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Wednesday, September 29, 2010

नवोदित रचनाकारों और ब्लॉगरों के लिए कार्यशाला हेतु प्रविष्टियाँ आमंत्रित

सृजनात्मक लेखन कार्यशाला हेतु ब्लॉगरों से प्रविष्टि आमंत्रित

रायपुर। रचनाकारों की संस्था, प्रमोद वर्मा स्मृति संस्थान, रायपुर, छत्तीसगढ़ द्वारा देश के उभरते हुए कवियों/लेखकों/निबंधकारों/कथाकारों/लघुकथाकारों/ब्लॉगरों को देश के विशिष्ट और वरिष्ठ रचनाकारों द्वारा साहित्य के मूलभूत सिद्धातों, विधागत विशेषताओं, परंपरा, विकास और समकालीन प्रवृत्तियों से परिचित कराने, उनमें संवेदना और अभिव्यक्ति कौशल को विकसित करने, प्रजातांत्रिक और शाश्वत जीवन मूल्यों के प्रति उन्मुखीकरण तथा स्थापित लेखक तथा उनके रचनाधर्मिता से तादात्मय स्थापित कराने के लिए अ.भा.त्रिदिवसीय (13, 14, 15 नवंबर, 2010) सृजनात्मक लेखन कार्यशाला का आयोजन बिलासपुर में किया जा रहा है । इस अखिल भारतीय स्तर के कार्यशाला में देश के 75 नवोदित/युवा रचनाकारों को सम्मिलित किया जायेगा।

संक्षिप्त ब्यौरा निम्नानुसार है-

प्रतिभागियों को 20 अक्टूबर, 2010 तक अनिवार्यतः निःशुल्क पंजीयन कराना होगा। पंजीयन फ़ार्म संलग्न है।
प्रतिभागियों का अंतिम चयन पंजीकरण में प्राप्त आवेदन पत्र के क्रम से होगा।
पंजीकृत एवं कार्यशाला में सम्मिलित किये जाने वाले रचनाकारों का नाम ई-मेल से सूचित किया जायेगा।
प्रतिभागियों की आयु 18 वर्ष से कम एवं 40 वर्ष से अधिक ना हो।
प्रतिभागियों में 5 स्थान हिन्दी के स्तरीय ब्लॉगर के लिए सुरक्षित रखा गया है।
प्रतिभागियों को संस्थान/कार्यशाला में एक स्वयंसेवी रचनाकार की भाँति, समय-सारिणी के अनुसार अनुशासनबद्ध होकर कार्यशाला में भाग लेना अनिवार्य होगा।
प्रतिभागी रचनाकारों को प्रतिदिन दिये गये विषय पर लेखन-अभ्यास करना होगा जिसमें वरिष्ठ रचनाकारों द्वारा मार्गदर्शन दिया जायेगा।
कार्यशाला के सभी निर्धारित नियमों का आवश्यक रूप से पालन करना होगा।
प्रतिभागियों को सैद्धांतिक विषयों के प्रत्येक सत्र में भाग लेना अनिवार्य होगा। अपनी वांछित विधा विशेष के सत्र में वे अपनी इच्छानुसार भाग ले सकते हैं।
प्रतिभागियों के आवास, भोजन, स्वल्पाहार, प्रशस्ति पत्र, प्रतीक चिन्ह की व्यवस्था संस्थान द्वारा किया जायेगा।
प्रतिभागियों को कार्यशाला में संदर्भ सामग्री दी जायेगी।
प्रतिभागियों को अपना यात्रा-व्यय स्वयं वहन करना होगा।
प्रतिभागियों को 12 नवंबर, 2010 शाम 5 बजे के पूर्व कार्यशाला स्थल - बिलासपुर, छत्तीसगढ़ में अनिवार्यतः उपस्थित होना होगा। पंजीकृत/चयनित प्रतिभागी लेखकों को कार्यशाला स्थल (होटल) की जानकारी, संपर्क सूत्र आदि की सम्यक जानकारी पंजीयन पश्चात दी जायेगी।

प्रस्तावित/संभावित विषय एवं विशेषज्ञ लेखक

दिनाँक 13 नवंबर, 2010
रचना की दुनिया – दुनिया की रचना – श्री चंद्रकांत देवताले – विश्वनाथ प्रसाद तिवारी – प्रभाकर श्रोत्रिय
रचना में यथार्थ और कल्पना – श्री राजेन्द्र यादव – नीलाभ – केदारनाथ सिंह
रचना और प्रजातंत्र – श्री अखिलेश – रघुवंशमणि – परमानंद श्रीवास्तव
रचना और भारतीयता – श्री नंदकिशोर आचार्य – श्री अरविंद त्रिपाठी – विश्वनाथ प्रसाद तिवारी
रचना : महिला, दलित और आदिवासी –– सुश्री अनामिका - कात्यायनी - मोहनदास नैमिशारण्य
रचना और मनुष्यता के नये संकट - श्री विनोद शाही- श्रीप्रकाश मिश्र – सीताकांत महापात्र

दिनाँक 14 नवंबर, 2010
रचना और संप्रेषण – श्री कृष्ण मोहन – ज्योतिष जोशी – मधुरेश
शब्द, समय और संवेदना – श्री नंद भारद्वाज - श्रीभगवान सिंह – ए.अरविंदाक्षन
कविता की अद्यतन यात्रा – श्री वीरेन्द्र डंगवाल – ओम भारती - अशोक बाजपेयी
कविता - छंद और लय – श्री दिनेश शुक्ल – राजेन्द्र गौतम – डॉ. बुद्धिनाथ मिश्र
कैसा गीत कैसे पाठक ? - श्री राजगोपाल सिंह – यश मालवीय – माहेश्वर तिवारी
कहानी-विषयवस्तु, भाषा, शिल्प – श्री शशांक – डॉ. परदेशीराम वर्मा – गोविन्द मिश्र

दिनाँक 15 नवंबर, 2010
कहानी की पहचान – सुश्री उर्मिला शिरीष - सूरज प्रकाश – सतीश जायसवाल
लघुकथा क्या ? लघुकथा क्या नहीं ? – श्री अशोक भाटिया – फ़ज़ल इमाम मल्लिक - बलराम
आलोचना क्यों, आलोचना कैसी? श्री शंभुनाथ – डॉ. रोहिताश्व - विजय बहादुर सिंह
ललित निबंध : कितना ललित-कितना निबंध – श्री नर्मदा प्रसाद उपा.-अष्टभुजा शुक्ल – डॉ.श्रीराम परिहार

(अंतिम नाम निर्धारण स्वीकृति/अस्वीकृति उपरांत)

संपर्क सूत्र

जयप्रकाश मानस

कार्यकारी निदेशक
प्रमोद वर्मा स्मृति संस्थान, छत्तीसगढ़
एफ-3, छगमाशिम, आवासीय परिसर, पेंशनवाड़ा, रायपुर, छत्तीसगढ – 492001
ई-मेल-pandulipipatrika@gmail.com
मो.-94241-82664
बिलासपुर
श्री सुरेन्द्र वर्मा, मो.-94255-70751
श्री राजेश सोंथलिया, 9893048220

पंजीयन हेतु आवेदन पत्र फार्म नमूना

01. नाम -
02. जन्म तिथि व स्थान (हायर सेंकेंडरी सर्टिफिकेट के अनुसार) -
03. शैक्षणिक योग्यता –
04. वर्तमान व्यवसाय -
05. प्रकाशन (पत्र-पत्रिकाओं के नाम) –
06. प्रकाशित कृति का नाम –
07. ब्लॉग्स का यूआरएल – (यदि हो तो)
08. अन्य विवरण ( संक्षिप्त में लिखें)
09. पत्र-व्यवहार का संपूर्ण पता (ई-मेल सहित) –
हस्ताक्षर

Saturday, June 27, 2009

कें. हिं. प्र. सं. की 333वीं गहन हिंदी कार्यशाला सम्पन्न


प्रतिभागियों के अभिवादन संदेश संप्रेषित करते सहायक निदेशक शमशेर अहमद खान और अन्य अधिकारीगण

नई दिल्ली, 2-ए, पृथ्वी राज रोड स्थिति कें.हिं.प्र.सं. के अल्पकालिक गहन प्रशिक्षण एकक द्वारा आयोजित 333वीं गहन हिंदी कार्यशाला का समापन 26 जून 2009 को सफलतापूर्वक कें.हिं.प्र.सं. के प्रशासनिक अधिकारी श्री शिवपाल नेगी के सानिध्य में प्रशिक्षणार्थियों को प्रमाण वितरित कर एवं आशीर्वचन देकर सम्पन्न हो गया। यह कार्यशाला 22 जून 2009 से 26 जून 2009 तक आयोजित की गई थी, जिसमें देशभर के केंद्रीय कार्यालयों के 42 प्रतिभागी सम्मिलित हुए थे। इस कार्यशाला में जहां राजभाषा हिंदी की संवैधानिक स्थिति, मानक वर्तनी, पारिभाषिक शब्दावली, पत्राचार के विविध रूप, टिप्पण आलेखन आदि विषयों पर गहन विचार-विमर्श हुआ वहीं 'यूनिकोड और उपलब्ध हिन्दी सॉफ्टवेयर' पर भी एक व्याख्यान रखा गया। इस व्याख्यान को शैलेश भारतवासी ने सफलतापूर्वक लिया जिसे प्रतिभागियों ने काफी सराहा।
इस कार्यशाला के समन्वयक वरिष्ठ सहायक निदेशक श्री शमशेर अहमद खान थे। कार्यशाला के अन्य प्रमुख वक्ताओं ने अपने मूल्यांकन रिपोर्ट में वक्ताओं के व्याख्यान शैली की भूरि-भूरि प्रशंसा की।
मुख्य अतिथि श्री शिवपाल नेगी ने अपने उद्बोधन भाषण में इस कार्यशाला के सफलतापूर्वक संचालन में जहां श्री शमशेर अहमद खान की तारीफ की वहीं दो अन्य वक्ताओं वरिष्ठ सहायक निदेशक श्री एम. एल. शर्मा एवं श्रीमती (डॉ.) शोभा रानी के सकारात्मक सहयोग की ओर भी इंगित किया। उन्होंने प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए कहा कि आप लोगों के श्रम की सार्थकता तभी फलीभूत हो सकती है जब आप लोग अपने-अपने कार्यालयों में जाकर जो कुछ यहां सीखा है, हिंदी में कार्य करें।
ध्यातव्य हो कि इस कार्यशाला का उद्‍घाटन संस्थान के संयुक्त निदेशक श्री एम.एस. दोहरे ने किया था। इस अवसर पर कार्यक्रम के समन्वयक वरिष्ठ सहायक निदेशक श्री शमशेर अहमद खान के साथ ही वरिष्ठ सहायक निदेशक श्री एम. एल. शर्मा एवं श्रीमती (डॉ.) शोभा रानी थीं।


मंचासीन प्रशिक्षक शोभा रानी, शैलेश भारतवासी, शमशेर अहमद खान, एम. एल. शर्मा और प्रतिभागी-1



मंचासीन प्रशिक्षक और प्रतिभागी-2

Saturday, May 9, 2009

न्यूयार्क विश्वविद्यालय में हिंदी-उर्दू का ग्रीष्म कालीन प्रशिक्षण

(समाचार-सौजन्यः डॉ.बिन्देश्वरी अग्रवाल, न्यूयार्क)

आगमी 7 जुलाई 2009 से 17 जुलाई 2009 तक से न्यूयार्क विश्वविद्यालय, अमेरिका में 10 दिनों का ग्रीष्म कालीन हिंदी-उर्दू का शिक्षक-प्रशिक्षण वर्कशॉप होने जा रहा है। यह वर्कशॉप अमेरिका में सूचीबद्ध विदेशी भाषायों को बढ़ावा देने हेतु हर वर्ष अलग-अलग कैम्पस में किया जाता है। हिंदी-उर्दू के अलावा स्टॉरटाक अरबी और फारसी में यह प्रशिक्षण देने का कार्य करता है। इस बार यह कार्यशाला न्यूयार्क विश्वविद्यालय एवं अमेरिका की "स्टारटाक प्रोग्राम" के संयुक्त तत्वाधान में आयोजित किया जा रहा है। जिसके अंतर्गत प्रशिक्षु को विदेशी भाषा पढाने के नए तकनीक एवं भाषा का अनुवाद करने के तरीकों से अवगत कराया जाता है। इसमें प्रक्षिणुओं को अपने आस-पास के उपलब्ध उपकरणों, दृश्य-श्रव्य माध्यमों को पहचानने और इनका इस्तेमाल अपने विद्यार्थियों को भाषा की समझ विकसित करने की तरीके का प्रशिक्षण दिया जाता है। इसे न्यूयार्क राज्य द्वारा मान्यता प्राप्त कोर्स का दर्जा भी प्राप्त है।

इस वर्कशॉप में स्नातक पास विद्यार्थी भाग ले सकते हैं। साथ-साथ वर्कशॉप के लिए कई सुविधाएँ हैं-
स्थान- न्यूयार्क विश्वविद्यालय, कैम्पस
तिथि- 7-17 जुलाई, 2009
प्रशिक्षण शुल्क- 900 डॉलर मात्र (जिसमें "स्टारटाक" को सरकार से 700 डॉलर का अनुदान प्राप्त है)
अत: हर प्रशिक्षु को मात्र 200 डॉलर देना होगा।
आवेदन-पत्र भेजने की अन्तिम तिथि 18 मई 2009 है ।
विशेष सुविधा- 10 दिनों की रहने की एवं भोजन की नि:शुल्क सुविधा है।

विदेशी भाषा को बढ़ावा देने का अमेरिकी सरकार का एक अच्छा कार्यक्रम है। विशेष जानकारी हेतु, कृपया यहाँ संपर्क करें-
STARTALK
Middle Eastern and Islamic Studies
New York University
50 Washington Square South, Room 200
New York, NY 10012

आवेदन पत्र डाउनलोड करने के लिए तथा इस कोर्स के बारे में अधिक जानकारी के लिए यहाँ क्लिक करें।

Sunday, April 19, 2009

चिटठा-लेखन तथा अंतर्जाल पत्रकारिता : द्विदिवसीय कार्यशाला

'व्यष्टि से समष्टि तक वही पहुंचे जो सर्व हितकारी हो'-- संजीव सलिल


जबलपुर, १९ अप्रैल २००९. ''चिटठा लेखन वैयक्तिक अनुभूतियों की सार्वजानिक अभिव्यक्ति का माध्यम मात्र नहीं है, यह निजता के पिंजरे में क़ैद सत्य को व्यष्टि से समष्टि तक पहुँचने का उपक्रम भी है. एक से अनेक तक वही जाने योग्य है जो 'सत्य-शिव-सुन्दर' हो, जिसे पाकर 'सत-चित-आनंद' की प्रतीति हो. हमारी दैनन्दिनी अंतर्मन की व्यथा के प्रगटीकरण के लिए उपयुक्त थी चूंकि उसमें अभिव्यक्त कथ्य और तथ्य तब तक गुप्त रहते थे जब तक लेखक चाहे किन्तु चिटठा में लिखा गया हर कथ्य तत्काल सार्वजानिक हो जाता है, इसलिए यहाँ तथ्य, भाषा, शैली तथा उससे उत्पन्न प्रभावों के प्रति सचेत रहना अनिवार्य है. अंतर्जाल ने वस्तुतः सकल विश्व को विश्वैक नीडं तथा वसुधैव कुटुम्बकम की वैदिक अवधारणा के अनुरूप 'ग्लोबल विलेज' बना दिया है. इन माध्यमों से लगी चिंगारी क्षण मात्र में महाज्वाला बन सकती है, यह विदित हो तो इनसे जुड़ने के अस्त ही एक उत्तरदायित्व का बोध होगा. जन-मन-रंजन करने के समर्थ माध्यम होने पर भी इन्हें केवल मनोविनोद तक सीमित मत मानिये. ये दोनों माध्यम जन जागरण. चेतना विस्तार, जन समर्थन, जन आन्दोलन, समस्या निवारण, वैचारिक क्रांति तथा पुनर्निर्माण के सशक्त माध्यम तथा वाहक भी हैं.''

उक्त विचार स्वामी विवेकानंद आदर्श महाविद्यालय, मदन महल, जबलपुर में आयोजित द्विदिवसीय कार्यशाला के द्वितीय दिवस प्रशिक्षुओं को संबोधित करते हुए मुख्य वक्ता आचार्य संजीव वर्मा 'सलिल', संपादक दिव्य नर्मदा ने व्यक्त किये.

विशेष वक्ता श्री विवेकरंजन श्रीवास्तव 'विनम्र' ने अपने ५ वर्षों के चिटठा-लेखन के अनुभव सुनाते हुए प्रशिक्षुओं को इस विधा के विविध पहलुओं की जानकारी दी. उक्त दोनों वक्ताओं ने अंतरजाल पर स्थापित विविध पत्र-पत्रिकाओं तथा चिट्ठों का परिचय देते हुए उपस्थितों को उनके वैशिष्ट्य की जानकारी दी.

संगणक पर ई मेल आई डी बनाने, चिटठा खोलने, प्रविष्टि करने, चित्र तथा ध्वनि आदि जोड़ने के सम्बन्ध में दिव्य नर्मदा के तकनीकी प्रबंधक श्री मंवंतर वर्मा 'मनु' ने प्रायोगिक जानकारी दी. चिटठा लेखन की कला, आवश्यकता, उपादेयता, प्रभाव, तकनीक, लोकप्रियता, निर्माण विधि, सावधानियां, संभावित हानियाँ, क्षति से बचने के उपाय व् सावधानियां, सामग्री प्रस्तुतीकरण, सामग्री चयन, स्थापित मूल्यों में परिवर्तन की सम्भावना तथा अंतर्विरोधों, अश्लील व अशालीन चिटठा लेखन और विवादों आदि विविध पहलुओं पर प्रशिक्षुओं ने प्रश्न किया जिनके सम्यक समाधान विद्वान् वक्ताओं ने प्रस्तुत किये. चिटठा लेखन के आर्थिक पक्ष को जानने तथा इसे कैरिअर के रूप में अपनाने की सम्भावना के प्रति युवा छात्रों ने विशेष रूचि दिखाई.

संसथान के संचालक श्री प्रशांत कौरव ने अतिथियों का परिचय करने के साथ-साथ कार्यशाला के उद्देश्यों तथा लक्ष्यों की चर्चा करते हुए चिटठा लेखन के मनोवैज्ञानिक पहलू का उल्लेख करते हुए इसे व्यक्तित्व विकास का माध्यम निरूपित किया.

सुश्री वीणा रजक ने कार्य शाला की व्यवस्थाओं में विशेष सहयोग दिया तथा चिटठा लेखन में महिलाओं के योगदान की सम्भावना पर विचार व्यक्त करते हुए इसे वरदान निरुपित किया. द्विदिवसीय कार्य शाला का समापन डॉ. मदन पटेल द्वारा आभार तथा धन्यवाद ज्ञापन से हुआ. इस द्विदिवसीय कार्यशाला में शताधिक प्रशिक्षुओं तथा आम जनों ने चिटठा-लेखन के प्रति रूचि प्रर्दशित करते हुए मार्गदर्शन प्राप्त किया.