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Wednesday, March 31, 2010

श्री मध्यभारत हिन्दी साहित्य समिति ने आयोजित की एक अनूठी प्रतियोगिता

समिति द्वारा आयोजित अंतर विद्यालयीन लेखन प्रतियोगिता के परिणाम घोषित
विख्यात टी.वी.कलाकार नेहा शरद करेंगी विजेताओं को पुरस्कृत



इंदौर । 30 मार्च
स्कूली विद्यार्थियों की लेखन क्षमता और कल्पानाशीलता को नया आयाम देने के उद्देश्य से श्री मध्यभारत हिन्दी साहित्य समिति द्वारा आयोजित अंतरविद्यालयीन लेखन प्रतियोगिता के निर्णय घोषित कर दिए गए हैं। समिति के प्रधानमंत्री श्री बसंतसिंह जौहरी,प्रबंधमंत्री प्रो सूर्यप्रकाश चतुर्वेदी तथा प्रतियोगिता के समन्वयक युवा टी.वी. पत्रकार श्री सुबोध खन्डेलवाल ने बताया कि 3 अप्रैल, शनिवार को समिति में आयोजित एक समारोह में विख्यात टी.वी.कलाकार नेहा शरद विजेता विद्यार्थियों को पुरस्कृत करेंगी।

आपने बताया कि चौथी से नवीं तक के स्कूली बच्चों के लिये आयोजित ये लेखन प्रतियोगिता एक नई सोच के साथ आयोजित की गई थी। इस प्रतियोगिता के लिये बच्चों को कोई विषय नही दिया गया था बल्कि उन्हें एक अन्तर्राष्ट्रीय चित्रकला प्रदर्शनी मे बुलाया गया। इस प्रदर्शनी में दिल्ली की एक संस्था शन्कर्स इन्टरनेशनल द्वारा आयोजित अन्तरराष्ट्रीय चित्रकला प्रतियोगिता मे चयनित दुनिया के सत्रह देशों के बच्चों (14 साल तक के) द्वारा बनाये गये लगभग 130 चित्र नुमाया किये गये थे। लेखन प्रतियोगिता मे भाग लेने वाले बच्चों को इनमें से किसी एक चित्र का चयन कर उसके आधार पर अपना आलेख लिखना था। इस लेखन प्रतियोगिता में इन्दौर की प्रज्ञा गर्ल्स स्कूल की तान्या जैन प्रथम स्थान पर रहीं, एमरल्ड स्कूल के खुशाल रघुवंशी को द्वितीय स्थान मिला तथा अग्रसेन विद्यालय के सौरभ कुंवर तृतीय स्थान पर रहे। इनके अलावा एमरल्ड स्कूल की विन्नी मालिक, सन्मति स्कूल की ट्विंकल अग्रवाल, श्रुति उमठ और स्वाति चौधरी तथा अग्रसेन के सतपाल सिंह अजमानी सहित कुल पाँच विद्यार्थियों को प्रोत्साहन पुरकार हेतु चुना गया है।
इस अनूठी प्रतियोगिता में शहर के दस स्कूलों के एक सौ बीस विद्यार्थियों ने भाग लिया। इनके द्वारा भेजे गए आलेखों का मूल्यांकन भारत सरकार के केन्द्रीय हिन्दी निदेशालय, नई दिल्ली के सहायक निदेशक श्री अर्पण कुमार तथा समिति के श्री गिरेन्द्र सिंग भदोरिया ने किया।

श्री जौहरी ने कहा कि सुश्री नेहा शरद ने कई टी.वी. धारावाहिकों में अहम किरदार निभाये है, वे उन चुनींदा टी.वी. कलाकारों में से है जिन्हें उनके संजीदा अभिनय के कारण पहचाना जाता है और सबसे ख़ास बात ये है कि वो मालवा की माटी से जुड़े देश के सुप्रसिद्ध व्यंग्यकार स्व. श्री शरद जोशी की सुपुत्री हैं। उन्होंने कहा कि उनके हाथों पुरस्कृत होकर इन बच्चो की रचनात्मकता को और अधिक प्रोत्साहन मिलेगा।

प्रस्तुति-बसंतसिंह जौहरी, प्रधान मंत्री , हरेराम वाजपेयी, प्रचार मंत्री

Friday, March 5, 2010

रंगों और रेखाओं का अद्‍भुत मेल



बबिता बिश्वास चित्रकला जगत में विशेषकर वारली पेंटिंग में ख्यातिप्राप्ति नाम है। कला जगत में उनकी उप्लब्धियों की फेहरिस्त लंबी है। उन्हें अनेक सम्मान हासिल हो चुके हैं। कला से संबंधित अनेक वर्कशाप और कैम्प वे आयोजित कर चुकी हैं। उन्होंने न केवल एकल या सांझी चित्र प्रदर्शनियां देश के विभिन्न भागों में आयोजित की हैं बल्कि उनके दो प्रायोजित शो भी हो रहे हैं। उनमें से उनका पहला शो भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद द्वारा पिछले दिनों दिल्ली में आयोजित हुआ, जिसकी कुछ झलकियाँ प्रस्तुत हैं-











Friday, February 26, 2010

इदार इंबिको के छाया चित्रों की प्रदर्शनी

18 फरवरी 2010 से 24 फरवरी 2010 तक नई दिल्ली, लोदी रोड स्थित इंडिया इस्लामिक कल्चर सेंटर में रूसी छायाकार इदार इंबिको के छाया चित्रों की प्रदर्शनी का आयोजन रूसी साइंस और कल्चर सेंटर और इंडिया इस्लामिक कल्चर सेंटर के संयुक्त तत्वाधान में किया गया जिसका उद्घाटन भारत सरकार के केंद्रीय मंत्री माननीय डॉ. फारूक अब्दुल्लाह,रूसी संघ के भारत स्थित राजदूत महामहिम एलेक्सजेंडर एम.कदाकिन और आल इंडिया मस्जिदों के इमामों के महासचिव इमाम उमर अहमद इलियासी ने किया.इस छाया चित्र प्रदर्शनी का मूल विषय था—रूस में इस्लाम--.

रूसी छाया चित्रकार का जन्म 1955 में मास्को के आस-पास हुआ. उनका बचपन से ही फोटोग्राफी का शौक था. सेना की सेवा से निवृत होने के बाद बाल्यकाल का शौक उनके व्यवसाय से जुड़ गया.उनकी कला परवान चढ़्ने लगी जिसमें अनेक विषय अंतर्निहित होते थे. उनके चित्रों की प्रदर्शनियां रूस के साथट्यूनीसिया,मोरक्को,मिष्र और कांगो में हो चुकी हैं.उनके चित्रों की झलक आप भी लीजिए-















Saturday, January 9, 2010

बीजिंग के भारतीय सांस्कृतिक केंद्र में चित्र कला प्रदर्शनी का आयोजन

(चित्रों को बड़ा करके देखने लिए निम्नलिखित चित्रों पर बारी-बारी क्लिक करें)

भारतीय राजदूतावास के सांस्कृतिक केंद्र पर श्रीमती अंजुला शर्मा के रंगचित्रों की एक भव्य कला प्रदर्शनी आयोजित की गयी.प्रदर्शनी का उद्घाटन चीन में भारत के राजदूत महामहिम डॉ एस.जयशंकर ने किया.प्रदर्शनी में भारतीय राजदूतावास के सदस्यों के साथ साथ अंतर्राष्ट्रीय जगत के जानेमाने विशिष्ट राजनयिक एवं बीजिंग में भारतीय समुदाय के सदस्य उपस्थित थे.सभी विशिष्ट अभ्यागत अतिथियों ने अंजुला शर्मा के कलाकृतियों की मुक्त कंठ से प्रशंसा की.अपने उद्घाटन भाषण में महामहिम राजदूत महोदय ने कहा कि अंजुला शर्मा की पेंटिंग कलाकृति में भारतीय सांस्कृतिक विम्बों के मूर्तीकरण के साथ साथ भारतीय पारंपरिक अभिप्रायों को भी रेखांकित किया गया है.राजस्थानी परम्परा के निर्वाह के साथ साथ लोक तत्त्व का चित्रांकन अंजुला शर्मा के चित्रों की विशेषता है. उन्होंने इस बात पर बल दिया कि चीन में आयोजित यह प्रदर्शनी मात्र औपचारिक प्रदर्शनी नहीं है बल्कि यह सेतु के रूप में भारत-चीन के बीच सांस्कृतिक अभिप्रायों का आदान-प्रदान है.


अंजुला शर्मा ने भारतीय परम्परा को अपनी कला में जिया है.उन्होंने तैलरंगों का प्रयोग जिस रूप में किया है वह दर्शनीय है.उनके तूलिकाघात में अजीब सी गति दिखायी देती है.घात दर घात तूलिका स्वयं आगे बढ़ती गयी है और एक रास्ता बनाती गयी है.कहीं कहीं बोल्ड पैच तो कहीं कहीं खुरदुरेपन की झलक काफी आकर्षक दिखायी देती है.जब वे कैनवास पर होती हैं या रंग रोगन करती हैं तो स्पष्ट दीखता है कि मस्तिष्क और हाथ का तारतम्य कितना सधा हुआ है. रंग के कई शेड्स आते हैं जो स्थिति-दर स्थिति उनकी कलाकृतियों के भावार्थ तो बताते ही हैं,आधुनिक कला-कोष को भी समृद्ध भी करते हैं.राजदूतावास की कला-दीर्घा में प्रदर्शित अधिकांश कलाकृतियाँ राजस्थानी आदिवासी स्त्रियों के आदिम वेश-भूषा,आभूषण एवं उनके सांस्कृतिक अभिप्रायों के साथ प्रदर्शित हैं जोप्रभावशाली यथार्थ विम्बों का सृजन करती हैं.कलादीर्घा में कुल ४० कलाकृतियाँ प्रदर्शित की गयी हैं.इनमें सिल्क पर पोस्टल कलर,वाटर कलर एवं तैल-चित्र उल्लेखनीय हैं.स्थानीय चीनी दर्शकों एवं कलाकारों ने राजस्थानी 'मंडाना' शैली को काफी पसंद किया.

इन रंगों की भाषा को पढ़ाते हुए अंजुला शर्मा ने अनेक ऐसे रंगों का प्रयोग किया है जो काल के परिप्रेक्ष्य में क्षण और पल को परिभाषित करते हैं.ज्यादातर कलाकृतियों में उद्दीप्त रंगों का प्रयोग हुआ है.रचना,सृजन और चिंतन इन कलाकृतियों के मूल में है और यही अंजुला शर्मा की विशेषता है.

प्रदर्शनी के उद्घाटन के अवसर पर महामहिम राजदूत डा.एस.जयशंकर के अतिरिक्त दूतावास के उपमुख्य श्री जय दीप मजूमदार,श्री एन. आर.सिंह.श्री बी. के. सिंह,श्री वी.पी.चौहान,डॉ.देवेन्द्र शुक्ल एवं भारतीय पर्यटन केंद्र के निदेशक श्री शोएब अहमद तथा अन्य विशिष्ट राजनयिक उपस्थित थे.

कार्यक्रम का संयोजन और संचालन श्रीमती जसमिंदर कस्तूरिया ने किया.

प्रस्तुति- डॉ. देवेन्द्र शुक्ल
भारतीय दूतावास, बीजिंग, चीन