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Wednesday, October 6, 2010

लंदन की एक शाम तीन डॉक्यूमेंट्री फिल्मों के नाम


बाएँ से मीरा कौशिक, तेजेन्द्र शर्मा, दिव्या माथुर, डॉ. निखिल कौशिक, कैलाश बुधवार एवं काउंसलर ज़कीया ज़ुबैरी

कथा यू.के. एवं एशियन कम्यूनिटी आर्ट्स ने नेहरू सेंटर, लंदन में एक अनूठी शाम का आयोजन किया जिसमें वेल्स-निवासी नेत्र विशेषज्ञ, कवि, एवं फ़िल्मकार डा. निखिल कौशिक ने कथाकार-कवयित्री दिव्या माथुर, वरिष्ठ मीडिया हस्ती कैलाश बुधवार के साथ साथ कथाकार, फ़िल्म टीवी तथा मंच कलाकार, कवि व ग़ज़लकार तेजेन्द्र शर्मा पर निर्मित तीन डॉक्यूमेंटरी फ़िल्में दिखा कर नेहरू सेंटर में उपस्थित श्रोताओं को सम्मोहित कर दिया।

कार्यक्रम की शुरूआत में कथा यू.के. के महासचिव तेजेन्द्र शर्मा ने हाल ही में दिवंगत हुए कवि-पत्रकार एवं मीडिया हस्ती डा. कन्हैया लाल नंदन को श्रद्धांजलि देते हुए उनके साथ अपने नज़दीकी संबंधों की चर्चा करते हुए उनके साथ अपनी बहामास, क्यूबा और त्रिनिदाद यात्राओं की चर्चा की। तेजेन्द्र शर्मा ने नंदन जी को नये रचनाकारों और ख़ासतौर पर प्रवासी लेखकों का मार्गदर्शक बताया। अपनी धीर गंभीर आवाज़ में तेजेन्द्र ने उनकी एक कविता का पाठ किया जो कि नंदन जी ने 3 अक्टूबर 2005 (यानी कि ठीक पांच वर्ष पूर्व) हस्पताल के बिस्तर पर डायलिसिस करवाने के बाद लिखी थी।

हर सुबह को कोई दोपहर चाहिए, / मैं परिंदा हूं उड़ने को पर चाहिए।
मैंने मांगी दुआएँ, दुआएँ मिलीं / उन दुआओं का मुझपे असर चाहिए।

प्रत्येक डाक्यूमेंटरी क़रीब क़रीब बीस से बाईस मिनट लम्बी थी। सबसे पहले दिव्या माथुर पर बनाई फ़िल्म दिखाई गई। दिव्या को निखिल ने एक ऐसे व्यक्तित्व की तरह पेश किया जो कि अपने काम के प्रति समर्पित, व्यवहार में विनम्र एवं परिवार के प्रति निष्ठा रखती हैं। दिव्या माथुर ने अपने लेखन के विषय में भी विस्तार से बात की और बताया कि जब एक विषय उनके दिमाग़ में पक्की तरह से बैठ जाता है तो वे लगातार उसी विषय पर लिखती चली जाती हैं। उनके क्ई एक कविता संकलन एक ही विषय पर आधारित हैं। डॉक्यूमेंटरी में डॉ. केसरी नाथ त्रिपाठी, डॉ. सत्येन्द्र श्रीवास्तव, डॉ. लक्ष्मी शंकर वाजपेयी, मोनिका मोहता, रवि शर्मा और दिव्या के परिवार के सदस्यों सहित बहुत से लोगों ने दिव्या माथुर के प्रति अपने विचार व्यक्त किये।

कैलाश बुधवार पर बनाई डाक्युमेंटरी एक ऐसे व्यक्तित्व के बारे में है जिसे अपने बारे में कोई ग़लतफ़हमी नहीं; जो कभी भी किसी के बारे में कुछ ग़लत नहीं कहता; और जो अपने से अधिक अपने से वरिष्ठ लोगों के बारे में बात करके ख़ुश हो लेता है। शायद इसीलिये कैलाश जी ने अपनी डॉक्यूमेंटरी में पापाजी पृथ्वीराज कपूर और पृथ्वी थियेटर के बारे में अधिक बातें की और अपने व्यक्तित्व को ठीक उसी तरह छिपाए रखा जैसा कि वे पिछले चार दशकों से करते आ रहे हैं। उन्होंने अपने वरिष्ठ रेडियो की हस्तियों के बारे में बातें कीं जिनमें आले हसन, ज्ञान कौशिक, महेन्द्र कौल जैसे बहुत से लोग शामिल थे। श्रोताओं में बैठे नरेश कौशिक ने स्वीकार किया कि कैलाश जी ही उन्हें बीबीसी लंदन में लाए थे। कैलाश जी ने माइक पर आकर कहा कि वे अपने आपको इस तरह की किसी भी डॉक्यूमेंटरी के क़ाबिल नहीं समझते। वे हैरान भी थे कि मेट्रो स्ट्राइक, बारिश और कॉमनवेल्थ खेलों के सीधे प्रसारण के बावजूद लोग उनके बारे में निर्मित डाक्युमेंटरी देखने पहुंच गये।

ड़ा. निखिल कौशिक ने तेजेन्द्र शर्मा को ब्रिटेन के हिन्दी साहित्य का राजकपूर घोषित किया। उनका कहना था जिस प्रकार दिल्ली के राष्ट्रपति भवन के मुग़ल गार्डन में किसी फ़िल्म की शूटिंग करने वाले राजकपूर पहले फ़िल्मकार थे, ठीक उसी तरह ब्रिटेन की संसद के हाउस ऑफ़ कॉमन्स एवं हाउस ऑफ़ लॉर्ड्स में कथा यू.के. सम्मान आयोजित करके तेजेन्द्र शर्मा ने हिन्दी का परचम अंग्रेज़ी के गढ़ में लहराया है। निखिल कौशिक ने अपनी डॉक्युमेंटरी के ज़रिये तेजेन्द्र शर्मा को एक कहानीकार, ग़ज़लकार, मंच एवं सिने कलाकार, नाटक निर्देशक, रेडियो पत्रकार एवं एक हिन्दी सेवी के रूप में स्थापित करने का प्रयास किया है। तेजेन्द्र ने अपने अंग्रेज़ी एवं हिन्दी लेखन व टीवी सीरियल लेखन के बारे में बातचीत भी की है। तेजेन्द्र शर्मा की लिखी एक ग़ज़ल ‘जो तुम न मानो मुझे अपना, हक़ तुम्हारा है / यहां जो आ गया इक बार, वो हमारा है’ भी इस फ़िल्म में शामिल की गई। इस ग़ज़ल का संगीत बनाया अर्पण पटेल ने और स्वर दिया मीतल ने। तेजेन्द्र के व्यक्तित्व पर प्रो. अमीन मुग़ल, कैलाश बुधवार, डा. अचला शर्मा, मोनिका मोहता, रवि शर्मा, राकेश दुबे, आदि ने अपने अपने विचार रखे। अचला शर्मा के अनुसार तेजेन्द्र ने हिन्दी को मंदिरों से बाहर निकाल कर ब्रिटिश संसद में पहुंचा दिया है।


निखिल के साथ कैलाश जी

धन्यवाद ज्ञापन देते हुए काउंसलर ज़कीया ज़ुबैरी ने कहा कि किसी भी देश या समुदाय की प्रगति उसकी सांसकृतिक गतिविधियों पर आधारित होती है। डा. निखिल कौशिक लेखक, पत्रकार एवं संस्कृति कर्मियों के कार्यों को उजागर करने के लिये एक नई विधा से हमारा परिचय करवाया है। मुझे उम्मीद है कि जल्दी ही हमें निखिल कौशिक पर निर्मित डाक्युमेंटरी भी देखने को मिलेगी। कार्यक्रम में निखिल कौशिक ने दर्शकों के प्रश्नों के उत्तर भी दिये।

अन्य लोगों के अतिरिक्त काउंसलर ज़कीया ज़ुबैरी, मीरा कौशिक, उषा राजे सक्सेना, बीबीसी के नरेश कौशिक और शिवकांत, श्री इस्माइल चुनारा, श्रीमती अरुणा अजितसरिया, निखिल गौर, अरुण बेदी आदि भी शाम को सफल बनाने के लिये मौजूद थे।

-दीप्ति शर्मा

Sunday, September 26, 2010

डैलस में छाया ए आर रहमान का ज़ादू

हम अनेकों कार्यक्रमों में जाते है बहुत से शो देखते हैं पर उनमे से कुछ ऐसे होते हैं जो एक सुनहरी याद बन आँखों में समाजाते हैं. ऐसा ही कुछ खास अनुभव रहा ऐ आर रहमान का कौन्सर्ट "दा जरनी होम वर्ड टुअर "स्काई पास इंटरटेनमेंट के तत्वाधान में प्रस्तुत इस शो ने डैलस में इतिहास रच डाला. डैलस का आज तक का सबसे बड़ा और सफल शो कहा जाये तो गलत न होगा. अमेरिकन एयर लाइनस सेंटर में करीब १३००० से भी ज्यादा लोगों ने इस शो का आनन्द उठाया शो थोडा देर से प्रारंभ हुआ जब इस शो के करता धरता "स्काई पास इंटरटेनमेंट के सी ई ओ श्री विक्टर इब्राहीम जी से इस देरी का कारण पूछा गया तो उन्होंने बताया की पहले ये कॉन्सर्ट ४ जुलाई को होने वाला था पर कुछ कारणों से ये स्थगित हो गया उस समय हम बहुत दुखी हो गये थे. पर हमारे बहुत से टिकट बिक चुके थे और उस पर शो प्रारंभ होने का समय लिखा था ८ बजे फिर जब अभी शो की नई तारीख मिली तो जो नए टिकट बिके उसमे शो प्रारंभ होने का समय लिखा था ७ बजे। बस यही गलतफहमी हो गई। यदि हम शोए ७ बजे शुरू करते तो आधे लोगों का शो छूट जाता। इसी कारण शो देर से शुरू करना पड़ा।"

ऐ आर रहमान का ये शो आज कल पूरे अमेरिका में धूम मचा रहा है इस कार्यक्रम की खास बात है इसकी प्रस्तुति। और स्टेज सज्जा। जिसकी जिम्मेदारी सम्भाली थी सुप्रसिद्ध निर्देशक अमय(amy )टिंकमेन ने जो मारीअह केरे (mariah carey ), ब्रिटनी स्पेअर्स और बैकस्ट्रीट बॉय्स के साथ काम कर चुके हैं, पूरे स्टेज को कुछ यूँ बनाया गया था की समय समय पर उसमे परिवर्तन किये जा सकें ये परिवर्तन स्टेज को हर पल एक नया रूप दे रहा था और शो को भव्य बना रहा था। ध्वनि और प्रकाश की व्यवस्था अति उत्तम थी। लेजर का प्रयोग बहुत अच्छी तरह से किया गया था जो सभी के मन को लुभा रहा था। स्टेज के झीने परदे पर भव्य दृश्य आते जा रहे थे जो कार्यक्रम में चार चाँद लगा रहे थे।

रहमान जी ने हिदी के आलावा तमिल मलयालम तेलगू और इंग्लिश के भी गाने गाये उनके एक एक गाने पर लोग झूम रहे थे और ख़ुशी में चीख रहे थे। कुछ नये प्रयोग भी इस कार्यक्रम में देखने को मिले। रंग दे बसंती का गीत "लुका-छुपी बहुत हुई सामने आजा न" में रहमान जी के साथ लता जी ने भी गया है। यहाँ पर्दे पर लता जी को अपना हिस्सा गाते हुए दिखाया गया और रहमान जी ने अपना हिस्सा गया तो ऐसा लग रहा था कि लता जी सामने गा रही है सभी ने इस प्रयोग को बहुत सराहा। इस शो में हिन्दू, मुस्लिम और सिख धर्मो की दुआओं का संगम प्रस्तुत किया गया जो दर्शको को आत्मा तक भिगोगाया।
विभिन्न त्योहारों को भी बहुत सुंदर ढंग से इस शो की माला में पिरोया गया था।


(विक्टर अब्राहिम)

रहमान जी ने अपनी अल्बम का एक गीत जो कि सूफियाना कलाम था गया तो वि स्वयं इतने भावविभोर हो उठे कि उनकी आँखें छलक उठीं। ये दर्शाता ही कि वो संगीत में कितना डूब जाते हैं। रहमान जी की उंगलिया तबला, गिटार, हारमोनियम, पियानो, किसी वो वाद्य यंत्र को छूती है तो चमत्कारी संगीत निकलता है जब उन्होंने अपने इस गुण को दर्शाया तो लोग वाह वाह कर उठे। रहमान जी में स्लम डॉग मिलिनेयर, लगान, जाने तू या जाने न, दिल से, राग दे बसंती और रोज़ा फिल्म के गाने गाये और लोगों को आनंदित किया।
रहमान जी के साथ इस शो में श्री हरिहरन जी, विजय प्रकाश, हर्षदीप कौर, असद खान, बेन्नी दयाल, ब्लाज़े, श्वेता पंडित, नीति मुहान ने भी गाने गाये और लोगों का मनोरंजन किया।
हरिहरन जी ने तू ही रे, चंदा रे गया उस के बाद उहोने कुछ ग़ज़लें और शास्त्रीय संगीत को अपने सुरों से साध के एक समां बांध दिया उनकी हृदय स्पर्शी आवाज ने सभी को मन्त्र मुग्ध कर दिया।
स्वेता पंडित निती और हर्षदीप की मखमली सुरीली आवाज का जादू सभी को सम्मोहित कर गया। ससुराल गेंदा फूल, बरसो रे मेघा, मेहदी है रचने वाली, चल छईयां छईयां या प्रार्थना हो सभी में इनकी आवाज ने मानो सुरों का इन्द्रधनुष बिखेर दिया। बेन्नी दयाल के पप्पू कांट डांस "पर सभी ने खूब डांस किया। कहने को जश्ने बहारा है और गुज़ारिश से प्रसिद्ध ब्लाज़े के गाने भी लोगों ने बहुत पसंद किये।



घडी में ११ बजने को थे शो के समाप्त होने का समय पास आरहा था और लोगों को इंतजार था उस गाने का जिस के लिए रहमान जी को आस्कर मिला था । जब रहमान जी ने गाना प्रारंभ किया तो स्टेडियम का नज़ारा देखने वाला था कोई शायद ही अपनी सीट पर बैठा हो सभी खड़े होके तालियाँ बजा रहे थे और मस्ती में झूम रहे थे।
शो के डारेक्टर ऑफ़ ऑपरेशन श्री ताहिर अली जी ने कहा "जब ये कार्यक्रम स्थगित हुआ था तो बहुत निराशा हुई थी। पर डैलस कि जनता ने बहुत सहयोग दिया। लोग हमको जानते थे तो उनका यकीन नहीं टुटा अभी अंतिम तीन हफ्ते बहुत अच्छे बीते। १३ हज़ार से भी ज्यादा लोगों ने इस कार्यक्रम में शिरकत की। रहमान ने हमें अपने फन की नोज़ियत से नवाज़ा। इस पूरे शो में जितना सामने दिख रहा था उससे ज्यादा स्टेज के पीछे कि मेहनत थी। पूरा क्रू को दो भागों में बटा था हियूसटन का शो करने के बाद वो क्रू बोस्टन चला गया और यहाँ डैलस का क्रू वेंकुअर चला गया। दोनों ग्रुप को अलग-अलग दो कोच दिए गाये हैं जो सारी सुख सुविधा उक्त थे। इतने अच्छे प्रबंध के लिए मै मुख्य प्रबंधक को बधाई देता हूँ "



स्काई पास इंटरटेनमेंट के उपाध्यक्ष श्री जे सी वर्गिस जी का ये पहला शो था इसकी सफलता को ले के वो बहुत उत्साहित थे .
शो की सफलता के बारे में जब श्री विक्टर जी से पूछा गया तो उहोने कहा कि "सभी लोगों ने शो की तारीफ की है मुझे बधाई के बहुत से फ़ोन .,एस ऍम एस और इ मेल आये है मै अपने सभी प्रायोजकों को बहुत बहुत धन्यवाद देता हूँ और अपनी पूरी टीम और स्वयं सेविकों का आभार व्यक्त करता हूँ क्योकि उनकी मेहनत के बिना ये शो कभी भी कामियाब नहीं हो सकता था"
शो की समाप्ति पर जब मैने कुछ लोगों की राय जाने के लिए पूछा तो उनका कहना था कि ये जीवन भर का अनुभव है। बहुत अच्छा और मनोरंजक शो था। किसीने कहा पैसा वसूल शो था। किसी ने कहा की ऐसा शो उहोने कभी पहले नहीं देखा था सभी ने शो की सफलता के लिए श्री विक्टर अब्राहिम को और उनकी टीम को बधाई दी।




प्रस्तुति- रचना श्रीवास्तव