
इंदूर हिंदी सम्मान से सम्मानित डॉ शेख, श्री संतोष कुमार एवं श्रीमती हरबंस कौर के साथ बाएं से दायें सर्व श्री पवन पाण्डे ,मुख्य अतिथि उपायुक्त पी.ऍफ निज़ामाबाद, समिति के मंत्री राजकुमार सूबेदार, अध्यक्ष राजीव दुआ एवम स्वतंत्र वार्ता निज़ामाबाद संस्करण के स्थानीय संपादक प्रदीप श्रीवास्तव
2 अक्टूबर । निज़ामाबाद
शनिवार दो अक्तूबर की रात निज़ामाबाद के राजस्थान भवन में इंदूर हिंदी समिति द्वारा आयोजित एक समारोह में आदर्श हिंदी महाविद्यालय के पूर्व प्राचार्य डॉ ओ. एम. शेख, नव्यभारती ग्लोबल स्कूल के प्रबंध निदेशक के. संतोष कुमार एवं सरकारी जूनियर कालेज की वरिष्ठ प्राध्यापिका श्रीमती हरबंस कौर को इंदूर हिंदी समिति के तत्वावधान में वर्ष 2009 -2010 के लिए "इंदूर हिंदी सम्मान-2010" से सम्मानित किया गया। यह सम्मान उन्हें भविष्य निधि कार्यालय के आयुक्त मोहम्मद एच. वारसी ने प्रदान किया। सम्मान के रूप में सभी सम्मान ग्राहिताओं को शाल, श्रीफल, स्मृतिचिन्ह एवं सम्मान पत्र प्रदान किये गए। श्रीमती हरबंस को इनरव्हील क्लब ऑफ़ निज़ामाबाद की सिक्रेटरी श्रीमती अनुपमा सूबेदार, समिति की सदस्याएं श्रीमती ज्योतस्ना शर्मा, श्रीमती रंजू दुआ एवम श्रीमती कुसुम श्रीवास्तव ने प्रदान किये। डॉ शेख को हाल में ही मद्रास यूनिवर्सिटी द्वारा उनके शोध निबन्ध "निज़ामाबाद के बाज़ार एवम मार्केटिग" पर डाक्टरेट की उपाधि प्रदान की है। जबकि के. संतोष कुमार को अपने विद्यालय में हिंदी को प्रोत्साहित करने के लिए दिया गया है। वहीं पांच सितम्बर 2010 को आन्ध्र प्रदेश सरकार ने हरबंस कौर को उत्तम शिक्षिका के सम्मान से नवाजा था, इस लिए दिया गया है। उल्लेखनीय है कि अस्वस्थता के कारण डॉ हरीश चन्द्र विद्यार्थी उपस्थित नहीं हो सके, जिन्हें समिति के सदस्य हैदराबाद में जा कर प्रदान करेंगे। दूसरी तरफ डॉ. किशोरी लाल व्यास कि तबियत मंच पर बोलते वक्त ख़राब हो गई, जिन्हें बाद में दिया गया। इस कार्य क्रम में समिति के अध्यक्ष राजीव दुआ, मंत्री राज कुमार सूबेदार, कोषाध्यक्ष घनश्याम पाण्डे, हिंदी दैनिक स्वतंत्र वार्ता के स्थानीय संपादक प्रदीप श्रीवास्तव एवम तेलंगाना विश्व विद्यालय के हिंदी के प्राध्यापक पवन कुमार पाण्डे भी उपस्थित थे। पता हो कि यह सम्मान हर वर्ष हिंदी सेवियों को समिति प्रदान करेगी।

कार्यक्रम का दीप जलाकर शुभारंभ करते हुये डॉ किशोरी लाल व्यास

हिंदी की प्राध्यापिका श्रीमती हरबंस कौर को सम्मानित करते हुये श्रीमती अनुपमा सुबेदार ,कुसुम श्रीवास्तव एवं रंजू दुआ



वैसे तो पूर्वोत्तर में भी हिंदी की स्थिति भारत के अन्य गैर हिंदी भाषी क्षेत्रों जैसी ही है, पर सरकारी एवं गैर-सरकारी स्तरों पर यहाँ काफ़ी काम किया जा रहा है। केंद्रीय हिंदी संस्थान, आगरा एवं इसके क्षेत्रीय केन्द्र, केंद्रीय हिंदी निदेशालय, दिल्ली, महात्मा गाँधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय, वर्धा एवं पूर्वोत्तर के विभिन्न राज्यों में स्थित विश्वविद्यालयों के हिंदी विभाग हिंदी के प्रचार-प्रसार में खासा योग दे रहे हैं। त्रिपुरा में भी उक्त संस्थाओं के प्रयासों का अच्छा असर दिखाई दे रहा है। स्वयं हमने पिछले दो वर्षों में हिंदी को लेकर त्रिपुरा विश्वविद्यालय में कई राष्ट्रीय संगोष्ठी एवं कार्यशालाओं का आयोजन किया है। वस्तुत: त्रिपुरा विश्वविद्यालय में वर्ष 2006 में हिंदी विभाग की स्थापना की गई थी। तब से विभाग द्वारा लगातार यहाँ हिंदी प्रचार और कामकाज को बढ़ावा देने के प्रयास जारी हैं। अप्रैल, 2009 में वैज्ञानिक एवं तकनीकी शब्दावली आयोग, नई दिल्ली के सहयोग से ’मानविकी विषयों में तकनीकी शब्द-प्रयोग’ विषय पर तीन-दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी, दिसंबर, 2009 में केंद्रीय हिंदी संस्थान के शिलाँग केन्द्र के साथ ‘पूर्वोत्तर में हिंदी शिक्षण’ विषय पर दो-दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी और अगस्त, 2010 में केंद्रीय हिंदी निदेशालय, दिल्ली, के सहयोग से आठ दिवसीय हिंदी नवलेखक शिविर का आयोजन त्रिपुरा विश्वविद्यालय में किया जा चुका है। उपरोक्त सभी कार्यक्रमों के अलावा त्रिपुरा राष्ट्रभाषा प्रचार समिति द्वारा भी समय-समय पर हिंदी कार्यक्रम किए जाते रहे हैं। पहले राज्य के स्कूल एवं कॉलेजों में हिंदी विषय की पढ़ाई नहीं होती थी, पर इधर के प्रयासों से न केवल हिंदी विषय शुरू हुआ, बल्कि कई महाविद्यालयों में ऑनर्स भी खुल गया है। इसी वर्ष त्रिपुरा विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग में भी स्नातक स्तर पर हिंदी की पढ़ाई शुरू हो गई है। यहाँ के बाज़ारों में भी बांगला के साथ-साथ हिंदी प्रयोग चलने लगा है। हम भी समय-समय पर छात्रों के बीच हिंदी में निबंध लेखन, भाषण, कविता-लेखन आदि प्रतियोगिताएँ कराते रहते हैं। इस बार हिंदी दिवस पर होने वाली प्रतियोगिताओं में पुरस्कार पाने वाले ज्यादातर छात्र हिंदीतर संकायों से थे। हालांकि त्रिपुरा में हिंदी के प्रति नकारात्मक रवैया कभी नहीं था पर अब राज्य में हिंदी को लेकर अच्छा माहौल बन चुका है।









