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Friday, April 22, 2011

10वां राष्ट्रीय विश्व भोजपुरी सम्मलेन 23 -24 अप्रैल को, ऋषिकेश में

१०वें राष्ट्रीय विश्व भोजपुरी सम्मलेन का आयोजन २३ -२४ अप्रैल को त्रिवेणी घाट,ऋषिकेश (उतराखंड ) में किया जा रहा है जिसमें देश व देश के बाहर से हज़ारों की संख्या में साहित्यकार , कलाकार, गायक और भोजपुरी प्रेमी भाग लेंगे. सम्मलेन का उदघाटन माननीय मुख्यमंत्री ,उतराखंड श्री रमेश पोखरियाल निशंक करेंगे . मुख्य अतिथि वरिष्ठ नेता कलराज मिश्र , अध्यक्ष सतीश त्रिपाठी (राष्ट्रीय अध्यक्ष ,विश्व भोजपुरी सम्मलेन),अति विशिष्ट अतिथि -डा ० राजा वशिष्ठ (अमेरिका ),महामहिम राजदूत ( त्रिनिदाद) ,डा ० सरिता बुधू (मारीशस ),विशिष्ट अतिथि -श्री कमल नारायण मिश्र (प्रदेश अध्यक्ष ,उतराखंड ),श्री अरुणेश नीरन (अंतर राष्ट्रीय महासचिव ,विश्व भोजपुरी सम्मलेन ),माननीय हरीश रावत (सांसद , हरिद्वार ) और माननीय ओम प्रकाश यादव (सांसद, सीवान ) आदि उदघाटन सत्र में भाग लेंगे.
इस दो दिवसीय आयोजन में इस वर्ष भी साहित्यिक परिचर्चा , विचार गोष्ठी , लोकरंग , नटरंग , कवि सम्मेलन एवं सम्मान समारोह का कार्यक्रम होगा .

उक्त आशय की जानकारी देते हुए विश्व भोजपुरी सम्मेलन दिल्ली के अध्यक्ष श्री मनोज भावुक ने बताया कि '' विश्व भोजपुरी सम्मलेन २० करोड़ भोजपुरी भाषी लोगों का एक विश्व संगठन है तथा सोलह देश इसके सदस्य हैं . भारत एवं भारत के बाहर अब तक इसके चार विश्व सम्मेलन और नौ राष्ट्रीय अधिवेशन हो चुके हैं . इनमें भारत और मारीशस के राष्ट्रपति , प्रधानमंत्री , मंत्री , सांसद , संस्कृतिकर्मी , कलाकार , भाषाविद एवं साहित्यकारों ने उपस्थित होकर भोजपुरी का मान बढाया है .

श्री भावुक ने आगे कहा कि ' विश्व भोजपुरी सम्मलेन भोजपुरी भाषा , साहित्य , कला , संस्कृति एवं जीवन शैली के प्रचार-प्रसार , संरक्षण एवं संवर्धन के लिए समर्पित एक विश्व स्तरीय संगठन है . विश्व भर में अपने श्रम , प्रतिभा , कल्पनाशक्ति और समर्पण के कारण अपना विशेष स्थान बनाने वाले बीस करोड़ भोजपुरियों की एकता , आपसी संवाद , पहचान और अपनी मिट्टी की गंध बनाए रखने और उनके लिए एक विश्व मंच उपलब्ध कराने के उद्देश्य से सन १९९५ में सेतु न्यास मुम्बई की सहायता से संस्था की स्थापना हुई थी . मात्र पंद्रह वर्ष की अल्पावधि में सम्मेलन ने भोजपुरिया कला और संस्कृति के क्षेत्र में तो कीर्तिमान स्थापित किया ही है , लाखो लोगों को एक मंच पर जुटाकर उनकी अस्मिता का बोध भी कराया है .

Friday, December 31, 2010

मनोज तिवारी को भोजपुरी रतन सम्मान



नई दिल्ली: भोजपुरी गायक व सिने सुपर स्टार मनोज तिवारी को पूर्वांचल एक्सप्रेस और भोजपुरी संसार पत्रिका समूह ने भोजपुरी रतन सम्मान से सम्मानित किया। यह सम्मान उन्हें भोजपुरी सिनेमा, संगीत और फिल्म के माध्यम से विश्व स्तर पर भोजपुरी भाषा के प्रचार-प्रसार करने हेतु दिया गया। कुछ माह पूर्व पूर्वांचल एक्सप्रेस ने भोजपुरी रतन के चुनाव के लिए एक सर्वे कराया था, जिसमें २५ भोजपुरी रतन व भोजपुरिया विभूति का चुनाव किया गया। उसमें मनोज तिवारी के लिए सबसे ज्यादा लोगो ने अपनी सहमति जताई थी। मनोज तिवारी को यह सम्मान पूर्वांचल एक्सप्रेस व भोजपुरी संसार के कुलदीप श्रीवास्तव, मीडिया क्लब ऑफ़ इंडिया के आनंद प्रकाश और जाने माने भोजपुरी साहित्यकार मनोज भावुक ने संयुक्त रूप से प्रदान किया।

मनोज तिवारी के बिग बॉस से निकलने के बाद भी पूर्वांचल ने भोजपुरिया प्रदेश में एक सर्वे कराया था जिसमें लोगों से यह पूछा गया था कि आप किसको सबसे ज्यादा पसंद करते हैं - सलमान खान या मनोज तिवारी। तो इस में भी मनोज तिवारी ने बाजी मार ली और वह सलमान खान पर बीस साबित हुए।

इसी सर्वे में यह भी पूछा गया था कि क्या मनोज तिवारी बिग बॉस के घर के अंदर भोजपुरी का प्रचार-प्रसार किये तो कुछ लोग मायूस भी थे कि उन्होंने वहाँ पर बहुत कम भोजपुरी बोली या भोजपुरी गाना कम गाया। पर अधिकतर लोगों का यही कहना था कि मनोज तिवारी ने बिग बॉस के अंदर जो छठ पूजा की वह एक तरह से भोजपुरी का हीं प्रचार-प्रसार है। और बिग बॉस के घर में छठ पूजा करना भोजपुरी भाषियों के लिए एक ऐतिहासिक घटना ही थी। सर्वे में अधिकतर लोगों का यह भी कहना था कि मनोज तिवारी को वोट कम नहीं मिले थे। उनको एक साजिश के तहत निकाला गया था। इस बात को लेकर भोजपुरिया समाज में बहुत रोष है।

Friday, October 1, 2010

मनोज भावुक को भोजपुरी के लिये प्रताप नारायण मिश्र स्मृति- युवा साहित्यकार सम्मान



1 अक्टूबर । लखनऊ
लखनऊ स्‍थित संस्‍था भाऊराव देवरस सेवा न्‍यास ने भोजपुरी के लोकप्रिय कवि मनोज भावुक को भोजपुरी भाषा में उल्‍लेखनीय योगदान के लिए पंडित प्रताप नारायण मिश्र स्‍मृति-युवा साहित्‍यकार सम्‍मान से नवाजा है। पहली बार किसी भोजपुरी साहित्‍यकार को यह सम्‍मान मिला है।

लखनऊ, उत्तर प्रदेश के ऐतिहासिक ‘माधव सभागार' में आयोजित युवा साहित्‍यकार सम्‍मान समारोह के दौरान मनोज भावुक को ये सम्‍मान दिया गया। सेवानिवृत आई.ए.एस. विनोद शंकर चौबे, लखनऊ के पासपोर्ट अधिकारी जे.पी.सिंह और लखनऊ के महापौर डॉ. दिनेश शर्मा ने उन्‍हें सम्‍मान प्रदान किया।

इस समारोह में श्री मनोज भावुक को सम्‍मान स्‍वरूप पांच हजार रुपये, प्रशस्‍ति पत्र, प्रतीक चिन्‍ह, माँ सरस्‍वती की प्रतिमा, अंगवस्‍त्र एवं न्‍यास द्वारा प्रकाशित पुस्‍तकों का सेट भेंट किया गया।

भाऊराव देवरस सेवा न्‍यास गत पंद्रह वर्षों से अखिल भारतीय स्‍तर पर भारतीय साहित्‍य के विविध विधाओं के सृजनात्‍मक एवं विचारात्‍मक रचना करने वाले सात युवा साहित्‍यकारों को पुरस्‍कृत व सम्‍मानित करता आ रहा है।

न्‍यास द्वारा आयोजित इस सोलहवें युवा-साहित्‍यकार सम्‍मान समारोह में वर्ष 2010 के लिए मनोज भावुक के अलावा जिन युवा साहित्‍यकारों को सम्‍मानित किया गया, वे हैं- काव्‍य के लिए अरविंद कुमार सोनकर, कथा साहित्‍य के लिए दिनेश कर्नाटक, बाल साहित्‍य के लिए सुश्री गीतिका सिंह, पत्रकारिता के लिए डॉ. मुकुल श्रीवास्‍तव और संस्‍कृत के लिए डॉ. धीरेन्‍द्र झा।

मनोज भावुक की रचनाओं के बारे में टिप्‍पणी करते हुए भाऊराव देवरस सेवा न्‍यास के कार्यक्रम संयोजक डॉ. विजय कुमार कर्ण ने कहा ‘2 जनवरी 1976 को सीवान (बिहार) में जन्‍मे और रेणुकूट (उत्तर प्रदेश) में पले-बढ़े मनोज भावुक भोजपुरी न्‍यूज चैनल ‘हमार टीवी' के क्रिएटिव हेड हैं और भोजपुरी के सुप्रसिद्ध युवा साहित्‍यकार हैं। पिछले 15 सालों से देश और देश के बाहर (अफ्रीका और यूके में) भोजपुरी भाषा, साहित्‍य और संस्‍कृति के प्रचार-प्रसार में सक्रिय भावुक भोजपुरी सिनेमा, नाटक आदि के इतिहास पर किये गये अपने समग्र शोध के लिए भी पहचाने जाते हैं। अभिनय, एंकरिंग एवं पटकथा लेखन आदि विधाओं में गहरी रुचि रखने वाले मनोज दुनिया भर के भोजपुरी भाषा को समर्पित संस्‍थाओं के संस्‍थापक, सलाहकार और सदस्‍य हैं। ‘‘तस्‍वीर जिंदगी के''(गजल-संग्रह) एवं ‘‘चलनी में पानी''(गीत-संग्रह) मनोज की चर्चित पुस्‍तके हैं। ‘‘तस्‍वीर जिन्‍दगी के'' के लिए मनोज को वर्ष 2006 के भारतीय भाषा परिषद सम्‍मान से नवाजा जा चुका है। अभी हाल ही में मनोज भावुक को विश्‍व भोजपुरी सम्‍मेलन दिल्‍ली का अध्‍यक्ष नियुक्‍त किया गया है। भाऊराव देवरस सेवा न्‍यास मनोज भावुक को सम्‍मानित करते हुए गौरवान्‍वित है।'
सम्‍मान समारोह की अध्‍यक्षता करते हुये विनोद शंकर चौबे ने मनोज भावुक की रचनाओं की जम कर तारीफ की और कहा कि मनोज ने रघुबीर नारायण के बटोहिया गीत की याद ताजा कर दी।

इस मौके पर युवा कवि मनोज भावुक ने भोजपुरी में गजल पाठकर पूरा माहौल भोजपुरीमय कर दिया और कहा, ‘यह सम्‍मान किसी एक व्‍यक्ति का नही है बल्‍कि भोजपुरी भाषा एवं साहित्‍य और देश-विदेश में फैले करोड़ों भोजपुरी भाषियों एवं भोजपुरी प्रेमियों का सम्‍मान है।'

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Tuesday, September 28, 2010

मनोज भावुक विश्व भोजपुरी सम्मलेन,दिल्ली के अध्यक्ष बने

विश्व भोजपुरी सम्मलेन की झारखंड इकाई द्वारा गत २६-२७ सितम्बर को विरसामुंडा की पावन भूमि रांची में सम्मलेन की कार्यकारिणी के राष्ट्रीय अधिकारियों की एक महत्वपूर्ण बैठक हुई जिसमें सर्वसम्मति से युवा कवि मनोज भावुक को विश्व भोजपुरी सम्मलेन की दिल्ली इकाई का अध्यक्ष नियुक्त किया गया. मनोज इससे पहले विश्व भोजपुरी सम्मलेन की ग्रेट ब्रिटेन इकाई के अध्यक्ष (२००६-७) एवं अखिल भारतीय भोजपुरी साहित्य सम्मलेन के प्रबंध मंत्री ( १९९८-९९) रह चुके हैं.

2 जनवरी 1976 को सीवान (बिहार) में जन्मे और रेणुकूट (उत्तर प्रदेश ) में पले- बढ़े मनोज भावुक भोजपुरी के सुप्रसिद्ध युवा साहित्यकार हैं। पिछले 15 सालों से देश और देश के बाहर (अफ्रीका और यूके में) भोजपुरी भाषा, साहित्य और संस्कृति के प्रचार-प्रसार में सक्रिय भावुक भोजपुरी सिनेमा, नाटक आदि के इतिहास पर किये गये अपने समग्र शोध के लिए भी पहचाने जाते हैं। अभिनय, एंकरिंग एवं पटकथा लेखन आदि विधाओं में गहरी रुचि रखने वाले मनोज दुनिया भर के भोजपुरी भाषा को समर्पित संस्थाओं के संस्थापक, सलाहकार और सदस्य हैं। तस्वीर जिंदगी के( ग़ज़ल-संग्रह) एवं चलनी में पानी ( गीत- संग्रह) मनोज की चर्चित पुस्तके हैं। ‘तस्वीर जिन्दगी के’ तो इतना लोकप्रिय हुआ कि इसका दूसरा संस्करण प्रकाशित किया जा चुका है और इस पुस्तक को वर्ष 2006 के भारतीय भाषा परिषद सम्मान से नवाज़ा जा चुका है। एक भोजपुरी पुस्तक को पहली बार यह सम्मान दिया गया है।
इस अवसर पर मनोज भावुक ने अपना उदगार व्यक्त करते हुए कहा कि मैंने १५-१६ वर्षों के अपने अनुभव में यही देखा है कि लगभग सभी भोजपुरी सम्मलेन में अस्सी फीसदी सफ़ेद बाल ही दिखाई देते हैं. इसमें युवाओं व महिलाओं की भागीदारी जरुरी हैं. मनोज ने युवाओं के लिए भोजपुरी कार्यशाला व साल में कम से कम एक बार भोजपुरी पुस्तक मेला करने का प्रस्ताव रखा जिसे अंतरराष्ट्रीय महासचिव अरुणेश नीरन ने मंजूरी दे दी.नीरन ने कहा जनवरी में वाराणसी में होगी युवाओं के लिए भोजपुरी कार्यशाला व अगले सम्मलेन में ऋषिकेश में भोजपुरी पुस्तक मेला .
आगे नीरन ने यह भी कहा कि मनोज दिल्ली में अपनी कार्यकारिणी का गठन करें व उसमें अधिक से अधिक युवा-युवतियो को शामिल करें.

इस अवसर पर सम्मेलन के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष सतीश त्रिपाठी,राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बी.एन तिवारी, सभी प्रदेशों के प्रांतीय अध्यक्ष के अलावा दूरदर्शन रांची के निदेशक शैलेश पंडित,आकाशवाणी रांची के सीनियर उद्घोषक कुमार ब्रिजेन्द्र, भोजपुरी संसार पत्रिका के सम्पादक मनोज श्रीवास्तव, संस्था के प्रचार-प्रसार सचिव कुलदीप श्रीवास्तव,भोजपुरी सेवा संस्थान,लखनऊ के अध्यक्ष दिनेश तिवारी, गत वर्ष आगरा में हुए विश्व भोजपुरी सम्मलेन के संयोजक अशोक चौबे,वरिष्ठ समाज सेवी माधव सिंह, अखिल विश्व भोजपुरी समाज के आरा अध्यक्ष ब्रजेश सिंह समेत विभिन्न प्रान्तों से आये साहित्यकार,पत्रकार, कलाकार व गायक उपस्थित थे.

इस दो दिवसीय सम्मलेन में सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन भी किया गया. जिसका उदघाटन करते हुए खाद्य एवं प्रसंस्करण मंत्री सुबोध कान्त सहाय ने कहा ' आज प्रधानमंत्री का जन्म दिन है और मै इस मंच से प्रधानमंत्री से यह आग्रह करता हूँ कि भोजपुरी को अतिशीघ्र आठवीं अनुसूची में शामिल किया जाय. सहाय ने भोजपुरी फिल्मकारों की भी खिचाईं की.कहा सख्त जरुरत है स्टैण्डर्ड उठाने की . अंतरराष्ट्रीय महासचिव अरुणेश नीरन कहा विश्व भोजपुरी सम्मलेन भोजपुरी को उसका वाजिब हक़ दिलाने के लिए प्रतिबध्ध है. सम्मलेन को अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष सतीश त्रिपाठी, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बी.एन तिवारी,विधान सभा अध्यक्ष सी.पी .सिंह, दूरदर्शन रांची के निदेशक शैलेश पंडित,सांसद राजनीति प्रसाद, वरिष्ठ समाज सेवी माधव सिंह, विजय पासवान आदि ने भी संबोधित किया.

फिर सजी सुर की महफ़िल.आगाज किया भोजपुरी सम्राट भरत शर्मा ने. गायिका देवी ने लोक लहरी में सबको डुबो दिया . प्रतिभा सिंह, नीतू सिंह नूतन, दीपक त्रिपाठी,सुशांत व राजकुमार आदि ने दर्शको को झूमने-नाचने पर मजबूर कर दिया. आरा से आई पूनम सिंह की टीम व रांची के अजय मलकानी के ग्रुप ने भी अनेक रंगारंग कार्यक्रम दिए और रांची में देर रात तक गूंजती रही भोजपुरिया फ़नकारो की आवाज.

Sunday, August 15, 2010

हमार टीवी पर भोजपुरी कवि सम्मेलन का साप्ताहिक शो "वाह जी वाह"



आजकल जबकि साहित्य टीवी चैनल्स से दूर होते जा रहे हैं, हमार टीवी द्वारा भोजपुरी-मैथिली कवि-सम्मेलन का साप्ताहिक कार्यक्रम वाह जी वाह का श्रीगणेश सचमुच ऐतिहासिक है।

वाह जी वाह की शुरूआत स्वतंत्रता दिवस के शुभ अवसर पर भोजपुरी की देश-भक्ति कविताओं से हो रहा है। 15 अगस्त को 12 .00 Noon और 10.00 P.M पर प्रसारित होने वाले इस कवि-सम्मेलन का संचालन कर रहे हैं- भोजपुरी के जाने माने शायर मनोज भावुक और इस अनोखे एपिसोड के कवि हैं- डा. रमाशंकर श्रीवास्तव, महेन्द्र प्रसाद सिंह, परिचय दास एवं अलका सिन्हा।

हमार के चैनल हैड उदय चन्द्र सिंह ने बताया कि इस वीकली शो के एंकर - प्रोड्यूसर मनोज भावुक हैं और पैनल प्रोड्यूसर हैं दिलीप सिंह। इस कार्यक्रम से देश-दुनिया का भोजपुरी -मैथिली साहित्य से साक्षात्कार तो होगा ही, साथ ही साहित्यिक अभिरूचि भी बढ़ेगी। इस कार्यक्रम में स्थापित कवियों के साथ ही नवोदित कवियों को भी अवसर दिया जाएगा।
कवि सम्मेलन में भाग लेने हेतु सम्पर्क करें -- wahjiwah@hamartv.in , manojsinghbhawuk@yahoo.co.uk
कवि सम्मेलन www.netvindia.com पर जाकर हमार टी.वी के अन्तर्गत देखा जा सकता है।

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Saturday, August 7, 2010

भोजपुरी के झंडा तोहरा हाथ में बा.ओकरा के देश में फहरावs—केदारनाथ सिंह

"अमरे होखे खातिर सरहद बनावल गइल बा, का ए हमार बाबू"। इस कविता ने एक बूढ़ी माँ के कोख के दर्द को उकेर दिया। मनोज भावुक ने काव्य पाठ शुरू किया तो पूरा माहौल,शहीद बेटे की बूढ़ी माँ के व्यथा को सुन नम हो गया। मनोज की इस कविता ने वरिष्ठ कवियों का दिल जीत लिया। कविता सुनने के बाद कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे डॉ. केदारनाथ सिंह ने मनोज भावुक को नारायणी साहित्य अकादमी के मंच पर सम्मानित करते हुए कहा "भोजपुरी के झंडा तोहरा हाथ में बा। ओकरा के देश में फहरावs।" वरिष्ठ आलोचक नामवर सिंह ने भी सस्नेह टिप्पणी दी कि "मनोज अपनी बोली के समर्थ कवि हैं।"
खुर्जा, उत्तर प्रदेश में नारायणी साहित्य अकादमी द्वारा कारगिल शहीद दाताराम की पावन स्मृति में आयोजित कवि सम्मेलन में कई प्रदेश के कवियों ने शिरकत किया। हिन्दी कवि-सम्मेलन में जब भोजपुरी के कवि मनोज को काव्य-पाठ के लिये आमंत्रित किया गया तो उन्होंने बड़ी सहजता व विनम्रता से कहा कि एक शहीद की स्मृति में मेरी भोजपुरी कविता पता नहीं आप तक संप्रेषित हो पाये या नहीं हालांकि संस्था के सचिव डॉ. पुष्पा सिंह विसेन ने मनोज का हौसला बढ़ाया है कि जो विदेशों में भोजपुरी सुना सकते हैं और वहाँ के लोगों को समझा सकते हैं, तो यह तो अपना ही घर है। मनोज के काव्य-पाठ के बाद डॉ. केदार नाथ सिंह ने कहा 'खूब संप्रेषित भइल भोजपुरी कविता।'

Sunday, February 21, 2010

भोजपुरिया शिखर सम्मेलन में लोकार्पित हुआ मनोज भावुक का चर्चित ग़ज़ल संग्रह



20 फरवरी की शाम एयरपोर्ट ऑथोरिटी ऑफ इण्डिया, दिल्ली के आफिसर्स इंस्ट्यूशनल क्लब में अन्तरराष्ट्रीय स्तर के भोजपुरी के चिन्तको की एक महत्वपूर्ण बैठक हुई।

बैठक की अध्यक्षता भोजपुरी समाज, दिल्ली के अध्यक्ष अजीत दुबे, संचालन डॉ रमाशंकर श्रीवास्तव एवं संयोजन मनोज भावुक और कुलदीप श्रीवास्तव ने किया।

मुख्य अतिथि अखिल विश्व भोजपुरी समाज विकास मंच जमशेदपुर के बी एन तिवारी उर्फ भाई जी भोजपुरिया एवं ख़ास मेहमान सात समुन्दर पार से आईं मारीशस की डॉ सरिता बुद्वू एवं ट्रिनिडाड की रिसर्च स्कॉलर पेंगी मोहन थीं।

कार्यक्रम तीन चरणों में बँटा था, परिचर्चा, लोकार्पण व होली मिलन।

लोकार्पण



मॉरिशस भोजपुरी संस्थान की संस्थापक डॉ सरिता बुद्वू, भोजपुरी समाज के अध्यक्ष अजीत दूबे एवं अखिल विश्व भोजपुरी समाज विकास मंच जमशेदपुर के बी एन तिवारी उर्फ भाई जी भोजपुरिया ने संयुक्त रूप से युवा कवि मनोज भावुक के लोकप्रिय व बहुचर्चित गजल संग्रह “तस्वीर जिन्दगी के” के द्वितीय संस्करण का लोकार्पण किया। इस पुस्तक के लिए मनोज भावुक को गीतकार गुलजार एवं ठुमरी साम्राज्ञी गिरजा देवी के हाथो वर्ष 2006 के भारतीय भाषा परिषद् सम्मान से नवाजा गया था। एक भोजपुरी पुस्तक को पहली बार यह सम्मान दिया गया है। हिन्द युग्म से प्रकाशित इस पुस्तक की उपस्थित विद्वानों ने प्रशंसा की और भावुक को बधाई दी। गौरतलब है कि स्तरीय साहित्य को प्रोत्साहित करने के लिए हाल ही में सम्पन्न विश्व पुस्तक मेले से हिन्द-युग्म ने प्रकाशन की शुरूआत की है।



परिचर्चा

परिचर्चा का मकसद स्पष्ट करते हुए मनोज भावुक ने कहा कि होली के पावन अवसर पर विश्व भर में फैले भोजपुरी की तमाम महत्वपूर्ण संस्थाओं का यह महामिलन समारोह है। लगभग सभी संस्थाओ के अध्यक्ष उपस्थित हैं। आज की बैठक का मुख्य उदेश्य है कि हम सब मिलकर संयुक्त रूप से भोजपुरी को उसका वाजिब हक दिलाने के लिए एक ठोस व कारगर रणनीति तैयार करें और उसे यथाशीघ्र कार्यान्वित करें।
अध्यक्षीय भाषण देते हुए अजीत दूबे ने कहा कि देश में और देश के बाहर तमाम संस्थाएँ अच्छा प्रयास कर रही हैं, लेकिन हमें एक छत के नीचे आना होगा जिसका केंद्रीय कार्यालय दिल्ली होगा। हम सब में बहुत ताकत है लेकिन इस तरह के संयुक्त प्रयास से हमारी ताकत हजार गुनी बढ़ जाएगी। भोजपुरी को अष्ठम सूची में शामिल कराना, भोजपुरी के स्वाभिमान की रक्षा करना व दिल्ली के स्कूलों में भोजपुरी पाठ्यक्रम लागू कराना हमारा मुख्य एजेण्डा होगा। हालाँकि दिल्ली प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष जयप्रकाश अग्रवाल पहले ही दिल्ली के स्कूलों में भोजपुरी पाठ्यक्रम को लागू करने की घोषणा कर चुके हैं। लेकिन हम लोग इसको कार्यान्वित करने का प्रयास करेंगे।



मॉरिशस से आई सरिता बुद्वू, ट्रिनिडाड की रिसर्च स्कॉलर पेंगी मोहन एवं मुख्य अतिथि अखिल विश्व भोजपुरी समाज विकास मंच, जमशेदपुर के अध्यक्ष बीएन तिवारी उर्फ भाईजी भोजपुरिया ने अपने-अपने प्रयासों की विस्तार से चर्चा करते हुए कहा कि आज भोजपुरी को एक कॉमन प्लेटफार्म और मजबूत नेटर्वकिंग की जरूरत है।

पूर्वांचल एकता मंच के अध्यक्ष श्री शिवजी सिंह ने कहा कि हमें अपना पीठ थपथपाने की आदत व छोटी-छोटी बातों के लिए मुँह फुलौवल छोड़कर बड़े व ठोस प्रयास के लिए साधना करनी होगी। कुलदीप श्रीवास्तव ने बड़े ही सहज ढंग से कहा कि हमे सिर्फ भाषणबाजी न कर किसी ठोस निष्कर्ष की ओर बढ़ना चाहिए। रंगकर्मी व फिल्म निर्माता उमेश सिंह ने कहा कि हमें जातिवाद, क्षेत्रवाद व राजनीति से ऊपर उठकर सिर्फ भाषा की लड़ाई लड़नी होगी।

इग्नू में भोजपुरी के प्रणेता प्रो॰ शत्रुघ्न कुमार, नाटककार महेन्द्र प्रसाद सिंह, लोकदृष्टि संपादक राजेश पाण्डेय, महिला सेवा अर्पण केन्द्र की संचालिका पूनम सिंह, वेववार्ता संपादक सईद अहमद, भोजपुरी समाज के उपाध्यक्ष प्रभुनाथ पाण्डेय, प्रदीप कुमार पाण्डेय, बिहारी खबर के मुन्ना पाठक, सन्तोष पटेल एवं भोजपुरी कॉग्रेस के अध्यक्ष सुधीर सिंहा ने ऐसे प्रयास का पुरजोर सर्मथन किया।

सर्वसम्मति से यह निर्णय लिया गया कि सार्थक प्रयास हेतु शीघ्र ही अजीत दूबे के नेतृत्व में एक कोर कमेटी का गठन किया जाएगा।

होली मिलन

अन्त में फागुन का उत्पात चालू हो गया। डॉ॰ सरिता बुद्वू ने गाया- होली खेले रघुबीरा अवध में तो भाईजी भोजपुरिया ने गाया- पिया काहे अइल होली के बिहान! पूरा महफ़िल फगुआ गया! सबको अबीर गुलाल लगाया गया और इस तरह से यह ऐतिहासिक भोजपुरिया शिखर सम्मेलन सफलतापूर्वक सम्पन्न हो गया।

Tuesday, January 12, 2010

चलनी में पानी का लोकार्पण

पूर्वांचल एकता मंच द्वारा दिल्ली में आयोजित विश्व भोजपुरी सम्मेलन में उतर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री एवं कांग्रेस सांसद श्री जगदिम्बका पाल के हाथों भोजपुरी के प्रख्यात साहित्यकार मनोज भावुक के गीत संग्रह चलनी में पानी का लोकार्पण हुआ।

इस अवसर पर फिल्म अभिनेता श्री शत्रुधन सिंहा, महुआ चैनल के चेयरमैन श्री पीके तिवारी, भोजपुरी सुरसम्राट मनोज तिवारी एवं लोकगायिका मालिनी अवस्थी जैसी हस्तियां मौजूद थीं।

लोकार्पित पुस्तक की प्रशंसा करते हुए पूर्वांचल एकता मंच के अघ्यक्ष शिवजी सिंह ने कहा कि मनोज भावुक भोजपुरी के लोकप्रिय गजलकार एवं फिल्म समीक्षक है और इन्होने अफ्रीका एवं ग्रेट ब्रिटेन आदि देशों में भोजपुरी का परचम लहराया है। इसलिए भोजपुरी साहित्य के क्षेत्र में विशिष्ट, बहुआयामी और बहुमुल्य योगदान के लिए इन्हें पूर्वाचल एकता मंच की ओर से भोजपुरी के अन्य शीर्ष कवियों के साथ डॉ प्रभुनाथ सिंह सम्मान से नवाजा गया।

विदित हो कि मनोज भावुक को उनके भोजपुरी गजल संग्रह ‘तस्वीर जिन्दगी के’ के लिए भी सन् 2006 में भारतीय भाषा परिषद् सम्मान से सम्मानित किया गया था। उन्हें सम्मान प्रदान किया था ठुमरी साम्राज्ञी गिरिजा देवी एवं आस्कर अवार्ड से सम्मानित सिंने जगत के नामी गीतकार गुलजार ने। एक मात्र भोजपुरी साहित्यकार कों यह सम्मान प्राप्त है।



चलनी में पानी भावुक का दोहा एवं गीत संग्रह है। पुस्तक की भूमिका में डॉ रमाशंकर श्रीवास्तव ने लिखा हैं कि यह जिन्दगी एक चलनी समान है। आदमी जिन्दगी भर इससे पानी उलीचता रह जाता है फिर भी आखिर में हासिल कुछ भी नहीं होता। नश्वरता दर्शन का ऐसा विम्ब साहित्य में दुर्लभ नहीं तो कम अवश्य है। चलनी में पानी सहज प्रयोग में भी गूढ़ दर्शन को व्यक्त करता है। भावुक ने एक दोहा में कहा है -
चलनी में पानी भरत बीतल उम्र तमाम
तबहू बा मन में भरम कइनी बहुते काम !

विश्व भोजपुरी सम्मेलन में उपस्थित लाखों दर्शको ने तालियॉ बजाकर मनोज भावुक के इस लोकार्पित पुस्तक का स्वागत किया।

Saturday, June 6, 2009

इग्नू में भोजपुरी भाषा पाठ्यक्रम के बढ़ते कदम


दिनांक 1.6.2009 को इग्नू प्रांगण के मानविकी विद्यापीठ में ’’भोजपुरी भाषा में सर्टिफिकेट कार्यक्रम’’ से संबंधित विशेषज्ञ समिति की बैठक संपन्न हुई। इस बैठक का शुभारंभ करते हुए इग्नू के कुलपति, प्रो. वी.एन. राजशेखरन पिल्लई ने कहा कि 20 करोड़ से भी अधिक आबादी द्वारा बोली जाने वाली भाषा पर पाठ्यक्रम बनाने की योजना बहुत ही महत्वपूर्ण है। 17 देशों में बोली जाने वाली भाषा भोजपुरी के महत्व को इसी से आंका जा सकता है कि मॉरिशस में 70 प्रतिशत लोग भोजपुरी बोलते हैं और वहाँ इस भाषा को देश की द्धितीय भाषा का दर्जा प्राप्त है। आदिकाल से समृद्व साहित्य से परिपूर्ण इस भाषा में पाठ्यक्रम प्रारंभ करने संबंधी योजना का प्रस्ताव एवं प्रारूप तैयार कर पाठ्यक्रम के संयोजक प्रो. शत्रुघ्न कुमार ने एक ऐतिहासिक कार्य किया है और इग्नू के राष्ट्रीय स्वरूप को ही उजागर किया है। उन्होंने यह भी कहा कि भोजपुरी भाषा के समृद्ध साहित्यिक परंपरा को ध्यान में रखकर ही इग्नू ने पिछले वर्ष ही आधार पाठ्यक्रम का निर्माण आरंभ किया। यह पाठ्यक्रम बन कर तैयार है और जुलाई 2009 के सत्र से छात्रों को उपलब्ध हो जायेगा। प्रो. शत्रुघ्न कुमार निश्चित ही बधाई के पात्र हैं। कुलपति ने यह भी आशा व्यक्त की कि भोजपुरी में यह सर्टिफिकेट कार्यक्रम शीघ्र बन कर छात्रों के लिए उपलब्ध होगा और आगे भोजपुरी में बी.ए., एम.ए. के पाठ्यक्रम पर भी कार्य आरंभ होगा उन्होंने इस बैठक में पधारे देश के विभिन्न भागों से आए भोजपुरी विद्धानों को पाठ्यक्रम निर्माण में अपना बहुमूल्य योगदान के लिए धन्यवाद दिया।

भोजपुरी भाषा पाठ्यक्रम के इस महत्वपूर्ण एवं ऐतिहासिक कार्य की संपूर्ण योजना बनाने वाले और पाठ्यक्रम के सूत्रधार एवं संयोजक प्रो. शत्रुघ्न कुमार ने अपने वक्तव्य में यह कहा कि भोजपुरी भाषा में पाठ्यक्रम निर्माण से संबंधित वर्षों से संजोये हुए सपने को साकार करने का अवसर मिला। उन्होंने जोर देकर यह भी कहा कि इस ऐतिहासिक कार्य में कुलपति का सबसे बड़ा सहयोग नहीं मिला होता तो शायद 20 करोड़ भोजपुरियों के सपनों को साकार किया जाने वाला यह कार्य संपन्न नहीं हो सकता था।

पाठ्यक्रम संयोजक प्रो. शत्रुघ्न कुमार ने आगे कहा कि जब रूसी, जापानी, चीनी, फ्रेंच, रोमेनियन भाषाओं में जीवन के सभी क्षेत्रों में उन्नति संबंधी कार्य हो सकता है तो इतनी बड़ी संख्या में बोली जाने वाली भाषभोजपुरी में भी सभी कार्य क्यों नहीं हो सकता? भोजपुरी भाषा में भी सभी कार्य संपन्न हो सकते हैं और इससे समाज की प्रगति भी हो सकती है।
प्रो. कुमार ने यह भी बताया कि भोजपुरी के सारे पाठ्यक्रम को आधुनिक एवं उपयोगी बनाया जायेगा। प्रो. कुमार ने कुलपति महोदय को ह्नदय से आभार प्रकट किया जिनके सहयोग से देश-विदेश में फैले हुए 20 करोड़ भोजपुरी भाषियों के अंदर एक नई आशा की किरण जगी है। उन्होंने यह भी सूचना दी कि जब पिछले वर्ष आधार पाठ्यक्रम की शुरूआत हुई तो घोर विरोध के स्वर भी उभरे लेकिन उस समय प्रो. कुमार के तर्क एवं अन्य विद्धानों के तर्क के आगे विरोध के स्वर तो दब ही गए साथ ही मजबूती से एक यह भी माँग उठी कि ’’भोजपुरी भाषा में सर्टिफिकेट कार्यक्रम’’ शीघ्र शुरू किया जाए। उस समय प्रो.शत्रुघ्न कुमार ने बोर्ड के सदस्यों को वचन दिया था कि वे सर्टिफिकेट ही नहीं बल्कि बी.ए., एम.ए. तथा भोजपुरी भाषा में ’शोध’ तक के पाठ्यक्रम की पूरी योजना को वे शीघ्र साकार रूप प्रदान करेंगे। 1 जून, 2009 को विशेषज्ञ समिति की बैठक का संपन्न होना इस बात का प्रमाण है कि प्रो. शत्रुघ्न ने अपने वचन को कितनी लगन और निष्ठा के साथ निभाया है। पिछले वर्ष से ही प्रो. शत्रुघ्न कुमार द्वारा ’’भोजपुरी माई के खातिर’’ किए जाने वाले कार्य से देश-विदेश के सभी लोग अच्छी तरह वाकिफ हो चुके हैं।

मानविकी विद्यापीठ के निदेशिका, प्रो. रेणु भारद्वाज ने इस अवसर पर अपने वक्तव्य में मानविकी विद्यापीठ द्वारा अन्य भाषाओं से संबंधित पाठ्यक्रम निर्माण की सूचना दी तथा उन्होंने भी प्रो. शत्रुघ्न कुमार को बधाई देते हुए यह भी कहा कि अपनी मेहनत और लगन से प्रो. कुमार ने ’’असंभव कार्य को संभव कर दिया’’। इस कार्य में वे सदा उनका सहयोग देती रहेंगी।

इस बैठक में देश के विभिन्न क्षेत्रों से पधारे भोजपुरी भाषा साहित्य के प्रसिद्ध चिंतक, विद्वान, लेखकों ने हिस्सा लिया जिनमें डॉ. नागेन्द्र प्रसाद सिंह (पटना), प्रो. रामदेव शुक्ल (गोरखपुर), डॉ. राजेन्द्र प्रसाद सिंह (सासाराम), प्रो. विरेन्द्र नारायण यादव (छपरा), डॉ. प्रेमशिला शुक्ला (देवरिया), प्रो. रामेश्वर मिश्र (शांतिनिकेतन, पश्चिम बंगाल) शामिल हैं। इस बैठक में देश के विभिन्न क्षेत्रों से पधारे विद्वान न केवल भोजपुरी भाषा के विशेषज्ञ है बल्कि प्रसिद्ध लेखक, चिंतक और भोजपुरी भाषा आंदोलन के सक्रिय योद्धा हैं। विशेषज्ञ समिति की यह बैठक सुबह से शाम तक चली और गहन विचार-विमर्श के बाद पाठ्यक्रम की रूपरेखा को अंतिम रूप प्रदान किया गया।

1 जून, 2009 को संसार के भोजपुरी भाषियों को यह सुखद समाचार सुनने एवं देखने को मिला कि एक ओर इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय भोजपुरी भाषा से संबंधित पाठ्यक्रम निर्माण की दिशा में ऐतिहासिक कार्य हो रहा था तो दूसरी ओर देश के संसद में भी एक भोजपुरी भाषी महिला राजनीतिज्ञ को लोकसभा के स्पीकर के पद पर सुशोभित करने का कार्य हो रहा था। दुनियाँ के भोजपुरी भाषियों के लिए यह आशा की किरण दिखाई दे रही है कि सदियों पुरानी भोजपुरी भाषा को अपना गौरवपूर्ण स्थान प्राप्त होगा। भोजपुरी भाषियों को यह भी आशा है कि ’संसद से सड़क’ तक भोजपुरी भाषा को प्रतिष्ठा मिलेगी।

इस बैठक में ’हमार टीवी’, के प्रोग्राम प्रोडयूसर मनोज भावुक जो कि स्वयं भोजपुरी भाषा के लेखक है और पूर्वांचल एक्सप्रेस से कुलदीप ने मीडिया प्रतिनिधि के रूप में भी इस बैठक में हिस्सा लिया। ’सम्यक् भारत’ के कार्यकारी संपादक के.पी. मोर्या ने इस ऐतिहासिक क्षण को कैमरे एवं वीडियों में सुरक्षित कर लिया।

प्रस्तुति- प्रो॰ शत्रुघ्न कुमार
(भोजपुरी भाषा में सर्टिफिकेट प्रोग्रेम के प्रस्तावक और संयोजक)

Thursday, January 22, 2009

पहला भोजपुरी-मैथिली कवि सम्मेलन

कहते हैं उतरती हुई सर्दी गुलाबी हो जाती है और ऐसी सर्दी में जब पुरबिया माटी के लाल शब्दों के गुलाल से एक-दूसरे को रंगने अखाडें में उतर आयें तो फ़िर क्या कहिये! ऐसा ही कुछ नजारा था दिल्ली के श्रीराम सेंटर का जहाँ प्रथम भोजपुरी मैथिली कवि सम्मलेन में पुरबिया माटी की सोंधी खुशबू ने दिल्ली के खुश्क मिजाज को खालिस गंवई रंग से सराबोर कर दिया।
कार्यक्रम का विधिवत् आरम्भ होता इसके पहले दर्शकों का मन बहलाने मंच पर आए मशहूर भोजपुरी गायक गजाधर ठाकुर ने जब ''गोरिया चाँद के अंजोरिया नियर गोर बाडू हो, तोहार जोड़ा केहू नईखे तू बेजोड़ बाडू हो' छेड़ी तो उपस्थित पुरुषों का मन बरबस मचल उठा। माहौल की रूमानियत बढ़ ही रही थी की 'बेसी बोलबा ता धयिके हो रजवु चीर देयिब' ने माहौल को देशभक्ति के जज्बे से भर दिया।

इसके बाद सुधांशु बहुगुडा की टीम ने अपनी प्रस्तुतियों से संगीत का मायाजाल बुनना शुरू ही किया था कि दिल्ली सरकार की भाषा मंत्री किरण वालिया का आगमन हो गया। उन्होंने दीप प्रज्जवलन कर कवि सम्मलेन का शुभारम्भ किया।

सबसे पहले बारी आई डाक्टर चंद्र देव यादव की जिन्होंने 'गाँवपुर के बस इहे निशानी, छाता के बस बचल कमानी' से गांवों की व्यथा व्यक्त की।
इसके बाद मिथिला की झलक पेश करने आए रमन सिंह ने 'ओल्ड होम में वृद्ध' कविता से वृद्धों के दर्द को मुखरित किया।

माहौल बिल्कुल तनावपूर्ण हो चला था कि संचालक डाक्टर रमाशंकर श्रीवास्तव ने मनोज "भावुक" को आवाज दी, भावुक के आते ही मंच की रंगत ही बदल गई। अपनी रंग-बिरंगी रचनाओं से उन्होंने एकबार फिर मंच को गति प्रदान करते हुए 'आम मउरल बा जिया गंध से पागल बाटे, ऐ सखी-ऐ सखी भावुक के बुलावल जाए' और 'अबकी गणतंत्र दिवस अईसे मनावल जाए, आग के राग दुश्मन के सुनावल जाए' सुनाया। इसके बाद मैथिली की कामनी कामायनी ने 'विस्थापित लोग' के माध्यम से दर्शकों की वाहवाही लूटी तो नहले पे दहला मारते हुए भोजपुरी कवयित्री अल्का सिन्हा ने 'करवा चौथ' कविता से पुरुषों और स्त्रियों दोनों को सोंचने पर मजबूर कर दिया।

तुरन्ता की परम्परा का निर्वाह करते हुए रविन्द्र लाल दास ने 'हमर गाँव', 'रोटी' और 'बाद्हिक असली फायदा' जैसी क्षणिकाओं से आधुनिक समाज पर करारा व्यंग्य किया। मैथिल कवि रविन्द्र नाथ ठाकुर ने 'छंद मधुर, भाव मधुर, मॉस मधुर गीतक' से महफ़िल को मिठास से भर दिया तो मैथिल सम्राट गंगेश गुंजन ने 'हम मरिजाब' से श्रोताओं को आँखे मींचने पर मजबूर कर दिया। इसके अलावा शत्रुघ्न कुमार, सारण कुमार आदि ने भी काव्य पाठ किया।

अंत में सम्मलेन की अध्यक्षता कर रहे डाक्टर नित्यानंद तिवारी ने सभी कविताओं की समीक्षा करते हुए कहा कि 'कविता के मतलब सिर्फ़ आस्वाद रूचि के पोषण कईल न ह, कविता ता उ हा, जवन दिक् करे.'

कुछ और तस्वीरें-




दिल्ली से आलोक सिंह 'साहिल'