समिति द्वारा आयोजित अंतर विद्यालयीन लेखन प्रतियोगिता के परिणाम घोषित
विख्यात टी.वी.कलाकार नेहा शरद करेंगी विजेताओं को पुरस्कृत
इंदौर । 30 मार्च
स्कूली विद्यार्थियों की लेखन क्षमता और कल्पानाशीलता को नया आयाम देने के उद्देश्य से श्री मध्यभारत हिन्दी साहित्य समिति द्वारा आयोजित अंतरविद्यालयीन लेखन प्रतियोगिता के निर्णय घोषित कर दिए गए हैं। समिति के प्रधानमंत्री श्री बसंतसिंह जौहरी,प्रबंधमंत्री प्रो सूर्यप्रकाश चतुर्वेदी तथा प्रतियोगिता के समन्वयक युवा टी.वी. पत्रकार श्री सुबोध खन्डेलवाल ने बताया कि 3 अप्रैल, शनिवार को समिति में आयोजित एक समारोह में विख्यात टी.वी.कलाकार नेहा शरद विजेता विद्यार्थियों को पुरस्कृत करेंगी।
आपने बताया कि चौथी से नवीं तक के स्कूली बच्चों के लिये आयोजित ये लेखन प्रतियोगिता एक नई सोच के साथ आयोजित की गई थी। इस प्रतियोगिता के लिये बच्चों को कोई विषय नही दिया गया था बल्कि उन्हें एक अन्तर्राष्ट्रीय चित्रकला प्रदर्शनी मे बुलाया गया। इस प्रदर्शनी में दिल्ली की एक संस्था शन्कर्स इन्टरनेशनल द्वारा आयोजित अन्तरराष्ट्रीय चित्रकला प्रतियोगिता मे चयनित दुनिया के सत्रह देशों के बच्चों (14 साल तक के) द्वारा बनाये गये लगभग 130 चित्र नुमाया किये गये थे। लेखन प्रतियोगिता मे भाग लेने वाले बच्चों को इनमें से किसी एक चित्र का चयन कर उसके आधार पर अपना आलेख लिखना था। इस लेखन प्रतियोगिता में इन्दौर की प्रज्ञा गर्ल्स स्कूल की तान्या जैन प्रथम स्थान पर रहीं, एमरल्ड स्कूल के खुशाल रघुवंशी को द्वितीय स्थान मिला तथा अग्रसेन विद्यालय के सौरभ कुंवर तृतीय स्थान पर रहे। इनके अलावा एमरल्ड स्कूल की विन्नी मालिक, सन्मति स्कूल की ट्विंकल अग्रवाल, श्रुति उमठ और स्वाति चौधरी तथा अग्रसेन के सतपाल सिंह अजमानी सहित कुल पाँच विद्यार्थियों को प्रोत्साहन पुरकार हेतु चुना गया है।
इस अनूठी प्रतियोगिता में शहर के दस स्कूलों के एक सौ बीस विद्यार्थियों ने भाग लिया। इनके द्वारा भेजे गए आलेखों का मूल्यांकन भारत सरकार के केन्द्रीय हिन्दी निदेशालय, नई दिल्ली के सहायक निदेशक श्री अर्पण कुमार तथा समिति के श्री गिरेन्द्र सिंग भदोरिया ने किया।
श्री जौहरी ने कहा कि सुश्री नेहा शरद ने कई टी.वी. धारावाहिकों में अहम किरदार निभाये है, वे उन चुनींदा टी.वी. कलाकारों में से है जिन्हें उनके संजीदा अभिनय के कारण पहचाना जाता है और सबसे ख़ास बात ये है कि वो मालवा की माटी से जुड़े देश के सुप्रसिद्ध व्यंग्यकार स्व. श्री शरद जोशी की सुपुत्री हैं। उन्होंने कहा कि उनके हाथों पुरस्कृत होकर इन बच्चो की रचनात्मकता को और अधिक प्रोत्साहन मिलेगा।
प्रस्तुति-बसंतसिंह जौहरी, प्रधान मंत्री , हरेराम वाजपेयी, प्रचार मंत्री



फिल्म ‘अथिति तुम कब जाओगे’ की सफलता के बाद प्रोड्यूसर व एक्ट्रेस अमिता पाठक की अगली फिल्म की तैयारी हो गई है। इस फिल्म के निर्देशक है प्रियदर्शन जहां अमिता, अजय देवगन, बिपाशा बसु व अक्षय खन्ना के साथ दिखाई देंगी। अमिता का कहना है,‘‘अब मेरा अच्छा समय शुरू हो गया है व इसका फायदा वह जल्द से जल्द उठा लेना चाहती है। फिल्म का नाम हालांकि नहीं रखा गया है पर यह जल्द ही शुरू हो जाएगी।’’
भर के संगीत समारोहों में गाकर एक गायक के रूप में लोकप्रिय हो चुके हैं. अशोक चोपड़ा का कहना है कि, "मुझे खुशी है कि सभी के आशीर्वाद के साथ, मेरा यह एलबम लांच हो रहा है."
























व्यंग्य लेखक केवल राजनीति एवं राजनेता पर ही व्यंग्य करता है जबकि व्यंग्य के माध्यम से तो समाज की गदंगी तथा पूरी शताब्दी को व्यक्त नहीं करता, नहीं स्वयं पर हंसता है, अतः मुझे लगता है कि जो व्यंग्यकार स्वयं पर नहीं हंस सकता है उसे समाज के लोगों पर हंसने का कोई अधिकार नहीं है। ये विचार समाजवादी विचारक कवि एवं साहित्यकार प्रो. नन्द चतुर्वेदी ने महावीर समता संदेश के होली















एक मध्यम वर्गीय परिवार की बेटी है नंदिनी (टीना पारेख), जो एक गाँव में रहती है पढने में बहुत ही होशियार है और इसी तरह अपनी मेहनत व लगन के बल पर वह एम बी बी एस कर डॉo बन जाती है. इसी दौरान उसकी मुलाकात समीर नामक एक युवक से होती है व दोनों एक दूसरे को पसंद करते हैं और शादी कर लेते है. शादी के बाद नंदिनी अपने पति के साथ मारीशस चली जाती है. लेकिन वहां उसका मन नहीं लगता है उसे हर दम अपने गाँव व घर की याद सताती है. मारीशस और उसके गाँव की संस्कृति व रहन - सहन में बहुत ही अंतर है, उसके गाँव व उसका पीहर आर्थिक रूप से संपन्न नहीं है जिसकी उसे बहुत ही चिंता है. इसी बात को लेकर नंदिनी व उसके पति में आपस में मन मुटाव रहता है, उसके पति का कहना है कि अब उसकी शादी हो चुकी है और ससुराल ही उसका घर है अपने पीहर की चिंता उसे नहीं करनी चाहिए. अब यह सब उसका फर्ज नहीं बल्कि उसके भाइयो का है. इसके जवाब में वो कहती है कि जब एक ही घर में एक ही माँ से जन्म लेकर हम भाई - बहन एक साथ रहते हैं तो उस घर के प्रति किसी एक का नहीं बल्कि सभी भाई व बहन का फर्ज बनता है. इसी के चलते वो वापस अपने पीहर आ जाती है और अपने गाँव में अस्पताल खोलने का जो सपना उसने पहले देखा था उसे पूरा करना चाहती है. उसके घर में उसकी माँ गायत्री (साधना सिंह) उसके तीन भाई मनीष (मधुर अरोरा), सागर (हितेश कृपलानी), विष्णु (अमित) हैं.






