Showing posts with label Dalas. Show all posts
Showing posts with label Dalas. Show all posts

Friday, November 5, 2010

अमेरिका का सबसे बड़ा दिवाली मेला



हरगोविंद जी का मुक्त दिवस हो
या स्वामी महावीर को निर्वाण मिला हो
राम जी अयोध्या आ पहुंचे हों
या पांडव ने पूरा बनवास किया हो
हो कारण कोई भी
प्रेम का तोरण हर द्वार सजाएँ
आओ एक दीप जलाएं

दीपावली एक ऐसा त्यौहार है जो अलग अलग नामो से विभिन्न कारणों से बहुत सी धर्मो में मनाया जाता है। अंधकार पर प्रकाश की, अज्ञान पर ज्ञान की और बुराई पर अच्छाई जी विजय का प्रतीक है दीपावली। प्रकाश के इस त्यौहार को डी अफ डब्लू इंडियन कल्चरल सोसईटी ने एक बड़े मेले के रूप में २००६ में मानना प्रारंभ किया था। तब से ये पारम्पर निरंतर चली आ रही है। इसी परंपरा के तहत इस बार पांचवां दीवाली मेला बहुत ही धूमधाम और शान से मनाया गया ,इस मेले में करीब ८० से ९० हजार लोग शामिल हुए। लोगों का आना जाना शाम से ही प्रारंभ होगया था। खाने पीने के ९० स्टौल थे जहाँ भारत के हर प्रदेश का खाना था। खाने की महक पूरे वातावरण को और भी मेले जैसा बना रही थी।किड्स कौर्नर में बच्चों ने बहुत आनन्द उठाया। मेले में कहीं बन्जी जम्पिंक हो रही थी तो कहीं बच्चे हाथी और ऊंट की सवारी कर रहे थे। बाहरी स्टेज पर देश के विभिन प्रान्त का नृत्य हो रहा था जिसको लोगो ने बहुत सराहा तथा गरबा और भांगड़ा का खूब लुत्फ़ उठाया। इस के लिए श्री कृष्ण परमार बधाई के पात्र हैं।
दी ऍफ़ वाब्लू इंडियन कल्चरल सोसाईंटी के अध्यक्ष श्री सतीश गुप्ता जी जो की स्वयं स्टेडियम के अन्दर और बाहर के स्टेज के कार्यक्रम की देख भाल कर रहे थे से जब मेले की सफलता के बारे में बात की तो उन्होंने कहा की "ये हमारा पांचवां मेला है और हर बार ये पहले से बेहतर हुआ है। लोगों की संख्या में भी निरंतर वृद्धि हुई है। इस बार ये मेला कॉटन बौल स्टेडियम में हुआ और बहुत हो सफल रहा। इस बार हमको डैलस के मेयर और आसपास के शहरों के मेयर का बहुत ज्यादा सहयोग मिला है। पहले जब हमने ये प्रारंभ किया था तो मन में शंका थी कि पता नहीं लोगों को पसंद आएगा या नहीं यहाँ के लोग क्या कहेंगे पर जैसे जैसे देसी लोग बढ़ते जा रहे हैं। लोगों को हमारी सभ्यता और संस्कृति के बारे में पता चलता जा रहा है।और अब हम को सभी का सहयोग मिलने लगा है। इस मेले की सफलता का श्रेय मेरे साथियों और स्वयं सेवियों को जाता है जिन्होंने दिनरात मेहनत की है।"
डैलस रंगमंच द्वारा इस मौके पर रामलीला का आयोजन किया गया था। जैसे ही रामलीला प्रारंभ हुई सभी लोग अन्दर हौल में आ के बैठ गए। एक घंटे चली इस रामलीला ने सभी को मन्त्र मुग्ध कर दिया। रामायण के पात्रों की वेश-भूषा, मंच सज्जा और पत्रों का अभिनय ऐसा था कि अमरीका में बसे भारतीयों को अपने बचपन के दिनों की रामलीला याद आ गई। लेखक, निर्देशक जयंत चौधरी, और सोनल की कल्पनाशीलता ने रामलीला को दर्शकों के दिलो-दिमाग में ऐसा बसा दिया कि बच्चों से लेकर बूढ़े तक इसके एक एक दृश्य, संवाद और सुंदर प्रस्तुति को लेकर अपनी प्रशंसा के भाव छुपा नहीं पा रहे थे। सूत्रधार सोनल पौद्दार और सौम्या सरन ने बहुत खूबी से इस भूमिका का निर्वाह किया। जिस की वजह से रामलीला और भी उत्तम हुई कल्पना फ्रूटवाला। डॉ श्री प्रकाश कागाल, श्री अरुण रावत, सुश्री वन्दिता पारिख, श्री राज त्रिपाठी, श्री तरुण सरन, डॉ श्री थीरू विजय, सुश्री नूतन अरोरा, सुश्री ज्योति कुमार, श्री तरुण धाम, सुश्री पारुल भाटिया आदि ने रामलीला के मुख्य पात्रों की भूमिका का निर्वाह किया। बाल कलाकारों में मुख्य थे अर्पित, सोनाक्षी, लक्ष्य, आदित्य, मेहर, मलिका, पंकज, रोहन शिवम् संजना मेघना मुकुंद, विवेक, विनायक, राघव। रामलीला की स्वयंसेवी टीम में थे श्री राम साहनी, श्री विनय सक्सेना, नूतन अरोरा, सुश्री राधिका गोयल, सुश्री शारदा रावत, श्री राजेश रैना, सुश्री नीरजा शेठ, सुश्री रश्मि भाटिया, सुश्री मंजू श्रीवास्तव, सुश्री किनी परिवार, श्री किशोर फ्रूटवाला इन सभी के सहयोग के बिना रामलीला का संम्पन हो पाना अकल्पनीय था। रावन दहन के साथ ही पूरा स्टेडियम जय श्रीराम के नारों से गुंजायेमान हो उठा।
दीवाली मेले को सफल बनाने में श्री रमेश गुप्ता जी का बहुत बड़ा योगदान है।रमेश जी ने प्रायोजकों से ले के बौलीवुड शो तक सभी कुछ का बखूबी इंतजाम किया। इनकी कार्य कुशलता की जितनी प्रशंसा की जाये कम है। श्री रमेश गुप्ताजी जो हर साल भारत से अमेरिका दिवाली मेले का आयोजन करने ही आते हैं। उन्होंने बताया अमेरिका से भारतीय सर्दियों की और गर्मी की छुट्टियों में मुख्यतः भारत जाते हैं, तो उनको कभी भी रामलीला देखने को नहीं मिल पाती है तो सोचा की हमारे बच्चे अपनी इस संस्कृति को भी देखें और इस का आनन्द लें। यही सोच के हम हर साल ये मेला सजाते हैं। रमेश गुप्ता जी ने आगे कहा की बिना प्रायोजकों के सहयोग से कार्यक्रम सफलता पूर्वक करना कठिन था। हम सिटी बैंक वालमार्ट जी टीवी, स्टार टी वी, सबवे, पेप्सिको, टी एक्स यु एनर्जी, देसी प्लाज़ा टेक्सस इंस्ट्रुमेंट्स, एस बी इंटरनेशनल, एकल विद्यालय, फेन एसिया, देसी प्लाजा। गुप्ता एंड एसोसियेट इंक, पटेल ब्रदर्स, गुप्ता अग्रवाल फाउन्डेशन, गिडो मैथ्स एंड लर्निंग। राज विडिओ फोटोग्राफी डॉ राज एंड प्रतिभा तन्ना के बहुत बहुत आभारी हैं। मै हृदय से सभी का धन्यवाद करता हूँ। राजन और उनकी टीम ने हमारी बहुत सहायता की है मै उनका भी बहुत आभारी हूँ।



मेले का अंतिम चरण था सुनिधि चौहान का कंसर्ट। लोग बेताबी से अपनी चाहिती गायिका का इंतजार कर रहे थे। उनके स्टेज पर आते ही पूरा स्टेडियम तालियों की गडगडाहट से गूंजा उठा। सुनिधि ने लोगों का भरपूर मनोरंजन किया। इसके बाद इंडियन आइडल और बदमाश कम्पनी के मियांग चेंग और अयूब पटेल ने भी लोगों का बहुत मनोरंजन किया। उनके गाये गानों पर लोग झूमते नजर आये। यहाँ का साउंड सिस्टम बहुत अच्छा था श्री चाट गणेश जी ने। जिसका पूरा इंतजाम किया था। वो बधाई के पात्र हैं।
स्टेडियम की सारी व्यवस्था अति उत्तम थी। श्री यू के गुप्ता जी जो की बहुत अच्छे समझौता वार्ताकार (निगोशियेटर ) माने जाते हैं। उनके कुशल मेनेजमेंट और निगोशियेशन कि वजह से स्टेडियम की अच्छी व्यवस्था संभव हो सकी। पूरा मेला बहुत ही अच्छी तरह से प्लान किया गया था। सब कुछ सुनियोजित ढंग से हुआ। ये विभाग श्री वी के गुप्ता जीके पास था जिन्होंने बहुत अच्छी तरह इतने विभिन्न कार्यक्रमों को एक सूत्र में पिरो के माला सा बना दिया। .डॉ नरेश गुप्ता जी जो की कैंसर क्लिनिक चलाते हैं उन लोगों की सहायता के लिए जिनके पास इन्शोरेंश नहीं है।इस तरह से सांस्कृतिक कार्यक्रमों में बहुत उत्साह से भाग लेते हैं और तन मन धन से सहायता करते हैं।




रमेश गुप्ता जी ने एक बहुत सुंदर बात की उन्होंने कहा की वो अब मेले की सांस्कृतिक बागडोर नवजवान बच्चों को सौपना चाहते हैं। इस बार मेले में यंग बच्चों ने बहुत मेहनत से काम किया जिनमे हैं अरिश गुप्ता अर्नव गुप्ता, सुनैना, विवेक गुप्ता और देव गुप्ता।

कौन्सर्ट की समाप्ति पर जी आतिशबाजी हुई बहुत देर तक चली। ऐसा लगता था कि पूरा आकाश दुधिया प्रकाश से भर गया हो और लाल, सफ़ेद, हरे, सुनहरे रंगों के फूल आकाश में खिल उठे हो। ये पूरा समां दर्शनीय था। मेले के बारे में जब लोगों से पूछा तो किसीने कहा की मुझको तो अपना बचपन याद आ गया, किसी ने कहा मेरे बच्चों को हाथी और ऊंट की सवारी कर के बहुत आनद आया, तो किसीने कहा मेले का पूरा आन्नद उठाया फिर रामलीला और सुनिधि का गाना गाना अन्त में आतिशबाजी मनोरंजन के लिए इससे ज्यादा कोई और क्या मांगेगा।हम तो अगले दिवाली मेला का इंतजार करेंगे।



मेला देखने के लिए लिटिल रौक अरकेंसा, अर्डमोर, फेड्विल, हीयूस्टन, औसटिन, शिकागो न्यू योर्क, कैलिफोर्निया से लोग आये थे। इस मेले की खास बात ये थी कि इसमें भारतियों के अलावा पाकिस्तानी, नेपाली और अमेरिकन भी शामिल हुए।

प्रस्तुति- रचना श्रीवास्तव

Sunday, September 26, 2010

डैलस में छाया ए आर रहमान का ज़ादू

हम अनेकों कार्यक्रमों में जाते है बहुत से शो देखते हैं पर उनमे से कुछ ऐसे होते हैं जो एक सुनहरी याद बन आँखों में समाजाते हैं. ऐसा ही कुछ खास अनुभव रहा ऐ आर रहमान का कौन्सर्ट "दा जरनी होम वर्ड टुअर "स्काई पास इंटरटेनमेंट के तत्वाधान में प्रस्तुत इस शो ने डैलस में इतिहास रच डाला. डैलस का आज तक का सबसे बड़ा और सफल शो कहा जाये तो गलत न होगा. अमेरिकन एयर लाइनस सेंटर में करीब १३००० से भी ज्यादा लोगों ने इस शो का आनन्द उठाया शो थोडा देर से प्रारंभ हुआ जब इस शो के करता धरता "स्काई पास इंटरटेनमेंट के सी ई ओ श्री विक्टर इब्राहीम जी से इस देरी का कारण पूछा गया तो उन्होंने बताया की पहले ये कॉन्सर्ट ४ जुलाई को होने वाला था पर कुछ कारणों से ये स्थगित हो गया उस समय हम बहुत दुखी हो गये थे. पर हमारे बहुत से टिकट बिक चुके थे और उस पर शो प्रारंभ होने का समय लिखा था ८ बजे फिर जब अभी शो की नई तारीख मिली तो जो नए टिकट बिके उसमे शो प्रारंभ होने का समय लिखा था ७ बजे। बस यही गलतफहमी हो गई। यदि हम शोए ७ बजे शुरू करते तो आधे लोगों का शो छूट जाता। इसी कारण शो देर से शुरू करना पड़ा।"

ऐ आर रहमान का ये शो आज कल पूरे अमेरिका में धूम मचा रहा है इस कार्यक्रम की खास बात है इसकी प्रस्तुति। और स्टेज सज्जा। जिसकी जिम्मेदारी सम्भाली थी सुप्रसिद्ध निर्देशक अमय(amy )टिंकमेन ने जो मारीअह केरे (mariah carey ), ब्रिटनी स्पेअर्स और बैकस्ट्रीट बॉय्स के साथ काम कर चुके हैं, पूरे स्टेज को कुछ यूँ बनाया गया था की समय समय पर उसमे परिवर्तन किये जा सकें ये परिवर्तन स्टेज को हर पल एक नया रूप दे रहा था और शो को भव्य बना रहा था। ध्वनि और प्रकाश की व्यवस्था अति उत्तम थी। लेजर का प्रयोग बहुत अच्छी तरह से किया गया था जो सभी के मन को लुभा रहा था। स्टेज के झीने परदे पर भव्य दृश्य आते जा रहे थे जो कार्यक्रम में चार चाँद लगा रहे थे।

रहमान जी ने हिदी के आलावा तमिल मलयालम तेलगू और इंग्लिश के भी गाने गाये उनके एक एक गाने पर लोग झूम रहे थे और ख़ुशी में चीख रहे थे। कुछ नये प्रयोग भी इस कार्यक्रम में देखने को मिले। रंग दे बसंती का गीत "लुका-छुपी बहुत हुई सामने आजा न" में रहमान जी के साथ लता जी ने भी गया है। यहाँ पर्दे पर लता जी को अपना हिस्सा गाते हुए दिखाया गया और रहमान जी ने अपना हिस्सा गया तो ऐसा लग रहा था कि लता जी सामने गा रही है सभी ने इस प्रयोग को बहुत सराहा। इस शो में हिन्दू, मुस्लिम और सिख धर्मो की दुआओं का संगम प्रस्तुत किया गया जो दर्शको को आत्मा तक भिगोगाया।
विभिन्न त्योहारों को भी बहुत सुंदर ढंग से इस शो की माला में पिरोया गया था।


(विक्टर अब्राहिम)

रहमान जी ने अपनी अल्बम का एक गीत जो कि सूफियाना कलाम था गया तो वि स्वयं इतने भावविभोर हो उठे कि उनकी आँखें छलक उठीं। ये दर्शाता ही कि वो संगीत में कितना डूब जाते हैं। रहमान जी की उंगलिया तबला, गिटार, हारमोनियम, पियानो, किसी वो वाद्य यंत्र को छूती है तो चमत्कारी संगीत निकलता है जब उन्होंने अपने इस गुण को दर्शाया तो लोग वाह वाह कर उठे। रहमान जी में स्लम डॉग मिलिनेयर, लगान, जाने तू या जाने न, दिल से, राग दे बसंती और रोज़ा फिल्म के गाने गाये और लोगों को आनंदित किया।
रहमान जी के साथ इस शो में श्री हरिहरन जी, विजय प्रकाश, हर्षदीप कौर, असद खान, बेन्नी दयाल, ब्लाज़े, श्वेता पंडित, नीति मुहान ने भी गाने गाये और लोगों का मनोरंजन किया।
हरिहरन जी ने तू ही रे, चंदा रे गया उस के बाद उहोने कुछ ग़ज़लें और शास्त्रीय संगीत को अपने सुरों से साध के एक समां बांध दिया उनकी हृदय स्पर्शी आवाज ने सभी को मन्त्र मुग्ध कर दिया।
स्वेता पंडित निती और हर्षदीप की मखमली सुरीली आवाज का जादू सभी को सम्मोहित कर गया। ससुराल गेंदा फूल, बरसो रे मेघा, मेहदी है रचने वाली, चल छईयां छईयां या प्रार्थना हो सभी में इनकी आवाज ने मानो सुरों का इन्द्रधनुष बिखेर दिया। बेन्नी दयाल के पप्पू कांट डांस "पर सभी ने खूब डांस किया। कहने को जश्ने बहारा है और गुज़ारिश से प्रसिद्ध ब्लाज़े के गाने भी लोगों ने बहुत पसंद किये।



घडी में ११ बजने को थे शो के समाप्त होने का समय पास आरहा था और लोगों को इंतजार था उस गाने का जिस के लिए रहमान जी को आस्कर मिला था । जब रहमान जी ने गाना प्रारंभ किया तो स्टेडियम का नज़ारा देखने वाला था कोई शायद ही अपनी सीट पर बैठा हो सभी खड़े होके तालियाँ बजा रहे थे और मस्ती में झूम रहे थे।
शो के डारेक्टर ऑफ़ ऑपरेशन श्री ताहिर अली जी ने कहा "जब ये कार्यक्रम स्थगित हुआ था तो बहुत निराशा हुई थी। पर डैलस कि जनता ने बहुत सहयोग दिया। लोग हमको जानते थे तो उनका यकीन नहीं टुटा अभी अंतिम तीन हफ्ते बहुत अच्छे बीते। १३ हज़ार से भी ज्यादा लोगों ने इस कार्यक्रम में शिरकत की। रहमान ने हमें अपने फन की नोज़ियत से नवाज़ा। इस पूरे शो में जितना सामने दिख रहा था उससे ज्यादा स्टेज के पीछे कि मेहनत थी। पूरा क्रू को दो भागों में बटा था हियूसटन का शो करने के बाद वो क्रू बोस्टन चला गया और यहाँ डैलस का क्रू वेंकुअर चला गया। दोनों ग्रुप को अलग-अलग दो कोच दिए गाये हैं जो सारी सुख सुविधा उक्त थे। इतने अच्छे प्रबंध के लिए मै मुख्य प्रबंधक को बधाई देता हूँ "



स्काई पास इंटरटेनमेंट के उपाध्यक्ष श्री जे सी वर्गिस जी का ये पहला शो था इसकी सफलता को ले के वो बहुत उत्साहित थे .
शो की सफलता के बारे में जब श्री विक्टर जी से पूछा गया तो उहोने कहा कि "सभी लोगों ने शो की तारीफ की है मुझे बधाई के बहुत से फ़ोन .,एस ऍम एस और इ मेल आये है मै अपने सभी प्रायोजकों को बहुत बहुत धन्यवाद देता हूँ और अपनी पूरी टीम और स्वयं सेविकों का आभार व्यक्त करता हूँ क्योकि उनकी मेहनत के बिना ये शो कभी भी कामियाब नहीं हो सकता था"
शो की समाप्ति पर जब मैने कुछ लोगों की राय जाने के लिए पूछा तो उनका कहना था कि ये जीवन भर का अनुभव है। बहुत अच्छा और मनोरंजक शो था। किसीने कहा पैसा वसूल शो था। किसी ने कहा की ऐसा शो उहोने कभी पहले नहीं देखा था सभी ने शो की सफलता के लिए श्री विक्टर अब्राहिम को और उनकी टीम को बधाई दी।




प्रस्तुति- रचना श्रीवास्तव

Monday, August 30, 2010

अमेरिका के शहर डैलस का 15 अगस्त



जब १५ अगस्त आता है तो पूरा देश तीन रगों में रंग जाता है। इस बार अमेरिका भी इस बात से अछूता नहीं रहा न्यू योर्क का टाईम्स स्क्व्यर १५ अगस्त को तीन रंगों (केसरिया सफ़ेद और हरा) से रंग था।
डैलस में भी हर बार की तरह इस बार भी स्वतंत्रता दिवस बहुत ही धूम-धाम से मनाया गया। इण्डिया असोशियेशन ऑफ़ नोर्थ टेक्सस हर साल १५ अगस्त मनाने के लिए आनंद बाजार सजाती है। इस बार भी लोन स्टार पार्क में शाम से ही लोगों का आना प्रारंभ हो गया था। कार्यक्रम का प्रारंभ परेड से हुआ। जिसमें सबसे आगे स्वामी नारायण संस्था शानदार बैंड था। अभिनेता शर्मन जोशी और सा रे गा म पा लिटिल चैम्प की विजेता ऐश्वर्या मजुमदार इस कार्यक्रम के मुख्य अतिथि थे। मंच का कुशल संचालन शबनम जी और वैभव ने किया। शर्मन जोशी ने यहाँ उपस्थित सभी लोगों से मिले और साथ में फोटो भी खिचाई।
इण्डिया असोशियेशन ऑफ़ नोर्थ टेक्सस के प्रेसिडेंट श्री निरंजन पटेल जी, पेप्सिको के श्री राजगोपालन जी स्काई पास ट्रेवल्स के श्री विक्टर इब्राहीम जी, ने लोगों को संबोधित किया। मंच पर फन एसिया के जॉन हामिद जी, न्यू योर्क लाइफ इंशोरेंस के सुधीर पारिख जी और कमल कौशल जी ने उपस्थित हो के कार्यक्रम की शोभा बढ़ाई। इस कार्यक्रम के एक मात्र मिडिया सहयोगी रहे फन एसिया।
पूरा मैदान भारतियों से भरा था। २० हजार से भी ज्यादा लोग अपने देश का स्वतंत्रता दिवस माने के लिए यहाँ उपस्थित थे। जब राष्ट्रीय गान प्रारंभ हुआ तो सभी अपनी जगह पर खड़े हो गए और सुर में सुर मिलाने लगे। एक अजीब सी ख़ुशी और उत्साह था पूरे मौहोल में .यहाँ २०० से भी ज्यादा बूथ लगे थे। जिनमें से करीब ४० खाने के स्टाल थे। भारत के हर प्रान्त का खाना यहाँ मौजूद था। नारियल पानी, पान, चाय आनन्द बाजार में हर छोटी छोटी चाहतों का ध्यान रखा गया था। यहाँ बच्चों के लिए किड्स कोर्नर था। जहाँ बच्चों ने बहुत मजा किया।
रात्रि में बहुत सुंदर आतिशबाजी हुई जिस को देख सभी का मन आनंदित हो गया। आनन्द बाजार की व्यवस्था की सभी ने भूरी भूरी प्रशंशा की। लोगों के अनुसार उनके जीवन में ये अनूठा अनुभव था देश से दूर यहाँ अमेरिका में कभी अपना स्वतंत्रता दिवस मना पाएंगे सोचा न था। यहाँ आ के लगा ही नहीं कि हम भारत से इतनी दूर हैं ।
इण्डिया असोशियेशन ऑफ़ नोर्थ टेक्सस के प्रेसिडेंट इलेक्ट और आनंद बाज़ार के चेयर श्री जगदीश गोधवानी जी ने बताया कि "ये ३४ वाँ आनन्द बाज़ार था। जोकि बहुत ही सफल रहा, मैं यहाँ आने वाले सभी लोगों का हृदय से धन्यवाद करता हूँ। ये लोगों का प्यार और विश्वास ही है जो वो यहाँ आये और इस आयोजन को सफल बनाया। इण्डिया असोशियेशन ऑफ़ नोर्थ टेक्सस की स्थापना १९६२ में हुई थी। मेरे ख्याल से ये अमेरिका में भारतियों के द्वारा स्थापित ये सबसे पुरानी संस्था है। इतना बड़ा आयोजन बिना सहयोग के सम्पन नहीं हो सकता, मैं अपने सभी प्रायोजकों का धन्यवाद करता हूँ। यहाँ आये सभी भारतियों से उम्मीद करता हूँ कि अगले साल पुनः हम सभी इसी तरह मिल कर अपना स्वतंत्रता दिवस मनाएंगे"।
देश भक्ति गीत गाते सभी भारतीय पुनः अगले साल आने की तम्मना अपने मन में लिए घरो को रवाना हो गए।













प्रस्तुतिः- रचना श्रीवास्तव

Wednesday, April 14, 2010

डैलस, अमेरिका में अंतरराष्ट्रीय हिन्दी समिति ने आयोजित किया अपना 25वाँ कवि सम्मेलन

डैलस।


कविता सुनाते आश करण अटल

अंतरराष्ट्रीय हिंदी समिति (अमेरिका) के कवि सम्मेलनों की शृंखला का आरम्भ 9 अप्रैल 2010 को डैलस से हुआ। उत्तरी अमेरिका में यह संस्था प्रत्येक वर्ष तक़रीबन पंद्रह से सत्रह कार्यक्रम करवाती है। डॉ नन्दलाल सिंह, डॉ सुधा ओम ढींगरा और श्री अलोक मिश्रा इस संस्था के आधार स्तम्भ हैं। इन्हीं के अथक प्रयास से इस बार भी कवि सम्मेलनों के सोलह कार्यक्रम विभिन्न शहरों में संपन्न होंगे। अंतर्राष्ट्रीय हिंदी समिति के तत्वावधान में प्रस्तुत हास्य कवि सम्मलेन में भारत के बहुचर्चित हास्य कवि श्री महेंद्र अजनबी, श्री आश करण अटल और श्री अरुण जेमिनी जी ने भाग लिया। डैलस संभाग की अध्यक्षा श्रीमती निशि भाटिया को श्री जयन्त चौधरी ने मंच पर आमंत्रित किया। निशि जी ने सभी स्वयंसेवकों के नाम बताते हुए उनको धन्यवाद दिया और कार्यक्रम को विधिवत तरीके से आरम्भ कराया। कार्यक्रम का प्रारंभ परम्परागत तरीके से एकल विद्यालयों के शुभचिंतक श्रीमती कल्पना फ्रूटवाला और श्री किशोर फ्रूटवाला ने दीप प्रज्वलित कर तथा श्रीमती कुसुम गुप्ता के नेतृत्व में सरस्वती वंदना से हुआ। आगे मंच संचालन के लिए निशि जी ने अंतरराष्ट्रीय हिंदी समिति के संयोजक डॉ.नन्दलाल सिंह को आमंत्रित किया। नन्दलाल जी की वाक्पटुता और हास्य मिश्रित कथन ने लोगों का खूब मनोरंजन किया और मन मोह लिया। डैलस में आयोजित ये 25वां कवि सम्मलेन था। आज के इस फ़िल्मी युग में जब 700 से भी ज्यादा लोग कवि सम्मलेन का आनंद लेते हैं तो मन असीम आनंद से भर जाता है। इस का पूरा श्रेय नन्दलाल जी को जाता है। आज से 25 साल पहले इसका प्रारंभ हुआ था, तब कुछ लोग ही ऐसे कार्यक्रमों में आते थे, पर धीरे-धीरे लोग आते गए और कारवाँ बनता गया और आज ये कारवाँ काव्यप्रेमियों के जत्थे में परिवर्तित हो चुका है। नन्दलाल जी के शब्दों में "आज कवि सम्मलेन का रजत जयंती समारोह है। डैलस में दिसम्बर 85 में पहले कवि सम्मलेन का आयोजन किया गया था। स्वयं सेवकों/सेविकाओं की कार्य निष्ठा से ही हम आज यहाँ तक पहुंचे हैं। आज के इस कार्यक्रम के प्रचार और प्रसार के लिए मैं फन एशिया और जैक गोदवानी का आभारी हूँ"। नन्दलाल जी ने कवियों को सारगर्भित परिचय के साथ मंच पर आमंत्रित किया। पुष्पगुच्छ भेंट कर महेंद्र अजनबी जी का स्वागत श्रीमती अनीता सिंघल ने, आश किरण अटल जी का श्रीमती नीतू अग्रवाल ने और अरुण जेमिनी जी का श्रीमती परम अग्रवाल ने किया। मंच पर कवियों के आते ही पूरा हॉल करतल ध्वनि से गुंजायमान हो उठा।
कवि सम्मलेन का संचालन श्री अरुण जेमिनी जी ने किया। अरुण जेमिनी जी ने श्री नन्दलाल जी, श्री अशोक जी और ज्योति जी, करिश्मा हिम्मत सिंघानी जी के साथ सभी का धन्यवाद किया। इन पंक्तियों के साथ किया उन्होंने महेन्द्र अजनबी जी को मंच पर आमंत्रित किया.....

मुस्कुराती जिंदगानी चाहिए
काव्य में ऐसी रवानी चाहिए
सारी दुनिया अपनी हो जाती है बस
एक उसकी मेहरबानी चाहिए


महेंद्र अजनबी जी ने बच्चों की बातों को बहुत ही रोचक ढंग से प्रस्तुत किया। जिनको सुनकर हँसते-हँसते पेट में बल पड़ गए एक उदाहरण देखिये-

एक बच्ची से पूछा गया कि राम-लक्ष्मण तो ठीक पर सीता जी वन क्यों गईं?
बच्ची ने कहा,
सीता जी के वनवास जाने में बहुत बड़ी सीख है..
तीन-तीन सास जब घर में हो तो जंगल ही ठीक है..


ट्रक के पीछे लिखी पंक्तियों और समाचार पत्र के शीर्षकों से हास्य की उत्पति कैसे होती है बताया। जब कवि एक पंक्ति पढ़ता है और श्रोता उस को पूरी कर देता है, उससे किस तरह हास्य उत्पन्न होता है, एक उदाहण देखिये---

जेल में कवि सम्मलेन हो रहा था ...
कवि बोला आदमी यूँ हालातों में जकड़ा नहीं जाता
कैदी बोला कुत्ते की पूँछ पे पैर पड़ा न होता तो मैं पकड़ा नहीं जाता

ट्रेन की भीड़ पर सुनाई गईं उनकी हास्य व्यंग्य की कविता खूब सराही गई...

ट्रेन में इतनी भीड़ थी भाई
कि हाथ को मुँह भी नहीं देता था दिखाई
एक आदमी ने बीड़ी सुलगाई
और मेरे मुहँ में लगाई


हास्य रस की डरावनी कविता सुनाने जा रहा हूँ, कह के महेंद्र जी ने भूतों पर लिखी अपनी कविता सुनाई जिसमें व्यंग्य के नुकीले बाण थे-

वे एक दूसरे से बतिया रहे थे
आदमियों के एक से बढ़ के एक भयानक किस्से सुना रहे थे
ये कल रात ही शहर हो के आया है
इस पर जरूर किसी आदमी का साया है
किसी झाड़ फूँक वाले को बुलाओ इस पर से आदमी उतरवाओ
-------
पेड़ से उल्टा लटका देगा और वोट माँगेगा
और याद रख अपने इलाके की वोटर लिस्ट में तो
तू वैसे भी अभी तक नहीं मरा होगा
---
एक वरिष्ठ भूत बोला उन इन्सानों की बस्तियों के बारे में सोच
जो साथ-साथ होते हुए भी वीरान है
उनसे ज्यादा आबाद तो कब्रिस्तान और श्मशान हैं....



लोगों को हँसाते महेन्द्र अजनबी

इस के बाद अरुण जेमिनी जी ने आश करण अटल जी को मंच पर ये कहते हुए बुलाया कि इनके नाम को लिखने में हमेशा गलती हुई है, इन के नाम में आशा भोंसले वाला आश है, कुम्भकर्ण वाला करण है, और अटल बिहारी बाजपेई वाला अटल है... तीन-तीन नामों का सम्मिश्रण हैं।
मिडिया पर सुनाई उनकी कविता ने सभी का मन मोह लिया....

क्या उनको पता था कि अंतिम साँस लेने के बाद वो मर जायेंगे...
जी पता था...
जब उनको पता था कि अंतिम साँस लेने के बाद वो मर जायेंगे तो उन्होंने अंतिम साँस क्यों ली?
जी राष्ट्रहित में ..


"हाइवे के हमदम" शीर्षक की कविता ने लोगों को इतना हँसाया की आँखें झलक उठीं ...

ये है दुनिया का सब से बड़ा ओपन एयर शौचालय
आप यहाँ क्या कर रहे है?
जी में यहाँ क्या कर रहा हूँ ये तो आप देख ही रहे हैं...
पर आप यहाँ क्या कर रहे हैं?


इसके बाद उन्होंने अपनी कविता "क्या हमारे पूर्वज बंदर थे" सुनाई। ये कविता राजिस्थान में कक्षा 11 की पाठ्यपुस्तक में पढ़ाई जाती है।
अरुण जेमिनी जी ने हँसीवर्षा के इस क्रम को जारी रखा। उनके हरयाणवी अन्दाज ने कविता को और भी मनोरंजक बना दिया।

एक आदमी कुत्ते को घुमा रहा था दूसरे ने पूछा----
ताऊ कुत्ते को घुमरिया है के
नहीं ये तो ऊंट है कद छोटा रह गया है



संयोजक नंदलाल और संचालक अरुण जैमिनी

अरुण जेमिनी जी की कविता "21वीं में सदी में ढूँढ़ते रह जाओगे" ने हास्य के साथ लोगों को सोचने पर भी विवश कर दिया।

चीजों में कुछ चीजें बातों में कुछ बातें वो होंगी
जिन्हें कभी देख नहीं पाओगे
21वीं में सदी में ढूँढ़ते रह जाओगे
अध्यापक जी सचमुच पढ़ाये
अफसर जो रिश्वत न खाये
बुद्धिजीवी जो राह दिखाये
कानून जो न्याय दिलाये
बाप जो समझाए
और ऐसा बेटा जो समझ जाये
ढूँढ‌़ते रह जाओगे
नेहरु जैसी इज़्ज़त
सुभाष जैसी हिम्मत
पटेल के इरादे
शास्त्री सीधे-साधे
पन्ना धाय का त्याग
राणा प्रताप की आग
अशोक का बैराग
तानसेन का राग
चाणक्य का नीति ज्ञान
इन्दिरा गाँधी जैसी बोल्ड
और महात्मा गाँधी जैसा गोल्ड
ढूँढ़ते रह जाओगे

कार्यक्रम के प्रारंभ में श्री अखिल कुमार जी ने पिछले कवि सम्मेलनों का स्लाइड शो दिखाया, जिस को दर्शकों ने खूब सराहा। श्री संजीव अग्रवाल, श्री मोती अग्रवाल और श्री अभय गर्ग का ही प्रयास था की सुव्यवस्थित हॉल, सुसज्जित मंच और सुस्वादिष्ट भोजन की सभी ने भूरि-भूरि प्रशंसा की।


उपस्थित श्रोतागण

अंतरराष्ट्रीय हिंदी समीति ने हिंदी का नन्हा सा जो दिया जलाया था, वो आज सूरज बन चमक रहा था। इस का भान इसी बात से हो रहा था कि आज 700 से भी अधिक लोग इस हास्य कविसम्मेलन का आन्नद लेने के लिए यहाँ एकत्रित थे। लगातार तीन घंटा तीस मिनट चले इस कवि सम्मलेन में हँसते-हँसते लोगों के पेट में बल पड़ गए। जीवन की आपाधापी में हम हँसना लगभग भूल ही गए हैं, इस तरह के आयोजन हमें जीने की नई उर्जा देते हैं। कुछ लोगों के अनुसार तो वो आज जितना हँसे हैं, उतना जीवन में शायद ही कभी हँसे हों। उनका ये भी कहना था कि बड़े-बड़े कॉन्सर्ट में जाने से अच्छा है कि कवि सम्मेलनों में जाया जाए। मिडलैंड और ह्यूस्टन के कार्यक्रम भी बहुत सराहनीय रहे। 9 मई तक इनके कार्यक्रम चलेंगे। इन कवि सम्मेलनों में हिन्दी भाषी जब एक छत तले इकट्ठे होते हैं तो अमेरिका में भी भारत बसा महसूस होता है। चारों तरफ देश की महक फैली महसूस होती है।

रिपोर्ट- रचना श्रीवास्तव