. रश्मि मल्होत्रा), ‘उस पार तो जाना है’ (कविता संग्रह - सविता चड्ढा), ‘सृजन समग्र खंड -1’ (कहानी संग्रह - उर्मिल सत्यभूषण) तथा श्रीमती संतोष खन्ना द्वारा सम्पादित ‘विधि भारती’ पत्रिका के 64वें अंक का लोकार्पण भी अध्यक्ष प्रो. विजय कुमार के करकमलों द्वारा हुआ.

साहित्य की प्रगति में पुरस्कारों सम्मानों की जो सकारात्मक भूमिका है, उसे नकारा नहीं जा सकता, यह बात दीगर है कि कतिपय लोग व संस्थाएं इन्हें आत्म-प्रसिद्धि का साधन भी बना लेते हैं. इस समारोह मैं सम्मानित झारखंड के आदिवासी क्षेत्र से आई सूरज मणि स्टेला से जब यह पूछा गया कि इस सम्मान से आप को कैसा महसूस हुआ तब वे हंस कर बोली – ‘मुझ से तो बच्चों ने भी यह पूछा था कि आप को यह सम्मान किस उपलब्धि के लिये मिल रहा है, तब मैंने उन से कहा कि तुम आजकल के विद्यार्थी लोग अंग्रेज़ी के लिये अपनी जान लड़ा देते हो, मरने मिटने पर उतारू हो जाते हो पर मैंने जीवन भर हिंदी में बात की, हिंदी माध्यम से ही शिक्षा प्राप्त की, हिंदी साहित्य में कार्यरत रही, बस यह उसी का सम्मान है’. ‘नदिया’(कविता संग्रह), ‘वंचित वाणी’ (कहानी संग्रह) तथा ‘आओ फूल खिल उठे’ (बाल कविता संग्रह) जैसी सशक्त रचनाओं की रचेता सूरज मणि स्टेला का सम्मान उस समस्त आदिवासी भारत का सम्मान है जो जीवन के संघर्षों में भी मुस्काता है और हिंदी साहित्य के माध्यम से अपने कठिन जीवन की झलकियाँ दिखाता है.

‘मीडिया सम्मान’ से सम्मानित मीडिया कर्मी रमा पाण्डेय हिंदी मीडिया में एक सर्वविदित नाम है जो ‘दिल्ली दूरदर्शन’ ‘बी.बी.सी लंदन’ व ‘सी.बी.सी कनाडा’ में सक्रिय रही तथा अपनी ही स्थापित ‘मोंटेज फिल्म्स’ द्वारा शिक्षा से जुडी हिंदी फिल्में निर्मित करती रही. ‘राजा राम मोहन राय कलाश्री पुरस्कार’ ‘अंबेडकर दलित साहित्य पुरस्कार’ व लंदन के ‘कथा’ विशिष्ट सम्मान पुरस्कार’ से सम्मानित रमा पाण्डेय का कथन है कि जिस सभागार में पंडित नेहरु व सरदार पटेल से लेकर देश के कई गणमान्य हिंदी प्रेमियों ने हिंदी का गुणगान किया, उसी सभागार में सम्मानित हो कर उन्हें बेहद प्रसन्नता हुई है. भारतीय संस्कृति, भाषा व कला से जुडी 300 हिंदी फिल्मों की शृंखला ‘जाने अपना देश’ की निर्माता रमा पाण्डेय ने ‘सुनो’ कहानी नाम से बाल साहित्य शृंखला भी लिखी. स्वतंत्र मीडिया कर्मी कनुप्रिया ने मुझे बताया कि हिंदी एक ऐसी सशक्त भाषा है जिस के माध्यम से हम शहर से गांव तक अधिकाधिक लोगों तक पहुँच सकते हैं. वे मीडिया को केवल धारावाहिकों द्वारा मनोरंजन का साधन बनाने में विश्वास नहीं करती वरन उसे एक ऐसी शक्ति मानती हैं जो किसी भी समाज की सोच तक को बदल कर रख सकता है. दिन भर अति व्यक्त रहने वाली कनुप्रिया प्रतिबद्धता में आस्था रखती हैं तथा वे इस सम्मान को अपने दृष्टिकोण का ही सम्मान मानती हैं.

‘दैनिक जागरण’ के मुख्य महाप्रबंधक निशिकांत ठाकुर ने अपने भाषण में इस बात पर अपार प्रसन्नता व्यक्त की कि इस वर्ष ‘राष्ट्रभाषा मीडिया सम्मान’ भी दिए गए हैं. उन्होंने आश्वासन दिया कि वे इस प्रकार के सम्मानों का भविष्य में भी ज़ोरदार समर्थन करेंगे. सभागार हिंदी प्रेमियों से खचाखच भरा था और निशिकांत ठाकुर की इस बात पर सभागार में हर्षध्वनि फैल गई. सभी ने करतल ध्वनि द्वारा इस समर्थन का स्वागत किया.

पूर्व सांसद उदय प्रताप सिंह ने कहा कि एक राष्ट्र में एक ही भाषा का वर्चस्व होना चाहिए, भले ही उसमें अन्य कई क्षेत्रीय आदि भाषाओँ के शब्द भी सम्मिलित हो जाएँ. उन्होंने कहा कि अंग्रेजों ने भी इसीलिये प्रगति की कि वे एक ही भाषा को ले कर चले और उसे विश्व की अनेक भाषाओँ के शब्दों से निरंतर धनी बनाते रहे.

अध्यक्ष प्रो. विजय कुमार ने ‘वैज्ञानिक एवं तकनीकी शब्दावली आयोग’ के अध्यक्ष रूप में सभी सम्मानित साहित्यकारों व मीडिया कर्मियों को बधाई देते हुए कहा कि हिंदी भाषा गंगा की सशक्त धारा के रूप में निरंतर प्रवाहित होती रहनी चाहिए. गंगा की इस पवित्र धारा का यह निरंतर प्रवाह रुकना नहीं चाहिए. उन्होंने यह भी कहा कि इस भाषा को भारी भरकम शब्दों से बोझिल करने की ज़रूरत नहीं है, वरन् इस में विश्व भर की भाषाओँ के शब्दों को समाहित किया जा सकता है.

कार्यक्रम की सम्पन्नता के रूप में पूर्व सांसद सत्या बहन ने धन्यवाद प्रस्ताव प्रस्तुत करते हुए इस बात पर गर्व व्यक्त किया कि संसद के इसी सभागार में हिंदी को संवैधानिक दर्जा दिया गया था और पिछले कई वर्षों से ‘संसदीय हिंदी समिति’ यहाँ हिंदी से जुड़े अनेकों कार्यक्रम करती रही है. उन्होंने कहा कि हिंदी से जुड़े सभी साहित्यकार व हिंदी प्रेमी बधाई के पात्र हैं और जैसा अध्यक्ष महोदय ने कहा, हिंदी की सशक्त धारा गंगा की तरह निरंतर प्रवाहित होते रहनी चाहिए.

कार्यक्रम का संचालन ‘परिचय साहित्य परिषद’ अध्यक्ष उर्मिल सत्यभूषण, संतोष खन्ना व अर्चना त्रिपाठी ने किया. कार्यक्रम राष्ट्र गान ‘जन गण मन...’ से संपन्न हुआ.

रिपोर्ट – प्रेमचंद सहजवाला

Thursday, October 1, 2009

उल्लास के साथ मना के.हि.प्र.सं.के पखवाड़े का समापन समारोह



30 सितम्बर 2009 । नई दिल्ली

गृह मंत्रालय, राजभाषा विभाग के अंतर्गत केंद्रीय हिंदी प्रशिक्षण संस्थान में दिनांक-15-09-2009 से 30-09-2009 तक हिंदी पखवाड़े का आयोजन किया गया। इसमें कर्मचारियों/अधिकारियों को हिंदी में कार्य करने के प्रति प्रेरित करने के उद्देश्य से अनेक प्रतियोगिताएं आयोजित की गईं जिसमें कर्मचारियों/अधिकारियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। विभिन्न प्रतियोगिताओं में विजयी प्रतिभागियों के नाम इस प्रकार हैं—हिंदी टंकण—श्री निलॉय सरकार प्रथम, श्रीमती बिमला द्वितीय, श्री राकेश कुमार गांधी तृतीय, हिंदी आशुलिपि- श्री राजेश कुमार सैनी प्रथम, श्रीमती बिमला द्वितीय, श्री शिवकुमार केदरे तृतीय, श्रुत लेखन{ ग्रुप डी}- श्री मनोज कुमार प्रथम, श्री महेश चंद द्वितीय, श्री प्रहलाद सिंह तृतीय, श्री योगेन्द्र पाल सिंह प्रोत्साहन सामान्य ज्ञान- श्री मनोज कुमार प्रथम, श्री सुरेन्द्र कुमार द्वितीय, श्री कमल जीत सिंह तृतीय, श्री महेश चंद प्रोत्साहन, निबंध लेखन—श्री पवन कुमार मिश्र प्रथम, श्रीमती बिमला द्वितीय, श्री निलॉय सरकार तृतीय, श्री मदन लाल पोपली तृतीय, टिप्पण व मसौदा लेखन –श्री पवन कुमार मिश्र प्रथम, श्री मदन लाल पोपली द्वितीय, श्री दिनेश कुमार तृतीय, श्री श्यामसुंदर तृतीय, आशु भाषण—श्री शमशेर अहमद खान प्रथम, श्री श्याम सुंदर द्वितीय, श्री मुकेश कुमार तृतीय स्वरचित कविता पाठ- श्री पूरन चंद सिंह प्रथम, श्री राकेश कुमार द्वितीय, श्री श्याम सुंदर तृतीय।

इस कार्यक्रम का समापन केंद्रीय हिंदी प्रशिक्षण संस्थान के 2-ए,पृथ्वी राज रोड स्थिति कार्यशाला एकक के व्याख्यान कक्ष में आयोजित किया गया। विजयी प्रतिभागियों को राज भाषा विभाग के संयुक्त सचिव श्री डी.के.पांडेय ने पुरस्कार राशि और प्रमाण पत्र प्रदान करते हुए प्रसन्नता व्यक्त की और कहा कि इसी प्रकार भविष्य में भी लोग उत्साहपूर्वक काम करें और पुरस्कार से लाभांवित हों। इस संस्थान की निदेशक श्रीमती मोहिनी हिंगोरानी ने मुख्य अतिथि के सम्मान में दो शब्द कहे और पखवाड़े की रिपोर्ट प्रस्तुत की। कार्यक्रम का धन्यवाद ज्ञापन उपनिदेशक (टंकण पत्राचार) श्री टीकाराम कश्यप ने किया तथा संचालन श्री एम.एल. शर्मा सहायक निदेशक ने सफलतापूर्वक किया।






रिपोर्ट- शमशेर अहमद खान,सहायक निदेशक, के.हि.प्र.सं.,2-ए, पृथ्वी राज रोड, नई दिल्ली-110011

Tuesday, September 22, 2009

भारत से 16000 किमी दूर मनाया गया हिन्दी पखवाडा़



सूरीनाम में हिंदी पखवाड़ा

सूरीनाम स्थित भारत के राजदूतावास में 1-09-09 से 14-09-09 तक बड़े हर्षोल्लास के साथ हिंदी पखवाड़ा मनाया गया। इस दौरान सूरीनाम के चार जिलों निकेरी, कौमवेना, सरमक्का व पारामारीबो में हिंदी सुलेख और भाषण प्रतियोगिताएँ आयोजित की गईं। 1-09-09 को राजदूतावास व भारतीय सांस्कृतिक केंद्र में एक परिपत्र जारी किया गया जिसमें सभी भारतीय अधिकारियों व कर्मचारियों को हिंदी में काम करने का अनुदेश दिया गया।

वीज़ा, पासपोर्ट लेने आने वाले व्यक्तियों के लिए भी नोटिस बोर्ड पर सूचना लगाई गई- यदि आप हिंदी में बात करेंगे तो हमें प्रसन्नता होगी। इसका काफी सकारात्मक प्रभाव पड़ा और अधिकांश आगंतुको ने हिंदी में बात की।

14 सितंबर 2009 को सायंकाल 7.30 बजे भारतीय सांस्कृतिक केंद्र के सभागार में समापन समारोह में एक साहित्यिक गोष्ठी का आयोजन किया गया और प्रतियोगिताओं के विजेताओं को पुरस्कार वितरित किए गए। गोष्ठी में चर्चा के विषय थे-

साहित्य मानव जीवन का दर्पण
सूरीनाम में रचित साहित्य
हिंदी और सरनामी- परिचय व संबंध
हिंदी और सरनामी- वर्तमान स्थिति (स्थानीय संदर्भ)
साहित्यकारों के समक्ष कठिनाइयाँ- स्थानीय संदर्भ


इन विषयों पर सूरीनाम के जाने-माने विद्वान नारायणदत्त गंगाराम पांडेय, पं. हरिदेव सहतू, हिंदी छात्रा कृष्णा भिखारी और दो युवा हिंदी कर्मियों धीरज कंधई व निशा झाखरी ने अपने विचार व्यक्त किए।

भारत के राजदूतावास की अताशे (हिंदी व संस्कृति) भावना सक्सैना ने अपने स्वागत भाषण में कहा कि भारत से 16,000 कि.मी दूर हिंदी का यह उत्सव हिंदी कर्मियों को नमन करने और हिंदी के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दर्शाने के लिए है। उन्होंने सूरीनामवासियों से आग्रह किया कि वे हिंदी भाषा के साथ-साथ देवनागरी लिपि को भी अपनाएँ क्योंकि लिपि में भाषा के प्राण हैं।

सूरीनाम में भारत के राजदूत, कँवलजीत सिंह सोढी ने भारत की सर्वशिक्षा प्रणाली का उल्लेख करते हुए हर हिंदी जानने वाले से एक और व्यक्ति को हिंदी सिखाने का आग्रह किया।

इस कार्यक्रम में लगभग 200 हिंदी कार्यकर्ताओं व हिंदी प्रेमियों ने उपस्थित होकर आयोजन को सफल बनाया।