पंडित रामप्रसाद बिस्मिल फाउंडेशन के तत्वावधान में आगामी 11 अगस्त 2010 को हिंदी के मूर्धन्य साहित्यकार-पत्रकार एवं स्वतंत्रता
सम्मानित होने वाली विभूतियाँ
सेनानी साहित्य शिरोमणि स्वर्गीय पंडित दामोदर दास चतुर्वेदी की स्मृति में हर साल आयोजित किया जानेवाला स्मृति सम्मान समारोह भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद,आजाद भवन,आईटीओ के सभागार में सायं 5.00 बजे आयोजित किया जा रहा है। कार्यक्रम का उदघाटन संसद सदस्य एवं संसदीय राजभाषा समिति के उपाध्यक्ष सत्यव्रत चतुर्वेदी करेंगे। भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद के महानिदेशक सुरेश के. गोयल, समारोह के जहां मुख्य अतिथि होंगे, वहीं हिंदुस्तान मीडिया वेंचर के प्रधान संपादक शशि शेखर इस समारोह के विशिष्ट अतिथि होंगे। कार्यक्रम की अध्यक्षता हिंदी के लोकप्रिय कवि एवं पत्रकार पंडित सुरेश नीरव होंगे। आयोजन के केन्द्रीय कथ्य का विषय प्रवेश संडे इंडियन के संपादक ओंकारेश्वर पांडेय करेंगे। - प्रदीप पंडित (संपादक-शुक्रवार)
- मणिकिशोर तिवारी (संपादक-लोकायत)
- संतोष चौबे (चेअरमैन-आईसेक्ट संपादक-आई.टी इंडिया)
- शैलेश भारतवासी (संपादक-हिंदी ब्लाग-हिंद युग्म डॉट कॉम)
- विजया भारती (लोक गीत गायिका)
- डॉ. प्रेमलता नीलम (हिंदी कवयित्री)
- डॉ. आनंद सुमन (संपादक-सरस्वती सुमन)
- संजीव सेंगर (प्रकाशक)
- अंकित जैन (टीवी सीरियल निर्माता)
- राजकुमार सचान होरी (कवि-कथाकार)
- रूपनारायम सोनकर (दलित साहित्यकार)
- कमलेश चतुर्वेदी (अंतर्राष्ट्रीय भूगर्भवेत्ता)
इस अवसर पर कला,साहित्य, संगीत, पत्रकारिता, विज्ञान और हिंदी ब्लाग लेखन के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए विशिष्ट लोगों को साहित्य शिरोमणि स्वर्गीय पंडित दामोदर दास चतुर्वेदी स्मृति सम्मान-2010 से अलंकृत भी किया जा रहा है। जिसमें प्रदीप पंडित (संपादक¬-शुक्रवार), मणिकिशोर तिवारी (संपादक-लोकायत), संतोष चौबे (चेअरमैन-आईसेक्ट संपादक-आई.टी इंडिया) शैलेश भारतवासी (संपादक-हिंदी ब्लाग-हिंद युग्म डॉट कॉम), विजया भारती (लोक गीत गायिका), डॉ. प्रेमलता नीलम (हिंदी कवयित्री), डॉ. आनंद सुमन(संपादक-सरस्वती सुमन), संजीव सेंगर(प्रकाशक), अंकित जैन (टीवी सीरियल निर्माता), राजकुमार सचान होरी (कवि-कथाकार), रूपनारायम सोनकर (दलित साहित्यकार) तथा कमलेश चतुर्वेदी( अंतर्राष्ट्रीय भूगर्भवेत्ता) के नाम उल्लेखनीय हैं।
इसी कार्यक्रम में हिन्द-युग्म प्रकाशन द्वारा प्रकाशित डॉ॰ अरुणा कपूर के उपन्यास 'उनकी नज़र है हम पर' का विमोचन भी होगा।
समारोह के दूसरे चरण में राष्ट्रीय एकता और सदभाव विषय पर कवि सम्मेलन में प्रकाश प्रलय, डा. अरविंद चतुर्वेदी, मृगेन्द्र मकबूल, अरविंद पथिक, भगवान सिंह हंस, डॉ. मधु चतुर्वेदी कविता पाठ करेंगे। समारोह के स्वागताध्यक्ष ज्ञानेन्द्र चतुर्वेदी तथा संयोजक रजनीकांत राजू ने इस अवसर पर अधिक-से-अधिक साहित्यप्रेमियों को उपस्थित रहने की अपील की है।
स्थान- आजाद भवन, आईटीवी, नई दिल्ली
समय- सायं 5 बजे
समय- सायं 5 बजे
कार्यक्रमोपरांत भोजन की व्यवस्था है।
(निमंत्रण-पत्र को बड़ा करके देखने और पूरा विवरण पढ़ने के लिए निम्नलिखित चित्रों पर क्लिक करें)
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24 फरवरी 1970 को भिवानी (हरियाणा) में जन्मे श्याम वशिष्ठ ‘शाहिद’ कॉमर्स से स्नातकोत्तर उपाधि प्राप्त कर चुके हैं। वर्तमान में वे पीएच.डी.शोध में संलग्न हैं और बनवारी लाल जिन्दल सूईवाला महाविद्यालय, तोशाम में वाणिज्य विभाग में सहायक प्रवक्ता के रूप में कार्यरत हैं।






दि. 23 जुलाई 2010 को नई दिल्ली के फेरोज़शाह रोड स्थित ‘रशियन कल्चर सेण्टर’ में ‘परिचय साहित्य परिषद’ की स्थाई अध्यक्ष व सुपरिचित साहित्यकार उर्मिल सत्यभूषण के सद्य:प्रकाशित कहानी संग्रह ‘सृजन समग्र – खंड 1’ पर एक समीक्षा गोष्ठी का आयोजन किया गया. गोष्ठी के मुख्य अतिथि सुप्रसिद्ध साहित्यकार बालस्वरूप राही थे व श्री राजेंद्र गौतम, श्री महेश दर्पण, श्री लक्ष्मी शंकर बाजपेई व श्री प्रेमचंद सहजवाला गोष्ठी के विशिष्ट वक्ता रहे. श्री सहजवाला ने उर्मिल सत्यभूषण के कहानी संग्रह पर एक समीक्षा पत्र पढ़ते हुए कहा कि उर्मिल सत्यभूषण के पास बेहद विस्तृत अनुभव संसार है तथा उन के इस संग्रह की 27 में से अधिकाँश कहानियों में नारी जीवन की बेहद यथार्थ झलकियाँ हैं. उर्मिल सत्यभूषण के पास एक सिद्धहस्त कलम है जिस के माध्यम से वे नारी के सामाजिक जीवन की सशक्त तस्वीर प्रस्तुत करती हैं. नारी किन किन परिवेशगत दबावों में जीती है तथा किन किन मोर्चों पर वह इस पुरुष प्रधान समाज में हारती है, इस का बेहद सशक्त लेखा-जोखा उर्मिल जी के कथा संसार में मिलता है. कुछ कहानियों की विशेष प्रशंसा करते हुए उन्होंने कहा कि इन कहानियों की विशिष्टता यह है कि इन में अन्याय अनाचार के विरुद्ध नारी की विद्रोही तेवरों से साक्षात्कार होते हैं, जैसे कहानी ‘अब और नहीं’, ‘आखिर कब तक’ वगैरह. श्री राजेंद्र गौतम ने कहा कि उर्मिल सत्यभूषण की कहानियों में नारी-पुरुष प्रेम को यथार्थ रूप में प्रस्तुत किया गया है. पर कहानी ‘रौशनी की जीत’ जो कि सन् 84 की निर्मम सिख हत्याओं पर आधारित है, की उन्होंने विशेष प्रशंसा करते हुए कहा कि जैसे ‘द्वितीय विश्व युद्ध’ मानव सभ्यता की एक अविस्मरणीय त्रासदी है जिस पर निरंतर आज भी बहुत से उपन्यास लिखे जा रहे हैं, वैसे ही हमारे देश में सन् 84 का कलंक कभी नहीं मिटेगा और उस पर लगातार साहित्य लिखा जाता रहेगा. श्री लक्ष्मीशंकर बाजपेयी ने कहा कि ‘शाबास कुडिये’ जैसी व इस संग्रह की अन्य कई कहानियों जैसी नारी पात्र हमारे पूरे समाज में लगभग घर घर में हैं, जो अपनी स्वतंत्रता के लिए छटपटाती न जाने किन किन पारिवारिक सामजिक दबावों में जीती हैं. इस सब को रेखांकित करने में पूर्ण सफलता पर उन्होंने उर्मिल सत्यभूषण को हार्दिक बधाई दी. श्री महेश दर्पण ने कहा कि लेखिका के सरोकार बेहद ‘जेनुइन’ रहे और इस संग्रह को पढ़ कर किसी शिल्पगत गठन या अन्य तत्वों की ओर ध्यान न जा कर सीधे उन नारी पात्रों के जीवन पर जाता है, जिन्हें लेखिका ने अपने करीब पाया है. श्रोतागण में से लेखिकाओं तूलिका व शोभना समर्थ आदि ने भी संग्रह की कुछ कहानियों की विशेष प्रशंसा की. अंत में मुख्य अतिथि बाल स्वरुप राही ने अपने अध्यक्षीय भाषण में कहा कि जो लेखन अपने अनुभव को पाठक की अनुभूति में बदल सकता है, वही लेखन सही लेखन है और उर्मिल सत्यभूषण इस कसौटी पर पूर्णतः खरी उतरी हैं. उन्होंने संग्रह में नारी के विस्तृत रूपों की ओर ध्यान आकर्षित करते हुए कहा कि भारत में पहली नारी शतरूपा थी और उर्मिल के कथा संसार में भी नारी के अनेकों रूपों से साक्षात्कार होता है. गोष्ठी का संचालन भी प्रेमचंद सहजवाला ने किया.


