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Sunday, August 15, 2010

हमार टीवी पर भोजपुरी कवि सम्मेलन का साप्ताहिक शो "वाह जी वाह"



आजकल जबकि साहित्य टीवी चैनल्स से दूर होते जा रहे हैं, हमार टीवी द्वारा भोजपुरी-मैथिली कवि-सम्मेलन का साप्ताहिक कार्यक्रम वाह जी वाह का श्रीगणेश सचमुच ऐतिहासिक है।

वाह जी वाह की शुरूआत स्वतंत्रता दिवस के शुभ अवसर पर भोजपुरी की देश-भक्ति कविताओं से हो रहा है। 15 अगस्त को 12 .00 Noon और 10.00 P.M पर प्रसारित होने वाले इस कवि-सम्मेलन का संचालन कर रहे हैं- भोजपुरी के जाने माने शायर मनोज भावुक और इस अनोखे एपिसोड के कवि हैं- डा. रमाशंकर श्रीवास्तव, महेन्द्र प्रसाद सिंह, परिचय दास एवं अलका सिन्हा।

हमार के चैनल हैड उदय चन्द्र सिंह ने बताया कि इस वीकली शो के एंकर - प्रोड्यूसर मनोज भावुक हैं और पैनल प्रोड्यूसर हैं दिलीप सिंह। इस कार्यक्रम से देश-दुनिया का भोजपुरी -मैथिली साहित्य से साक्षात्कार तो होगा ही, साथ ही साहित्यिक अभिरूचि भी बढ़ेगी। इस कार्यक्रम में स्थापित कवियों के साथ ही नवोदित कवियों को भी अवसर दिया जाएगा।
कवि सम्मेलन में भाग लेने हेतु सम्पर्क करें -- wahjiwah@hamartv.in , manojsinghbhawuk@yahoo.co.uk
कवि सम्मेलन www.netvindia.com पर जाकर हमार टी.वी के अन्तर्गत देखा जा सकता है।

झलकियाँ-





Tuesday, April 13, 2010

सीमा तिवारी की आवाज से अब गूंजेगा गुयाना

संगीत तपस्या और निरंतर सिखाते रहने की प्रक्रिया है ,जिसे आज भी मैं सिख रही हूँ .यह कहना है देश बिदेश में भोजपुरी की संस्कृति बचने की प्रयासरत सिंगर सीमा तिवारी का .हाल ही में आयोजीत एक कार्यक्रम में भाग लेने आयी सीमा तिवारी से हमारे संबाददाता ने भोजपुरी संगीत के पहलूओं पर बात चीत की:

प्रश्न :सबसे पहला सवाल भोजपुरी संगीत में आपकी शुरुआत कैसे हुई और आज इस स्तर पर कैसे पहुँची?
उत्तर:संगीत की शुरुआत हमारी बचपन से ही हुई,छोटे मोटे कार्यक्रम तो विद्यालय स्तर पर ही होते रहते थे .लेकिन इसमें निखार आया सन २००२ में .पठाई के साथ साथ दो तीन घंटे का रोज अभ्यास करना उस समय आसान नहीं होता था.इसका पुरा पूरा श्रेया मैं अपने पिताजी को देना चाहती हूँ .शादी के बाद मेरे पति डॉ साहब का भी सहयोग रहता है.
प्रश्न:संगीत के माध्यम से भोजपुरी संस्कृति बचाने का प्रयाश कर रही हैं आज अपने आप को कितना सफल मान रही है?
उत्तर:शत प्रतिशत भोजपुरी संस्कृति खतरे में है इसे हर व्यक्ति को जिसे भी भोजपुरी की खुश्बू याद है, उसे सहेजना चाहिए क्योंकी कहा जाता है की जिसका भी इतिहास बदलना हो उसकी संस्कृति बदल दो. हम वो नहीं होने देंगे संगीत समाज का अगुआ होता है. उससे संस्कृति और इतिहास दोनों को बचाया जा सकता है. मेरा इसी दिशा में प्रयाश जारी है.
प्रश्न :भोजपुरी संगीत के क्षेत्र में आगे आप क्या करना चाहती है?
उत्तर: भोजपुरी के क्षेत्र में नया कार्य करना चाहती हूँ अश्लील गीतों को हटाना चाहती हूँ जिससे भोजपुरी के प्रति जो भ्रांतियां पैदा हो गयी हैं वो दूर हो सके .
प्रश्न:संगीत के क्षेत्र में कोई यैसा पल जो आज भी आपको याद आता है?
उत्तर:संगीत का हर पल ही एक कलाकार के लिए सुनहरा होता है लेकिन कुछ ऐसे पल होते है जो भुलाने योग्य नहीं होते हैं. वाकया "बलिया मोहोतस्वा" का है उसी समय कारगील की लड़ाई खत्म हुई थी और बलिया जिले का भी एक जवान शहीद हुआ था उस शहीद का पार्थिव शरीर जब तिरंगे में लपेट कर उसके माँ को सौंपी गयी थी उसी घटना पर आधारित मेरे पिताजी ने एक गीत लिखा था "देखनी तिरंगा में बबुववा के छाती दूना हो गईल" इसी गीत को मैंने प्रस्तुत किया था और इस गीत को गाते गाते मेरे आँखों से अश्रुधारा निकल गई .और सामने बैठे लाखों श्रोताओं की आखें नम हो गई थी. यह मेरे लिए नहीं भूलने वाला पल है .
प्रश्न :आपको इस गीत पर उत्तर प्रदेश राज्यपाल द्वारा पुरस्कृत भी किया जा चूका है इसके बारे में भी कुछ बतावें.
उत्तर:जी हाँ यह वही गीत था जिस पर तत्कालीन राज्यपाल माननीय विष्णु कान्त शास्त्री ने २००४ में मुझे पुरस्कृत किया था.
प्रश्न :आज के दौर में भोजपुरी कलाकारों को खुद को स्थापित करने के लिए अश्लीलता का सहारा लेना पद रहा है कैसे चुनौतियो का सामना करती हैं?
उत्तर: बिलकुल ठीक कहा आपने लेकिन आप एक कलाकार बता दे जो ऐसे गीत गाकर पद्म श्री ले लिया हो. यदि पद्मश्री की बात आती है तो उसमे सिर्फ श्रीमती शारदा सिन्हा जी ही है और वो अश्लील गीत गाकर नहीं लिया गया है.अभी इसी साल २०१० के गणतंत्र दिवस पर इंडिया गेट पर हमारे कटनी और रोपनी गीत बजे क्या यह अश्लीलता से संभव था. मैं जानती हूँ आजकल संगीत महफीलों में नया चलन देखने को मिल रहा है एक तरफ सिंगर गाना गा रहे होते हैं तो दूसरे तरफ नृत्य का आयोजन चलता रहता है ऐसे में भोजपुरी आयोजकों को ध्यान रखना चाहिए की गीत और नृत्य का अलग-अलग स्थान होना चाहिए क्योंकि दोनों की अलग अलग मर्यादाएं है.कला का आयोजन सिर्फ शोहरत और पैसा कमाने के लिए न हो संस्कृति को सहेजने के लिए भी हो.यह तभी संभव है जब कलाकार अपने में नियंत्रित रहेंगे।
प्रश्न: इस महीने आप विदेश दौरा पर जा रही है इसके बारे में कुछ बताएं.
उत्तर: जी हाँ, भारत सरकार द्वारा हमें गुयाना भेजा जा रहा है,वहाँ कई जगह कार्यक्रम होंगे जो २५ अप्रैल से ५ मई तक चलेगा.
प्रश्न: गुयाना के प्रदर्शन में आप अपने संस्कृति को कैसे प्रदर्शित करेंगी
उत्तर: भोजपुरी संस्कृति बिधावों की भंडार है जैसे -सोहर, खेलवना, विवाह गीत, हल्दी गीत, जेवनार, जनेऊ गीत आदि कई ऐसी विधाएं है में कोशिश करुँगी की इन सारी मिटटी की खुशबुओं को गुयाना में छोड़ कर आऊँ।
प्रश्न: भोजपुरी संगीत सुनने वालों के लिए क्या सन्देश देना चाहती हैं?
उत्तर: सबसे पहले श्रोताओं को धन्यवाद देती हूँ. और उनके लिए एक छोटी सी गुजारिश यह है के वही गीत सुने जो आपकी संस्कृति से जुड़े हों और अश्लील न हो.
प्रश्न: अच्छा सीमा जी बहुत बहुत धन्यबाद अपने अपना समय दिया।
ऊतर :जी, धन्यवाद, नमस्कार

Monday, March 8, 2010

सीमा तिवारी की आवाज से मधुमई हुई शाम



नई दिल्ली । 8 मार्च 2010

अन्तरराष्ट्रीय महिला दिवस के पूर्व संध्या पर माननीय लोकसभा अध्यक्षा मीरा कुमार जी का निवास और सुर में पिरोई हुई देश की जानी मानी लोक गायिका सीमा तिवारी की आवाज से मधुमास के महीने की शाम मधुमई हो गई. इस कार्यक्रम की शुरूआत "दिल्ली के धरती ह लोग भोजपुरिया स्वागत में रउरा हमार झुकल बा मउरिया .............................. गीत के साथ हुई. चइती गीत "आधी आधी रतिया जगावे इ कान्हा तोरीरे बंसुरिया......... एवं "बनेबने फुलवा फुलइले हो रामा एही मधुमसवा................ पर लोग झूमने पर मजबूर हो गये। सीमा तिवारी ने इस मौके पर महिलाओं एवं भोजपुरी में आ रही अश्लीलता के लिए एक सन्देश गीत "हरियर टीकुलिया लहरेदार टिकुली गिरे न पावे..................... भी गाया।
इस समारोह का आयोजन पटना विश्वविद्यालय के द्वारा किया गया था। इस समारोह में भूतपूर्व राज्यपाल डॉ भीस्म नारायण सिंह, आई.पी.एस आमोद कंठ, आई. ई. एस. श्री मंजूल जी, पूर्वांचल एकता मंच के अध्यक्ष श्री शिवजी सिंह, श्री हरेन्द्र प्रताप सिंह, सिम्पैथी के निदेशक डॉ आर. कान्त. एवं समाजसेवी लाल बिहारी लाल सहित कई गणमान्य लोगों ने इस कार्यक्रम का लुफ्त उठाया। अंत में पटना विश्वविद्यालय के कुलपति द्वारा सभी अतिथियों का धन्यवाद ज्ञापित किया।



प्रस्तुति: सीमा तिवारी

Sunday, February 21, 2010

भोजपुरिया शिखर सम्मेलन में लोकार्पित हुआ मनोज भावुक का चर्चित ग़ज़ल संग्रह



20 फरवरी की शाम एयरपोर्ट ऑथोरिटी ऑफ इण्डिया, दिल्ली के आफिसर्स इंस्ट्यूशनल क्लब में अन्तरराष्ट्रीय स्तर के भोजपुरी के चिन्तको की एक महत्वपूर्ण बैठक हुई।

बैठक की अध्यक्षता भोजपुरी समाज, दिल्ली के अध्यक्ष अजीत दुबे, संचालन डॉ रमाशंकर श्रीवास्तव एवं संयोजन मनोज भावुक और कुलदीप श्रीवास्तव ने किया।

मुख्य अतिथि अखिल विश्व भोजपुरी समाज विकास मंच जमशेदपुर के बी एन तिवारी उर्फ भाई जी भोजपुरिया एवं ख़ास मेहमान सात समुन्दर पार से आईं मारीशस की डॉ सरिता बुद्वू एवं ट्रिनिडाड की रिसर्च स्कॉलर पेंगी मोहन थीं।

कार्यक्रम तीन चरणों में बँटा था, परिचर्चा, लोकार्पण व होली मिलन।

लोकार्पण



मॉरिशस भोजपुरी संस्थान की संस्थापक डॉ सरिता बुद्वू, भोजपुरी समाज के अध्यक्ष अजीत दूबे एवं अखिल विश्व भोजपुरी समाज विकास मंच जमशेदपुर के बी एन तिवारी उर्फ भाई जी भोजपुरिया ने संयुक्त रूप से युवा कवि मनोज भावुक के लोकप्रिय व बहुचर्चित गजल संग्रह “तस्वीर जिन्दगी के” के द्वितीय संस्करण का लोकार्पण किया। इस पुस्तक के लिए मनोज भावुक को गीतकार गुलजार एवं ठुमरी साम्राज्ञी गिरजा देवी के हाथो वर्ष 2006 के भारतीय भाषा परिषद् सम्मान से नवाजा गया था। एक भोजपुरी पुस्तक को पहली बार यह सम्मान दिया गया है। हिन्द युग्म से प्रकाशित इस पुस्तक की उपस्थित विद्वानों ने प्रशंसा की और भावुक को बधाई दी। गौरतलब है कि स्तरीय साहित्य को प्रोत्साहित करने के लिए हाल ही में सम्पन्न विश्व पुस्तक मेले से हिन्द-युग्म ने प्रकाशन की शुरूआत की है।



परिचर्चा

परिचर्चा का मकसद स्पष्ट करते हुए मनोज भावुक ने कहा कि होली के पावन अवसर पर विश्व भर में फैले भोजपुरी की तमाम महत्वपूर्ण संस्थाओं का यह महामिलन समारोह है। लगभग सभी संस्थाओ के अध्यक्ष उपस्थित हैं। आज की बैठक का मुख्य उदेश्य है कि हम सब मिलकर संयुक्त रूप से भोजपुरी को उसका वाजिब हक दिलाने के लिए एक ठोस व कारगर रणनीति तैयार करें और उसे यथाशीघ्र कार्यान्वित करें।
अध्यक्षीय भाषण देते हुए अजीत दूबे ने कहा कि देश में और देश के बाहर तमाम संस्थाएँ अच्छा प्रयास कर रही हैं, लेकिन हमें एक छत के नीचे आना होगा जिसका केंद्रीय कार्यालय दिल्ली होगा। हम सब में बहुत ताकत है लेकिन इस तरह के संयुक्त प्रयास से हमारी ताकत हजार गुनी बढ़ जाएगी। भोजपुरी को अष्ठम सूची में शामिल कराना, भोजपुरी के स्वाभिमान की रक्षा करना व दिल्ली के स्कूलों में भोजपुरी पाठ्यक्रम लागू कराना हमारा मुख्य एजेण्डा होगा। हालाँकि दिल्ली प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष जयप्रकाश अग्रवाल पहले ही दिल्ली के स्कूलों में भोजपुरी पाठ्यक्रम को लागू करने की घोषणा कर चुके हैं। लेकिन हम लोग इसको कार्यान्वित करने का प्रयास करेंगे।



मॉरिशस से आई सरिता बुद्वू, ट्रिनिडाड की रिसर्च स्कॉलर पेंगी मोहन एवं मुख्य अतिथि अखिल विश्व भोजपुरी समाज विकास मंच, जमशेदपुर के अध्यक्ष बीएन तिवारी उर्फ भाईजी भोजपुरिया ने अपने-अपने प्रयासों की विस्तार से चर्चा करते हुए कहा कि आज भोजपुरी को एक कॉमन प्लेटफार्म और मजबूत नेटर्वकिंग की जरूरत है।

पूर्वांचल एकता मंच के अध्यक्ष श्री शिवजी सिंह ने कहा कि हमें अपना पीठ थपथपाने की आदत व छोटी-छोटी बातों के लिए मुँह फुलौवल छोड़कर बड़े व ठोस प्रयास के लिए साधना करनी होगी। कुलदीप श्रीवास्तव ने बड़े ही सहज ढंग से कहा कि हमे सिर्फ भाषणबाजी न कर किसी ठोस निष्कर्ष की ओर बढ़ना चाहिए। रंगकर्मी व फिल्म निर्माता उमेश सिंह ने कहा कि हमें जातिवाद, क्षेत्रवाद व राजनीति से ऊपर उठकर सिर्फ भाषा की लड़ाई लड़नी होगी।

इग्नू में भोजपुरी के प्रणेता प्रो॰ शत्रुघ्न कुमार, नाटककार महेन्द्र प्रसाद सिंह, लोकदृष्टि संपादक राजेश पाण्डेय, महिला सेवा अर्पण केन्द्र की संचालिका पूनम सिंह, वेववार्ता संपादक सईद अहमद, भोजपुरी समाज के उपाध्यक्ष प्रभुनाथ पाण्डेय, प्रदीप कुमार पाण्डेय, बिहारी खबर के मुन्ना पाठक, सन्तोष पटेल एवं भोजपुरी कॉग्रेस के अध्यक्ष सुधीर सिंहा ने ऐसे प्रयास का पुरजोर सर्मथन किया।

सर्वसम्मति से यह निर्णय लिया गया कि सार्थक प्रयास हेतु शीघ्र ही अजीत दूबे के नेतृत्व में एक कोर कमेटी का गठन किया जाएगा।

होली मिलन

अन्त में फागुन का उत्पात चालू हो गया। डॉ॰ सरिता बुद्वू ने गाया- होली खेले रघुबीरा अवध में तो भाईजी भोजपुरिया ने गाया- पिया काहे अइल होली के बिहान! पूरा महफ़िल फगुआ गया! सबको अबीर गुलाल लगाया गया और इस तरह से यह ऐतिहासिक भोजपुरिया शिखर सम्मेलन सफलतापूर्वक सम्पन्न हो गया।

Friday, February 19, 2010

ठाकरे परिवार के खिलाफ खड़े हुए आम भोजपुरिया लोग, प्रधानमंत्री को लिखा विरोध पत्र

एक लाख पोस्ट कार्ड प्रधानमंत्री को भेजने की अपील



विगत चौदह फरवरी को दिल्ली के आई .टी .ओ स्थित राजेन्द्र भवन में जय भोजपुरी मिलन समारोह का आयोजन किया गया। समारोह में एक सोशल भोजपुरी वेबसाइट के सदस्यों ने भाग लिया। समारोह की शुरूआत सदस्यों के आपसी मेल-जोल एवं परिचय आदान-प्रदान से हुई। कार्यक्रम को आगे बढ़ाते हुए जय भोजपुरी के सक्रीय सदस्य श्री सुधीर कुमार ने राज ठाकरे एवं बाल ठाकरे द्वारा जारी राष्ट्र विरोधी कुकृत्यों के सार्वभौमिक विरोध से की। समारोह को संबोधित करते हुए सुधीर कुमार ने कहा की अब वो समय आ गया है जब आम जनता को इन राष्ट्र विरोधी तत्वों के खिलाफ आवाज बुलंद करनी चाहिए। इसी क्रम में सुधीर कुमार ने यह भी कहा की हमारा प्रथम लक्ष्य तीन माह के अन्दर लगभग एक लाख विरोध पत्र प्रधानमंत्री महोदय तक प्रेषित करना है। इस अभियान में आम जनसमुदाय का सहयोग अनिवार्य एवं आपेक्षित है। समारोह की अध्यक्षता कर रहे सत्येन्द्र जी ने भी सहयोग की अपील की।

कार्यक्रम का प्रथम चरण समाप्त होते ही श्री मोंटू सिंह जी ने सबको लिट्टी चोखा खाने के लिए निमंत्रित किया। कार्यक्रम के दूसरे चरण की शुरूआत विरोध पत्र लेखन से हुई जिसमें कार्यक्रम में उपस्थित सभी सदस्यों ने ठाकरे परिवार के प्रति प्रधानमंत्री को पत्र लिख कर अपना विरोध प्रदर्शित किया। इसी कड़ी में तमाम सदस्यों ने अपने सुझाव एवं विचार व्यक्त किये।
समारोह का अंतिम चरण भोजपुरी संगीत के उभरते कलाकारों के गीत संगीत के नाम रहा। इस क्रम में नवोदित भोजपुरी गायक पंकज प्रवीण के आगामी एल्बम "चाहत में सनम" के बारे में सूचित किया गया। साथ ही भोजपुरी गायिका भानुश्री ने अपनी एल्बम "ए डार्लिंग" की एक-एक सी.डी सबको भेंट की। कार्यक्रम के अंतिम संबोधन में सभी ने विरोध पत्र के लिए आम जन समुदाय को प्रेरित करने का संकल्प लिया। आप सभी पाठकों से अनुरोध है की इस राष्ट्रहित में जारी विरोध अभियान में हिस्सा लेते हुए इस अभियान को सफल बनाए।

अगर आप खुद ही पत्र लिख कर पोस्ट करना चाहते हैं तो अपना सन्देश लिख कर (किसी भी भाषा में) निम्नलिखित पते पर भेंजे-

प्रधानमंत्री कार्यालय
साउथ ब्लाक, रायसिना हिल्स
नई दिल्ली 110101

अगर आप स्वयं पत्र लिख पाने में असमर्थ हैं तो कृपया अपना नाम, पूरा पता kumar@bhojpuria.com पर अपने सन्देश के साथ मेल करें। ज्यादा जानकारी के लिए सीधा संपर्क करें --9716248802
शिवा नन्द द्विवेदी "सहर"

Tuesday, January 12, 2010

चलनी में पानी का लोकार्पण

पूर्वांचल एकता मंच द्वारा दिल्ली में आयोजित विश्व भोजपुरी सम्मेलन में उतर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री एवं कांग्रेस सांसद श्री जगदिम्बका पाल के हाथों भोजपुरी के प्रख्यात साहित्यकार मनोज भावुक के गीत संग्रह चलनी में पानी का लोकार्पण हुआ।

इस अवसर पर फिल्म अभिनेता श्री शत्रुधन सिंहा, महुआ चैनल के चेयरमैन श्री पीके तिवारी, भोजपुरी सुरसम्राट मनोज तिवारी एवं लोकगायिका मालिनी अवस्थी जैसी हस्तियां मौजूद थीं।

लोकार्पित पुस्तक की प्रशंसा करते हुए पूर्वांचल एकता मंच के अघ्यक्ष शिवजी सिंह ने कहा कि मनोज भावुक भोजपुरी के लोकप्रिय गजलकार एवं फिल्म समीक्षक है और इन्होने अफ्रीका एवं ग्रेट ब्रिटेन आदि देशों में भोजपुरी का परचम लहराया है। इसलिए भोजपुरी साहित्य के क्षेत्र में विशिष्ट, बहुआयामी और बहुमुल्य योगदान के लिए इन्हें पूर्वाचल एकता मंच की ओर से भोजपुरी के अन्य शीर्ष कवियों के साथ डॉ प्रभुनाथ सिंह सम्मान से नवाजा गया।

विदित हो कि मनोज भावुक को उनके भोजपुरी गजल संग्रह ‘तस्वीर जिन्दगी के’ के लिए भी सन् 2006 में भारतीय भाषा परिषद् सम्मान से सम्मानित किया गया था। उन्हें सम्मान प्रदान किया था ठुमरी साम्राज्ञी गिरिजा देवी एवं आस्कर अवार्ड से सम्मानित सिंने जगत के नामी गीतकार गुलजार ने। एक मात्र भोजपुरी साहित्यकार कों यह सम्मान प्राप्त है।



चलनी में पानी भावुक का दोहा एवं गीत संग्रह है। पुस्तक की भूमिका में डॉ रमाशंकर श्रीवास्तव ने लिखा हैं कि यह जिन्दगी एक चलनी समान है। आदमी जिन्दगी भर इससे पानी उलीचता रह जाता है फिर भी आखिर में हासिल कुछ भी नहीं होता। नश्वरता दर्शन का ऐसा विम्ब साहित्य में दुर्लभ नहीं तो कम अवश्य है। चलनी में पानी सहज प्रयोग में भी गूढ़ दर्शन को व्यक्त करता है। भावुक ने एक दोहा में कहा है -
चलनी में पानी भरत बीतल उम्र तमाम
तबहू बा मन में भरम कइनी बहुते काम !

विश्व भोजपुरी सम्मेलन में उपस्थित लाखों दर्शको ने तालियॉ बजाकर मनोज भावुक के इस लोकार्पित पुस्तक का स्वागत किया।

Saturday, June 6, 2009

इग्नू में भोजपुरी भाषा पाठ्यक्रम के बढ़ते कदम


दिनांक 1.6.2009 को इग्नू प्रांगण के मानविकी विद्यापीठ में ’’भोजपुरी भाषा में सर्टिफिकेट कार्यक्रम’’ से संबंधित विशेषज्ञ समिति की बैठक संपन्न हुई। इस बैठक का शुभारंभ करते हुए इग्नू के कुलपति, प्रो. वी.एन. राजशेखरन पिल्लई ने कहा कि 20 करोड़ से भी अधिक आबादी द्वारा बोली जाने वाली भाषा पर पाठ्यक्रम बनाने की योजना बहुत ही महत्वपूर्ण है। 17 देशों में बोली जाने वाली भाषा भोजपुरी के महत्व को इसी से आंका जा सकता है कि मॉरिशस में 70 प्रतिशत लोग भोजपुरी बोलते हैं और वहाँ इस भाषा को देश की द्धितीय भाषा का दर्जा प्राप्त है। आदिकाल से समृद्व साहित्य से परिपूर्ण इस भाषा में पाठ्यक्रम प्रारंभ करने संबंधी योजना का प्रस्ताव एवं प्रारूप तैयार कर पाठ्यक्रम के संयोजक प्रो. शत्रुघ्न कुमार ने एक ऐतिहासिक कार्य किया है और इग्नू के राष्ट्रीय स्वरूप को ही उजागर किया है। उन्होंने यह भी कहा कि भोजपुरी भाषा के समृद्ध साहित्यिक परंपरा को ध्यान में रखकर ही इग्नू ने पिछले वर्ष ही आधार पाठ्यक्रम का निर्माण आरंभ किया। यह पाठ्यक्रम बन कर तैयार है और जुलाई 2009 के सत्र से छात्रों को उपलब्ध हो जायेगा। प्रो. शत्रुघ्न कुमार निश्चित ही बधाई के पात्र हैं। कुलपति ने यह भी आशा व्यक्त की कि भोजपुरी में यह सर्टिफिकेट कार्यक्रम शीघ्र बन कर छात्रों के लिए उपलब्ध होगा और आगे भोजपुरी में बी.ए., एम.ए. के पाठ्यक्रम पर भी कार्य आरंभ होगा उन्होंने इस बैठक में पधारे देश के विभिन्न भागों से आए भोजपुरी विद्धानों को पाठ्यक्रम निर्माण में अपना बहुमूल्य योगदान के लिए धन्यवाद दिया।

भोजपुरी भाषा पाठ्यक्रम के इस महत्वपूर्ण एवं ऐतिहासिक कार्य की संपूर्ण योजना बनाने वाले और पाठ्यक्रम के सूत्रधार एवं संयोजक प्रो. शत्रुघ्न कुमार ने अपने वक्तव्य में यह कहा कि भोजपुरी भाषा में पाठ्यक्रम निर्माण से संबंधित वर्षों से संजोये हुए सपने को साकार करने का अवसर मिला। उन्होंने जोर देकर यह भी कहा कि इस ऐतिहासिक कार्य में कुलपति का सबसे बड़ा सहयोग नहीं मिला होता तो शायद 20 करोड़ भोजपुरियों के सपनों को साकार किया जाने वाला यह कार्य संपन्न नहीं हो सकता था।

पाठ्यक्रम संयोजक प्रो. शत्रुघ्न कुमार ने आगे कहा कि जब रूसी, जापानी, चीनी, फ्रेंच, रोमेनियन भाषाओं में जीवन के सभी क्षेत्रों में उन्नति संबंधी कार्य हो सकता है तो इतनी बड़ी संख्या में बोली जाने वाली भाषभोजपुरी में भी सभी कार्य क्यों नहीं हो सकता? भोजपुरी भाषा में भी सभी कार्य संपन्न हो सकते हैं और इससे समाज की प्रगति भी हो सकती है।
प्रो. कुमार ने यह भी बताया कि भोजपुरी के सारे पाठ्यक्रम को आधुनिक एवं उपयोगी बनाया जायेगा। प्रो. कुमार ने कुलपति महोदय को ह्नदय से आभार प्रकट किया जिनके सहयोग से देश-विदेश में फैले हुए 20 करोड़ भोजपुरी भाषियों के अंदर एक नई आशा की किरण जगी है। उन्होंने यह भी सूचना दी कि जब पिछले वर्ष आधार पाठ्यक्रम की शुरूआत हुई तो घोर विरोध के स्वर भी उभरे लेकिन उस समय प्रो. कुमार के तर्क एवं अन्य विद्धानों के तर्क के आगे विरोध के स्वर तो दब ही गए साथ ही मजबूती से एक यह भी माँग उठी कि ’’भोजपुरी भाषा में सर्टिफिकेट कार्यक्रम’’ शीघ्र शुरू किया जाए। उस समय प्रो.शत्रुघ्न कुमार ने बोर्ड के सदस्यों को वचन दिया था कि वे सर्टिफिकेट ही नहीं बल्कि बी.ए., एम.ए. तथा भोजपुरी भाषा में ’शोध’ तक के पाठ्यक्रम की पूरी योजना को वे शीघ्र साकार रूप प्रदान करेंगे। 1 जून, 2009 को विशेषज्ञ समिति की बैठक का संपन्न होना इस बात का प्रमाण है कि प्रो. शत्रुघ्न ने अपने वचन को कितनी लगन और निष्ठा के साथ निभाया है। पिछले वर्ष से ही प्रो. शत्रुघ्न कुमार द्वारा ’’भोजपुरी माई के खातिर’’ किए जाने वाले कार्य से देश-विदेश के सभी लोग अच्छी तरह वाकिफ हो चुके हैं।

मानविकी विद्यापीठ के निदेशिका, प्रो. रेणु भारद्वाज ने इस अवसर पर अपने वक्तव्य में मानविकी विद्यापीठ द्वारा अन्य भाषाओं से संबंधित पाठ्यक्रम निर्माण की सूचना दी तथा उन्होंने भी प्रो. शत्रुघ्न कुमार को बधाई देते हुए यह भी कहा कि अपनी मेहनत और लगन से प्रो. कुमार ने ’’असंभव कार्य को संभव कर दिया’’। इस कार्य में वे सदा उनका सहयोग देती रहेंगी।

इस बैठक में देश के विभिन्न क्षेत्रों से पधारे भोजपुरी भाषा साहित्य के प्रसिद्ध चिंतक, विद्वान, लेखकों ने हिस्सा लिया जिनमें डॉ. नागेन्द्र प्रसाद सिंह (पटना), प्रो. रामदेव शुक्ल (गोरखपुर), डॉ. राजेन्द्र प्रसाद सिंह (सासाराम), प्रो. विरेन्द्र नारायण यादव (छपरा), डॉ. प्रेमशिला शुक्ला (देवरिया), प्रो. रामेश्वर मिश्र (शांतिनिकेतन, पश्चिम बंगाल) शामिल हैं। इस बैठक में देश के विभिन्न क्षेत्रों से पधारे विद्वान न केवल भोजपुरी भाषा के विशेषज्ञ है बल्कि प्रसिद्ध लेखक, चिंतक और भोजपुरी भाषा आंदोलन के सक्रिय योद्धा हैं। विशेषज्ञ समिति की यह बैठक सुबह से शाम तक चली और गहन विचार-विमर्श के बाद पाठ्यक्रम की रूपरेखा को अंतिम रूप प्रदान किया गया।

1 जून, 2009 को संसार के भोजपुरी भाषियों को यह सुखद समाचार सुनने एवं देखने को मिला कि एक ओर इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय भोजपुरी भाषा से संबंधित पाठ्यक्रम निर्माण की दिशा में ऐतिहासिक कार्य हो रहा था तो दूसरी ओर देश के संसद में भी एक भोजपुरी भाषी महिला राजनीतिज्ञ को लोकसभा के स्पीकर के पद पर सुशोभित करने का कार्य हो रहा था। दुनियाँ के भोजपुरी भाषियों के लिए यह आशा की किरण दिखाई दे रही है कि सदियों पुरानी भोजपुरी भाषा को अपना गौरवपूर्ण स्थान प्राप्त होगा। भोजपुरी भाषियों को यह भी आशा है कि ’संसद से सड़क’ तक भोजपुरी भाषा को प्रतिष्ठा मिलेगी।

इस बैठक में ’हमार टीवी’, के प्रोग्राम प्रोडयूसर मनोज भावुक जो कि स्वयं भोजपुरी भाषा के लेखक है और पूर्वांचल एक्सप्रेस से कुलदीप ने मीडिया प्रतिनिधि के रूप में भी इस बैठक में हिस्सा लिया। ’सम्यक् भारत’ के कार्यकारी संपादक के.पी. मोर्या ने इस ऐतिहासिक क्षण को कैमरे एवं वीडियों में सुरक्षित कर लिया।

प्रस्तुति- प्रो॰ शत्रुघ्न कुमार
(भोजपुरी भाषा में सर्टिफिकेट प्रोग्रेम के प्रस्तावक और संयोजक)

Thursday, January 22, 2009

पहला भोजपुरी-मैथिली कवि सम्मेलन

कहते हैं उतरती हुई सर्दी गुलाबी हो जाती है और ऐसी सर्दी में जब पुरबिया माटी के लाल शब्दों के गुलाल से एक-दूसरे को रंगने अखाडें में उतर आयें तो फ़िर क्या कहिये! ऐसा ही कुछ नजारा था दिल्ली के श्रीराम सेंटर का जहाँ प्रथम भोजपुरी मैथिली कवि सम्मलेन में पुरबिया माटी की सोंधी खुशबू ने दिल्ली के खुश्क मिजाज को खालिस गंवई रंग से सराबोर कर दिया।
कार्यक्रम का विधिवत् आरम्भ होता इसके पहले दर्शकों का मन बहलाने मंच पर आए मशहूर भोजपुरी गायक गजाधर ठाकुर ने जब ''गोरिया चाँद के अंजोरिया नियर गोर बाडू हो, तोहार जोड़ा केहू नईखे तू बेजोड़ बाडू हो' छेड़ी तो उपस्थित पुरुषों का मन बरबस मचल उठा। माहौल की रूमानियत बढ़ ही रही थी की 'बेसी बोलबा ता धयिके हो रजवु चीर देयिब' ने माहौल को देशभक्ति के जज्बे से भर दिया।

इसके बाद सुधांशु बहुगुडा की टीम ने अपनी प्रस्तुतियों से संगीत का मायाजाल बुनना शुरू ही किया था कि दिल्ली सरकार की भाषा मंत्री किरण वालिया का आगमन हो गया। उन्होंने दीप प्रज्जवलन कर कवि सम्मलेन का शुभारम्भ किया।

सबसे पहले बारी आई डाक्टर चंद्र देव यादव की जिन्होंने 'गाँवपुर के बस इहे निशानी, छाता के बस बचल कमानी' से गांवों की व्यथा व्यक्त की।
इसके बाद मिथिला की झलक पेश करने आए रमन सिंह ने 'ओल्ड होम में वृद्ध' कविता से वृद्धों के दर्द को मुखरित किया।

माहौल बिल्कुल तनावपूर्ण हो चला था कि संचालक डाक्टर रमाशंकर श्रीवास्तव ने मनोज "भावुक" को आवाज दी, भावुक के आते ही मंच की रंगत ही बदल गई। अपनी रंग-बिरंगी रचनाओं से उन्होंने एकबार फिर मंच को गति प्रदान करते हुए 'आम मउरल बा जिया गंध से पागल बाटे, ऐ सखी-ऐ सखी भावुक के बुलावल जाए' और 'अबकी गणतंत्र दिवस अईसे मनावल जाए, आग के राग दुश्मन के सुनावल जाए' सुनाया। इसके बाद मैथिली की कामनी कामायनी ने 'विस्थापित लोग' के माध्यम से दर्शकों की वाहवाही लूटी तो नहले पे दहला मारते हुए भोजपुरी कवयित्री अल्का सिन्हा ने 'करवा चौथ' कविता से पुरुषों और स्त्रियों दोनों को सोंचने पर मजबूर कर दिया।

तुरन्ता की परम्परा का निर्वाह करते हुए रविन्द्र लाल दास ने 'हमर गाँव', 'रोटी' और 'बाद्हिक असली फायदा' जैसी क्षणिकाओं से आधुनिक समाज पर करारा व्यंग्य किया। मैथिल कवि रविन्द्र नाथ ठाकुर ने 'छंद मधुर, भाव मधुर, मॉस मधुर गीतक' से महफ़िल को मिठास से भर दिया तो मैथिल सम्राट गंगेश गुंजन ने 'हम मरिजाब' से श्रोताओं को आँखे मींचने पर मजबूर कर दिया। इसके अलावा शत्रुघ्न कुमार, सारण कुमार आदि ने भी काव्य पाठ किया।

अंत में सम्मलेन की अध्यक्षता कर रहे डाक्टर नित्यानंद तिवारी ने सभी कविताओं की समीक्षा करते हुए कहा कि 'कविता के मतलब सिर्फ़ आस्वाद रूचि के पोषण कईल न ह, कविता ता उ हा, जवन दिक् करे.'

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दिल्ली से आलोक सिंह 'साहिल'