Saturday, September 25, 2010

हिंदी पखवाड़ा संसद भवन के केंद्रीय सभागार में ‘राष्ट्रभाषा उत्सव – 2010’ का शानदार आयोजन





‘संसदीय हिंदी परिषद’, ‘परिचय साहित्य परिषद’ व ‘विधि भारती परिषद’ के तत्वावधान में दि. 21 सितम्बर 2010 को ‘राष्ट्रभाषा उत्सव – 2010’ का शानदार आयोजन किया गया. इस अवसर पर ‘वैज्ञानिक एवं तकनीकी शब्दावली आयोग’ के अध्यक्ष प्रो. (डॉ.) विजय कुमार ने अध्यक्षता की. पूर्व सांसद श्री उदय प्रताप सिंह, ‘दैनिक जागरण’ के मुख्य महा-प्रबंधक श्री निशिकांत ठाकुर, व पूर्व सांसद सत्या बहन विशिष्ट अतिथि थे. कार्यक्रम का प्रारंभ ‘सर्वोदय बालिका विद्यालय, समालखा’ की छात्राओं द्वारा ‘वंदे मातरम’ गान से हुआ. इसके अतिरिक्त इन बालिकाओं ने अन्य मधुर गीत भी प्रस्तुत किये. बालिकाओं ने जब हिंदी का गुणगान करते हुए गाया:
हृदय के उद्गारों को / होंठों पर सजा ले आए जो वाणी /वह भाषा हमारी हिंदी है...

तब सभागार में उपस्थित जनसमूह पर हुई सुखद प्रतिक्रिया को सहज ही समझा जा सकता है.

पूर्व केंद्रीय मंत्री डॉ. सरोजिनी महिषी ने सभी गणमान्य अतिथियों व श्रोतागण का स्वागत करते हुए कहा कि हिंदी भाषा विश्व की सभी भाषाओँ के समकक्ष हो कर निरंतर गतिशील रही है तथा मानव सभ्यता की प्रगति में उसका प्राचीन काल से ही सशक्त योगदान रहा है. डॉ. सरोजिनी महिषी राजनीतिक जीवन में लगभग 25 वर्ष लोकसभा व राज्यसभा की सदस्या रही तथा पर्यटन व नागरिक उड्डयन, परमाणु ऊर्जा व विधि मंत्रालयों के अतिरिक्त उन्होंने प्रधान मंत्री कार्यालय में ‘पब्लिक रिलेशंस’ का कार्यभार भी संभाला. मौसम विज्ञान विभाग जब उनके अधीन आया तब देश भर में ‘चक्रवात चेतावनी’ के 8 रडार उन्होंने स्थापित करवाए जो उस से पूर्व इस विभाग के पास नहीं थे. वे पिछले 48 वर्षों से संसद के इसी सभागार में हिंदी भाषा सेविका के रूप में ‘संसदीय हिंदी परिषद’ का संचालन कर रही हैं. अपने स्वागत भाषण में उन्होंने भारत व विश्व में हिंदी की मज़बूत स्थिति पर बेहद प्रसन्नता व्यक्त की.
समारोह में कुछ गणमान्य साहित्यकारों को ‘राष्ट्रभाषा गौरव सम्मान’ से सम्मानित किया गया तथा इस वर्ष पहली बार मीडिया-कर्मियों को भी ‘राष्ट्रभाषा मीडिया सम्मान’ से सम्मानित किया गया. साहित्यकारगण श्रीमती शान्ति अग्रवाल, श्री अशोक खन्ना, श्रीमती सविता चड्ढा, डॉ. धर्मवीर, श्री अनिल वर्मा ‘मीत’ व सुश्री सूरज मणि स्टेला को ‘राष्ट्रभाषा गौरव सम्मान’ से सम्मानित किया गया. मीडिया से जुड़े विश्षिट हस्ताक्षरों: श्रीमती रमा पाण्डेय व सुश्री कनुप्रिया को ‘राष्ट्रभाषा मीडिया सम्मान’ से सम्मानित किया गया. इसके अतिरिक्त कुछ पुस्तकों: ‘जीवन का सच’ (कविता संग्रह - डॉ. शारदा वर्मा), ‘जात्रूलैन’ (यात्रा संस्मरण - चमेली जुगरान), ‘कौन जाए गालिब दिल्ली की गलियां छोड़कर’ (कविता संग्रह - डॉ. रश्मि मल्होत्रा), ‘उस पार तो जाना है’ (कविता संग्रह - सविता चड्ढा), ‘सृजन समग्र खंड -1’ (कहानी संग्रह - उर्मिल सत्यभूषण) तथा श्रीमती संतोष खन्ना द्वारा सम्पादित ‘विधि भारती’ पत्रिका के 64वें अंक का लोकार्पण भी अध्यक्ष प्रो. विजय कुमार के करकमलों द्वारा हुआ.

साहित्य की प्रगति में पुरस्कारों सम्मानों की जो सकारात्मक भूमिका है, उसे नकारा नहीं जा सकता, यह बात दीगर है कि कतिपय लोग व संस्थाएं इन्हें आत्म-प्रसिद्धि का साधन भी बना लेते हैं. इस समारोह मैं सम्मानित झारखंड के आदिवासी क्षेत्र से आई सूरज मणि स्टेला से जब यह पूछा गया कि इस सम्मान से आप को कैसा महसूस हुआ तब वे हंस कर बोली – ‘मुझ से तो बच्चों ने भी यह पूछा था कि आप को यह सम्मान किस उपलब्धि के लिये मिल रहा है, तब मैंने उन से कहा कि तुम आजकल के विद्यार्थी लोग अंग्रेज़ी के लिये अपनी जान लड़ा देते हो, मरने मिटने पर उतारू हो जाते हो पर मैंने जीवन भर हिंदी में बात की, हिंदी माध्यम से ही शिक्षा प्राप्त की, हिंदी साहित्य में कार्यरत रही, बस यह उसी का सम्मान है’. ‘नदिया’(कविता संग्रह), ‘वंचित वाणी’ (कहानी संग्रह) तथा ‘आओ फूल खिल उठे’ (बाल कविता संग्रह) जैसी सशक्त रचनाओं की रचेता सूरज मणि स्टेला का सम्मान उस समस्त आदिवासी भारत का सम्मान है जो जीवन के संघर्षों में भी मुस्काता है और हिंदी साहित्य के माध्यम से अपने कठिन जीवन की झलकियाँ दिखाता है.

‘मीडिया सम्मान’ से सम्मानित मीडिया कर्मी रमा पाण्डेय हिंदी मीडिया में एक सर्वविदित नाम है जो ‘दिल्ली दूरदर्शन’ ‘बी.बी.सी लंदन’ व ‘सी.बी.सी कनाडा’ में सक्रिय रही तथा अपनी ही स्थापित ‘मोंटेज फिल्म्स’ द्वारा शिक्षा से जुडी हिंदी फिल्में निर्मित करती रही. ‘राजा राम मोहन राय कलाश्री पुरस्कार’ ‘अंबेडकर दलित साहित्य पुरस्कार’ व लंदन के ‘कथा’ विशिष्ट सम्मान पुरस्कार’ से सम्मानित रमा पाण्डेय का कथन है कि जिस सभागार में पंडित नेहरु व सरदार पटेल से लेकर देश के कई गणमान्य हिंदी प्रेमियों ने हिंदी का गुणगान किया, उसी सभागार में सम्मानित हो कर उन्हें बेहद प्रसन्नता हुई है. भारतीय संस्कृति, भाषा व कला से जुडी 300 हिंदी फिल्मों की शृंखला ‘जाने अपना देश’ की निर्माता रमा पाण्डेय ने ‘सुनो’ कहानी नाम से बाल साहित्य शृंखला भी लिखी. स्वतंत्र मीडिया कर्मी कनुप्रिया ने मुझे बताया कि हिंदी एक ऐसी सशक्त भाषा है जिस के माध्यम से हम शहर से गांव तक अधिकाधिक लोगों तक पहुँच सकते हैं. वे मीडिया को केवल धारावाहिकों द्वारा मनोरंजन का साधन बनाने में विश्वास नहीं करती वरन उसे एक ऐसी शक्ति मानती हैं जो किसी भी समाज की सोच तक को बदल कर रख सकता है. दिन भर अति व्यक्त रहने वाली कनुप्रिया प्रतिबद्धता में आस्था रखती हैं तथा वे इस सम्मान को अपने दृष्टिकोण का ही सम्मान मानती हैं.

‘दैनिक जागरण’ के मुख्य महाप्रबंधक निशिकांत ठाकुर ने अपने भाषण में इस बात पर अपार प्रसन्नता व्यक्त की कि इस वर्ष ‘राष्ट्रभाषा मीडिया सम्मान’ भी दिए गए हैं. उन्होंने आश्वासन दिया कि वे इस प्रकार के सम्मानों का भविष्य में भी ज़ोरदार समर्थन करेंगे. सभागार हिंदी प्रेमियों से खचाखच भरा था और निशिकांत ठाकुर की इस बात पर सभागार में हर्षध्वनि फैल गई. सभी ने करतल ध्वनि द्वारा इस समर्थन का स्वागत किया.

पूर्व सांसद उदय प्रताप सिंह ने कहा कि एक राष्ट्र में एक ही भाषा का वर्चस्व होना चाहिए, भले ही उसमें अन्य कई क्षेत्रीय आदि भाषाओँ के शब्द भी सम्मिलित हो जाएँ. उन्होंने कहा कि अंग्रेजों ने भी इसीलिये प्रगति की कि वे एक ही भाषा को ले कर चले और उसे विश्व की अनेक भाषाओँ के शब्दों से निरंतर धनी बनाते रहे.

अध्यक्ष प्रो. विजय कुमार ने ‘वैज्ञानिक एवं तकनीकी शब्दावली आयोग’ के अध्यक्ष रूप में सभी सम्मानित साहित्यकारों व मीडिया कर्मियों को बधाई देते हुए कहा कि हिंदी भाषा गंगा की सशक्त धारा के रूप में निरंतर प्रवाहित होती रहनी चाहिए. गंगा की इस पवित्र धारा का यह निरंतर प्रवाह रुकना नहीं चाहिए. उन्होंने यह भी कहा कि इस भाषा को भारी भरकम शब्दों से बोझिल करने की ज़रूरत नहीं है, वरन् इस में विश्व भर की भाषाओँ के शब्दों को समाहित किया जा सकता है.

कार्यक्रम की सम्पन्नता के रूप में पूर्व सांसद सत्या बहन ने धन्यवाद प्रस्ताव प्रस्तुत करते हुए इस बात पर गर्व व्यक्त किया कि संसद के इसी सभागार में हिंदी को संवैधानिक दर्जा दिया गया था और पिछले कई वर्षों से ‘संसदीय हिंदी समिति’ यहाँ हिंदी से जुड़े अनेकों कार्यक्रम करती रही है. उन्होंने कहा कि हिंदी से जुड़े सभी साहित्यकार व हिंदी प्रेमी बधाई के पात्र हैं और जैसा अध्यक्ष महोदय ने कहा, हिंदी की सशक्त धारा गंगा की तरह निरंतर प्रवाहित होते रहनी चाहिए.

कार्यक्रम का संचालन ‘परिचय साहित्य परिषद’ अध्यक्ष उर्मिल सत्यभूषण, संतोष खन्ना व अर्चना त्रिपाठी ने किया. कार्यक्रम राष्ट्र गान ‘जन गण मन...’ से संपन्न हुआ.

रिपोर्ट – प्रेमचंद सहजवाला

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पाठक का कहना है :

डा. अरुणा कपूर. का कहना है कि -

इस प्रकार से हिंदी के संबंधित आयोजन होते रहेंगे तभी जन जागृति आएगी!....जन साधारण को अपनी भाषा की - हिंदी की-पहचान करानी अति आवश्यक है! --यह देश सेवा ही है!.... कार्यक्रम की जानकारी उत्त्म प्रकार से आपने दी है, धन्यवाद!

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